टाइट साड़ी में पड़ी माँ के गांड मे बेटे का लंड घुसा
बुखार में बेहोश माँ के बगल में सोया बेटा… टाइट साड़ी में गांड में लंड चिपकाकर रातभर करता रहा गंदा काम। माँ को पता भी नहीं चला।

रोहन 22 साल का था। घर में ज्यादातर समय वही रहता। उसकी माँ मीरा 40 साल की थीं, लेकिन उनकी बॉडी देखकर कोई यकीन नहीं करता था। पतली कमर, भारी और गोल गांड, और बड़े नरम स्तन। वो अक्सर बहुत पतली और टाइट साड़ी पहनती थीं। नीचे पेटीकोट कभी नहीं पहनती थीं – सिर्फ एक टाइट अंडरवेयर। साड़ी उनके शरीर से इतनी चिपकती थी कि गांड का पूरा गोल आकार साफ नजर आता था। जांघों की लाइन और गांड की दरार तक साफ झलकती थी।
उस दिन मीरा को तेज बुखार चढ़ गया। बदन जल रहा था, लेकिन ठंड लग रही थी। कमजोरी इतनी थी कि वो बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थीं। पापा शहर के बाहर मीटिंग पर थे और रात भर नहीं आने वाले थे। रोहन ने खुद उनकी सेवा संभाली – दवा दी, माथे पर कपड़ा रखा, पानी पिलाया।
रात के करीब ग्यारह बजे बुखार और बढ़ गया। मीरा कांप रही थीं। आंखें आधी बंद थीं। बुखार की नशे में उनकी हालत आधी-नींद जैसी हो गई थी। वो कभी कुछ बड़बड़ातीं, कभी चुप हो जातीं।
रोहन उनके बिस्तर के किनारे बैठा रहा। फिर उसने धीरे से कहा, “माँ, मैं पास लेट जाता हूँ… गरमाहट मिलेगी।”
मीरा ने सिर्फ हल्की आवाज में “हम्म…” कहा। पूरी तरह होश में नहीं थीं।
रोहन उनके पीछे की तरफ लेट गया। उसने हल्की चादर दोनों पर डाल दी। मीरा ने उस दिन हल्की पाउडर-पिंक रंग की बहुत पतली साड़ी पहन रखी थी। नीचे सिर्फ टाइट ब्लैक अंडरवेयर थी। साड़ी उनके बदन से पूरी तरह चिपक रही थी। उनकी भारी गांड का गोल और उभरा हुआ आकार चादर के नीचे भी साफ महसूस हो रहा था।
रोहन धीरे-धीरे उनके और करीब खिसका। उसका सीना उनकी पीठ से सट गया। मीरा का बदन बुखार से गर्म था। रोहन का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने धीरे से हाथ बढ़ाया और साड़ी के ऊपर से उनकी जांघ पर रखा। जांघ का नरम और गर्म गोश्त हाथ में आया। उसने हल्के हाथों से सहलाया।
मीरा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बस हल्की सिसक ली।
रोहन का हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरका। उसने साड़ी के ऊपर से उनकी गांड पर हाथ फेरा। गांड गोल, टाइट और नरम थी। साड़ी इतनी पतली थी कि अंडरवेयर की लाइन भी महसूस हो रही थी। उसने हल्के हाथों से गांड को सहलाया, फिर हल्का दबाया। गांड उसके हाथ में दब गई।
मीरा की सांस थोड़ी तेज हुई, लेकिन आंखें बंद ही रहीं। बुखार की नशे में उन्हें साफ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।
रोहन और करीब चिपक गया। उसने धीरे से अपना पैंट नीचे किया। उसका तना हुआ नंगा लंड बाहर निकल आया। उसने लंड को उनकी गांड की दरार में, साड़ी और अंडरवेयर के ऊपर से, धीरे से चिपका दिया। पूरा लंड उनकी गोल गांड की नरम दरार में फिट हो गया। रोहन ने हल्के से कमर आगे की और लंड को और अंदर की तरफ दबाया।
मीरा के शरीर में हल्की सी कंपन हुई। उन्होंने अधजली आवाज में कुछ बड़बड़ाया, “ठंड… लग रही है…”
