चॉल की सेक्सी भाभी को लिटाकर गांड में चोदा - जोरदार धक्के
मैंने बाजू वाली सेक्सी भाभी को कंबल पर लिटाया और उनकी मोटी गांड में अपना मोटा लंड जोर-जोर से घुसाने लगा। भाभी दर्द और मजें में कराह रही थीं और बोल रही थीं, “आह्ह्ह… और जोर से चोदो… मेरी गांड फाड़ दो!”

हम मुंबई के एक पुराने चॉल में रहते थे। एक ही फ्लोर पर चार छोटे-छोटे कमरे थे और नीचे मालिक का बड़ा कमरा था। मैं, मेरी मम्मी और पापा एक ही छोटे से कमरे में किराए पर रहते थे। मैं 21 साल का था और कॉलेज की फाइनल ईयर में पढ़ता था।
हमारे बगल वाला कमरा कुछ दिन पहले खाली हो गया था। मुझे नहीं पता था कि उसमें एक मस्त, सेक्सी और कम उम्र की भाभी आने वाली है। वो बस 29 साल की थी और उनकी एक छोटी सी बेटी थी, जो लगभग 5 साल की थी।
जिस दिन वो पहली बार आईं, मैंने उन्हें हल्की सिल्क वाली साड़ी में देखा। क्योंकि वो हमारे बगल में ही रहने आई थीं, मम्मी उनसे बात करने लगीं।
मैंने देखा कि उनकी बॉडी उस टाइट सिल्क साड़ी में कसी हुई थी। उनका गोरा रंग, बड़े-बड़े स्तन जो ब्लाउज से आधे बाहर दिख रहे थे, उनकी मोटी-मोटी लटकी हुई गांड – देखते ही किसी का भी मन करे कि उन्हें जोर से पकड़कर चोद डाले। उनके गाल और कमर भी एकदम गोरी और नरम थी, मानो अभी चूम-चूस लूं।
वो कुछ साल पहले ही गांव से मुंबई आई थीं, इसलिए शहर के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं। वो नई-नई थीं। मैं जब भी घर पर रहता और उनके घर के पास से निकलता, तो उन्हें झुककर पोछा मारते या कपड़े धोते देखता। उनकी हिलती हुई बड़ी गोरी चूचियां और एकदम परफेक्ट, टाइट, गोल गांड देखकर मन करता कि अभी उन्हें जोर से दबा दूं। लेकिन मैं कंट्रोल करता।
उनके पति स्टेशनरी की दुकान चलाते थे। सुबह 8 बजे निकल जाते और रात 10 बजे आते। भाभी दिन भर अकेली रहतीं। उनकी बेटी के साथ टीवी देखती रहतीं।
कभी-कभी वो मेरी मम्मी से बात करने हमारे घर आ जातीं। तब जब वो बैठी होतीं, मैं चुपके से उन्हें फोन चलाते हुए देखता रहता। उनकी कसी हुई टाइट बॉडी देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता। धीरे-धीरे उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछना शुरू किया।
मैं भी उनसे बातें करने लगा। उनकी बेटी को लाड-प्यार करने लगा। अब मैं अक्सर उनकी बेटी के लिए टॉफी या चिप्स लेकर उनके घर चला जाता। भाभी खुश हो जातीं और कहतीं, “बैठो ना, हमें भी बोरियत लगती है, बातें करते हैं।”
ऐसे ही हम दोनों के बीच काफी नजदीकियां बढ़ गईं। मैं उनसे मजाक करता, वो हंसतीं। मैं उनके छोटे-मोटे कामों में मदद भी करने लगा। लगता था कि अब वो मुझे प्यार भरी नजरों से देखने लगी हैं। उन्हें कोई मिल गया था जो उनकी अकेलापन दूर कर सके।
मैं उनके घर में बैठा रहता। जब वो काम करतीं तो उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां हिलतीं और गांड कसी हुई मटकती। लेकिन मैं इंतजार कर रहा था कि कब मौका मिले।
एक दिन मम्मी थोड़े समय के लिए बाहर काम से गईं। मैं उनके घर बैठा था। उनकी छोटी बेटी को मैंने टॉफी दे दी थी और वो टीवी देख रही थी। दोपहर का समय था। भाभी मेरे बगल में बैठी थीं। उस दिन उन्होंने एक पतली सी नाइटी पहनी हुई थी। ना ब्रा थी, ना पेटीकोट।
नाइटी के ऊपर से उनकी बड़ी चूचियों का पूरा शेप दिख रहा था और निप्पल की उभान भी साफ नजर आ रही थी। उनकी गांड पर सिर्फ टाइट चड्डी थी जो पूरी तरह चिपकी हुई थी।
बात करते-करते मेरा ध्यान उनकी चूचियों और गांड पर चला गया। मेरा लंड पैंट में एकदम तन गया। मैं उनके और पास खिसक गया। मैंने कहा, “भाभी, आप यहां अकेली हो, आपको सूनेपन का अहसास नहीं होता क्या?”
