पीछे से सेक्सी माँ की गांड में चिपक कर बहुत चोदा रात भर - चूची भी दबाई

पीछे से अपनी सेक्सी माँ की मोटी गांड में चिपककर मैंने रात भर जोर-जोर से चोदा। उनके बड़े-बड़े नरम स्तनों को जोर से दबाते हुए गहरी गांड चुदाई की, माँ कराहते हुए मजा ले रही थीं!

लेखक: Rahul Sharma8 मिनट पढ़ने में
पीछे से सेक्सी माँ की गांड में चिपक कर बहुत चोदा रात भर - चूची भी दबाई

मुंबई की भीड़ भरी जगह पर एक पुराने बिल्डिंग में हमारा छोटा सा किराए का घर था। घर में सिर्फ एक ही कमरा था और एक छोटा सा किचन। कमरे में मेरे लिए एक छोटा सा सिंगल बेड था, जिसमें सिर्फ एक व्यक्ति ही आराम से सो सकता था। मेरे माता-पिता नीचे फर्श पर चटाई बिछाकर सोते थे।

मेरी माँ, राधा, उस समय करीब 39-40 साल की थीं। लेकिन उनकी उम्र उनके शरीर को देखकर कोई नहीं कह सकता था। उनका फिगर बेहद आकर्षक और सेक्सी था — 36-30-38 का माप। उनके स्तन बहुत बड़े, भारी और दूध जैसे गोरे थे, जो हर समय उनके टाइट ब्लाउज में कैद रहते थे। ब्लाउज के बटन उन भारी स्तनों को मुश्किल से संभाल पाते थे।

उनकी कमर चिकनी और पतली थी, लेकिन सबसे खतरनाक थी उनकी मोटी, गोल और भारी गांड। जब वो चलती तो उनकी गांड लहराती हुई नजर आती। आमतौर पर वो घर में चड्डी नहीं पहनती थीं, सिर्फ साड़ी और ब्लाउज में रहती थीं। लेकिन कभी-कभी जब वो पतली साड़ी के साथ चड्डी पहनती थीं, तो उनकी टाइट गांड पर चड्डी का पूरा आकार साफ दिखता था, जो किसी को भी पागल कर देने के लिए काफी था। उनकी गोरी गालें, मोटे होंठ और चिकनी कमर देखकर मेरा मन बार-बार अश्लील विचारों से भर जाता था।

मैं कॉलेज में पढ़ता था। सुबह कॉलेज चला जाता और शाम को लौटता। कई बार जब मैं घर आता और माँ को काम करते देखता तो मेरा लंड खड़ा हो जाता। खासकर जब वो झुककर बर्तन साफ करतीं, तो उनके भारी स्तन ब्लाउज से बाहर लटककर हिलते दिखते। या जब वो झाड़ू लगातीं तो उनकी मोटी गांड पीछे की तरफ उभरकर टाइट हो जाती। मन करता कि अभी पीछे से उनकी साड़ी उठाकर उनकी चूत या गांड में लंड घुसा दूं। लेकिन माँ का स्वभाव थोड़ा सख्त था, इसलिए मैं चुप रह जाता।

मेरे पापा एक प्राइवेट कंपनी में सुपरवाइजर थे। वो सुबह 8 बजे घर से निकल जाते और रात को 7-8 बजे तक लौटते थे। दिन में उनका व्यवहार बहुत अच्छा और प्यारा होता था, लेकिन रात होते ही वो एकदम जानवर बन जाते थे।

हर रात की एक रस्म बन गई थी। जब मैं अपने बेड पर सोने का नाटक करता, तो कुछ देर बाद अजीब-अजीब सी आवाजें आने लगतीं। “आह्ह्ह… उmmmm… धीरे चोदो ना… आह्ह्ह… मर गई मैं…!”