रोहन ने एक हाथ आगे बढ़ाया। साड़ी के ऊपर से ही उनके बड़े स्तन को पूरा हाथ में भर लिया। स्तन नरम, भारी और बुखार से गर्म थे। उसने हल्के हाथों से मसलना शुरू किया। निप्पल साड़ी के ऊपर से ही तना हुआ महसूस हो रहा था।
वो पूरे शरीर से उनसे चिपक गया था। पीछे से लंड उनकी गांड की दरार में दबा हुआ था, और आगे से एक हाथ उनके स्तन को मसल रहा था। चादर दोनों को ढके हुए थी।
रोहन ने धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू की। लंड उनकी गांड पर रगड़ रहा था। साड़ी की पतली परत के बावजूद गांड की गर्माहट और मुलायमियत साफ महसूस हो रही थी। उसने स्तन को और कसकर पकड़ा।
मीरा कभी-कभी हल्की कराह निकालतीं, कभी शरीर हल्का सा हिला देतीं, लेकिन आंखें नहीं खोलती थीं। बुखार ने उनकी समझ को धुंधला कर रखा था। उन्हें सिर्फ इतना महसूस हो रहा था कि कोई गरमाहट दे रहा है और बदन सहला रहा है।
रोहन के कान में उनकी हल्की कराहें पड़ रही थीं। उसने और जोर से लंड को उनकी गांड में रगड़ना शुरू किया। एक हाथ से स्तन मसल रहा था, दूसरे हाथ से उनकी जांघ और गांड को सहला रहा था। उसकी सांसें तेज हो गई थीं।
काफी देर तक वो ऐसे ही रगड़ता रहा। मीरा की गांड उसके लंड के नीचे नरम और गर्म थी। अचानक रोहन का शरीर अकड़ गया। उसने दबे स्वर में कराहते हुए उनकी गांड के ऊपर, साड़ी पर ही, पूरा गर्म वीर्य छोड़ दिया। गाढ़ा तरल साड़ी पर फैल गया।
रोहन ने जल्दी से हाथ से पोछने की कोशिश की। फिर लंड को दोबारा उनकी गांड की दरार में चिपका दिया और स्तन पकड़कर लेट गया।
पूरी रात वो ऐसे ही उनके बगल में लेटा रहा। कभी स्तन सहलाता, कभी गांड पर हाथ फेरता, कभी लंड फिर से उनकी गांड में दबाकर धीरे-धीरे रगड़ता। मीरा बुखार की आधी नींद में कभी कराहतीं, कभी शरीर मोड़तीं, लेकिन कभी पूरी तरह नहीं जागीं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा उनके शरीर के साथ क्या कर रहा है।
रात के गहरे अंधेरे में रोहन उनकी गर्माहट में खोया रहा… और सीमाएं धीरे-धीरे पार करता रहा।
रात के दो बज चुके थे। कमरे में सिर्फ पंखे की हल्की आवाज और मीरा की भारी सांसें गूंज रही थीं। बुखार अभी भी ऊंचा था। उनका चेहरा गर्मागर्म था, आंखें पूरी तरह बंद। होश की हालत बहुत कमजोर थी – कभी हल्की कराह, कभी अधबीच में कुछ शब्द, फिर फिर से गहरी आधी-नींद।
रोहन उनके बिल्कुल पीछे चिपका हुआ था। चादर दोनों को ढके हुए थी। उसका नंगा लंड अभी भी उनकी गांड की नरम दरार में, पतली साड़ी के ऊपर से, दबा हुआ था। एक हाथ उनके बड़े स्तन को पूरी तरह जकड़े हुए था। स्तन इतने नरम और भारी थे कि उंगलियों के बीच दबकर फैल जाते थे। रोहन ने धीरे से निप्पल को दो उंगलियों में लिया और हल्का मसलने लगा। निप्पल साड़ी के ऊपर से ही सख्त महसूस हो रहा था।
मीरा के मुंह से हल्की सी आवाज निकली, “उम्म…” लेकिन आंखें नहीं खुलीं।
रोहन का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने कमर और आगे सरकाई। लंड उनकी गांड में और गहराई तक दब गया। साड़ी इतनी पतली थी कि अंडरवेयर की इलास्टिक और गांड की नरम गरम मांस का फर्क साफ महसूस हो रहा था। उसने धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू की – लंबी, दबाव वाली रगड़। हर बार जब लंड उनकी गांड की दरार में आगे-पीछे सरकता, तो रोहन की सांस रुक जाती।
