सेक्सी मां बोली “पापा की जगह तुम चोदो” - बेटा दो रात मां को चोदता रहा
आधी रात को बेटे ने देखा बाप मां की गांड चोद रहा है… अगले दिन बाप चला गया तो सेक्सी मां बोली “पापा की जगह तुम चोदो”। फिर बेटे ने दो रात लगातार मां की चूत और गांड दोनों में माल भर दिया। पूरी गर्म कहानी अभी पढ़ो।
दिल्ली का एक छोटा सा फ्लैट। सिर्फ एक कॉमन हॉल, किचन और एक छोटा बाथरूम। कोई अलग कमरा नहीं था। पापा और मैं (21 साल) यहीं रहते थे। मेरी कॉलेज की गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थीं। पापा ने एक दिन कहा, “बेटा, तेरी माँ को गाँव से कुछ दिनों के लिए बुला लेता हूँ। तेरा भी मन बहल जाएगा, उनका भी।”
माँ आ गईं। 40 साल की, लेकिन देखने में एकदम जवान और सेक्सी। गाँव की औरत, बॉडी बिल्कुल दूध जैसी सफेद और भारी-भरकम। बड़े-बड़े टाइट स्तन, थोड़ी सी लटकती हुई भरी हुई गाँड, पतली कमर। वे हमेशा पतली रेशमी टाइट साड़ी पहनती थीं जो उनके शरीर पर चिपक जाती थी।
छोटे फ्लैट में सब एक ही कॉमन हॉल में सोते थे। हॉल के एक कोने में मेरा बिस्तर लगता था और दूसरी तरफ पापा-माँ का। बीच में थोड़ी जगह छोड़कर दोनों साइड अलग-अलग बिस्तर बिछाए जाते थे।
पहले दो-चार दिन सब सामान्य रहा। हम तीनों ने साथ में समय बिताया, खाना खाया, बातें कीं।
फिर वह रात आई। आधी रात को मुझे प्यास लगी। नींद खुल गई। हॉल में हल्की अंधेरी रोशनी थी। पापा-माँ की तरफ से हल्की सिसकियाँ आ रही थीं। मैंने सोया हुआ नाटक किया और आँखें हल्की सी खोलकर देखने लगा।
पापा माँ के बिल्कुल पीछे चिपके हुए थे। एक हाथ उनकी गाँड पर फेर रहे थे और दूसरा हाथ उनकी चूचियाँ दबा रहे थे। माँ हाँफ रही थीं।
“अभी मत करो… वो जाग जाएगा,” माँ धीरे से बोलीं।
पापा पूरी तरह तने हुए उनसे चिपके हुए थे। उनका लंड माँ की गाँड के बीच अच्छी तरह सेट किया हुआ था। माँ अपनी गाँड हिला रही थीं। पापा एक हाथ से उनकी गाँड दबा रहे थे और दूसरे हाथ से ब्लाउज के अंदर उनकी चूची मसल रहे थे।
पापा धीरे से बोले, “आज कितने साल बाद तुम यहाँ आई हो… आज तो चोदने दो। बहुत दिन हो गए।”
माँ मना कर रही थीं। फिर पापा ने अपना अंडरवियर सरकाया और मोटा लंड सीधे निकाल लिया। उन्होंने माँ से कहा, “चुपचाप सोती रह। मैं आराम से करूँगा।”
पापा उठे और पैर से माँ की साड़ी ऊपर उठाई, फिर पेटीकोट भी। अब सिर्फ माँ की एकदम हॉट और बड़ी गाँड उनके सामने थी। उन्होंने माँ की पैंटी भी निकाल दी। हाथ को उनकी गाँड में घुसाकर चूत में उंगली करने लगे। माँ कराहने लगीं, “नहीं… मत करो… दर्द होगा।”
फिर उन्होंने सोते हुए ही उंगली उनकी गाँड के छेद में घुसा दी। माँ अचानक कराह उठीं, “आह… मर गई…”
