बहू की तड़पती गांड़ में लंड ठूसा | ज़ोरदार एनल सेक्स कहानी
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शीतल एक 24 वर्षीय नवविवाहित युवती थी, जिसकी शादी राजेश से अभी-अभी 6 महीने पहले हुई थी। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती थी और शादी के बाद अपने ससुराल में ही रहने आई थी। उसका ससुर अमरीश एक 48 वर्षीय व्यवसायी थे, जो अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद अकेले ही रहते थे। उनका एक बेटा राजेश भी उनके साथ ही रहता था।
शीतल को शुरू से ही अमरीश की ओर एक अजीब सी आकर्षण महसूस होता था। वह एक सुंदर, मजबूत और आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्ति थे। उनका कदा-काठी ठीठ थी, उनके बाल थोड़े सफेद होने लगे थे, लेकिन फिर भी वह बहुत ही आकर्षक दिखते थे। शीतल को उनकी आवाज़ भी बहुत पसंद थी, जो एक अजीब सी गहराई और मजबूती लिए हुए थी।
राजेश अक्सर अपने काम में व्यस्त रहता था, और शीतल को घर में बहुत समय अकेले गुजारना पड़ता था। वह अक्सर अमरीश के साथ समय बिताने लगी। वे साथ में टीवी देखते, बातें करते, और कभी-कभी साथ में खाना भी खाते। शीतल को अमरीश के साथ बिताया गया समय बहुत अच्छा लगता था।
एक दिन, जब राजेश काम से घर नहीं आया, तो शीतल और अमरीश साथ में डिनर कर रहे थे। डिनर के बाद, वे सोफे पर बैठे हुए थे और बातें कर रहे थे। शीतल ने अमरीश को बताया कि वह उनके साथ बिताया गया समय कितना एन्जॉय करती है। अमरीश ने भी कहा कि वह भी उनके साथ बिताया गया समय एन्जॉय करते हैं।
उस रात, जब शीतल सोने के लिए अपने कमरे में गई, तो उसके मन में अमरीश के बारे में बहुत सारे विचार आने लगे। वह उनके बारे में सोचते हुए सो गई।
अगले दिन, शीतल ने अमरीश को एक कप चाय देने के लिए उनके कमरे गई। अमरीश उस समय अपने कमरे में बैठे हुए थे और कुछ पढ़ रहे थे। शीतल ने चाय का कप उनके पास रखा और वहां से जाने लगी। अचानक, अमरीश ने उसका हाथ पकड़ लिया। शीतल चौंक गई और पीछे मुड़कर देखा। अमरीश उसे घूर रहे थे, और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
शीतल को उस समय भी अमरीश के साथ एक अजीब सी आकर्षण महसूस हो रहा था। वह उनके हाथ से अपना हाथ छुड़ाना नहीं चाहती थी। वह वहीं खड़ी रही, और अमरीश उसके हाथ को अपने हाथ में दबाए रखे।
अमरीश ने धीरे-धीरे शीतल के करीब आते हुए कहा, "तुम बहुत खूबसूरत हो, शीतल।" शीतल के चेहरे पर एक शर्मिंदा सी मुस्कान आ गई।
शीतल का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। अमरीश के उस एक वाक्य ने उसके अंदर की सुप्त इच्छा को जगा दिया था। वह उनकी आँखों में देख रही थी, और वहाँ उसे बस वही चाहत नज़र आ रही थी, जो उसके अपने दिल में भी थी।
अमरीश ने उसका हाथ छोड़कर अपना हाथ उसके गाल पर रख दिया। उनकी उंगलियाँ गर्म और कंपकंपी वाली थीं। शीतल ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनके स्पर्श का आनंद लेने लगी। अमरीश धीरे-धीरे उसके चेहरे को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगे।
"शीतल," अमरीश ने फुसफुसाकर कहा, "मुझे तुम्हारे साथ बिताया हर पल अच्छा लगता है। मैं जानता हूँ कि यह गलत है, लेकिन मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ।"
शीतल ने अपनी आँखें खोलीं और उन्हें देखा। उसकी आँखों में भी वही बेचैनी और चाहत थी। "मैं भी आपको चाहती हूँ, ससुर जी," उसने कांपती आवाज़ में कहा।
यह सुनकर अमरीश के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गई। उन्होंने शीतल को अपनी बांहों में खींच लिया और उसके होंठों पर एक जोशीला किस कर लिया। शीतल ने भी उनका पूरा साथ दिया। उनका किस धीरे-धीरे और गहरा होता गया। उनकी जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं और उनके साँसें तेज़ हो गईं।
