नौकरानी को रंडी बनाकर सुबह तक चोदता रहा

मम्मी-पापा एक दिन के लिए बाहर गए… और जवान लड़के ने 35 साल की सेक्सी नौकरानी को पैसे का लालच देकर अपनी रंडी बना लिया। दिन भर चोदा, रात को बाँधकर दोनों छेद चोदे, सुबह तक निचोड़ता रहा।

लेखक: Aalok Pandey6 मिनट पढ़ने में
नौकरानी को रंडी बनाकर सुबह तक चोदता रहा

नाम था अर्जुन। उम्र तेईस साल। अमीर बिजनेसमैन का इकलौता बेटा। घर में एक मेड थी—सुमन। उम्र पैंतीस साल। गोरी चमकदार त्वचा, भारी भरकम चुचियाँ, पतली कमर और गोल टाइट गाँड। साड़ी पहनती तो लगती थी जैसे कोई जवान औरत हो।

अर्जुन कई महीनों से सुमन को देख रहा था। उसकी बॉडी देखकर रोज लंड सख्त हो जाता। कई बार अर्जुन अपने बेड पर लेटकर मुठ मारता था—आँखें बंद, सुमन की कल्पना करते हुए। और कई बार सुमन ने उसे ऐसा करते हुए देख लिया था। लेकिन उसने कभी किसी से कुछ नहीं कहा। चुपचाप कमरे से निकल जाती। अर्जुन जानता था कि सुमन को भी उससे लगाव है। आँखों में वो भूख साफ दिखती थी।

एक दिन मम्मी-पापा बिजनेस के सिलसिले में एक दिन के लिए बाहर गए। घर में सिर्फ अर्जुन और सुमन रह गए।

सुबह के करीब नौ बजे सुमन कमरे में आई। झाड़ू-पोछा करने और अर्जुन को जगाने। उसने धीरे से आवाज़ दी, “अर्जुन बाबू… उठ जाइए… चाय ठंडी हो जाएगी।”

कोई जवाब नहीं मिला। उसने चादर हटाई तो अचानक सहम गई। अर्जुन नंगा लेटा हुआ था। मोटा, लंबा, नसों से भरा लंड सीधा खड़ा था। सुमन की साँसें अटक गईं। वो पीछे हटने वाली थी कि अर्जुन की आँखें खुल गईं।

“सुमन…” उसने धीमी आवाज़ में कहा। “रुको।”

सुमन शर्म से लाल हो गई। “बाबू… मैं… मैं जा रही हूँ… माफ करना… मैंने नहीं देखा…”

अर्जुन उठकर बैठ गया। लंड हवा में हिल रहा था। उसने सुमन का हाथ पकड़ लिया।

“इतने दिनों से देख रही है ना मुझे? कई बार मुझे मुठ मारते हुए भी देख चुकी है इस बेड पर। क्यों कभी कुछ नहीं बोली?”

सुमन की आँखें चौड़ी हो गईं। “बाबू… वो… गलत समझिए मत… मैं… मैं कुछ नहीं बोली क्योंकि…”

अर्जुन ने उसे धीरे से खींचकर बिस्तर के किनारे बैठाया। एक हाथ उसकी कमर पर रखा।

“मैं तुझे चाहता हूँ, सुमन। मम्मी-पापा आज नहीं हैं। पूरा दिन हमारा है। तू मेरी बन जा… मैं तुझे अच्छे पैसे भी दूँगा। हर महीने अतिरिक्त पाँच हजार। और जब चाहेगी, और भी।”

सुमन ने नीचे देखा। लंड इतना मोटा और लंबा था कि दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। वो कई रातों से इसी लंड के बारे में सोचती थी।

“बाबू… मैं… पैंतीस साल की हूँ… तुम जवान हो…”

“उम्र कोई मायने नहीं रखती,” अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाया। “तेरी बॉडी देखकर मेरा लंड रोज खड़ा हो जाता है। आज तू मुझे दे दे… प्लीज।”

सुमन की साँसें तेज़ हो गईं। अर्जुन ने उसका चेहरा उठाया और गहरी चुम्बन दे दी। जीभ अंदर तक घुसा दी। सुमन पहले झिझकी, फिर धीरे-धीरे जवाब देने लगी। अर्जुन का हाथ उसकी साड़ी के अंदर चला गया। जाँघों को सहलाते हुए ऊपर गया और चड्डी के ऊपर से चूत को मसलने लगा। सुमन गीली हो चुकी थी।

अर्जुन ने साड़ी की पल्लू हटाई और ब्लाउज़ के हुक खोले। भारी गोरी चुचियाँ बाहर आ गईं। उसने दोनों को मुँह में भर-भर कर चूसने लगा। निप्पल को दाँतों से हल्के से काटा। सुमन की कमर हिलने लगी।