पापा ने उनका मुँह बंद करने के लिए माँ की ही पतली लेस वाली पैंटी जो उन्होंने निकाली थी, उनके मुँह में पूरा घुसाकर ठूस दी और बोले, “तू बहुत आवाज़ करेगी क्योंकि आज मैं तेरी गाँड का छेद चोदने वाला हूँ। तब तक चुप रह, मुँह में पैंटी लिए रह।”
माँ बस “उम्म… उम्म…” करती रहीं।
पापा ने अपने लंड पर थूक लगाया और बोले, “अभी तेरी गा गाँड में डालूँगा। चिल्लाना मत। मुझे तीन-चार घंटे तक तेरी गाँड चोदने दे। चुपचाप पड़ी रह, आवाज़ मत कर।”
उन्होंने माँ के ब्लाउज के हुक भी खोल दिए। माँ की चूचियाँ बाहर लटकने लगीं — एकदम टाइट और बड़ी।
अब पापा माँ की गाँड के छेद के पास सोते हुए उन्हें पीछे से जकड़कर लंड लेकर गए और छेद के पास रगड़ने लगे। उन्होंने माँ के हाथों को पीछे से पूरा पकड़ लिया। माँ मुँह में पैंटी दबाए सिसक रही थीं। फिर एक ही धक्के में उन्होंने पूरा लंड अंदर ठूस दिया।
माँ का मुँह एकदम लाल हो गया। उनकी आँखों से आँसू आ गए और वे “उम्म… आआह…” करने लगीं। पापा अब उनसे एकदम पीछे से से चिपककर पूरा अंदर तक चोदने लगे। माँ बस “उऊउम्म… उफ्फ…” करती रहीं। पापा उनकी गाँड में लंड घुसाए पीछे से दोनों चूचियाँ मसल रहे थे। बाद में उन्होंने माँ और खुद को चादर से ढक लिया ताकि मैं देख न लूँ, और उनके छेद को चोदते रहे। लंड माँ की गाँड में डाले तीन-चार घंटे तक चूचियाँ दबाते हुए चोदते रहे। मैं चुपचाप देखता रहा।
सुबह जब हुआ तो उन्होंने माँ के मुँह से पैंटी निकाली और बोले, “पूरा माल अंदर ही डाल दिया हूँ।”
माँ बोलीं, “बहुत दर्द हो रहा है। गाँड का छेद मत चोदा करो। इतना दर्द होता है। अब मैं चल भी नहीं पाऊँगी।”
पापा उनकी चूची दबाते हुए बोले, “तू बहुत सेक्सी है। बहुत मजा आया। सुन, मैं कल ही दो दिन के लिए ऑफिस के काम से जा रहा हूँ। अभी दो दिन नहीं रहूँगा, इसलिए तुझे आज ही चोद दिया।”
उन्होंने अपना लंड बाहर लिया और माँ से बोले, “पैंटी पहन के सो जा, वरना वो जाग जाएगा।”
माँ बोलीं, “तुम एकदम हरामी हो। तीन-चार घंटे गाँड चोदकर सुबह सोने को कहते हो।”
मैंने वह सब देख लिया था। माँ की चूचियाँ और गाँड देखकर अब मैं भी उन्हें चोदना चाहता था। मैं तभी बाथरूम गया और माँ की पैंटी जो वहाँ रखी थी, उसमें मूठ मार ली। मैंने माँ को चोदने का पक्का इरादा कर लिया।
अगले दिन सुबह 8 बजे पापा ऑफिस निकल गए। उन्होंने कहा, “बेटा, माँ का ख्याल रखना। मैं अभी दो दिन बाद आऊँगा। ऑफिस के काम से बाहर जा रहा हूँ।”
पापा चले गए थे। घर में अब सिर्फ मैं और माँ थे। माँ थोड़ी तकलीफ से चल रही थीं। उनका चलना देखकर साफ पता चल रहा था कि पिछली रात की वजह से उन्हें दर्द हो रहा है।
मैंने पास जाकर पूछा, “माँ, कोई प्रॉब्लम है क्या?”