कुछ देर बाद, अमरीश ने शीतल को अपने से थोड़ा दूर किया और उसकी साड़ी के पल्लू को उसके कंधे से खींच दिया। शीतल का गला और क्लीवेज उजागर हो गया। अमरीश की आँखें चमक उठीं। वह उसके गले को चूमने लगे, फिर उसकी छाती को। शीतल सिसकियाँ ले रही थी और उसकी साँसें और भी तेज़ हो गई थीं।
अमरीश ने शीतल की साड़ी को उसके शरीर से अलग कर दिया। अब शीतल सिर्फ अपने ब्लाउज और पेटीकोट में थी। अमरीश ने उसे अपने बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गए। वे फिर से किस करने लगे, और इस बार उनका किस और भी जोशीला था।
अमरीश के हाथ अब शीतल के पीठ पर घूम रहे थे, और वह धीरे-धीरे उसके ब्लाउज की हुक खोलने लगे। जैसे ही ब्लाउज खुला, शीतल के सफेद, मुलायम और उछले हुए स्तन बाहर आ गए। अमरीश की आँखें उन्हें देखकर फटी की फटी रह गईं। वह झट से उन पर झुक गए और उन्हें चूसने और दबाने लगे। शीतल के मुँह से आहें निकलने लगीं।
"आह... ससुर जी... और जोर से... आह..." शीतल कामुकता से भरी आवाज़ में बोल रही थी।
अमरीश अब उसके स्तनों का रसपान कर रहे थे। वह एक को चूसते और दूसरे को मसलते। उनका मुँह और हाथ दोनों लगे हुए थे। शीतल तो जैसे स्वर्ग का सुख पा रही थी।
शीतल के हाथों ने अमरीश के सिर को अपने स्तनों से और दबा दिया। वह पागलों की तरह उनके बालों में अपनी उंगलियाँ फेर रही थी। उसके मुँह से निकल रही सिसकियाँ और आहें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।
"आह्ह... ससुर जी... मुझे तो बस यही चाहिए था... आपकी यह बाहें... आपका स्पर्श..." शीतल फुसफुसा रही थी।
अमरीश उसके स्तनों से अपना मुँह हटाकर उसके पेट की ओर बढ़े। वह उसके नाभि को चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ रहे थे। उनकी हर एक चुम्बन से शीतल के शरीर में एक नई करंट दौड़ जाती थी। वह उसके पेटीकोट के डोरे को अपने मुँह से ही खींचने लगे। पेटीकोट ढीला होकर उसके कमर से नीचे गिर गया।
अब शीतल सिर्फ अपनी पैंटी में थी। अमरीश ने उसे उठाकर उसकी पैंटी भी उतार दी। शीतल का वह सुनहरा, गीला और मुलायम भाग अब अमरीश के सामने पूरी तरह से बेपर्दा था। अमरीश की आँखें चमक उठीं। वह उसकी योनि को देखते ही रह गए।
"क्या खूबसूरत नज़ारा है, शीतल," अमरीश ने कहा।
वह उसकी योनि को चूमने लगे। शीतल कांपने लगी। उसने अपने पैर और चौड़े कर दिए। अमरीश ने अपनी जीभ उसकी योनि में घुसा दी। शीतल के मुँह से एक जोरदार आह निकली।
"आह्ह... ससुर जी... यह क्या कर रहे हैं आप... मुझे तो जन्नत का एहसास हो रहा है..." शीतल कामुकता से भरी आवाज़ में बोल रही थी।
अमरीश उसकी योनि को चाटते और चूसते रहे। वह उसके क्लिट को अपने दाँतों से हल्के-हल्के काटते भी रहे थे। शीतल तो जैसे पागल ही हो गई थी। वह अपने कूल्हों को उछाल-उछाल कर अमरीश का पूरा साथ दे रही थी।
कुछ देर बाद, अमरीश उठकर खड़े हो गए। उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए। उनका वह मजबूत, खड़ा और मोटा लिंग शीतल के सामने था। शीतल उसे देखकर एकदम से शांत हो गई। वह उसे घूर रही थी।
"अब मैं तुम्हें इससे रूबरू कराऊंगा, मेरी जान," अमरीश ने कहा।
वह शीतल के ऊपर लेट गए और अपना लिंग उसकी योनि के मुँह पर रख दिया। शीतल ने अपनी आँखें बंद कर लीं। अमरीश ने एक धीमा धक्का दिया। उनका लिंग शीतल की योनि में घुस गया। शीतल के मुँह से एक हल्की सी तकलीफ की आवाज़ आई, लेकिन फिर वह शांत हो गई।
अमरीश धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाने लगे। वह उसे धीरे-धीरे चोदने लगे। शीतल को अब दर्द की बजाय सुख का अनुभव हो रहा था। वह भी अपने कूल्हों को उछाल-उछाल कर उनका साथ दे रही थी।
"आह्ह... ससुर जी... और तेज़... और जोर से... फाड़ दीजिए मुझे... आज मैं आपकी हूँ... पूरी तरह से आपकी..."