माँ की ये कराह सुनकर मैं रात को जागता रहता। मैं जानता था कि पापा माँ को चोद रहे हैं, लेकिन कभी साफ-साफ नहीं देख पाया था। फिर एक रात मैंने फैसला किया कि आज मैं सोने का पूरा नाटक करूंगा। मैं लेट गया और आँखें बंद कर लीं। थोड़ी देर बाद उन्होंने माँ से कहा, “राधा, आज बहुत मन कर रहा है। वो सो गया है ना? आओ ना, मुझे तुम्हें चोदना है।”

माँ ने धीरे से कहा, “अरे नहीं, बेटा ऊपर सो रहा है। कहीं जाग गया तो?”

पापा ने नहीं माना। उन्होंने माँ को पीछे से पकड़ लिया और अपनी hard लंड उनकी गांड पर सटा दी। माँ की साँसें भारी हो गईं। “आह्ह्ह… उम्म्म…”

पापा ने माँ की साड़ी के पल्लू को खींचा और उनके बड़े-बड़े स्तनों पर हाथ फेरने लगे। ब्लाउज के ऊपर से ही जोर-जोर से दबाने लगे। फिर उन्होंने साड़ी को कमर तक ऊपर कर दिया। अब माँ सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। उनकी लाल रंग की पतली चड्डी में उनकी मोटी गोरी गांड फंसी हुई थी।

पापा ने दोनों हाथों से उनकी गांड को जोरदार मसलना शुरू कर दिया। गांड के दोनों फूलों को अलग-अलग दबाते, चिकोटी काटते। फिर चड्डी के अंदर हाथ डालकर माँ की चूत में उंगली डाल दी। माँ “हम्म्म… आह्ह्ह… धीरे…” करती हुई अपनी गांड पीछे की तरफ हिलाने लगीं।

पापा ने अपनी ८ इंच लंबी और मोटी लंड निकाली और माँ की चूत पर रगड़ने लगे। फिर उन्होंने माँ की एक टांग उठाई और पीछे से एक ही झटके में पूरा लंड माँ की चूत में घुसा दिया। जोर-जोर से धक्के मारने लगे। कमरे में “पच्च… पच्च… पच्च…” की आवाज गूंज रही थी।

मैं आँखें थोड़ी-थोड़ी खोलकर सब कुछ देख रहा था। पापा माँ को जानवरों की तरह चोद रहे थे। उन्होंने माँ का ब्लाउज खोला और दोनों भारी स्तनों को बाहर निकाल लिया। एक हाथ से एक स्तन को जोर से दबाते हुए दूसरे हाथ से कमर पकड़कर चोद रहे थे। माँ की आँखें बंद थीं और वो बार-बार “आह्ह्ह… उmmmm… जोर से चोदो…” कर रही थीं।

कुछ देर बाद पापा ने माँ को पेट के बल लिटा दिया। अब उनकी मोटी गांड पूरी तरह ऊपर थी। पापा ने अपनी लंड माँ की गांड के छेद पर रखी और जोर से धक्का मारा। माँ चीख उठीं, लेकिन पापा ने उनका मुँह दबा लिया और पूरा लंड उनकी गांड में ठेल दिया। फिर शुरू हुई जोरदार गांड चुदाई। हर धक्के के साथ माँ की पूरी गांड हिल रही थी।

आधे घंटे तक चोदने के बाद पापा ने माँ की गांड के अंदर ही अपना गाढ़ा वीर्य भर दिया। जब उन्होंने लंड निकाला तो माँ की गांड से वीर्य बहने लगा। पापा ने माँ की गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और बोले, “मैं दो दिन के लिए कंपनी के काम से बाहर जा रहा हूँ। इसलिए आज तुम्हारा पूरा कोटा पूरा कर दिया।”

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। मैं यह सब देखकर पागल हो चुका था। माँ की मोटी गांड और भारी स्तनों को देखकर मेरा मन पूरी तरह बेकाबू हो गया था। उसी रात मैं बाथरूम गया और माँ को याद करके जोर-जोर से मुठ मारकर अपना वीर्य निकाला।

