साड़ी फाड़कर आंटी की चूत चोदी
32 साल की पड़ोस वाली सेक्सी आंटी को मैंने बारिश की रात जबरदस्ती पकड़ा और उनकी लाल साड़ी फाड़ दी। पहले मना किया लेकिन बाद में चीखने लगी – "जोर से चोदो, मेरी चूत और गांड फाड़ दो!" पूरी रात की wild चुदाई की हॉट कहानी।
अमित 21 साल का जवान, तगड़ा और हॉट लड़का था। उसके पड़ोस में रेखा आंटी 32 साल की थीं। उनकी शादी को 10 साल हो चुके थे, लेकिन उनकी देह अभी भी जवान और बेहद कामुक थी। गोरी
चमकदार त्वचा, 36 इंच के भारी-भारी गोल-गोल स्तन, पतली कमर, मोटी-मोटी जांघें और भारी-भारी गोल गांड जो चलते वक्त लहराती थी। वो ज्यादातर पारंपरिक साड़ी पहनती थीं, जो उनकी सेक्सी बॉडी को और ज्यादा आकर्षक बना देती थी।
उस दिन शाम को तेज बारिश हो रही थी। आंटी के घर की बिजली चली गई थी। उन्होंने मुझे फोन करके बुलाया। जब मैं उनके घर पहुंचा तो देखा वो एक गहरी लाल रंग की साड़ी में खड़ी थीं। साड़ी का पल्लू उनके भारी स्तनों पर लिपटा हुआ था।
ब्लाउज काफी टाइट था, जिससे उनके स्तन बुरी तरह उभरे हुए थे और ब्लाउज के बीच से गोरी लकीर दिख रही थी। पेटीकोट और साड़ी की फोल्ड्स के बीच उनकी पतली कमर की गोरी त्वचा साफ नजर आ रही थी।
"अमित, फ्यूज ठीक कर दो बेटा। घर में अंधेरा हो गया है," उन्होंने कहा। उनकी आवाज में एक खास गर्माहट और नमी थी।
जैसे ही मैं फ्यूज बॉक्स के पास खड़ा हुआ, आंटी मेरे पीछे आकर खड़ी हो गईं। उनकी नरम, गर्म छाती मेरी पीठ से पूरी तरह सट गई। मैं मुड़ा तो उन्होंने मेरे गाल पर हाथ फेर दिया और धीरे से बोलीं, "अमित, मेरे पति 15 दिन से बाहर हैं। मैं बहुत अकेली महसूस कर रही हूं।"
मैंने हिम्मत जुटाई और उनका हाथ पकड़कर अपने कठोर, तने हुए लंड पर रख दिया। आंटी चौंक गईं। "नहीं अमित… ये गलत है… मैं तुम्हारी आंटी हूं," उन्होंने मना किया, लेकिन उनका हाथ मेरे लंड से हटाया नहीं।
मैंने उन्हें जोर से दीवार से लगा दिया और उनके होंठों को जोर से चूसने लगा। पहले वो विरोध कर रही थीं, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। किस बहुत गहरी, गीली और भूखी थी। हमारी लार एक-दूसरे के मुंह में जा रही थी।
मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। साड़ी धीरे-धीरे खुलने लगी। मैंने ब्लाउज के सभी हुक एक-एक करके खोले। ब्लाउज खुलते ही काले रंग का ब्रा सामने आया। मैंने ब्रा का हुक खोला। दो बड़े-बड़े, भारी, गोरे स्तन बाहर आ गए। उनके गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।
मैंने दोनों स्तनों को हाथों में लिया, जोर से दबाया और एक-एक करके मुंह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा। निप्पल को दांतों से हल्का-हल्का काट रहा था। रेखा आंटी सिर पीछे झुकाकर कराह रही थीं – "आह्ह्ह… अमित… धीरे चूसो… उफ्फ… बहुत दिनों बाद किसी ने छुआ है… हां… और जोर से… काटो!"
