ससुर का लंड बहू की चुत और गाँड में ही रहा रात भर
अकेली बहू की साड़ी खुलते ही ससुर का मोटा लंड उसकी गीली चुत में धँस गया। फिर पूरी रात वह लंड कभी चुत में, कभी गाँड में… दोनों छेदों को बेरहमी से फाड़ता रहा। बहू की कराहें, चूचियों का मसलना, गाँड पर थप्पड़ और अंत में दोनों होल में भरा हुआ गर्म वीर्य… एक ऐसी रात जो कभी खत्म नहीं हुई।

रात का अंधेरा कमरे में घना था। सिर्फ बेडसाइड लैंप की पीली रोशनी जल रही थी। बहू बिस्तर पर लेटी थी। उसकी साड़ी की पल्लू पूरी तरह खिसक चुकी थी। दोनों बड़ी-बड़ी चूचियाँ आधी नंगी थीं। निप्पल सख्त हो चुके थे। उसने एक हाथ अपनी चुत पर रखा था और धीरे-धीरे रगड़ रही थी। पैंटी पहले से गीली हो चुकी थी। उसकी उंगलियाँ चुत के चेद में घुस-घुसकर गीलापन निकाल रही थीं।
दरवाजा धीरे से खुला। सासुर अंदर आए। उनकी नजर बहू की खुली चूचियों और चुत पर रगड़ती उंगलियों पर पड़ी। उनका लंड तुरंत सख्त हो गया और पैंट में तनकर खड़ा हो गया।
वे पास आए। बिना कुछ बोले बहू का हाथ हटाया और खुद अपनी मोटी उंगलियाँ उसकी गीली चुत पर रख दीं। “इतनी गीली चुत… रात भर अकेले में यूँ ही रगड़ती रहती हो क्या?”
बहू की साँसें फूल गईं। सासुर ने उसकी साड़ी और पैंटी एक झटके में नीचे खींच ली। अब बहू पूरी नंगी थी। दोनों बड़ी चूचियाँ बाहर निकली हुई थीं। सासुर ने दोनों चूचियों को जोर से दबाया। निप्पल को उंगलियों में लेकर मरोड़ा। फिर मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे। दाँतों से हल्का काटा।
“आह्ह… बाबा… चूचियाँ मत दबाओ इतना…” बहू कराह उठी, लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी।
सासुर ने एक हाथ उसकी चुत में घुसा दिया। दो मोटी उंगलियाँ अंदर तक धँस गईं। चुत की दीवारें गीली और गरम थीं। उंगलियाँ अंदर-बाहर तेजी से चलने लगीं। चुत की आवाज “चिक-चिक” करने लगी।
“सुनो ये चिक-चिक… कितनी हरामी चुत है तेरी।” सासुर ने तीसरी उंगली भी डाल दी और जोर से चुत को फाड़ते हुए उंगलियाँ घुमाने लगे।
बहू की जाँघें कांप रही थीं। सासुर ने अपना लंड बाहर निकाला। मोटा, काला, नसों से भरा हुआ लंड। उन्होंने बहू के मुँह के पास ले जाकर उसके होठों पर रगड़ा। “चूस इसे।”
बहू ने मुँह खोला। सासुर ने पूरा लंड उसके मुँह में धकेल दिया। गले तक। बहू की आँखों से पानी आने लगा, लेकिन वह चूसती रही। सासुर उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह में ठोक रहे थे।
फिर उन्होंने बहू को बिस्तर पर चित्त लिटाया। दोनों पैर फैलाए। लंड की नोक चुत के चेद पर रखी और एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह… बाबा… पूरा अंदर चला गया…” बहू चीख उठी।
सासुर ने कमर हिलानी शुरू की। हर धक्के में लंड चुत की गहराई तक जा रहा था। चुत की गीली आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी—चिक… चिक… चिक…। उन्होंने बहू की दोनों चूचियों को जोर से दबाते हुए चूसा और कमर और तेज कर दी।
फिर उन्होंने बहू को पलटा। घुटनों के बल करवाया। गाँड ऊपर उठी हुई थी। सासुर ने दोनों हाथों से गाँड के दो भाग फैलाए और लंड को फिर से चुत में ठोक दिया। एक हाथ से उसकी गाँड को जोर-जोर से थप्पड़ मारे। लाल हो गई गाँड।
“तेरी ये गोल-गोल गाँड… और ये गीली चुत… आज रात दोनों फाड़ दूँगा।”
वे तेजी से धक्के लगा रहे थे। बहू की चूचियाँ हिल-हिलकर बिस्तर से टकरा रही थीं। सासुर ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चुत के ऊपर वाले हिस्से को रगड़ना शुरू किया। बहू का शरीर कांपने लगा।
“बाबा… मैं आने वाली हूँ… और जोर से ठोको…”
सासुर ने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखे और इतनी जोर से ठोकने लगे कि बिस्तर चरमरा गया। आखिरी कुछ धक्कों में उन्होंने अपना पूरा पानी उसकी चुत के अंदर छोड़ दिया। गरम-गरम वीर्य चुत को भर गया और बाहर भी निकलने लगा।
बहू भी उसी पल झड़ गई। उसकी चुत जोर-जोर से ऐंठ रही थी। दोनों पसीने से भीगे हुए लेटे रहे। सासुर का लंड अभी भी उसकी चुत में था। उन्होंने धीरे से उसे बाहर निकाला। वीर्य की धार चुत से रिसकर जाँघों पर बहने लगी।
