मौसी की टाइट चूत में भांजे का पहला लंड - रातभर चुदाई
सेक्सी मौसी प्रिया को 24 साल के शर्मीले भांजे राहुल को पहली बार चोदा। मौसी की टाइट और गीली चूत में भांजे का पहला लंड घुसा और पूरी रात जोरदार चुदाई चली। ओरल सेक्स, चूत चुदाई और अलग-अलग पोजीशन में रात भर मस्ती।
राहुल शर्मा एक 24 वर्षीय युवा था, जो दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय परिवार में रहता था। उसके पिता राजेश शर्मा एक सरकारी अधिकारी थे, जिनकी नौकरी की वजह से वे अक्सर दौरों पर रहते थे। उसकी माँ कविता शर्मा एक गृहिणी थीं, जो घर संभालती थीं। राहुल एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था।
राहुल की ज़िंदगी बहुत ही सादी थी। सुबह उठना, ऑफिस जाना, शाम को घर लौटना, और फिर रात में अकेले अपने कमरे में समय बिताना। उसके दोस्त भी कम थे, और सोशल लाइफ लगभग शून्य के बराबर। वह एक शर्मीला लड़का था, जिसने आज तक किसी लड़की से दोस्ती तक नहीं की थी, यौन संबंध तो दूर की बात थी।
उसका परिवार उत्तम नगर में एक दो मंजिला घर में रहता था। नीचे का हिस्सा किराए पर दिया हुआ था, और ऊपर का हिस्सा में वे रहते थे। तीन बेडरूम, एक बड़ा हॉल, रसोई, और एक छोटा स्टडी रूम। राहुल का कमरा घर के पीछे की तरफ था, जहाँ से एक छोटा बालकनी भी था जिसमें वह अक्सर शाम को चाय पीता था।
उस शुक्रवार की सुबह कुछ अलग थी। राहुल की माँ कविता बहुत उत्साहित दिख रही थीं। उन्होंने राहुल को बताया कि उनकी छोटी बहन प्रिया, यानी राहुल की मौसी, कई सालों बाद दिल्ली आ रही हैं।
"राहुल, तेरी मौसी आ रही हैं आज शाम को। उनके पति का तबादला यहाँ हो गया है। वे अगले हफ्ते आएंगे, लेकिन तेरी मौसी पहले आ रही हैं कुछ दिनों के लिए। तू ऑफिस से जल्दी आ जाना," कविता ने कहा।
राहुल ने हाँ में सिर हिलाया, लेकिन उसके मन में कोई खास उत्साह नहीं था। उसे अपनी मौसी याद भी नहीं थीं अच्छे से। आखिरी बार उन्हें देखा था जब वह 14 साल का था, और तब से 10 साल बीत चुके थे।
दिन भर ऑफिस में राहुल का मन काम में नहीं लगा। वह सोच रहा था कि उसकी मौसी कैसी दिखती होंगी। उसे याद था कि वह बहुत सुंदर थीं, लेकिन बचपन की यादें अब धुंधली हो चुकी थीं।
शाम को पाँच बजे, राहुल ने ऑफिस से छुट्टी ली और घर की ओर चल पड़ा। मेट्रो में यात्रा करते हुए वह अपने फोन पर सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहा था। उसके दोस्तों की पोस्ट्स देखकर वह और अधिक अकेला महसूस करता था - सबके पास गर्लफ्रेंड्स थीं, पार्टीज़ में जाते थे, और यहाँ वह अपनी मौसी से मिलने जा रहा था।
घर पहुँचने पर, राहुल ने देखा कि उसकी माँ ने घर को एकदम सजा दिया था। नए फर्श पर पॉलिश, सोफे पर नए कवर, और हवा में मेहमानों के आने की खुशबू। उसके पिता भी घर पर थे, जो आश्चर्यजनक था।
"राहुल, तू तैयार हो जा। उनकी ट्रेन आने वाली है। हम स्टेशन जा रहे हैं उन्हें लेने," पिता ने कहा।
