जवान सेक्सी भाभी ने पड़ोसी लड़के से चूत चुदवाया
36 साल की सेक्सी भाभी ने पति के जाते ही 24 साल के पड़ोसी लड़के को बुलाया और 2 दिन तक अपनी चूत चुदवाती रही। बच्चे के लिए बिना कंडोम के पूरा माल अंदर ले लिया।

आदित्य 24 साल का था। कॉलेज खत्म करके शहर में छोटी सी नौकरी कर रहा था। बैचलर था और अकेला एक फ्लैट में रहता था। उसके ठीक सामने वाले फ्लैट में रहती थीं प्रिया भाभी – 36 साल की, लेकिन बॉडी ऐसी कि कोई 28 की भी नहीं लगता। गोरा चिकना बदन, भारी गोल स्तन जो ब्लाउज में टाइट भरे रहते, पतली कमर और पीछे से भरी हुई हिलती गांड। बच्चों की कोई तस्वीर घर में नहीं थी। पति राजेश लगभग हमेशा बाहर रहते थे।
आदित्य रोज उन्हें देखता था। सुबह जब वो दूध लेने निकलतीं तो साड़ी में उनकी गांड की शेप साफ नजर आती। शाम को बालकनी में खड़ी होतीं तो ब्लाउज में स्तनों का उभार आदित्य की नजरें चुरा लेता। एक दिन उसने फैसला कर लिया – अब सिर्फ देखने से काम नहीं चलेगा।
शाम के छह बजे आदित्य उनके दरवाजे पर खड़ा था। घंटी बजाई। प्रिया ने दरवाजा खोला। आज उन्होंने टाइट काली साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज इतना फिट था कि स्तनों का पूरा आकार उभर रहा था। साड़ी कमर पर कसकर बंधी थी, गांड गोल और भारी लग रही थी।
“हां?” प्रिया ने पूछा।
आदित्य ने आंखें उनकी बॉडी पर थोड़ी देर टिकाए रखकर फिर चेहरे पर लाईं। “भाभी… थोड़ी चीनी मिल जाएगी? खत्म हो गई है।”
प्रिया ने उसकी निगाहें पकड़ लीं। हल्की मुस्कान दी। “आ जाओ अंदर।”
आदित्य अंदर घुसा। कमरा एयर कंडीशन्ड था। प्रिया चीनी का डिब्बा लेकर आईं। जब वो झुकीं तो ब्लाउज के गले से स्तनों का गहरा कटाव साफ दिख गया। आदित्य की नजरें वहीं अटक गईं। प्रिया ने उठाकर देखा तो आदित्य ने नजरें नहीं हटाईं। दोनों की निगाहें मिलीं। कमरे में हल्की सी तनाव वाली खामोशी छा गई।
“तुम रोज कुछ न कुछ मांगने आओगे क्या?” प्रिया ने हंसते हुए कहा, लेकिन आवाज में हल्की छेड़ थी।
आदित्य ने सीधा जवाब दिया, “जब तक आप देती रहेंगी भाभी… आता रहूंगा।”
प्रिया की मुस्कान थोड़ी और गहरी हो गई। चीनी देते हुए उनकी उंगलियां आदित्य की उंगलियों से छू गईं। दोनों ने हाथ नहीं हटाया। कुछ सेकंड तक सिर्फ छूते रहे। फिर प्रिया ने धीरे से हाथ खींचा।
“अब जाओ… देर हो रही है,” उन्होंने कहा लेकिन आवाज में वो सख्ती नहीं थी।
दो दिन बाद आदित्य फिर गया। इस बार दूध मांगने। प्रिया ने दरवाजा खोला तो आज लाल रंग की टाइट कुर्ती पहन रखी थी। कुर्ती इतनी फिट थी कि स्तन और कमर दोनों साफ उभर रहे थे। आदित्य अंदर गया। इस बार प्रिया ने खुद चाय बनाई। दोनों सोफे पर पास-पास बैठे।
बातें लंबी होने लगीं। प्रिया ने बताया कि शादी के दस साल हो गए, बच्चा नहीं हुआ। “डॉक्टर कहते हैं मेरी कोई समस्या नहीं… शायद सही व्यक्ति का इंतजार है,” उन्होंने धीमे स्वर में कहा और आदित्य की तरफ देखा।
आदित्य ने उनका हाथ पकड़ लिया। इस बार प्रिया ने नहीं छुड़ाया। आदित्य ने उंगलियों से उनकी हथेली के अंदर धीरे-धीरे फेरा। प्रिया की सांसें बदलने लगीं। आदित्य और करीब खिसक गया। उसके घुटने प्रिया के घुटने से छू रहे थे।
“भाभी… आप अकेली इतनी खूबसूरत हो… शरीर भी ऐसा… कैसे अकेली रह लेती हैं?” आदित्य ने सीधे पूछा।