उसने दूसरा हाथ भी आगे बढ़ाया। अब दोनों हाथों से उनके स्तन पकड़ रखे थे। एक स्तन को निचोड़ता, दूसरे के निप्पल को घुमाता। मीरा का बदन बुखार से इतना गर्म था कि छूते ही रोहन के हाथ जलने जैसे लगते।
“माँ… कितनी नरम हो तुम…” रोहन ने बहुत धीमी आवाज में कहा, जानते हुए कि वो ठीक से सुन भी नहीं पाएंगी।
मीरा ने सिर्फ सिर हल्का सा एक तरफ मोड़ा। उनकी साड़ी थोड़ी ऊपर खिसक गई थी। रोहन ने मौका देखा। उसने धीरे से साड़ी को और ऊपर सरकाया। अब उनकी टाइट ब्लैक अंडरवेयर सीधे उसके लंड के संपर्क में आ गई। अंडरवेयर इतनी टाइट थी कि गांड की दोनों गोलियां पूरी तरह अलग-अलग दिख रही थीं और बीच की गहरी दरार साफ उभर रही थी।
रोहन ने लंड को सीधे अंडरवेयर के ऊपर, दरार के बीच में रख दिया। फिर जोर से दबाया। पूरा लंड उनकी गांड की नरम गरम गली में समा गया। उसने एक हाथ से स्तन पकड़ना जारी रखा और दूसरे हाथ से उनकी जांघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाने लगा।
मीरा के शरीर में हल्की कंपन दौड़ गई। उनके होंठों से एक लंबी, अधबीच की कराह निकली। बुखार की नशे में वो समझ नहीं पा रही थीं कि उनके बेटे का नंगा लंड उनकी गांड में दबा है और हाथ उनके स्तन मसल रहे हैं। उन्हें सिर्फ ये महसूस हो रहा था कि कोई बहुत करीब है और बदन को गरमाहट दे रहा है।
रोहन अब और बोल्ड हो गया। उसने अंडरवेयर के ऊपर से ही लंड को तेजी से रगड़ना शुरू किया। गांड की नरम मांस उसके लंड को दोनों तरफ से दबा रही थी। हर रगड़ के साथ उसकी सांसें तेज होती जा रही थीं। स्तन को जोर-जोर से मसलते हुए वो उनके कान के पास बहुत धीरे बोल रहा था,
“माँ… तुम्हारी गांड इतनी गोल और नरम कैसे हो सकती है… स्तन भी हाथ में पूरे नहीं आ रहे…”
मीरा ने जवाब में सिर्फ हल्की सिसकारी दी। उनका एक हाथ कमजोर से चादर को पकड़ रहा था।
रोहन की रफ्तार बढ़ती गई। वो अब पूरी तरह उनकी गांड पर झुककर रगड़ रहा था। स्तन इतने जोर से निचोड़ रहा था कि उंगलियों के निशान पड़ सकते थे। अचानक उसका शरीर तन गया। लंड जोर से धड़का और उसने दोबारा उनकी गांड और अंडरवेयर पर गर्म गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। इतना था कि अंडरवेयर और साड़ी दोनों गीली हो गईं।
रोहन ने भारी सांस लेते हुए कुछ पल रुककर आंखें बंद कीं। फिर धीरे से हाथ से ज्यादातर हिस्सा पोंछ दिया, लेकिन थोड़ा सा छोड़ दिया। लंड फिर से उनकी गीली गांड की दरार में चिपका दिया और स्तन पकड़कर लेट गया।
सुबह के चार बज रहे थे। रोहन की आंखें नहीं लग रही थीं। वो बार-बार उनके स्तन सहलाता, कभी जांघों के बीच हाथ फेरता, कभी लंड को फिर से अंडरवेयर में दबाकर धीरे-धीरे हिलाता। मीरा कभी-कभी अधखुली आंखों से कराहतीं, शरीर को थोड़ा मोड़तीं, लेकिन कभी पूरी तरह नहीं जागीं। बुखार ने उनकी चेतना को लगभग सुला रखा था।
सुबह जब हल्की रोशनी आने लगी, तब भी रोहन उनके बिल्कुल पीछे चिपका हुआ था। लंड अभी भी उनकी गांड में दबा था, एक हाथ उनके स्तन पर। मीरा की साड़ी और अंडरवेयर जगह-जगह गीली थीं। उनके शरीर पर रोहन के हाथों के छुए होने के निशान थे, लेकिन खुद मीरा को कुछ पता नहीं था।
रोहन ने धीरे से उनके बालों को सहलाते हुए सोचा – आज रात सिर्फ शुरुआत थी। बुखार अभी पूरी तरह उतरा नहीं था… और पापा अभी भी नहीं आए थे।