राहुल ने अपने कपड़े बदले - एक साधारण नीली शर्ट और जींस पहनी। वह खुद को आईने में देखता रहा। उसकी हाइट 5 फुट 10 इंच थी, गोरा रंग, औसत बदन, और एक शर्मीली मुस्कान। वह जानता था कि वह कोई मॉडल नहीं था, लेकिन वह बुरा भी नहीं दिखता था।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ थी। राहुल अपने माता-पिता के साथ प्लेटफॉर्म पर खड़ा था। उसकी नज़रें आने वाली ट्रेन की ओर थीं।
"अजमेर एक्सप्रेस" प्लेटफॉर्म पर आई। यात्री उतरने लगे। राहुल की माँ कविता आगे बढ़ीं और किसी को खोजने लगीं।
"प्रिया! प्रिया!" कविता ने चिल्लाया।
राहुल ने देखा कि एक महिला उनकी ओर आ रही थी। वह एक मध्यम आकार का सूटकेस खींच रही थीं। जैसे ही वह करीब आईं, राहुल का दिल धड़कने लगा।
यह उसकी मौसी थीं? वह तो किसी फिल्म स्टार से कम नहीं लग रही थीं!
प्रिया लगभग 38-39 साल की थीं, लेकिन दिखने में ३० की भी नहीं लगती थीं। उन्होंने एक हल्की सी साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी। साड़ी का रंग हल्का गुलाबी था, जिसमें सुनहरी किनारी थी। उनके बाल कंधों तक आते थे, काले और चमकदार। चेहरे पर हल्का मेकअप, लाल लिपस्टिक, और आँखों में काजल।
लेकिन सबसे आकर्षक उनका बदन था। वह औसत कद की थीं, लगभग ५ फुट ४ इंच, लेकिन उनका फिगर एकदम परफेक्ट था। भरी हुई छाती जो ब्लाउज में कसकर बंधी हुई थी, पतली कमर, और फिर हिप्स जो साड़ी में सुडौल लग रहे थे।
"दीदी!" प्रिया ने कविता को गले लगाया।
फिर उन्होंने राहुल के पिता को नमस्ते की। और फिर उनकी नज़र राहुल पर पड़ी।
"यह राहुल है?" प्रिया ने पूछा, आश्चर्य से।
"हाँ, तेरा भांजा। बहुत बड़ा हो गया ना?" कविता ने मुस्कुराते हुए कहा।
प्रिया राहुल के पास आईं। उन्होंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। "अरे वाह! कितना हैंडसम हो गया है मेरा भांजा! पहले तो इतना पतला सा था, अब तो बिल्कुल हीरो लग रहा है!"
राहुल शर्मा गया। उसकी मौसी के हाथ उसके गालों पर थे, और उनकी नज़रें उसमें इतनी गहराई से देख रही थीं कि वह घबरा गया।
"नमस्ते मौसी," राहुल ने हकलाते हुए कहा।
"अरे नमस्ते वाली क्या बात! गले लग जा अपनी मौसी को!" प्रिया ने कहा और राहुल को अपनी बाहों में भर लिया।
राहुल को अपनी मौसी की सुगंध महसूस हुई - एक मिश्रित खुशबू, शायद कोई महंगा परफ्यूम, और उनके बालों की खुशबू। उनकी छाती उसके सीने से सटी हुई थी, और वह महसूस कर सकता था कि वह कितनी नरम थीं।
वह एक पल के लिए वहीं खड़ा रहा, अपनी मौसी की बाहों में।
"चलो घर चलते हैं," पिता ने कहा।
गाड़ी में, राहुल पीछे की सीट पर बैठा था, और प्रिया मौसी उसके बगल में। उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार उसके हाथ से टकरा रहा था। राहुल ने देखा कि उनके पैरों पर लाल रंग की बिंदियाँ लगी हुई थीं, और पैरों की मेंहदी उतरी नहीं थी।
"राहुल, तू क्या कर रहा है आजकल?" प्रिया ने पूछा।
"मौसी, मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूँ," राहुल ने कहा।
"अच्छा! और गर्लफ्रेंड?"
