रातभर सेक्सी माँ की गांड में लंड डालके सोया - जोरदार चुदाई
रात भर अपनी सेक्सी माँ की गर्म और टाइट गांड में लंड डालकर सोया। पूरी रात माँ की गांड में गहराई तक लंड घुसाए रखा, कभी धीरे-धीरे चोदा तो कभी जोरदार ठोके मारे। माँ की आहें, सिसकारियाँ और प्यासी चुदाई की आवाजें पूरे कमरे में गूंजती रहीं।
राजेश अपने कमरे में लेटा हुआ था। गर्मी की वजह से उसने अपनी शर्ट उतार दी थी। पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था, लेकिन भीषण गर्मी में कोई राहत नहीं मिल रही थी। वह 22 साल का जवान लड़का था, जो अपनी माँ के साथ रहता था। उसके पिता की मृत्यु उसके बचपन में ही हो गई थी, और तब से उसकी माँ सीता ने ही उसे पाला था।
सीता 42 साल की थी, लेकिन उम्र का कोई असर नहीं था उसकी सुंदरता पर। गोरा बदन, भरे हुए गाल, और वो कमर जो अभी भी जवान लड़कियों को मात दे सकती थी। उसके बाल अभी भी काले थे, और आँखों में वो चमक थी जो किसी भी पुरुष को अपनी ओर खींच सकती थी।
रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे थे। राजेश ने सुना कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला। उसकी माँ नहाकर बाहर आ रही थी। वह अपने कमरे से बाहर निकला और गलियारे में खड़ा हो गया।
"माँ, इतनी देर क्यों लगा दी?" राजेश ने पूछा।
सीता ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, गर्मी इतनी है कि ठंडे पानी से नहाने में ही मज़ा आ रहा था।"
राजेश की नज़र अपनी माँ पर टिक गई। वह एक हल्की साड़ी पहने हुए थी, जो उसके गीले बदन से चिपक रही थी। ब्लाउज की गहराई से उसकी गोरी छाती का हिस्सा दिखाई दे रहा था। पानी की बूंदें उसके गालों से होते हुए गर्दन पर बह रही थीं।
"क्या देख रहा है बेटा?" सीता ने शर्माते हुए पूछा।
"कुछ नहीं माँ... बस आप इतनी सुंदर लग रही हो," राजेश ने अनायास ही कह दिया।
सीता के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आई। वह जानती थी कि उसका बेटा अब बड़ा हो गया था। उसकी नज़रें उसे कैसे देखती हैं, यह वह महसूस करती थी।
"आज रात मेरे कमरे में सो जा बेटा... पंखा खराब हो गया है तेरे कमरे का," सीता ने कहा।
राजेश का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वह जानता था कि यह सिर्फ पंखे की बात नहीं थी।
रात में, जब दोनों एक ही बिस्तर पर लेटे थे, तो गर्मी की वजह से दोनों के बदन पसीने से तर थे। सीता ने अपनी साड़ी हटा दी, और अब वह सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी।
"माँ, गर्मी बहुत है," राजेश ने कहा।
"हाँ बेटा... तू भी अपनी बनियान उतार दे," सीता ने कहा।
राजेश ने अपनी बनियान उतार दी। अंधेरे में भी उसका जवान बदन दिखाई दे रहा था। सीता की नज़र उसके चौड़े सीने पर टिक गई। उसका बेटा अब एक मर्द बन चुका था।
"माँ..." राजेश ने धीरे से कहा।
"हाँ बेटा?"
"मैं आपको छू सकता हूँ?"