मैंने उनके स्तनों को मसलते हुए नीचे बैठ गया। उनकी साड़ी और पेटीकोट का नाड़ा खोला। दोनों नीचे सरक गए। अब आंटी सिर्फ काली लेस वाली पैंटी में खड़ी थीं। पैंटी उनके मोटे गांड में आधी धंसी हुई थी और चूत का उभार साफ दिख रहा था।
मैंने पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाया। उनकी चूत बिल्कुल साफ शेव की हुई, गुलाबी और हल्की गीली थी। मैंने उनकी जांघें फैलाईं और मुंह लगा दिया। पहले तो मैंने बाहर वाले होंठ चाटे, फिर जीभ से क्लिटोरिस को तेजी से चाटा। आंटी मेरे बाल पकड़े हुए चीख रही थीं – "आह्ह्ह… अमित… क्या कर रहे हो… हां… चूत चाटो… जीभ अंदर डालो… गहरी डालो!"
मैंने जीभ अंदर डालकर पूरा रस चूसने लगा। फिर दो उंगलियां उनकी चूत में घुसाईं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। आंटी का पूरा बदन कांपने लगा। वो पहली बार जोर से झड़ गईं। उनका गर्म, मीठा पानी मेरे मुंह और चेहरे पर आ गया।
"अब चोद मुझे अमित… मैं और इंतजार नहीं कर सकती," उन्होंने भूखी आंखों से कहा।
मैंने अपना 7 इंच का मोटा, नसों वाला, सख्त लंड बाहर निकाला। उनकी चूत के मुंह पर कई बार रगड़ा और फिर एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया।
"आआआह्ह्ह्ह… फट गई… बहुत दर्द हो रहा है अमित… तेरे लंड ने मेरी चूत फाड़ दी!" आंटी जोर से चीखीं।
मैंने कुछ सेकंड रुककर उनके स्तन चूसने शुरू किए। फिर धीरे-धीरे तेज धक्के मारने लगा। फच-फच-फच… कमरे में चुदाई की तेज आवाज गूंज रही थी। आंटी के भारी स्तन हर धक्के पर उछल रहे थे।
कुछ देर बाद आंटी खुद कमर हिलाने लगीं। "जोर से चोदो अमित… फाड़ दो मेरी चूत… हां… और गहरा… तेज…!"
मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। उनकी भारी गांड ऊपर थी। मैंने दोनों हाथों से गांड पकड़ी, जोर-जोर से थप्पड़ मारे और लंड चूत में घुसाया। फिर आंटी की गांड में भी लंड डाल दिया।
"हां… गांड में चोदो… फाड़ दो… दर्द के साथ मजा भी आ रहा है!" आंटी चीख रही थीं। हमने पूरी रात कई राउंड लिए।
एक राउंड में मैंने उन्हें सोफे पर लिटाकर मिशनरी में चोदा, उनके पैर अपने कंधों पर रखकर बहुत गहराई तक घुसाया।
दूसरे में आंटी ऊपर बैठकर काउगर्ल स्टाइल में खुद जोर-जोर से कूद-कूदकर चोद रही थीं। उनके स्तन उछल रहे थे। मैं नीचे से धक्के दे रहा था। तीसरे राउंड में 69 पोजीशन में हमने एक-दूसरे को चाटा। मैं उनकी चूत और गांड चाट रहा था, वो मेरे लंड को गले तक चूस रही थीं।
चौथे राउंड में खड़े-खड़े दीवार से सटाकर चोदा। उनकी एक टांग उठाकर। पांचवें राउंड में मैंने उन्हें बेड पर लिटाकर फिर से गांड मारी।
हर राउंड में चूत चाटना, गांड चाटना, स्तन दबाना, थप्पड़ मारना, गहरी किसिंग, गाली देना – सब कुछ था। आखिरकार आंटी ने मेरा लंड मुंह में लेकर गले तक ले लिया और पूरा गाढ़ा, गर्म वीर्य निगल लिया।
सुबह होते-होते रेखा आंटी मेरे सीने पर लेटी हुई थीं। उनका पूरा बदन पसीने, लार और वीर्य से चिपका हुआ था। उनकी चूत और गांड लाल, सूजी हुई और वीर्य से भरी हुई थी। उन्होंने धीरे से कहा, "अब से जब भी मन करे, आ जाना अमित। आंटी तुम्हारी प्राइवेट रंडी है।"
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