"नहीं मौसी, कोई नहीं," राहुल ने शर्माते हुए कहा।
"क्यों? इतना हैंडसम लड़का और कोई लड़की नहीं मिली? तेरी मौसी को तो तेरे जैसा लड़का चाहिए था," प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
राहुल समझ नहीं पाया कि यह क्या मतलब था। लेकिन उसके दिल में एक अजीब सी हलचल हो रही थी।
घर पहुँचने पर, प्रिया मौसी को घर दिखाया गया। कविता ने उनके लिए गेस्ट रूम तैयार किया था, लेकिन प्रिया ने कहा, "अरे दीदी, मुझे वो कमरा नहीं चाहिए। वह तो बहुत छोटा है। राहुल के कमरे में ही सो जाऊँगी, उसका कमरा तो बड़ा है।"
राहुल चौंक गया। उसका कमरा? उसमें तो सिर्फ एक बिस्तर था!
"लेकिन प्रिया..." कविता ने कहना चाहा।
"अरे दीदी, कोई बात नहीं। राहुल और मैं एडजस्ट कर लेंगे। वैसे भी, मुझे अपने भांजे से बहुत सारी बातें करनी हैं," प्रिया ने कहा।
राहुल के पिता ने कहा, "ठीक है, राहुल तू सोफे पर सो जाना।"
"नहीं जीजू, राहुल अपने कमरे में ही सोएगा। मैं उसे परेशान नहीं करूँगी," प्रिया ने कहा।
राहुल समझ नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा था।
रात का खाना हुआ। प्रिया मौसी ने बहुत सारी बातें कीं - अपने जीवन के बारे में, अपने पति के बारे में, और कैसे वे अब दिल्ली में रहेंगे। राहुल चुपचाप सुन रहा था, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार अपनी मौसी पर जा रही थीं।
खाना खत्म होने के बाद, सब लोग सोने चले गए। राहुल ने सोचा कि वह सोफे पर सो जाएगा, लेकिन प्रिया मौसी ने उसे रोका।
"कहाँ जा रहा है? चल, कमरे में चलते हैं। मुझे तुझसे कुछ बात करनी है," प्रिया ने कहा।
राहुल ने अपनी माँ को देखा, लेकिन कविता ने कहा, "जा बेटा, मौसी से बातें कर।"
राहुल का कमरा घर के पीछे की तरफ था, जो काफी बड़ा था। एक डबल बेड, एक स्टडी टेबल, एक अलमारी, और एक छोटा अटैच्ड बाथरूम। खिड़की से बाहर एक छोटा बालकनी था।
प्रिया मौसी कमरे में आईं और चारों ओर देखा। "वाह, तेरा कमरा तो बहुत अच्छा है।"
"धन्यवाद मौसी," राहुल ने कहा।
प्रिया ने अपना सूटकेस खोला और कपड़े निकालने लगीं। राहुल ने देखा कि वह अपनी साड़ी खोल रही थीं। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
"मौसी, मैं... मैं बाहर जाता हूँ," राहुल ने कहा।