सीता ने कुछ पल सोचा, फिर हाँ में सिर हिलाया। राजेश का हाथ धीरे-धीरे आगे बढ़ा और उसने अपनी माँ का हाथ पकड़ लिया। उसका हाथ गरम था, और सीता को एक अजीब सा सुख महसूस हुआ।
राजेश करीब खिसक गया। उसका हाथ अब सीता की कमर पर था। वह धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहा था। सीता की साँसें तेज़ होने लगीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह गलत है या सही, लेकिन उसका शरीर जवाब दे चुका था।
"बेटा... यह..." सीता ने कहना चाहा।
"शhhh... माँ, बस आज रात..." राजेश ने उसके होठों पर उंगली रखी।
राजेश ने अपनी माँ को अपनी ओर खींच लिया। अब दोनों के बदन एक-दूसरे से सटे हुए थे। राजेश का सीना सीता की पीठ से लगा था, और उसका एक हाथ उसके पेट पर घूम रहा था।
"माँ, आप इतनी कोमल हो..." राजेश ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा।
सीता ने आँखें बंद कर लीं। उसे अपने बेटे की गर्म साँसें अपने गालों पर महसूस हो रही थीं। राजेश का हाथ अब ऊपर बढ़ चुका था। उसने अपनी माँ के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके, धीरे-धीरे।
जब ब्लाउज खुला, तो सीता की गोरी पीठ सामने आ गई। राजेश ने अपने होंठ उसकी पीठ पर रखे और धीरे-धीरे चूमना शुरू किया। सीता की साँसें और तेज़ हो गईं। उसका शरीर काँपने लगा।
"आहhh... बेटा..." सीता ने हल्की सी आवाज़ निकाली।
राजेश ने अपनी माँ को पीठ के बल लिटा दिया। अब वह उसके ऊपर था। उसने अपने होंठ उसकी गर्दन पर रखे और चूमना शुरू किया। नीचे से ऊपर, कान के पास, फिर गालों पर।
सीता ने अपने हाथ पीछे किए और अपने बेटे के सिर को सहलाने लगी। राजेश धीरे-धीरे नीचे बढ़ रहा था। उसके होंठ अब उसकी कंधों पर थे, फिर पीठ के बीच में, फिर कमर पर।
"माँ, मैं आपकी पेटीकोट हटा दूँ?" राजेश ने पूछा।
सीता ने शर्माते हुए हाँ कहा। राजेश ने उसकी पेटीकोट का नाड़ा खोला और धीरे से नीचे खींचा। अब सीता सिर्फ अपनी पैंटी में थी, और उसका ब्लाउज भी खुला हुआ था।
राजेश ने अपनी माँ को फिर से पलट दिया। अंधेरे में भी सीता का गोरा बदन चमक रहा था। उसके भरे हुए स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थीं तेज़ साँसों के साथ।
राजेश ऊपर आया और इस बार उसने अपने होंठ सीधे अपनी माँ के होंठों पर रख दिए। सीता ने पहले तो विरोध किया, लेकिन फिर वह भी उसमें डूब गई। दोनों की जीभें एक-दूसरे से मिलीं, और एक लंबा चुंबन शुरू हुआ।
राजेश का एक हाथ सीता के स्तनों पर था। वह उन्हें धीरे-धीरे दबा रहा था, सहला रहा था। सीता की आवाज़ें निकलने लगीं - "आहh... उmm... हाँh..."
"माँ, आपके ये कितने मुलायम हैं..." राजेश ने कहा और उसने एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया।
सीता की पीठ अकड़ गई। उसके बेटे की जीभ उसके निप्पल को चाट रही थी, चूस रही थी। वह धीरे-धीरे काट रहा था, फिर चाट रहा था। सीता को स्वर्ग जैसा सुख मिल रहा था।
"उmm... बेटा... और ज़ोर से..." सीता ने कहा।
राजेश दूसरे स्तन को भी वैसे ही चूसने लगा। उसका दूसरा हाथ नीचे बढ़ चुका था। उसने सीता की पैंटी में हाथ डाल दिया।
"ओहh... माँ, आप तो पूरी गीली हो चुकी हो..." राजेश ने कहा।
सीता शर्मा गई, लेकिन उसे मज़ा भी आ रहा था। राजेश ने उसकी पैंटी नीचे खींची और फेंक दी। अब उसकी माँ पूरी नंगी थी, और वह उसके ऊपर था।
राजेश ने अपनी शॉर्ट्स उतार दी। उसका लिंग पूरी तरह से खड़ा था, लगभग 7 इंच का और काफी मोटा। सीता ने अंधेरे में भी उसे देख लिया और उसके मुँह से निकला, "वाहh... मेरा बेटा तो बड़ा हो गया..."
