सेक्सी भाभी की जोरदार चुदाई: चूची से चूत तक चोदा
टाइट सलवार सूट में भीगी भाभी ने खुद देवर का लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर ले लिया। रात भर चूचियाँ दबवाईं, चूत फड़कवाई… भाभी कराह-कराह कर चुदती रही और देवर को सब कुछ सिखाती रही!

शादी को सिर्फ छह महीने हुए थे। घर में नई भाभी आई थीं : अंजलि।
अंजलि 27 साल की, गोरी, और शरीर से इतनी भरी हुई कि टight सलवार सूट पहनने पर उनकी बॉडी मानो कपड़ों से लिपटी रहती थी। कमीज उनके स्तनों को कसकर दबाए रखती थी और सलवार जाँघों और गाँड पर चिपककर हर हिलने-डुलने को साफ दिखा देती थी।
रोहित 22 का था। शुरू में वह नजरें चुराता था, लेकिन धीरे-धीरे अंजलि की वो छोटी-छोटी हरकतें - सलवार की डोरी बाँधते वक्त कमर का मुड़ना, पानी पीते वक्त गले की हल्की हरकत, या टीवी देखते वक्त पैरों का एक-दूसरे पर चढ़ जाना, उसे अंदर तक खाने लगीं।
उस शाम घर में सिर्फ दोनों थे। भाई की मीटिंग लेट चल रही थी।
अंजलि सोफे पर बैठी टीवी देख रही थीं। काला टight सलवार सूट शरीर पर चिपका हुआ था। रोहित पानी लेकर आया और उनके पास ही बैठ गया। अंजलि ने टीवी का वॉल्यूम कम किया।
“इतने दिनों से देख रहे हो… बोलते क्यों नहीं?” उन्होंने सीधा पूछा।
रोहित की साँस अटक गई। अंजलि मुस्कुराईं और खुद ही उसका हाथ पकड़कर अपनी जाँघ पर रख दिया। सलवार इतनी पतली थी कि हाथ के नीचे मांस की गर्माहट साफ महसूस हो रही थी।
“डर लगता है क्या?” अंजलि ने धीरे से पूछा।
रोहित ने सिर हिलाया। “भाभी… आप…”
अंजलि ने उसका हाथ और ऊपर सरका दिया। अब उसकी हथेली सलवार के ऊपर से उनकी चूत पर थी। उन्होंने खुद हल्का सा दबाव डाला।
“यहाँ तक देख चुके हो… अब छूने से डर क्यों लगता है?”
रोहित का हाथ अपने आप दबने लगा। अंजलि की आँखें भारी हो गईं। उन्होंने रोहित का चेहरा अपने करीब खींचा और होंठों पर हल्का सा चुंबन दे दिया। फिर धीरे से बोलीं, “आज भाई देर से आएंगे… डरने की जरूरत नहीं।”
रोहित ने हिम्मत करके उनका ब्लाउज़ (कमीज) के ऊपर से स्तन दबाना शुरू किया। अंजलि ने आँखें बंद कर लीं। थोड़ी देर बाद उन्होंने खुद कमीज के हुक खोल दिए। अंदर सिर्फ एक पतली ब्रा थी। रोहित ने ब्रा ऊपर की और पहली बार उनकी नंगी चूचियाँ देखीं—भारी, नरम, और निप्पल सख्त।
उसने मुँह लगाया। धीरे-धीरे चूसने लगा। अंजलि का हाथ उसके बालों में था।
“हल्के दाँत लगाओ… अच्छा लगता है,” उन्होंने फुसफुसाया।
रोहित ने वैसा ही किया। अंजलि की साँसें तेज़ हो गईं। थोड़ी देर बाद उन्होंने खुद सलवार की डोरी खोली और सलवार नीचे सरका दी। अब सिर्फ पैंटी बची थी। रोहित ने पैंटी के ऊपर से ही उंगलियाँ फेरनी शुरू कीं। पैंटी बीच से गीली हो चुकी थी।
अंजलि ने पैंटी खुद साइड में की और रोहित की उंगली अपनी चूत पर रख दी।
“अंदर डालो… धीरे से।”
रोहित की उंगली अंदर गई। अंजलि की दीवारें गर्म और गीली थीं। वह धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगा। अंजलि की कमर हिलने लगी।
कुछ देर बाद अंजलि ने रोहित की पैंट खोली। लंड बाहर आया तो उन्होंने हाथ में लेकर हल्के से दबाया।
“पहली बार है ना?” उन्होंने पूछा। रोहित ने सिर हिलाया।
अंजलि मुस्कुराईं। उन्होंने रोहित को सोफे पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर बैठ गईं। पैंटी एक तरफ सरकाई, लंड का सिरा अपनी चूत पर लगाया और धीरे-धीरे खुद अंदर लेती चली गईं।