वे हल्के से मुस्कुराते हुए बोलीं, “कुछ नहीं बेटा… हल्का सा पैर में मोच जैसा है।”
मैं मन ही मन मुस्कुराया। मौका बनाने के लिए मैंने बाथरूम के नल में हल्की सी छेड़छाड़ कर दी। थोड़ी देर बाद माँ नहाने के लिए अंदर गईं। कुछ देर बाद अंदर से उनकी आवाज़ आई,
“बेटा… इधर तो नल में पानी ही नहीं आ रहा!”
मैं तुरंत अंदर चला गया। माँ उस समय सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। साड़ी उन्होंने एक तरफ रख दी थी। मैंने नल चेक करने का नाटक किया और अचानक पानी जोर से ऊपर की तरफ शावर की तरह निकल पड़ा। दोनों के ऊपर पानी बरसने लगा। हम दोनों पूरी तरह भीग गए।
गीले कपड़ों में माँ की बॉडी और भी साफ दिखने लगी। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ गीले ब्लाउज में उभर आई थीं और पेटीकोट उनकी गाँड पर चिपककर उनकी गोल शेप दिखा रहा था। मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया।
माँ मेरे करीब आईं और बोलीं, “अरे… तू भी तो भीग गया!”
वे आगे बढ़कर अपना हाथ मेरे चेहरे पर फेरने लगीं पानी पोंछने के लिए। उसी पल मैंने धीरे से अपना एक हाथ बढ़ाकर उनकी गीली गाँड पर रख दिया। मेरा हाथ उनकी भरी हुई गाँड को महसूस कर रहा था। माँ अचानक असहज हो गईं। उनकी आँखों में हैरानी थी।
“तुम… बाहर जाओ। मैं नहा लेती हूँ,” वे बोलीं।
मैंने उनकी बात अनसुनी की। मैंने उन्हें धीरे से पीछे की दीवार से सटा दिया। दोनों हाथों से उनकी भारी और गीली गाँड को पकड़ लिया।
“माँ… आप बहुत हॉट लग रही हो। प्लीज… एक बार…”
माँ की आँखें चौड़ी हो गईं। वे हैरान थीं, लेकिन उन्होंने जोर से मना नहीं किया। उनकी साँसें तेज होने लगी थीं। मैंने हिम्मत करके उनका ब्लाउज खोल दिया। हुक खुलते ही उनकी बड़ी-बड़ी टाइट चूचियाँ बाहर आ गईं। पानी की बूंदें उनकी चूचियों पर से फिसल रही थीं। फिर मैंने उनका पेटीकोट भी नीचे खींच दिया। अब वे मेरे सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थीं।
मैं उनके पीछे से चिपक गया। एक हाथ से उनकी एक चूची को जोर से मसलने लगा और दूसरा हाथ उनकी चूत पर ले जाकर उंगली फेरने लगा। माँ की हल्की कराह निकल गई।
“बेटा… ये… ये क्या कर रहे हो तुम…”
मैं उनके कान के पास मुँह लाकर बोला, “आज मैं आपको अच्छे से नहलाऊँगा।”
मैंने साबुन लिया और उनकी पूरी बॉडी पर लगाने लगा। पहले उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर साबुन मालिश की। निप्पल्स को उंगलियों के बीच दबा-दबाकर साफ किया। फिर उनकी पीठ, कमर और भरी हुई गाँड पर साबुन लगाया। गाँड के दोनों भागों को फैलाकर बीच में भी साबुन लगाया। उसके बाद उनकी जांघों और चूत के बालों पर भी अच्छे से साबुन मालिश की।
मैंने अपनी एक उंगली उनकी चूत के छेद में डाली और दूसरी उंगली उनकी गाँड के छेद में धीरे से घुसा दी। माँ की कमर अचानक काँप गई। वे मेरी बाँहों में सिमटने लगीं।
मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया। पानी अभी भी ऊपर से गिर रहा था। माँ ने खुद मेरा अंडरवियर नीचे किया और मेरा सख्त लंड पकड़ लिया। उन्होंने उसे अपनी गीली चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अपने अंदर लेना शुरू किया। पूरा लंड अंदर जाते ही उनकी आँखें बंद हो गईं और मुँह से लंबी कराह निकल गई।