प्रिया ने आंखें बंद कर लीं। आदित्य ने हाथ बढ़ाकर उनके गाल को सहलाया। फिर धीरे से गर्दन की तरफ ले गया। प्रिया का शरीर कांप गया। आदित्य ने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले हल्की चुंबन। प्रिया ने जवाब नहीं दिया। फिर थोड़ा और गहराई से चूमा। इस बार प्रिया के होंठ खुल गए। दोनों की जीभ मिली। प्रिया की सांस तेज हो गई।
आदित्य का हाथ उनकी कमर पर गया। फिर धीरे-धीरे ऊपर सरककर ब्लाउज के नीचे स्तन के निचले हिस्से तक पहुंच गया। प्रिया ने हल्की कराह ली। आदित्य ने पूरा स्तन हाथ में भर लिया और हल्का निचोड़ा। स्तन नरम और भारी थे। प्रिया का शरीर आदित्य की तरफ झुकने लगा।
इतने में बाहर किसी के आने की आहट हुई। दोनों झट से अलग हो गए। प्रिया के गाल लाल थे, सांसें तेज थीं। उन्होंने बाल संभालते हुए कहा, “अब जाओ… सच में किसी ने देख लिया तो…”
आदित्य उठ खड़ा हुआ। दरवाजे तक जाते-जाते प्रिया ने पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया। बहुत धीमी आवाज में बोलीं,
“राजेश परसों दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं। घर पूरी तरह खाली रहेगा। अगर तुम… आना चाहो तो आ जाना। रात भर।”
आदित्य ने उनकी आंखों में देखा। प्रिया की आंखों में साफ मंशा थी। आदित्य ने धीरे से जवाब दिया, “ आऊंगा भाभी… पूरे दो दिन।”
प्रिया ने हल्की मुस्कान दी और दरवाजा बंद कर दिया।
आदित्य अपने फ्लैट में जाकर लेट गया। उसका लंड तना हुआ था। सामने वाले फ्लैट में प्रिया भी आईने के सामने खड़ी थीं। टाइट साड़ी में अपनी बॉडी देख रही थीं और सोच रही थीं कि दो दिन बाद ये जवान लड़का उनके शरीर को कैसे इस्तेमाल करेगा… और शायद उन्हें वो देगा जो पति नहीं दे पाया।
परसों की शाम आते-आते आदित्य तैयार हो चुका था। उसने सादा शर्ट और जींस पहनी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। सामने वाले फ्लैट का दरवाजा अधखुला था। उसने हल्के से धक्का दिया और अंदर घुस गया।
प्रिया लिविंग रूम में खड़ी थीं। आज उन्होंने गहरी लाल रंग की टाइट साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज इतना फिट था कि स्तन बाहर आने को बेताब लग रहे थे। साड़ी कमर पर कसकर बंधी थी, गांड का गोल और भारी आकार साफ उभर रहा था। बाल खुले थे, होंठ हल्के रंगे हुए।
दोनों कुछ पल बस एक-दूसरे को देखते रहे। फिर प्रिया ने दरवाजा बंद किया और आदित्य के करीब आ गईं।
“दो पूरे दिन हैं… कोई नहीं आएगा,” उन्होंने धीमी लेकिन साफ आवाज में कहा।
आदित्य ने उनका हाथ पकड़ा और अपनी ओर खींच लिया। दोनों के होंठ जोर से मिले। इस बार चुंबन में कोई हिचकिचाहट नहीं थी। जीभें लड़ रही थीं। आदित्य के हाथ उनकी कमर पर गए, फिर नीचे सरककर गांड को कसकर पकड़ लिया। गांड इतनी गोल और नरम थी कि हाथ दबकर रह गए। प्रिया ने भी उसके बालों में उंगलियां फंसा लीं।
आदित्य ने उन्हें दीवार से सटा दिया। ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। भारी गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल पहले से ही सख्त थे। आदित्य ने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ से मसल रहा था। प्रिया की गर्दन पीछे की ओर झुक गई।
“आह्ह… आदित्य… बहुत दिनों बाद…” उनकी आवाज में भूख साफ थी।