“आह्ह… बाबू… बहुत अच्छा लग रहा है…”

अर्जुन ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। साड़ी-पेटीकोट एक साथ खींचकर उतार दिए। चड्डी को दांतों से नीचे सरकाया। सुमन की चूत थोड़ी बालों वाली थी, लेकिन गीली चमक रही थी। अर्जुन ने जाँघें फैलाईं और जीभ निकालकर लंबा चाटा मारा। क्लिट पर घूमने लगा। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं।

सुमन जोर से कराह उठी। “आह्ह्ह… बाबू… वहाँ… बहुत… अच्छा…”

अर्जुन ने उसकी चूत अच्छे से चाटी। रस मुँह में भर गया। फिर वो खुद खड़ा हो गया। लंड सुमन के मुँह के पास ले गया।

“मुँह खोल… और अच्छे से चूस।”

सुमन ने घुटनों के बल बैठकर लंड दोनों हाथों में पकड़ा। पहले सिर चूसा, फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर लेने लगी। गले तक। लार बहने लगी। अर्जुन ने उसके बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे करने लगा। मुँह की चोदाई जोरदार हो गई।

“बस… ऐसे ही… गले तक ले…”

थोड़ी देर बाद अर्जुन ने लंड निकाला। सुमन को लिटाया, जाँघें कंधों तक मोड़ीं और लंड चूत के मुँह पर रखा। एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया।

“आह्ह्ह… इतना मोटा… दर्द… लेकिन अच्छा…”

अर्जुन ने कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के में लंड गहराई तक जाता। चुचियाँ हवा में झूल रही थीं। कमरे में थप-थप की आवाज़ गूँज रही थी। सुमन के नाखून अर्जुन की पीठ पर गड़ गए।

“बाबू… और जोर से… चोदो मुझे…”

अर्जुन ने एक हाथ से चुची मसलनी शुरू की, दूसरे से क्लिट। सुमन जोर से काँप उठी और झड़ गई। चूत सिकुड़-सिकुड़ कर लंड को निचोड़ने लगी। अर्जुन ने गति और तेज़ कर दी। कुछ देर बाद उसने लंड बाहर निकाला और सुमन के मुँह के पास लाया।

“फिर से मुँह में ले… सारा पी जा।”

सुमन ने मुँह खोला। अर्जुन ने जोर से झड़ते हुए गर्म गाढ़ा माल उसके मुँह और जीभ पर उड़ेल दिया। सुमन ने पूरा निगल लिया। कुछ गालों पर बह गया।

अर्जुन हांफते हुए उसके पास लेट गया। सुमन की आँखें आधी बंद थीं, चेहरे पर संतुष्टि साफ थी।

अर्जुन ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “शाम को फिर आना। आज रात मैं तुझे और अलग तरीके से चोदूँगा… बंधन में बाँधकर।”

सुमन मुस्कुराई। साँसें अभी भी तेज़ थीं। “जैसी आपकी मर्जी… बाबू। मैं आऊँगी।”

शाम के सात बज रहे थे। घर में सन्नाटा था। अर्जुन ने सुमन को फोन किया।

“सुमन… अब आ जा। रात भर के लिए। आज मैं तुझे बाँधकर चोदूँगा।”

सुमन की धड़कन तेज़ हो गई। उसने जल्दी से नहाया, साड़ी पहनी और अर्जुन के कमरे में पहुँच गई। अर्जुन दरवाज़ा खोलते ही उसे अंदर खींच लिया और ताला लगा दिया।

“कपड़े उतार… सब।”

सुमन ने धीरे-धीरे साड़ी, ब्लाउज़, पेटीकोट और चड्डी उतार दी। नंगी खड़ी हो गई। भारी चुचियाँ, गोल गाँड, गीली चूत… अर्जुन का लंड तुरंत सख्त हो गया। उसने बिस्तर के पास से रस्सी निकाली।

“हाथ पीछे कर।”

सुमन ने हाथ पीछे किए। अर्जुन ने उसकी कलाई बाँध दी। फिर उसे बिस्तर पर लिटाकर दोनों टाँगें फैला दीं और टखनों को भी बिस्तर के पायों से बाँध दिया। सुमन पूरी तरह बेबस हो गई। हाथ-पैर बँधे, नंगी, साँसें तेज़।

अर्जुन उसके ऊपर चढ़ गया। पहले दोनों चुचियों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसा, काटा। फिर नीचे गया और उसकी चूत पर जीभ फेरने लगा। क्लिट को चूसते हुए दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। सुमन कराहने लगी, लेकिन हाथ-पैर बँधे होने की वजह से कुछ कर नहीं पा रही थी।

“बाबू… छोड़ो मत… और अंदर…”

अर्जुन ने खड़े होकर अपना लंड उसके मुँह के पास लाया। “मुँह खोल।”