"अरे नहीं, यहीं रह। मैं तो बस कंफर्टेबल कपड़े पहन रही हूँ। तू भी अपने कपड़े बदल ले," प्रिया ने कहा।
राहुल ने अपनी शर्ट उतारी और एक टी-शर्ट पहनी। जब वह मुड़ा, तो देखा कि प्रिया मौसी ने साड़ी उतार दी थी और अब एक नाइटी पहने हुए थीं। वह एक हल्की, पारदर्शी नाइटी थी, जो उनके बदन के सारे नक्शे दिखा रही थी।
राहुल का मुँह खुला रह गया। उसकी मौसी के अंदर काली ब्रा और पैंटी थी, जो नाइटी से साफ़ दिख रही थी। उनके पैर, उनकी जांघें, उनकी कमर - सब कुछ इतना सुंदर लग रहा था।
"क्या देख रहा है?" प्रिया ने मुस्कुराते हुए पूछा।
"कुछ नहीं मौसी," राहुल ने शर्माते हुए कहा और नज़रें हटा लीं।
"अरे देखने में क्या हर्ज है? मौसी हूँ तेरी, कोई अजनबी थोड़े ही हूँ," प्रिया ने कहा और राहुल के पास आईं।
उन्होंने राहुल के कंधों पर हाथ रखा। "तू बहुत शर्माता है। यह अच्छी बात नहीं है। एक मर्द को हिम्मतवान होना चाहिए।"
"जी मौसी," राहुल ने कहा।
"चल, बिस्तर पर बैठते हैं। मुझे तुझसे बहुत सारी बातें करनी हैं," प्रिया ने कहा।
दोनों बिस्तर पर बैठे। प्रिया ने अपने पैर बिस्तर पर रखे और राहुल की ओर मुड़ीं। उनकी नाइटी थोड़ी ऊपर सरक गई, और राहुल ने उनके पैरों को देखा - गोरे, चिकने, और लाल नाखूनों वाले।
"राहुल, तू कभी किसी लड़की के साथ..." प्रिया ने पूछना शुरू किया।
"क्या मौसी?" राहुल ने पूछा।
"मतलब, कभी किसी के साथ सोया है?" प्रिया ने सीधे पूछा।
राहुल का चेहरा लाल हो गया। "नहीं मौसी, कभी नहीं।"
"सच्ची? एक भी लड़की के साथ?" प्रिया ने आश्चर्य से पूछा।
"नहीं मौसी, मैं... मैं बहुत शर्माता हूँ," राहुल ने कहा।
प्रिया ने राहुल का हाथ पकड़ा। "कोई बात नहीं। तेरी मौसी है ना। मैं तुझे सब कुछ सिखाऊँगी।"
राहुल समझ नहीं पाया कि यह क्या मतलब था। लेकिन उसके हाथ में अपनी मौसी का गरम हाथ महसूस हो रहा था।
"राहुल, तू मुझे पसंद है। बहुत पसंद है," प्रिया ने धीरे से कहा।
"मौसी, आप..." राहुल ने कहना चाहा।
"शhhh... बोल मत, सुन। मैं जानती हूँ यह गलत है। मैं तेरी मौसी हूँ, तू मेरा भांजा है। लेकिन देख, मैं तुझे कुछ सिखाना चाहती हूँ। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए। क्या तू मुझे अपनी पहली टीचर बनाएगा?" प्रिया ने पूछा।
राहुल का दिमाग़ चकरा रहा था। उसकी मौसी उसे क्या कह रही थीं?
