मामी को होटल में जबरदस्ती रंडी बनाया
मामी लाल ब्रा और टाइट चड्डी में कपड़े बदल रही थी। मैंने दरवाजा बंद करके उन्हें होटल रूम में जबरदस्ती रंडी बना दिया। 2 घंटे तक उनकी चूत और गांड फाड़कर वीर्य से भर दिया।

मेरी मामी नेहा की उम्र अड़तीस साल थी। मामा सिंगापुर में अच्छी जॉब करते थे, इसलिए साल में सिर्फ छह महीने में एक बार घर आते थे। इस वजह से मामी ज्यादातर अकेली रहती थीं।
उनका शरीर बेहद आकर्षक और कामुक था — गोरा चमकदार रंग, लंबे घने काले बाल जो कमर तक लहराते थे, छत्तीस इंच की भारी-भारी दूधिया स्तन, छब्बीस इंच की पतली कमर और पैंतालीस इंच की मोटी, गोल, निचली गांड। उनकी चाल देखकर ही कोई भी जवान लड़का ललचा जाता था।
उस दिन मेरे चचेरे भाई की शादी का फंक्शन होटल में चल रहा था। शाम के समय मैं होटल के एक साइड वाले रूम से गुजर रहा था। दरवाजा थोड़ा-सा खुला हुआ था। अंदर मामी कपड़े बदल रही थीं।
वे लाल रंग की बहुत टाइट चड्डी और पतली ब्रा में खड़ी थीं। ब्रा इतनी पतली थी कि उनकी आधी स्तन ऊपर से बाहर झांक रही थीं। लाल टाइट चड्डी उनकी मोटी गांड में धंसी हुई थी, जिससे गांड के दोनों हिस्से अलग-अलग दिख रहे थे।
मैं चुपचाप खड़ा उन्हें देखने लगा। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मामी ने अचानक मुझे देख लिया। वे घबरा गईं और दोनों हाथों से अपनी छाती और चूत को ढकने की कोशिश करने लगीं।
“राहुल! तू यहाँ क्या कर रहा है? बाहर जा जल्दी!” उनकी आवाज काँप रही थी।
मैंने अंदर कदम रखा और पीछे से दरवाजा बंद कर दिया। चिटकनी लगा दी।
“राहुल… प्लीज… दरवाजा खोल… बाहर सब लोग हैं… मैं तेरी मामी हूँ… ये गलत है बेटा…” वे घबराकर बोलीं।
मैंने पीछे से उन्हें जोर से पकड़ लिया। पहले उनकी मोटी गांड को दोनों हाथों से कसकर दबाया। गांड इतनी नरम और भारी थी कि मेरे हाथ उसमें धंस गए। फिर मैंने आगे हाथ बढ़ाकर पतली ब्रा के ऊपर से ही उनकी भारी स्तनों को जोर-जोर से मसला।
“आह्ह… राहुल… क्या कर रहे हो… छोड़ दे मुझे…” मामी काँपती हुई बोलीं।
मैंने ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी छत्तीस इंच की भारी स्तन पूरी तरह बाहर आ गईं। मैंने उन्हें जोर से मसलते हुए निप्पलों को उंगलियों से सहलाया। फिर एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। निप्पल को दांतों से हल्का-हल्का काटने लगा।
मामी की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। “उफ्फ… राहुल… मत करो… आह्ह… बहुत दिन से किसी ने छुआ नहीं है…”
मैंने उनकी लाल टाइट चड्डी भी खींचकर उतार दी। अब वे पूरी तरह नंगी थीं। मैंने उन्हें बिस्तर पर धकेल दिया। उनकी टांगें फैलाईं और चूत पर मुंह रखकर जोर से चाटने लगा। जीभ से क्लिटोरिस को तेजी से चाटता और दो उंगलियाँ अंदर डालकर जोर से हिलाने लगा।
मामी तड़प रही थीं। “नहीं राहुल… प्लीज… आह्ह… मैं मर रही हूँ… छोड़ दे मुझे…”
लेकिन उनकी चूत पहले ही रस से लथपथ हो चुकी थी। मैंने उंगलियों की रफ्तार बढ़ा दी। मामी का पूरा शरीर काँपने लगा और वे पहली बार जोर से झड़ गईं। उनका गर्म चूत का रस मेरे मुंह पर आ गया।
फिर मैंने उन्हें पेट के बल लिटा दिया। उनकी पैंतालीस इंच की मोटी गांड को दोनों हाथों से फैला दिया। गांड की छोटी सी गुलाबी छेद देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने खूब सारा थूक उस पर लगाया और दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं।
मामी जोर से चीख पड़ीं, “आआह्ह… दर्द हो रहा है… मेरी गांड फट जाएगी… उंगलियाँ निकालो राहुल… प्लीज… बहुत जलन हो रही है…”
मैंने उनकी कलाइयाँ पीछे मोड़कर उन्हें काबू में रखा और अपना मोटा सात इंच का लंड उनकी गांड की छेद पर रख दिया। एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड अंदर ठेल दिया।
“आआआह्हhh… मार डाला… राहुल… बहुत मोटा है… निकाल लंड… मैं सह नहीं पा रही…” मामी तेज चीखें मार रही थीं। उनके आँसू निकल आए थे।
मैं रुका नहीं। उनकी कमर कसकर पकड़ ली और जोर-जोर से गांड चोदने लगा। हर धक्के पर “पच-पच-पच” की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। शुरू में वे दर्द से चिल्ला रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी चीखें कराह में बदल गईं।
“उफ्फ… राहुल… अब… अब अच्छा लग रहा है… हाँ बेटा… और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो…”
मैंने उन्हें घुमाया और लंड उनके मुंह में डाल दिया। “मुंह खोल मामी…”
मामी ने मुंह खोला। मैंने उनका सिर दोनों हाथों से पकड़ लिया और लंड को उनके गर्म, नरम मुंह में धकेल दिया। पहले तो सिर्फ सुपाड़ा अंदर किया, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड उनके मुंह में ले जाने लगा। लंड उनके गले तक जा रहा था। मामी की आँखें पानी से भर गईं। उनके मुंह से लार की धार निकल रही थी।
मैंने उनका सिर पकड़कर जोर-जोर से मुंह चोदना शुरू कर दिया। “चूसो मामी… अच्छे से चूसो…”
मामी पहले हिचक रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे वे भी लंड चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घुमाने लगी। मैंने 20 मिनट तक लगातार उनका मुंह चोदा। कभी तेजी से, कभी धीरे-धीरे। लंड उनके मुंह से निकलकर उनके होठों पर लार की परत चमक रही थी।
फिर मैंने उन्हें चूत में डाला। उंगलियाँ चूत में डालकर जोर से हिलाता और लंड से चोदता।
दो घंटे तक लगातार चुदाई चली। मैंने उन्हें कई बार बाँधा। स्तनों पर थप्पड़ मारे, गांड पर चपत लगाई। मामी पहले चीख रही थीं, बाद में पूरी तरह पागल हो गईं।
“हाँ राहुल… और मार… मेरी गांड फाड़ दे… मुझे रंडी बना दे… चोद अपनी मामी को… आह्ह… मैं तेरी हूँ… जोर से चोदो मुझे… और तेज…” मैंने हर पोजीशन में चोदा। आखिर में मैंने उनकी चूत और गांड में वीर्य भरा।
दो घंटे बाद मामी मेरे सीने पर लेट गईं और बोलीं, “राहुल… अब जब भी मामा विदेश हों, तू मुझे अकेले बुला लेना। मैं अब तेरी रंडी बन चुकी हूँ… तेरी पूरी तरह।”