मैंने मन ही मन फैसला कर लिया था — अब पापा के बाहर जाने पर मैं अपनी सेक्सी माँ को जरूर चोदूंगा।

अगले दिन सुबह सब कुछ नॉर्मल था। पापा ऑफिस जाने लगे तो माँ से बोले, “मैं दो दिन के लिए कंपनी के काम से बाहर जा रहा हूँ। घर का ख्याल रखना।” फिर मेरी तरफ देखकर बोले, “बेटा, अपनी माँ का अच्छे से ख्याल रखना।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ पापा, बिल्कुल।”

पापा के जाने के बाद माँ घर के काम में लग गईं। मैं भी कॉलेज चला गया, लेकिन पूरे दिन मेरा ध्यान कहीं नहीं लग रहा था। बार-बार कल रात देखी हुई माँ की मोटी गांड, उनके भारी स्तन और पापा द्वारा उनकी गांड चुदाई के दृश्य याद आ रहे थे। मेरा लंड दिन भर हल्का-हल्का खड़ा रहता। मैं सोच रहा था कि आज रात कैसे माँ के पास सोऊँ और उन्हें छूने की कोशिश करूँ।

शाम को करीब ४:३० बजे मैं कॉलेज से घर लौटा। दरवाजा खोलते ही मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। माँ उस दिन बेहद सेक्सी लग रही थीं। उन्होंने मरून कलर की बहुत पतली सिल्क वाली साड़ी पहनी हुई थी, जो उनके शरीर पर बिल्कुल चिपकी हुई थी। ब्लाउज भी काफी टाइट था, जिसमें उनके बड़े स्तन फटने को तैयार थे।

सबसे खास बात यह थी कि उस दिन उन्होंने पेटीकोट नहीं पहना था। जब वो झुककर काम कर रही थीं तो साड़ी के ऊपर से उनकी पतली लेस वाली चड्डी का निशान साफ दिख रहा था। चड्डी की पट्टी उनकी मोटी गांड के बीच में पूरी तरह घुसी हुई थी। उनकी गोरी गांड के दोनों फूल साड़ी के नीचे से उभरे हुए थे।

जब वो झुकतीं तो उनके भारी स्तन जोर-जोर से हिलते और ब्लाउज के कट में से आधे बाहर झाँक जाते। मैं बिना कुछ बोले उन्हें घूरता रहा। मेरा लंड पतलून में तन गया था।

रात को हमने खाना खाया। खाने के बाद माँ अपना बिस्तर नीचे बिछाने लगीं। मैंने हिम्मत करके कहा, “माँ, आज पापा भी घर पर नहीं हैं। मुझे ऊपर अकेले सोने में डर लग रहा है। क्या मैं आपके पास नीचे, जहाँ पापा सोते हैं, सो जाऊँ?”

मुझे उम्मीद थी कि वो मना कर देंगी, लेकिन माँ ने एक पल सोचकर कहा, “ठीक है, आ जा। मेरे बगल में ही सो जाना।”

यह सुनकर मेरी आँखें चमक उठीं। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

रात करीब 11 बजे हो चुकी थी। माँ ने लाइट बंद कर दी, सिर्फ एक छोटी नाइट लैंप जल रही थी। उन्होंने साड़ी का पल्लू नीचे किया और करवट लेकर लेट गईं। मैं भी उनके ठीक बगल में लेट गया। उनके पीछे की तरफ मेरा मुंह था।

लगभग एक घंटे तक मैं इंतजार करता रहा। जब मुझे लगा कि माँ गहरी नींद में चली गई हैं, तो मैं धीरे-धीरे उनके करीब सरक गया। उनकी चिकनी कमर और ऊपर उठी हुई मोटी गांड अब मेरे बिल्कुल सामने थी।