रोहित की आँखें बंद हो गईं। अंदर बहुत गर्म और कसकर जकड़ने वाला एहसास था। अंजलि ने पूरा ले लिया और फिर धीरे-धीरे कमर घुमाने लगीं।
“देखो… ऐसे हिलाना होता है,” उन्होंने सिखाते हुए कहा।
रोहित के हाथ उनकी कमर पर थे। अंजलि कभी धीमे तो कभी तेज़ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनकी चूचियाँ रोहित के चेहरे के सामने हिल रही थीं। रोहित कभी एक तो कभी दूसरी चूस लेता।
थोड़ी देर बाद अंजलि उतर गईं और चारों खाने चित लेट गईं। “अब तुम ऊपर आओ।”
रोहित उनके ऊपर आ गया। लंड फिर से अंदर डाला। इस बार उसने खुद धक्के मारने शुरू किए। अंजलि ने पैर उसकी कमर पर लपेट लिए।
“थोड़ा और अंदर… हाँ… वहीं…”
रोहित की रफ्तार बढ़ गई। अंजलि की आवाज़ें निकलने लगीं—हल्की, दबी हुई, लेकिन enthralling। अचानक अंजलि ने जोर से कस लिया और काँपते हुए झड़ गईं। उनकी चूत ने लंड को बार-बार जकड़ा।
रोहित रुकने वाला था लेकिन अंजलि ने कहा, “मत निकलो… अंदर ही छोड़ो।”
रोहित ने कुछ और गहरे धक्के मारे और फिर अंजलि की चूत के अंदर ही सब कुछ छोड़ दिया। दोनों लंबे समय तक जुड़े रहे।
अंजलि ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “अब तुम सिर्फ देवर नहीं रहे रोहित…”
रोहित ने उनका चेहरा देखा। अंजलि मुस्कुराईं।
“भाई के आने में अभी समय है। चलो अंदर कमरे में। आज मैं तुम्हें और सिखाना चाहती हूँ।”
रोहित ने उन्हें गोद में उठाया। अंजलि हल्की सी हँसीं और उसका गला अपने हाथों में ले लिया। दोनों अंदर चले गए।
बाहर घर अभी भी शांत था।
कमरे में घुसते ही अंजलि ने दरवाज़ा बंद कर दिया और पीछे से कुंडी लगा दी। रोहित अभी भी थोड़ा घबराया हुआ था, लेकिन अंजलि के अंदाज़ में एक अजीब सा कॉन्फिडेंस था।
उन्होंने रोहित को बिस्तर के किनारे बिठाया और खुद उसकी गोद में बैठ गईं। नाइटी जैसा कुछ नहीं था—वह अभी भी आधी खुली कमीज और नीचे सिर्फ पैंटी में थीं। रोहित के हाथ अपने-आप उनकी कमर पर चले गए।
“डर अभी भी लग रहा है?” अंजलि ने धीरे से पूछा।
रोहित ने सिर हिलाया। “थोड़ा… भाभी।”
अंजलि मुस्कुराईं। “अब भाभी मत बोलो। नाम से बुलाओ।”
“अंजलि…” रोहित ने धीमी आवाज़ में कहा।
अंजलि ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया और गहरी चुंबन देने लगीं। इस बार चुंबन में जल्दबाजी नहीं थी। जीभ धीरे-धीरे मिल रही थी। रोहित के हाथ उनकी पीठ पर सरक रहे थे। अंजलि ने खुद उसकी हथेलियाँ अपनी चूचियों पर रख दीं।
“आज तुम जल्दी में मत होना,” उन्होंने फुसफुसाया। “मैं तुम्हें सिखाना चाहती हूँ कि औरत को कैसे छूना होता है।”
रोहित ने उनकी चूचियों को धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। अंजलि की साँसें भारी होने लगीं। उन्होंने कमीज पूरी तरह उतार दी और रोहित का मुँह अपने निप्पल पर ले गईं। रोहित चूसने लगा—कभी हल्के, कभी थोड़ा जोर से। अंजलि का हाथ उसके बालों में था।
थोड़ी देर बाद अंजलि बिस्तर पर लेट गईं और रोहित को अपने ऊपर खींच लिया। उन्होंने खुद उसकी पैंट और अंडरवियर नीचे सरका दिए। लंड फिर से तन चुका था। अंजलि ने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगीं।
“इसे पहले अच्छे से तैयार करना होता है,” उन्होंने कहा और झुककर लंड को मुँह में ले लिया।
रोहित की साँस रुक गई। अंजलि की जीभ गर्म थी। वह धीरे-धीरे चाट रही थीं, कभी सिरा चूसतीं तो कभी पूरा अंदर लेने की कोशिश करतीं। रोहित का हाथ उनके बालों पर था लेकिन वह जोर नहीं कर रहा था।
जब लंड पूरी तरह गीला और चमकने लगा तो अंजलि लेट गईं और पैर फैला दिए।