"मैं... मैं समझा नहीं," राहुल ने कहा।
प्रिया ने राहुल का हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे अपने पेट पर रखा। "यहाँ से शुरुआत होती है। महसूस करो।"
राहुल का हाथ काँप रहा था। उसने अपनी मौसी का पेट छुआ - नरम, गरम, और थोड़ा उभारा हुआ।
"कैसा लगा?" प्रिया ने पूछा।
"अच्छा मौसी," राहुल ने कहा।
"अब धीरे-धीरे ऊपर जाओ," प्रिया ने कहा।
राहुल का हाथ ऊपर बढ़ा। उसने अपनी मौसी की छाती के नीचे का हिस्सा छुआ। वहाँ से उसे उनकी ब्रा का किनारा महसूस हुआ।
"और ऊपर," प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा।
राहुल ने हिम्मत की और अपना हाथ उनकी छाती पर रख दिया। वह इतनी नरम थी, इतनी भरी हुई। उसने महसूस किया कि उनका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।
"मौसी, मैं..." राहुल घबरा गया।
"डरो मत। यह सब स्वाभाविक है। एक मर्द और औरत के बीच," प्रिया ने कहा और राहुल के गाल पर चूमा।
वह चुंबन इतना हल्का था, लेकिन राहुल के शरीर में बिजली सी दौड़ गई।
"मौसी, यह सही है?" राहुल ने पूछा।
"प्यार कभी गलत नहीं होता, राहुल। और यह प्यार है, सिखाने का, समझने का," प्रिया ने कहा।
राहुल ने अपनी मौसी को देखा। उनकी आँखों में वो चमक थी, वो लाल होठ, और वो मुस्कान। उसने सोचा कि अगर यह गलत भी है, तो भी वह यह अनुभव करना चाहता था।
"मैं तैयार हूँ मौसी," राहुल ने कहा।
प्रिया ने मुस्कुराते हुए अपनी नाइटी उतार दी। अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। उनका गोरा बदन चाँदनी में चमक रहा था। उनके स्तन ब्रा से बाहर निकलने को तरस रहे थे, और उनकी पैंटी में एक हल्की सी गीली चमक थी।
"तुम भी अपने कपड़े उतारो," प्रिया ने कहा।
राहुल ने अपनी टी-शर्ट उतारी। उसका औसत बदन, लेकिन फिर भी जवान और कसा हुआ। फिर उसने अपनी शॉर्ट्स उतारी। उसका लिंग अंडरवियर में खड़ा था, जो एक तंबू जैसा दिख रहा था।
"वाह... मेरा भांजा तो बड़ा तैयार है," प्रिया ने कहा और राहुल के पास आईं।
उन्होंने राहुल के अंडरवियर को नीचे खींचा। उसका लिंग बाहर आ गया - लगभग 7 इंच का, गोरा, और नसों से भरा हुआ।
"बहुत सुंदर है तुम्हारा," प्रिया ने कहा और उसे अपने हाथ में पकड़ लिया।
राहुल ने आँखें बंद कर लीं। उसकी मौसी का गरम हाथ उसके लिंग पर था, और वह उसे धीरे-धीरे सहला रही थीं।
"यह जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। इसका आनंद लो," प्रिया ने कहा।
प्रिया ने राहुल को बिस्तर पर लिटा दिया। वह उसके पैरों के पास बैठीं और उसके लिंग को देखती रहीं। फिर वह झुकीं और उसे अपने मुँह में ले लिया।
राहुल की पीठ अकड़ गई। उसकी मौसी की गरम, गीली जीभ उसके लिंग पर घूम रही थी। वह उसके सिरे को चाट रही थीं, फिर नीचे की तरफ, फिर अंडकोषों को चूस रही थीं।
"उफ़... मौसी... यह..." राहुल ने कहा।
"मज़ा आ रहा है ना? यह ओरल सेक्स है। औरत का मुँह पुरुष के लिंग के लिए स्वर्ग होता है," प्रिया ने कहा और फिर चूसना जारी रखा।