उन्होंने कहा, “होता तो है, लेकिन तुम लोग आते-जाते रहते हो तो इतना नहीं लगता।”
मैंने हिम्मत करके कहा, “वो तो ठीक है, लेकिन आपकी कुछ पर्सनल जरूरत तो होगी ना मेरी प्यारी भाभी?”
ये सुनकर वो शर्मा गईं और धीरे से बोलीं, “वो तो रहने ही दो… मेरे पति को इसका समय कहां…”
मैंने उनके गाल पर चुटकी मारते हुए कहा, “वही तो… आप जैसी सुंदर और जवान पत्नी को छोड़कर बाहर कैसे घूम सकता है वो?” वो हंस पड़ीं।
मैंने और तारीफ की। वो बहुत खुश हो गईं और बोलीं, “मुझे नहीं पता था कि मैं तुम्हें इतनी अच्छी लगती हूं।”
मैंने कहा, “बहुत अच्छी लगती हो… आखिर मुझे भी तुम्हें खुश करने का मौका तो दो।” कहते हुए मैं उनके एकदम करीब चला गया।
ये सुनते ही वो थोड़ी देर रुकीं, फिर बोलीं, “ये क्या बोल रहे हो? मेरे पति को पता चल गया तो वो बहुत शक्की और खरूस है।”
मैंने तुरंत उनकी गोरी गाल पर किस कर दिया और बोला, “टेंशन मत लो मेरी सेक्सी भाभी, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।” उनकी बेटी टीवी देख रही थी। मैंने भाभी के मुंह में मुंह मिलाकर डीप किसिंग शुरू कर दी। भाभी भी इंटरेस्टेड थीं। उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। हम 10 मिनट तक किस करते रहे। वो “आह्ह्ह… उम्म्म… उफ्फ्फ…” कर रही थीं। बोलीं, “और चूसो मुझे… मजा आ रहा है।”
फिर मैंने कहा, “भाभी, सिर्फ किस ही करोगी? आओ मेरी गोद में बैठ जाओ।” वो हिचकिचाईं, लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़कर अपनी गोद में बिठा लिया।
जैसे ही वो मेरी गोद में बैठीं, उनकी नरम, कसी हुई मोटी गांड मेरे खड़े लंड पर एकदम फिट बैठ गई। मेरा लंड उनकी गांड की दरार के बीच में दब गया। मैंने पीछे से उन्हें जकड़ लिया। एक हाथ से उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़ लिया। नाइटी पतली थी और ब्रा नहीं थी, इसलिए पूरा स्तन मेरे हाथ में आ गया। मैं जोर-जोर से दबाने लगा।
भाभी जोर से “आह्ह्ह… उम्म्म… उफ्फ्फ…” करने लगीं। उनकी गांड मेरे लंड पर जोर से घिसने लगी। मैं एक हाथ से गांड दबा रहा था, दूसरे से चूचियां। १५ मिनट तक हम ऐसे ही करते रहे। मैंने नाइटी के ऊपर से ही उनकी गांड में उंगली डालने की कोशिश की और निप्पल जोर से दबाए।
तभी अचानक मेरी मम्मी की आवाज आई, “बेटा कहां हो? मैं आ गई!” हम दोनों डर गए। भाभी तुरंत मेरी गोद से उठकर दूर बैठ गईं। मैंने अपना तना हुआ लंड छिपाया और दरवाजा खोल दिया।
मम्मी ने कहा, “अरे तू इन्हीं के घर बैठा है?” मैंने बहाना बनाया। मम्मी चली गईं। लेकिन हमारी चुदाई की आग अधूरी रह गई। जाते समय भाभी ने कान में कहा, “जब मौका मिले तो जरूर चोदना मुझे।” मैंने कहा, “हां जल्दी ही।”
उस रात मैं उनकी चूचियां और गांड याद करके मुठ मारकर सोया।