माँ मेरी गोद में बैठकर अपनी गाँड हिलाने लगीं। ऊपर-नीचे, गोल-गोल। पानी दोनों के शरीर पर से बह रहा था। मैं उनकी दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबा रहा था और कभी-कभी मुँह में लेकर चूस भी रहा था। माँ की गति धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी। उनकी चूत बहुत गर्म और टाइट थी।
थोड़ी देर ऐसे ही चलने के बाद माँ ने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया और हाँफते हुए बोलीं,
“रात को… पापा की जगह आज तुम चोदना। तुम्हारा लंड बहुत तगड़ा है…”
मैंने उनका जवाब सिर्फ और गहराई तक धक्का मारकर दिया। माँ की कराह बाथरूम में गूँज गई।
उस वक्त मुझे लग रहा था कि आज रात बहुत लंबी होने वाली है।
बाथरूम वाला किस्सा हो चुका था। शाम होते-होते माँ के व्यवहार में हल्का सा बदलाव आ गया था। वे पहले जैसी सहज नहीं दिख रही थीं। उनकी आँखों में एक अजीब सी शर्म और इच्छा दोनों मिल गए थे।
रात का खाना खाते समय माँ चुप थीं। खाना खत्म होने के बाद उन्होंने धीरे से कहा, “आज… पापा वाले बिस्तर पर ही सो जाना।”
मैं उनकी आँखों में देखा। वे मेरी नजरें बचा रही थीं, लेकिन मना भी नहीं कर रही थीं। मैं उनका बिस्तर की तरफ चला गया। माँ थोड़ी देर बाद तैयार होकर आईं। उन्होंने पतली सी नाइट ड्रेस पहन रखी थी। ब्लाउज और साड़ी नहीं थी। ड्रेस इतनी हल्की थी कि उनकी चूचियों की आकृति साफ दिख रही थी।
वे मेरे पास आकर लेट गईं। कुछ पल खामोशी रही। फिर मैंने करवट लेकर उनका चेहरा अपने करीब किया और होठों पर होठ रख दिए। माँ ने पहले हल्के से विरोध किया, फिर खुद ही जवाब देने लगीं। चुंबन गहरा होता गया। मेरी जीभ उनके मुँह में घुस गई। माँ की साँसें तेज हो गईं।
मैंने उनकी नाइट ड्रेस ऊपर की। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ बाहर आ गईं। मैंने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरी को हाथ से मसल रहा था। माँ की कमर उठने लगी। वे मेरे सर को अपने सीने से और जोर से दबा रही थीं।
“आह्ह… बेटा… जोर से…” उन्होंने फुसफुसाकर कहा।
मैंने दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूसा, काटा और जीभ फेरी। फिर नीचे की तरफ बढ़ा। उनकी जांघें खुद-ब-खुद खुल गईं। मैंने उनकी चूत पर मुँह रखा और लंबा चाटा। माँ की कराह निकल गई। मैंने उनके दोनों होंठों को चूसा, क्लिट पर जीभ घुमाई और उंगलियाँ अंदर तक डालीं। माँ पहले से ही गीली थीं।
जब वे चरम के करीब पहुँचने लगीं तो मैं रुक गया। माँ हताश हो गईं। मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड को उनकी गीली चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड उनके अंदर चला गया।
माँ की आँखें बंद हो गईं। उनके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। “आह्ह्ह… कितना मोटा है… धीरे…”
मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे धक्के बढ़ाने लगा। हर धक्के के साथ माँ की कराहें तेज होती जा रही थीं। मैंने उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर चढ़ा दीं और गहराई तक मारने लगा। माँ का शरीर काँप रहा था। थोड़ी देर बाद वे जोर से काँपते हुए चरम पर पहुँच गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कसकर जकड़ लिया।
मैंने लंड बाहर निकाला और उन्हें पेट के बल लिटा दिया। उनके कूल्हे ऊपर उठाए और पीछे से फिर से अंदर घुस गया। इस पोजीशन में और भी गहरा जा रहा था। माँ की चीख निकल गई। मैंने उनके बाल पकड़कर सर पीछे खींचा और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। एक हाथ से उनकी चूची मसल रहा था।
“तेरी ये गाँड… और ये टाइट चूत… आज दोनों लेनी है,” मैंने कहा।
माँ की आवाज काँप रही थी, “ले… जो लेना है ले ले… बस मत छोड़…”
मैंने कुछ देर और पीछे से मारा। फिर लंड निकालकर उनके गाँड के छेद पर रखा। माँ तनाव में आ गईं लेकिन शरीर नहीं हटाया। मैंने थूक लगाया और धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। एक जोरदार धक्के में लंड उनके गाँड के छेद में चला गया। माँ की आँखों से आँसू आ गए। मैंने उनके हाथ पीछे पकड़ लिए और गहराई तक चोदने लगा। साथ ही उनकी चूचियाँ भी मसलता रहा।
उस रात मैंने दोनों छेदों में अपना पानी छोड़ा। माँ थककर मेरे सीने से चिपक गईं। वे हाँफते हुए बोलीं, “आज… बहुत मजा आया।”
दूसरी रात लास्ट नाइट थी। पापा अगले दिन आने वाले थे। उस रात मैं और ज्यादा वाइल्ड हो गया था।
माँ थकी हुई थीं। उन्होंने कहा, “आज हल्के से करना… बहुत दर्द हो रहा है।”
मैंने उनकी बात नहीं मानी। मैंने उन्हें नंगी किया और पहले उनके मुँह में लंड डाल दिया। माँ ने विरोध किया लेकिन मैंने उनके बाल पकड़कर मुँह में गहराई तक ले लिया। वे “उम्म… उम्म…” करती रहीं। मैंने उनका मुँह अच्छे से इस्तेमाल किया। फिर उन्हें बिस्तर पर लिटाकर उनकी चूत में जोर-जोर से चोदा। इस बार मैंने कोई रियायत नहीं दी। हर धक्का जोरदार था। माँ की चीखें निकल रही थीं।
मैंने उन्हें चारों पोजीशन में लिया। कभी ऊपर से, कभी पीछे से, कभी उनकी टांगें कंधों पर रखकर, कभी उन्हें गोद में बिठाकर। उनकी चूचियों पर, मुँह में, चूत में और गाँड में… हर जगह अपना माल गिराया। पूरी रात उन्हें सोने नहीं दिया। जब भी वे थककर लेटतीं, मैं फिर से शुरू कर देता।
सुबह के करीब माँ पूरी तरह थक चुकी थीं। उनका शरीर पसीने से भीगा हुआ था। वे मेरी बाँहों में लेटी हुई हाँफ रही थीं। उनकी आँखों में थकान के साथ एक अजीब सी संतुष्टि भी थी।
वे धीरे से बोलीं, “तू… बाप से भी ज्यादा हार्ड चोदता है। पूरी रात जगाए रखा…”
मैंने उनकी चूची हल्के से दबाते हुए कहा, “क्योंकि तू बहुत सेक्सी है माँ। और अब तू सिर्फ मेरी है।”
माँ कुछ नहीं बोलीं। बस मेरी छाती से और चिपक गईं। बाहर हल्की रोशनी फैलने लगी थी। पापा कुछ घंटों में आने वाले थे। लेकिन उस वक्त दोनों जानते थे कि यह सिर्फ दो रातों की बात नहीं थी।
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