“अब तुम आओ। लेकिन इस बार जल्दी मत करना।”
रोहित उनके ऊपर आ गया। लंड का सिरा उनकी चूत पर लगाया। अंजलि ने खुद थोड़ा ऊपर उठाकर सही जगह लगाई। रोहित ने धीरे से धक्का दिया। अंदर का एहसास फिर वही था—गरम, गीला और कसकर जकड़ने वाला।
अंजलि ने उसके कान में कहा, “पूरा अंदर तक ले जाओ… हाँ… ऐसे…”
रोहित ने धीरे-धीरे पूरा डाल दिया। फिर रुक गया। अंजलि की आँखें बंद थीं। वह अपनी कमर हल्के से हिला रही थीं।
“अब हिलो… लेकिन मेरे साथ। मेरे हिसाब से।”
रोहित ने धक्के शुरू किए। अंजलि अपनी कमर मिला रही थीं। कभी वह उसे नीचे दबातीं, कभी अपने पैर उसकी कमर पर और कस लेतीं। रोहित की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ रही थी। अंजलि की हल्की कराहें निकलने लगीं।
“और गहरा… वहीं… हाँ…”
रोहित ने उनका एक पैर अपने कंधे पर रखा और और गहराई तक जाने लगा। अंजलि की नाखून उसकी पीठ में गड़ गए। अचानक अंजलि का शरीर तन गया और वह काँपते हुए झड़ गईं। उनकी चूत ने लंड को बार-बार जकड़ा।
रोहित रुकने वाला था लेकिन अंजलि ने सिर हिलाया। “मत निकलो। जारी रखो।”
रोहित ने फिर से धक्के शुरू किए। अंजलि अब और गीली हो चुकी थीं। आवाज़ें भी थोड़ी तेज़ हो गई थीं। थोड़ी देर बाद उन्होंने रोहित को नीचे दबाया और खुद ऊपर आ गईं।
अब अंजलि ऊपर थीं। वह धीरे-धीरे कमर घुमा रही थीं। कभी आगे-पीछे, कभी गोल। रोहित की दोनों हथेलियाँ उनकी चूचियों पर थीं। अंजलि कभी झुककर उसका मुँह चूम लेतीं, कभी सीधी होकर अपनी चूचियाँ उसके मुँह के पास ले जातीं।
“देख रहे हो… औरत जब ऊपर हो तो कैसे लेती है,” अंजलि ने हाँफते हुए कहा।
रोहित सिर्फ देख रहा था और महसूस कर रहा था। अंजलि की रफ्तार बढ़ने लगी। उनकी साँसें फूलने लगीं। फिर अचानक वह जोर से बैठ गईं और काँपते हुए दूसरी बार झड़ गईं।
इस बार रोहित भी ज्यादा देर तक नहीं रह पाया। उसने अंजलि की कमर पकड़ी और नीचे से जोर-जोर से धक्के मारने लगा। अंजलि ने उसके सीने पर हाथ रखे और कहा, “अंदर छोड़ो… आज भी अंदर।”
रोहित ने कुछ गहरे धक्के मारे और फिर अंजलि की चूत के अंदर ही सब कुछ उड़ेल दिया। दोनों लंबे समय तक जुड़े रहे। पसीने से शरीर चिपक गए थे।
कुछ देर बाद अंजलि उसके सीने पर गिर गईं। दोनों की साँसें अभी तेज़ चल रही थीं।
अंजलि ने धीरे से पूछा, “अब कैसा लग रहा है?”
रोहित ने सच कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे मैंने पहले कुछ जाना ही नहीं था।”
अंजलि हल्की से हँसीं। उन्होंने उसका कान चूमते हुए कहा, “यह तो बस शुरुआत है। जब भाई घर पर नहीं होते… तब और भी बहुत कुछ सिखाऊँगी।”
रोहित ने उनके बालों में उंगलियाँ फेरते हुए पूछा, “डर नहीं लगता आपको?”
अंजलि ने सिर उठाकर उसकी आँखों में देखा। “डर लगता है। लेकिन आज के बाद तुम सिर्फ देवर नहीं रहे। और मैं सिर्फ भाभी नहीं रही।”
बाहर दरवाज़े पर किसी के आने की आवाज़ नहीं थी। कमरे में सिर्फ उनकी साँसें थीं और बिस्तर पर बिखरी हुई कपड़ों की गंध।
अंजलि ने फिर से उसका हाथ अपनी चूची पर रखा।
“थोड़ा आराम कर लो… फिर एक बार और। इस बार मैं तुम्हें पीछे से लेना सिखाऊँगी।”
रोहित की आँखें थोड़ी फैल गईं। अंजलि मुस्कुराईं और उसके होठों पर उंगली रख दी।
“बोलो मत। बस सीखो।”
बाहर घर अभी भी शांत था। अंदर दोनों के बीच एक खामोश लेकिन गहरा रिश्ता बन चुका था जो अब सिर्फ एक गलती नहीं रह गया था।
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