मैंने बहुत हल्के से अपना हाथ बढ़ाया और उनकी गांड को छू लिया। नरम, गर्म और भारी। जैसे कोई रबड़ का फूल हो। मेरे शरीर में करंट दौड़ गया। मैंने धीरे-धीरे अपनी पूरी हथेली उनकी गांड पर फैला दी और सहलाने लगा। चड्डी के ऊपर से ही उनकी गांड की शेप महसूस हो रही थी। मैंने आधे घंटे तक आराम से उनकी गांड मसली, दबाई और उंगली से उनकी गांड की दरार में सहलाया।

फिर मैं थोड़ा नीचे सरका और अपना मुँह उनकी गांड के पास ले गया। साड़ी के ऊपर से ही उनकी गांड चाटने लगा। मीठी और गर्म खुशबू आ रही थी। बीच-बीच में मैं उनकी गांड को हल्का-हल्का दबा भी रहा था।

अब मेरा लंड बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैंने अपना पजामा नीचे किया और 7 इंच का तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया। मैंने अपनी नंगी लंड को उनकी मोटी गांड पर सटा दिया। “हायyy…” क्या मजा आ रहा था!

मैंने धीरे-धीरे अपनी लंड को उनकी गांड की दरार में रगड़ना शुरू कर दिया। फिर मैंने हिम्मत करके अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनके ब्लाउज के अंदर डाल दिया। मेरे हाथ में पहली बार उनकी नंगी, भारी, गोरी चूची आ गई। वह एकदम टाइट और मुलायम थी। मैंने धीरे-धीरे उसे मसलना शुरू किया। निप्पल को उंगली से दबाया।

मैं अब पूरी तरह उनके पीछे चिपक गया था। मेरी लंड उनकी गांड के बीच में फंसी हुई थी और मेरा हाथ उनके ब्लाउज में उनकी चूची दबा रहा था। मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी। लंड को उनकी गांड पर जोर-जोर से रगड़ने लगा।

जोर-जोर से चूची दबाते हुए और गांड पर लंड रगड़ते हुए मेरा वीर्य अचानक निकल गया। मैंने पूरा गाढ़ा माल उनकी मोटी गांड पर और चड्डी के ऊपर गिरा दिया। फिर मैंने हाथ से उसे फैला दिया ताकि साड़ी पर लगने का पता न चले।

मैं पूरी तरह थक गया था। माँ को कुछ पता नहीं चला। मैं दूसरी तरफ मुड़कर सो गया। यह मेरी जिंदगी की पहली बार था जब मैंने अपनी माँ की गांड पर अपना वीर्य गिराया था।

अगले दिन सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन मेरे मन में बस एक ही बात थी — आज मेरी आखिरी रात है माँ के पास सोने की। कल पापा वापस आने वाले थे। मैंने पूरे दिन माँ को देखा। वो आज भी बहुत आकर्षक लग रही थीं।

रात को खाना खाने के बाद हम दोनों लेट गए। आज भी मैं माँ के बगल में ही सोया। रात के करीब 12 बजे थे। अचानक मुझे माँ की नींद में बड़बड़ाहट सुनाई दी।

“आह्ह्ह… डालो ना… चोदो ना मुझे… उम्म्म… गहराई से… आह्ह्ह…”

माँ पापा का सपना देख रही थीं। दो दिन से बिना चुदाई के उनकी चूत और गांड दोनों तड़प रही थीं। यह सुनकर मेरा लंड लोहे की तरह खड़ा हो गया। मैंने फैसला कर लिया — आज जो होगा देखा जाएगा।

मैं धीरे से उनके पीछे चिपक गया। फिर बहुत सावधानी से उनकी साड़ी को कमर तक ऊपर चढ़ाने लगा। आज उन्होंने पेटीकोट भी नहीं पहना था। सिर्फ एक पतली लेस वाली काली चड्डी थी, जिसकी पट्टी उनकी मोटी गांड के बीच में पूरी तरह घुसी हुई थी। उनकी गोरी, भारी, चमकती हुई गांड अब मेरे सामने बिल्कुल नंगी-सी हो गई थी।