"माँ, अब मैं आपको पूरी तरह से अपना बनाना चाहता हूँ," राजेश ने कहा।
सीता ने अपने पैर फैला दिए। राजेश ऊपर आया और उसने अपने लिंग को अपनी माँ की योनि के मुँह पर रखा। वह गीली थी, और उसका लिंग भी पूरी तरह तैयार था।
"धीरे से बेटा... पहली बार है..." सीता ने कहा।
राजेश ने धीरे से आगे धक्का दिया। उसका लिंग का सिरा अंदर घुस गया। सीता ने हल्की सी चीख लगाई, लेकिन दर्द के साथ सुख भी था।
"उmm... हाँh... और अंदर डालो..." सीता ने कहा।
राजेश ने एक और धक्का दिया, और उसका आधा लिंग अंदर चला गया। सीता की योनि गरम और तंग थी, और राजेश को अद्भुत अनुभव हो रहा था।
"माँ, आप इतनी तंग हो..." राजेश ने कहा।
"पूरी तरह डाल दो बेटा... मुझे पूरा ले लो..." सीता ने कहा।
राजेश ने एक ज़ोरदार धक्का दिया और उसका पूरा लिंग अपनी माँ की योनि में समा गया। दोनों की आवाज़ें निकली - "आहhh..."
राजेश ऊपर-नीचे होने लगा। धीरे-धीरे पहले, फिर तेज़ी से। बिस्तर की क्वालियाँ चरमराने लगीं। सीता ने अपने पैर उठाकर अपने बेटे की कमर में लपेट लिए।
"और तेज़ बेटा... और तेज़..." सीता ने कहा।
राजेश की गति तेज़ हो गई। वह अपनी माँ को चोद रहा था पूरी तरह से। उसके लिंग बाहर आते और फिर पूरी तरह अंदर जाते। हर धक्के के साथ सीता की आवाज़ें निकलतीं।
"आहh... हाँh... उmm... बहुत मज़ा आ रहा है..." सीता ने कहा।
"माँ, आपकी योनि इतनी गरम है..." राजेश ने कहा।
"तुम्हारा लिंग भी तो बहुत मोटा है बेटा... मुझे पूरा भर दिया है..." सीता ने कहा।
राजेश ने अपनी माँ के स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए चोदना जारी रखा। वह अलग-अलग पोज़िशन में आ रहा था - कभी ऊपर से, कभी पीछे से, कभी साइड में।
आधे घंटे तक यह सिलसिला चला। दोनों पसीने से तर थे, लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। सीता को पहली बार इतना सुख मिल रहा था।
"बेटा... अब मैं झड़ने वाली हूँ..." सीता ने कहा।
"मैं भी माँ... अंदर ही निकाल दूँ?" राजेश ने पूछा।
"हाँh... अंदर ही... मुझे अपना बना लो पूरी तरह..." सीता ने कहा।
राजेश ने कुछ और तेज़ धक्के लगाए, और फिर उसका लिंग अपनी माँ की योनि में ही फूलने लगा। गर्म गर्म वीर्य की धार सीता की योनि में भर गई। वह भी झड़ गई, और उसकी योनि ने राजेश के लिंग को कस लिया।
दोनों एक-दूसरे में समाए लेटे रहे। राजेश ने अपनी माँ को कसकर पकड़ लिया और उसके गाल पर चूमा।
"माँ, आज रात बहुत खास थी," राजेश ने कहा।
"हाँ बेटा... अब हम हमेशा एक-दूसरे के हैं," सीता ने मुस्कुराते हुए कहा।
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