एक दिन अचानक फैमिली फंक्शन आ गया। मम्मी-पापा वहां एक रात रुककर आने वाले थे। मैंने कहा कि कॉलेज का काम है, मैं नहीं जा रहा। वो सुबह 8 बजे निकल गए।
जैसे ही वो गए, मैं बेसब्री से इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद भाभी के पति भी दुकान चले गए। मैंने थोड़ा इंतजार किया, फिर उनके घर घुस गया। गेट को अंदर से लॉक कर दिया। उनकी बेटी को ढेर सारी चॉकलेट देकर टीवी पर बिठा दिया।
उस दिन भाभी पूरे चुदने के मूड में थीं। उन्होंने टाइट सिल्क की पतली साड़ी पहनी थी, ऊपर हाफ कट ब्लाउज, बाल खुले, काजल और लिपस्टिक लगाए हुए। मैंने कहा, “ओह भाभी, आप तो एकदम रेडी हो।”
वो हंसीं और बोलीं, “जल्दी करो ना, कहीं कोई आ न जाए।”
मैंने कहा, “घर छोटा है। एक काम करते हैं – नीचे कंबल बिछा दो, मैं तुम्हें उसी पर चोदूंगा।” उन्होंने मोटा कंबल बिछा दिया।
मैंने तुरंत पीछे से उन्हें दबोच लिया। ऊपर से ही उनकी चूचियां, कमर, गांड सब दबाया। फिर उनकी साड़ी का पल्लू हटाया, ब्लाउज के हुक खोले, ब्रा उतारी। उनकी बड़ी-बड़ी गोरी चूचियां बाहर आ गईं। मैंने उन्हें मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसा, काटा, निचोड़ा। भाभी “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… और जोर से…” कर रही थीं।
फिर मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर किया। चड्डी उतार दी। उनकी चूत साफ और गीली थी। मैं उन्हें बाथरूम ले गया। वहां उनके चूत और गांड के बाल रेजर से साफ किए। फिर अपनी जीभ से उनकी चूत चाटी, उंगली डाली। भाभी पागल हो रही थीं।
फिर मैंने उन्हें किचन में खड़ा किया, पीछे से साड़ी उठाई, लंड पर थूक लगाया और उनकी चूत में एक झटके में पूरा घुसा दिया। “आआआह्ह्ह… बहुत मोटा है…” वो चीखीं। मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। उनकी चूचियां हिल रही थीं। मैंने उन्हें पकड़कर चोदा।
उन्होंने गांड चुदवाने से मना किया, लेकिन मैंने थूक लगाकर उनकी गांड में भी लंड घुसा दिया। धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। भाभी दर्द और मजे से कराह रही थीं।
फिर मैंने उन्हें गोद में उठाया, दीवार से सटाकर चोदा। फिर कंबल पर लिटाकर मिशनरी में चोदा। उनकी टांगें अपने कंधे पर रखकर गहराई तक धक्के मारे। आखिर में मैंने उन्हें अपनी गोद में बिठाकर चोदा। उनकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी।
मैंने कहा, “भाभी, मैं आने वाला हूं।” उन्होंने कहा, “अंदर ही डाल दो…” मैंने जोर से धक्का मारा और पूरा वीर्य उनकी चूत के अंदर उड़ेल दिया। फिर उन्होंने मेरे लंड को मुंह में लिया। मैंने उनके मुंह में भी वीर्य डाल दिया और वो सब पी गईं।
हम दोनों पसीने से तर होकर लेट गए। भाभी ने कहा, “आज के बाद जब भी मौका मिले, तुम मुझे चोदते रहना। मैं तुम्हारी हूं।”