सुमन ने मुँह खोला। अर्जुन ने लंड गले तक ठूंस दिया और सिर पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदने लगा। लार बहकर गर्दन और चुचियों पर गिर रही थी। काफी देर तक मुँह की सेवा लेने के बाद उसने लंड निकाला।

फिर उसने सुमन की जाँघों के बीच जगह बनाई और मोटा लंड एक झटके में चूत में घुसा दिया। पूरा अंदर तक। सुमन चीख पड़ी। अर्जुन ने कमर पकड़ी और बेरहमी से धक्के मारने लगा। हर धक्का इतना जोरदार था कि बिस्तर चरचराने लगा। बाँधी हुई सुमन सिर्फ कराह सकती थी।

“आह्ह्ह… बाबू… बहुत जोर से… चोदो… और गहरा…”

अर्जुन ने एक हाथ से उसकी चुची मसलनी शुरू की। दूसरे हाथ से क्लिट को रगड़ने लगा। सुमन जोर से काँप उठी और बाँधे-बाँधे ही झड़ गई। चूत सिकुड़कर लंड को निचोड़ने लगी। अर्जुन नहीं रुका। उसने लंड निकाला, सुमन को पेट के बल पलटा (रस्सियाँ थोड़ी ढीली करके), गाँड ऊपर उठाई और फिर से चूत में डाल दिया। पीछे से और तेज़ चोदने लगा।

थोड़ी देर बाद उसने लंड निकालकर गाँड के छेद पर रखा। लार लगाई और धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा। सुमन की आँखें फटी रह गईं।

“बाबू… वहाँ… दर्द… लेकिन… मत रोको…”

अर्जुन ने पूरा लंड गाँड में समा दिया और जोर-जोर से गाँड चोदने लगा। एक हाथ से आगे जाकर चूत में उँगलियाँ डाल दीं। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। सुमन पागलों की तरह कराह रही थी।

रात के लगभग दो बजे तक अर्जुन उसे अलग-अलग तरीके से चोदता रहा। कभी मुँह में, कभी चूत में, कभी गाँड में। रस्सियाँ कभी कसता, कभी ढीली करता। आखिर में उसने सुमन की चूत में गहराई तक लंड दबाया और जोर से झड़ गया। गर्म माल सीधे अंदर उड़ेल दिया। सुमन भी साथ में झड़ गई।

अर्जुन ने रस्सियाँ खोलीं। सुमन थककर बिस्तर पर गिर गई। शरीर पर पसीना, रस और वीर्य चिपका हुआ था।

अर्जुन ने उसके कान में कहा, “सो जा। सुबह फिर से चोदूँगा। मम्मी-पापा दोपहर तक आएँगे… तब तक मैं तुझे पूरा निचोड़ लूँगा।”

अगली सुबह: सुबह आठ बजे अर्जुन ने सुमन को फिर जगाया। वो अभी भी नंगी ही सोई हुई थी। अर्जुन का लंड फिर से खड़ा था। उसने बिना कुछ कहे सुमन की जाँघें फैलाईं और सीधा चूत में घुस गया। सुमन आधी नींद में कराह उठी।

“बाबू… अभी…”

“हाँ… अभी। मम्मी-पापा आने से पहले आखिरी राउंड।”

अर्जुन ने आज बहुत rough चोदा। सुमन को घुटनों के बल बैठाया, बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और पीछे से बेरहमी से धक्के मारे। चुचियाँ हवा में झूल रही थीं। फिर उसे दीवार से सटाया और उठा-उठाकर चोदा। हर धक्के में लंड पेट तक जा रहा था।

सुमन की चूत और गाँड दोनों अब लाल और सूजे हुए थे। अर्जुन ने आखिर में उसे बिस्तर पर लिटाया, जाँघें कंधों तक मोड़ीं और जितनी जोर से हो सके उतनी जोर से चोदा। दोनों साथ में झड़े। अर्जुन ने सारा माल फिर से अंदर ही छोड़ दिया।

दोनों हांफ रहे थे। अर्जुन ने सुमन के माथे पर पसीना पोंछते हुए कहा, “अब जा… नहा ले। मम्मी-पापा आने वाले हैं। लेकिन याद रखना… जब भी मौका मिलेगा, मैं तुझे फिर से बाँधकर चोदूँगा।”

सुमन मुस्कुराई। आँखों में थकान और संतुष्टि दोनों थीं। उसने धीरे से कहा, “जैसी आपकी मर्जी… बाबू। मैं हमेशा तैयार रहूँगी।”

अर्जुन ने उसके होंठों पर आखिरी चुम्बन दी। सुमन उठकर कपड़े पहनने लगी। शरीर अभी भी काँप रहा था। दोनों छेद खुले और संवेदनशील थे।

बाहर गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ आई। मम्मी-पापा आ गए थे।

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