राहुल को लगा जैसे वह स्वर्ग में हो। उसकी मौसी का मुँह उसके लिंग पर ऊपर-नीचे हो रहा था, और वह उसे अपने गले तक लेने की कोशिश कर रही थीं। कभी-कभी वह उसे अपने दाँतों से हल्का काटतीं, फिर जीभ से चाटतीं।
"मौसी, रुकिए... मैं... मैं झड़ जाऊँगा," राहुल ने कहा।
प्रिया ने मुँह हटाया और मुस्कुराईं। "अभी नहीं। अभी तो शुरुआत हुई है।"
वह ऊपर आईं और अपनी ब्रा खोल दी। उनके स्तन आज़ाद हो गए - गोल, गोरे, और गुलाबी निप्पल्स के साथ। वह इतने सुंदर थे कि राहुल उन्हें देखता रहा।
"छूओ इन्हें," प्रिया ने कहा।
राहुल ने अपने हाथ उठाए और अपनी मौसी के स्तनों को छुआ। वह इतने नरम थे, इतने मुलायम। उसने उन्हें दबाया, सहलाया, और फिर एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया।
"आह... हाँ राहुल... चूसो... बहुत मज़ा आ रहा है," प्रिया ने कहा।
राहुल अपनी मौसी के स्तन चूस रहा था, और दूसरे को हाथ से दबा रहा था। वह निप्पल्स को काटता, फिर चाटता, फिर चूसता। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, और वह कराहने लगीं।
"उम्म... और ज़ोर से... हाँ... वहीं..." प्रिया ने कहा।
राहुल ने दूसरा स्तन भी वैसे ही चूसा। उसे अपनी मौसी की आवाज़ें बहुत अच्छी लग रही थीं। वह जानता था कि वह उन्हें सुख दे रहा था।
"अब नीचे चलो," प्रिया ने कहा।
राहुल नीचे बढ़ा। उसने अपनी मौसी की पैंटी देखी - गीली हो चुकी थी। उसने उसे नीचे खींचा और फेंक दिया।
अब प्रिया पूरी तरह से नंगी थीं। उनकी योनि साफ़ थी, एक हल्की सी गीली चमक आ रही थी। राहुल ने उसे देखा और पूछा, "मौसी, मैं क्या करूँ?"
"चाटो उसे। जैसे तुम मेरे स्तन चाट रहे थे," प्रिया ने कहा।
राहुल ने अपना मुँह उनकी योनि पर रखा। एक अजीब सी सुगंध आई, लेकिन वह अच्छी थी। उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी योनि को चाटा।
"ओह... हाँ... बहुत अच्छा..." प्रिया ने कहा।
राहुल ने उनकी योनि को चाटना शुरू किया। वह उसके भीतर की गुलाबी दीवारों को देख रहा था, और उसकी जीभ उन पर घूम रही थी। वह उनकी क्लिटोरिस को भी चाटता, जिससे प्रिया काँप उठतीं।
"उम्म... राहुल... तू तो प्रो हो गया... आह... हाँ..." प्रिया ने कहा।
राहुल लगभग १५ मिनट तक अपनी मौसी की योनि चाटता रहा। प्रिया दो बार झड़ चुकी थीं, और उनकी योनि से रस बह रहा था।
"बस अब... अब मुझे लो," प्रिया ने कहा।
प्रिया ने राहुल को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर बैठीं। उन्होंने उसके लिंग को अपने हाथ में लिया और अपनी योनि के मुँह पर रखा।
"यह पहली बार है, इसलिए थोड़ा दर्द होगा मुझे। लेकिन तुम धीरे-धीरे अंदर जाना," प्रिया ने कहा।
वह धीरे-धीरे नीचे बैठीं। राहुल का लिंग का सिरा उनकी योनि में घुसा। प्रिया ने हल्की सी सिसकी ली, लेकिन फिर मुस्कुराईं।
"बहुत बड़ा है तुम्हारा... मज़ा आएगा," प्रिया ने कहा।
वह और नीचे बैठीं। राहुल का आधा लिंग अंदर चला गया। उसे अपनी मौसी की योनि की गर्मी महसूस हुई - इतनी गरम, इतनी तंग, इतनी गीली।
"मौसी..." राहुल ने कहा।
"हाँ प्यारे... और अंदर..." प्रिया ने कहा।
वह एक और धक्का दिया और राहुल का पूरा लिंग उनकी योनि में समा गया। दोनों की आवाज़ें निकलीं - "आह..."