शीतल की विनती सुनकर अमरीश के अंदर का जानवर जाग गया। वह अब धीमेपन को पूरी तरह से भूल चुके थे। उन्होंने अपनी गति इतनी तेज़ कर दी कि पूरा कमरा उनकी जांघों के टकराने की आवाज़ से गूंजने लगा। वह शीतल को एक जानवर की तरह चोद रहे थे।
"ले साली... आज तेरी चूत की वासना बुझाता हूँ... तू तो जानती होगी ना कि तेरा ससुर कितना हरामी है... आज तुझे दिखाता हूँ कि ससुर बहू की चुदाई कैसे होती है..." अमरीश गुस्से और कामुकता से भरी आवाज़ में गरज रहे थे।
शीतल को उनकी यह बातें सुनकर और भी मज़ा आ रहा था। वह उनकी पीठ पर अपने नाखून गड़ा रही थी। "हाँ... मेरे हरामी ससुरजी... और जोर से चोदो अपनी बहू को... आज मेरी चूत को फाड़ दो... आपके लंड का प्यासा है यह..." शीतल भी उनसे कम नहीं थी।
अमरीश ने शीतल को कुतिया की स्टाइल में घुमा दिया। वह अब उसके पीछे आ गए और उसकी कमर पर दो तीन जोरदार थप्पड़ मारे। शीतल की चूतड़ लाल हो गईं। "आह्ह... मारिए ना... और मारिए..." शीतल चिल्ला रही थी।
अमरीश ने फिर से अपना लिंग उसकी योनि में घुसा दिया। इस बार वह और भी गहराई तक घुस गया। शीतल के मुँह से एक जोरदार चीख निकली। "आह्ह... मर गई... ससुर जी... मज़ा आ गया... आह्ह..."
अमरीश उसे कुतिया की तरह चोद रहे थे। वह उसके बालों को खींच रहे थे, उसके चूतड़ों को मार रहे थे, और उसके स्तनों को दबा रहे थे। शीतल स्वर्ग का सुख पा रही थी। वह जोर-जोर से चिल्ला रही थी।
"आह्ह... ससुर जी... मैं आने वाली हूँ... मैं झड़ने वाली हूँ... आह्ह..." शीतल चिल्ला रही थी।
"हाँ... झड़ जा मेरी रानी... झड़ मेरे लंड पर... आज तेरी चूत को पानी कर दूँगा मैं..." अमरीश भी झड़ने वाले थे।
अमरीश ने अपनी गति और तेज़ कर दी। वह उसे और भी जोर से चोद रहे थे। कुछ ही देर बाद, शीतल की योनि से एक तेज़ पानी की धार निकली। वह झड़ गई थी। उसका पूरा शरीर कांपने लगा।
शीतल की योनि के सिकुड़ने के साथ ही, अमरीश भी झड़ गए। उन्होंने अपना सारा वीर्य शीतल की योनि में छोड़ दिया। दोनों ही थक कर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।
कुछ देर तक तो दोनों चुप लेटे रहे। फिर अमरीश ने शीतल को अपनी बांहों में उठाया और उसके होंठों पर एक गहरा किस किया। "तुम बहुत अच्छी हो, शीतल," उन्होंने कहा।
शीतल ने भी उनके होंठों को चूमा। "आप भी बहुत अच्छे हो, ससुर जी," उसने कहा। दोनों एक-दूसरे की बांहों में लिपटे रहे। उनके बीच की सारी हदें अब टूट चुकी थीं।
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