मैं और नहीं रुक सका। मैंने अपना पजामा उतारा, अपना 7 इंच का मोटा और तना हुआ लंड बाहर निकाला। चड्डी को साइड में किया, लंड पर थूक लगाया और गांड के छेद पर रख दिया। फिर हल्का सा धक्का मारा।

“आआआह्ह्ह्ह!!!” माँ तेजी से चीखीं और चौंककर पीछे मुड़ीं। उनकी आँखें फट गईं जब उन्होंने देखा कि उनका बेटा अपना लंड उनकी गांड में घुसाने की कोशिश कर रहा है।

“ये क्या कर रहा है तू?! निकाल अपना लंड! ये गलत है!” माँ घबराकर बोलीं।

लेकिन मैं अब पूरी तरह बेकाबू था। मैंने तुरंत अपनी उंगली उनके मुंह में डाल दी और बोला, “माँ, तुम पापा से रोज चुदवाती हो। आज मुझे भी चोदने दो। मैं दो दिन से देख रहा हूँ तुम्हें।”

मैंने उंगली को उनके मुंह में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। माँ विरोध कर रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आँखें नशे में आने लगीं। उन्होंने कमजोर स्वर में कहा, “लेकिन बेटा… गांड बहुत टाइट है… बहुत दर्द होगा… धीरे करना…”

मैंने और हिम्मत कर ली। मैंने जोर का धक्का मारा। आधा लंड उनकी टाइट गांड में चला गया। माँ ने तकिए में मुँह दबाकर जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह्ह… मार गई…!”

फिर मैंने कमर पकड़ी और एक और जोरदार धक्का मारा। पूरा 7 इंच का लंड उनकी गांड में समा गया। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उनकी मोटी गांड लहरा रही थी।

“आह्ह्ह… उम्म्म… धीरे… आह्ह्ह… बहुत मोटा है तेरा…” माँ कराह रही थीं। धीरे-धीरे उनकी चीखें कराह में बदल गईं। मैंने स्पीड बढ़ा दी। उनकी गांड अब अच्छे से खुल चुकी थी। मैंने उनका ब्लाउज पूरी तरह खोल दिया। दोनों भारी गोरे स्तन बाहर आ गए। मैंने एक हाथ से दोनों स्तनों को जोर-जोर से दबाते हुए, निप्पल खींचते हुए और काटते हुए उनकी गांड चोदता रहा।

लगभग 20 मिनट तक इस पोजीशन में चोदने के बाद मैंने माँ को सीधा लिटाया। उनके ऊपर चढ़ गया। उनके होंठों पर गहरा किस किया। उनकी जीभ चूस ली। फिर मैं उनके स्तनों के बीच अपना लंड रखकर बूब्स फ़क करने लगा। माँ ने खुद अपना मुँह खोलकर मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। मैंने 10 मिनट तक उनका मुंह भी चोदा।

फिर मैंने उन्हें घुटनों के बल बैठाया। उनके बाल पकड़े और पीछे से फिर से उनकी गांड में लंड घुसा दिया। डॉगी स्टाइल में जोर-जोर से चोदने लगा। उनकी गांड पर थप्पड़ मारता, कमर पकड़कर खींचता और पूरी ताकत से धक्के मारता।

आखिरकार मैंने उन्हें पेट के बल लिटाया, उनकी दोनों टांगें फैलाकर सबसे गहरी पोजीशन में चोदा। माँ अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थीं। वो बार-बार कह रही थीं, “जोर से… और जोर से चोद… आह्ह्ह…”

मैंने आखिरी जोर लगाया और अपनी पूरी गर्म और गाढ़ी वीर्य उनकी गांड के अंदर ही छोड़ दिया। लंड निकालते ही उनकी गांड से मेरा वीर्य बहने लगा।

हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। माँ ने धीरे से कहा, “जब भी मौका मिले और पापा न हों… तब मुझे चोद देना। बहुत मजा आया।”

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Rahul Sharma
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