सासुर ने बहू की गाँड पर हाथ फेरा और बोले, “यह तो बस शुरूआत है… रात अभी बाकी है।”
सासुर का लंड अभी भी आधा सख्त था। बहू की चुत से उनका गाढ़ा वीर्य रिस-रिसकर जाँघों पर बह रहा था। उन्होंने बहू को फिर से चित्त लिटा दिया। दोनों बड़े-बड़े हाथों से उसकी चूचियों को जोर से मसलने लगे। निप्पल को उंगलियों में लेकर मरोड़ा, फिर मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसा।
“तेरी ये भरी हुई चूचियाँ… रात भर चूसता रहूँगा,” सासुर ने गुर्राते हुए कहा।
बहू की साँसें फिर से तेज हो गईं। सासुर ने अपना मुँह नीचे सरकाया। उसकी गीली चुत पर जीभ फेरने लगे। चुत के दोनों होठों को दाँतों से हल्का काटा, फिर जीभ को चेद के अंदर जितना हो सके उतना गहरा घुसा दिया। जीभ अंदर-बाहर तेजी से चलने लगी। “चिक… चिक…” की आवाज फिर से गूंजने लगी।
बहू की कमर अपने आप ऊपर उठ रही थी। सासुर ने दोनों हाथों से उसकी गाँड के दो भाग फैलाए और जीभ को और गहराई तक धकेला। फिर एक उंगली गाँड के छेद पर रख दी। धीरे-धीरे घुमाते हुए अंदर डालने लगे।
“आह्ह्ह… बाबा… गाँड में उंगली… मत डालो…” बहू कराह उठी, लेकिन उसकी आवाज में मना करने से ज्यादा मजा ले रही थी।
सासुर ने दो उंगलियाँ चुत में और एक उंगली गाँड के छेद में डाल दी। दोनों छेदों को एक साथ फाड़ते हुए उंगलियाँ घुमाने लगे। बहू का शरीर कांप रहा था। उसकी चुत से पानी की धार निकलने लगी।
फिर सासुर ने अपना लंड फिर से सख्त किया। बहू को घुटनों के बल करवाया। गाँड पूरी तरह ऊपर उठी हुई थी। उन्होंने पहले लंड को चुत में पूरा ठोक दिया। कुछ जोरदार धक्के लगाए, फिर लंड बाहर निकाला और गाँड के छेद पर रख दिया।
“अब तेरी गाँड लेता हूँ,” सासुर ने कहा और एक जोरदार धक्के में आधा लंड गाँड के अंदर घुसा दिया।
बहू जोर से चीख पड़ी। “आह्ह्ह… बाबा… फट गई… धीरे…”
लेकिन सासुर नहीं रुके। धीरे-धीरे पूरा लंड गाँड में धकेल दिया। गाँड की दीवारें कसकर लंड को जकड़ रही थीं। उन्होंने कमर हिलानी शुरू की। हर धक्के में लंड गाँड की गहराई तक जा रहा था। एक हाथ से बहू की चुत को रगड़ रहे थे, दूसरे हाथ से उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबा रहे थे।
“तेरी ये टाइट गाँड… कितनी मस्त है… आज रात दोनों छेद फाड़ दूँगा,” सासुर गुर्रा रहे थे।
वे काफी देर तक गाँड में ही ठोकते रहे। फिर लंड निकालकर फिर से चुत में डाल दिया। कभी चुत, कभी गाँड—बारी-बारी से दोनों छेदों को फाड़ रहे थे। बहू की आवाजें अब बेकाबू हो चुकी थीं। वह जोर-जोर से कराह रही थी।
सासुर ने बहू को फिर से चित्त लिटाया। उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख दिए। लंड को चुत में पूरा अंदर तक ठोक दिया और इतनी तेजी से धक्के लगाने लगे कि बिस्तर चरमरा रहा था। हर धक्के के साथ बहू की चूचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। सासुर ने दोनों चूचियों को मुँह में भरकर चूसा और कमर और तेज कर दी।
“बाबा… और जोर से… मेरी चुत फाड़ दो…” बहू चीख रही थी।
सासुर ने उसके बाल पकड़कर खींचे और आँखों में आँखें डालकर देखा। “आज रात तेरी चुत और गाँड दोनों में इतना पानी भर दूँगा कि सुबह तक रिसता रहे।”
वे आखिरी दौर में पहुँच चुके थे। सासुर की कमर पागलों की तरह हिल रही थी। बहू की चुत जोर-जोर से ऐंठने लगी। वह दूसरी बार झड़ गई। उसकी चुत से पानी की धार निकल रही थी। सासुर ने उसी पल अपना लंड गाँड में डाल दिया और पूरा वीर्य उसकी गाँड के अंदर छोड़ दिया। गरम-गरम वीर्य गाँड को भर गया।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। सासुर का लंड अभी भी आधा अंदर था। उन्होंने धीरे से बाहर निकाला। चुत और गाँड दोनों से उनका वीर्य रिस-रिसकर बिस्तर पर गिर रहा था।
सासुर ने बहू को अपनी छाती से चिपका लिया। एक हाथ उसकी चूची पर रखा और दूसरे हाथ से उसकी गीली चुत को सहलाते हुए बोले, “अब सो जा… सुबह फिर से शुरू करेंगे।”
बहू की आँखें बंद थीं। उसके होठों पर थकी हुई, पूरी तरह संतुष्ट मुस्कान थी। कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसें गूंज रही थीं।