"कैसा लग रहा है?" प्रिया ने पूछा।
"बहुत अच्छा मौसी... बहुत अच्छा..." राहुल ने कहा।
प्रिया ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन उछल रहे थे, और राहुल उन्हें देखता रहा। वह अपनी मौसी की कमर पकड़कर उसकी गति में मदद कर रहा था।
"और तेज़... और तेज़..." प्रिया ने कहा।
राहुल नीचे से धक्के मारने लगा। उसका लिंग पूरी तरह बाहर आता और फिर ज़ोर से अंदर जाता। हर धक्के के साथ प्रिया की आवाज़ निकलती - "आह... हाँ... उम्म..."
"मौसी, आप इतनी सुंदर हैं..." राहुल ने कहा।
"और तुम बहुत अच्छे चोदते हो... मुझे पूरा ले लो..." प्रिया ने कहा।
राहुल ने अपनी मौसी को पलट दिया। अब वह ऊपर था और प्रिया नीचे। उसने उनके पैर अपने कंधों पर रखे और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।
"आह... हाँ... मारो... और ज़ोर से..." प्रिया चिल्लाई।
राहुल पूरी ताकत से अपनी मौसी को चोद रहा था। बिस्तर की चरमराहट और प्रिया की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। दोनों पसीने से तर थे, लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
राहुल ने अलग-अलग पोज़िशन ट्राई कीं - कभी पीछे से, कभी साइड से, कभी प्रिया को बैठाकर। हर पोज़िशन में वह उन्हें और ज़्यादा सुख देने की कोशिश करता।
"राहुल... मैं फिर झड़ने वाली हूँ... और तेज़ करो..." प्रिया ने कहा।
राहुल ने और ज़ोर लगाया। उसका लिंग प्रिया की योनि में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था। अचानक प्रिया की योनि ने उसके लिंग को कस लिया, और वह झड़ गईं।
"आह... हाँ... आ गया... बहुत मज़ा आया..." प्रिया ने कहा।
राहुल भी अपनी सीमा पर था। "मौसी, मैं भी..."
"अंदर ही निकाल दो... मुझे भर दो अपने वीर्य से... मैं गर्भ नहीं ठहरने वाली, मैं पिल्स लेती हूँ," प्रिया ने कहा।
राहुल ने एक ज़ोरदार धक्का दिया और उसका लिंग प्रिया की योनि में फूलने लगा। गर्म वीर्य की धार उनकी योनि में भर गई। राहुल ने कुछ देर और धक्के दिए और फिर उनके ऊपर गिर गया।
दोनों एक-दूसरे में समाए लेटे रहे। राहुल ने अपनी मौसी को कसकर पकड़ लिया और उसके गाल पर चूमा।
"कैसा लगा मेरे राजकुमार?" प्रिया ने पूछा।
"मौसी, यह ज़िंदगी का सबसे अच्छा पल था," राहुल ने कहा।
"अभी तो रात बाकी है मेरे प्यारे... और भी बहुत कुछ सीखना है तुझे," प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
उस रात दोनों ने तीन बार और प्यार किया। हर बार नई पोज़िशन, नया तरीका। प्रिया ने राहुल को सब कुछ सिखाया - कैसे एक औरत को सुख देना है, कैसे उसे पागल करना है, कैसे उसे अपना गुलाम बनाना है।
सुबह होने पर, राहुल ने देखा कि उसकी मौसी उसकी बाहों में सो रही थीं। उसने उन्हें चूमा और सोचा कि यह जीवन का सबसे खूबसूरत दिन था।
"सुबह हो गई?" प्रिया ने आँखें खोलकर पूछा।
"हाँ मौसी," राहुल ने कहा।
"अब से मुझे मौसी मत कहना। जब हम अकेले हों, तो मुझे प्रिया कहना," उन्होंने कहा।
"ठीक है प्रिया," राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा।
और इस तरह शुरू हुई राहुल और प्रिया की एक अनोखी रिश्ते की कहानी, जो उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल देगी।
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