आदित्य ने साड़ी की पल्लू खोली और साड़ी को कमर तक ऊपर कर दिया। नीचे टाइट काली पैंटी थी। उसने पैंटी को धीरे से नीचे खींचा। प्रिया की चूत पर हल्के बाल थे, और वो पहले से ही थोड़ी गीली दिख रही थी। आदित्य घुटनों पर बैठ गया और जीभ निकालकर चाटने लगा। प्रिया की टांगें कांपने लगीं। उन्होंने उसके बाल पकड़ लिए।
“उफ्फ्… और अंदर… जीभ अंदर डाल…”
आदित्य ने काफी देर तक चाटा और उंगलियां अंदर-बाहर कीं। प्रिया कई बार कांप चुकी थीं। फिर उन्होंने आदित्य को खड़ा किया। उसकी जींस खोलकर लंड बाहर निकाला। 24 साल के युवा लंड को देखकर प्रिया की आंखें चमक उठीं। उन्होंने घुटनों पर बैठकर लंड को मुंह में ले लिया। पहले सिर्फ आगे का हिस्सा, फिर गहराई तक। आदित्य के हाथ उनके बालों में थे।
थोड़ी देर बाद प्रिया खुद बिस्तर पर लेट गईं। साड़ी पूरी तरह खोल दीं। अब वो पूरी नंगी थीं। आदित्य उनके ऊपर चढ़ गया। लंड को चूत पर रखा और एक ही धक्के में काफी अंदर तक घुसा दिया। प्रिया की आंखें बंद हो गईं और लंबी कराह निकली।
“पूरा डाल… मत रोक…” उन्होंने कहा।
आदित्य ने पूरा लंड अंदर कर दिया और जोर-जोर से चोदने लगा। बिस्तर चरमरा रहा था। प्रिया की टांगें उसकी कमर पर लिपटी हुई थीं। दोनों की त्वचा की टकराहट की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
आदित्य ने पोजीशन बदली। प्रिया को कुत्ते की तरह मोड़ दिया। भारी गांड ऊपर थी। पीछे से लंड अंदर किया और जोरदार ठोके मारने लगा। हर धक्के पर गांड लहराने लगती। आदित्य गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था। प्रिया चीख रही थीं।
“हां… और जोर से… फाड़ दे…”
फिर प्रिया खुद ऊपर चढ़ गईं। काउगर्ल में बैठकर लंड को पूरा अंदर ले रही थीं। उनके बड़े स्तन आदित्य के चेहरे के सामने उछल रहे थे। आदित्य दोनों स्तन मुंह में लेकर चूस रहा था। प्रिया खुद अपनी गांड हिला-हिलाकर चोद रही थीं।
रात भर दोनों ने कई बार किया। बीच में पानी पिया, फिर से शुरू कर दिया। आदित्य ने उन्हें खड़े-खड़े दीवार से सटाकर चोदा, कुर्सी पर बिठाकर चोदा, साइड से चोदा। हर बार बिना कंडोम के। प्रिया खुद कहतीं, “अंदर छोड़… पूरा अंदर… मुझे गर्भवती करना है।”
आदित्य हर बार उनके अंदर ही झड़ता। प्रिया की चूत वीर्य से भर जाती। फिर भी वो थोड़ी देर आराम करके फिर से मांगतीं।
दूसरे दिन: सुबह होते-होते दोनों थक चुके थे, लेकिन रुके नहीं। दोपहर में प्रिया ने फिर से लाल साड़ी पहन ली (सिर्फ साड़ी, अंदर कुछ नहीं)। आदित्य ने उन्हें किचन की प्लेटफॉर्म पर लिटाकर चोदा। फिर बालकनी के पास खड़े-खड़े। शाम को सोफे पर। रात को फिर बिस्तर पर।
आखिरी रात सबसे लंबी रही। आदित्य ने प्रिया के मुंह में, चूत में और आखिर में उनकी गांड में भी लंड डाला। प्रिया पहले थोड़ी हिचकिचाईं लेकिन फिर खुद गांड ऊंची करके लेने लगीं। आदित्य ने तीनों जगह अपना माल भरा।
सुबह जब आदित्य जाने लगा तो प्रिया ने उसे गले लगा लिया। दोनों पसीने और वीर्य से तर थे।
“जब भी राजेश बाहर हो… तुम आ जाना,” प्रिया ने धीमे स्वर में कहा। “मुझे तुम्हारा बच्चा चाहिए।”
आदित्य ने उनके होंठ चूमे और निकला। पीछे मुड़कर देखा तो प्रिया दरवाजे पर खड़ी थीं – बाल बिखरे, होंठ सूजे, शरीर पर उसके हाथों और लंड के निशान, और आंखों में एक नई सी चमक।
दो दिनों में आदित्य ने प्रिया के शरीर का हर हिस्सा ले लिया था… और प्रिया को वो गर्माहट और भराव दे दिया था जिसकी उन्हें सालों से कमी थी।

