कुंवारी बेटी को मनाकर सील तोड़ी - पहली चुदाई का दर्द

एक रात, दो प्यासी जिस्में। पापा ने तोड़ी कुंवारी बेटी की सील, पहली चुदाई का दर्द और अंतहीन मज़ा।

लेखक: Vikram Sen6 मिनट पढ़ने में
कुंवारी बेटी को मनाकर सील तोड़ी - पहली चुदाई का दर्द

रात गहरी थी। बारिश की बूँदें खिड़की पर तेज-तेज गिर रही थीं। घर में अँधेरा और सन्नाटा। अनन्या की माँ तीन साल पहले चल बसी थीं। तब से राहुल अकेले ही अपनी बेटी को पाल-पोस रहे थे। दिनभर कंपनी में मैनेजर की नौकरी, रात को घर आकर थकान। लेकिन आज रात थकान कुछ और ही थी।

अनन्या बाथरूम से निकली। बाल खुले, गीले। शरीर पर सिर्फ एक पतला, सफेद, पारदर्शी नाइट ड्रेस। ड्रेस इतना महीन था कि उसके बड़े-बड़े गोल स्तन, गुलाबी निप्पल्स की नोक, पतली कमर, गोल-मटोल कूल्हे और लंबी चिकनी जांघें साफ झलक रहे थे। अंदर एक धागा भी नहीं। उसकी चूत की हल्की सी लकीर ड्रेस के पार दिख रही थी।

वह पापा के कमरे में आई। राहुल बिस्तर पर बैठे थे, कमीज के बटन खुले। अनन्या ने दरवाजा बंद किया। धीरे-धीरे उनके पास आई। आँखों में जादुई चमक। उसने पापा की गोद में बैठते हुए फुसफुसाया—

“पापा… आज मुझे बहुत गर्मी लग रही है। शरीर जल रहा है। छू लो ना…”

राहुल की सांस अटक गई। अनन्या ने खुद उनका हाथ पकड़ा और अपने बड़े स्तन पर रख दिया। निप्पल सख्त था। राहुल की उंगलियाँ अपने आप निप्पल को मसलने लगीं। अनन्या की आँखें बंद हो गईं। हल्की कराह निकली—

“आह्ह… पापा… और जोर से…”

फिर उसने पापा का हाथ नीचे सरका दिया। नाइट ड्रेस के अंदर। सीधे अपनी गरम, चिकनी चूत पर। उंगलियाँ गीली हो गईं। अनन्या कुँवारी थी। आज तक किसी ने वहाँ हाथ तक नहीं लगाया था। राहुल की एक उंगली धीरे से अंदर घुसी। इतनी टाइट कि उंगली भी मुश्किल से जा रही थी। अनन्या दर्द से सहम गई।

“आह्ह्ह… पापा… दर्द… बहुत टाइट है…” वह कराहते हुए बोली, लेकिन पापा का हाथ नहीं हटाया। बल्कि और फैला दी अपनी जांघें।

राहुल ने दूसरी उंगली भी डाल दी। अनन्या की चूत फटने जैसी लग रही थी। आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन कराहें रुक नहीं रही थीं। राहुल ने झुककर उसके होठों को चूसा। जीभ अंदर डाल दी। अनन्या भी पापा की जीभ चूसने लगी।

फिर अनन्या खुद घुटनों के बल बिस्तर पर बैठ गई। उसने पापा की पैंट खींच दी। मोटा, लंबा, सख्त लंड बाहर निकला। नसें फूली हुईं। अनन्या ने डरते-डरते जीभ निकाली। मुंडे पर लंबा चाटा। फिर पूरा मुँह में ले लिया। गला भर गया। आँखों से पानी निकल आया, लेकिन वह और गहरा ले गई। ‘ग्लक… ग्लक…’ की आवाज़ें आने लगीं। लार टपक रही थी। वह एक हाथ से अंडे सहला रही थी, दूसरे से अपनी चूत मसल रही थी।

राहुल ने उसके बाल कसकर पकड़े और धीरे-धीरे अपना लंड और गहराई तक ठेल दिया। अनन्या की आँखें लाल हो गईं, लेकिन उसने लंड को छोड़ने से इनकार कर दिया। और जोर से चूसने लगी। गले की दीवारें लंड को कस रही थीं।

थोड़ी देर बाद राहुल ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। नाइट ड्रेस ऊपर फेंक दी। नंगी अनन्या। बड़े स्तन फैले हुए, निप्पल्स सख्त। राहुल ने एक निप्पल मुँह में लेकर जोर से चूसा, दाँतों से काटा। अनन्या जोर से चिल्लाई—

“आह्ह्ह पापा… काटो… और काटो…”

फिर राहुल नीचे गए। उसकी टाँगें कंधों पर चढ़ा दीं। जीभ से कुँवारी चूत चाटी। क्लिट पर घुमाया, चूसा। दो उंगलियाँ अंदर डालकर तेजी से हिलाने लगे। अनन्या की कमर उछल रही थी। कराहें कमरे में गूँज रही थीं।

“पापा… अब डालो… अपना लंड डालो… दर्द सह लूँगी…”

राहुल ने अपना मोटा लंड उसकी टाइट चूत पर रखा। मुंडा अंदर घुसा। अनन्या की आँखें फट गईं। मुँह से जोर की कराह निकली—

“आह्ह्ह्ह… पापा… बहुत दर्द… फट जाएगी… मत डालो पूरा…”

लेकिन राहुल धीरे-धीरे और अंदर धकेलते गए। आखिर में पूरा लंड उसकी कुँवारी चूत में समा गया। खून की हल्की लकीर निकल आई। अनन्या जोर-जोर से कराह रही थी। आँसू बह रहे थे। नाखून पापा की पीठ में धँस गए। शरीर काँप रहा था।

राहुल रुके। अनन्या के माथे, आँखों, होठों पर चुंबन किए। “दर्द सह ले मेरी जान… थोड़ी देर में मजा आने लगेगा।”

फिर धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर धक्के पर अनन्या कराह उठती। चूत इतनी टाइट थी कि लंड को जैसे निचोड़ रही हो। थोड़ी देर बाद दर्द कम होने लगा। मजा आने लगा। कराहें बदल गईं—

“आह्ह… पापा… अब अच्छा लग रहा है… और जोर से… और गहरा…”

राहुल तेज हो गए। बिस्तर चरमरा रहा था। अनन्या के बड़े स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे। वह पापा को कसकर गले लगाए हुए जोर से कराह रही थी। हर धक्के पर उसकी चूत से गीली ‘चप-चप’ आवाजें आ रही थीं।

राहुल ने उसकी एक टाँग कंधे पर चढ़ा दी। और गहराई तक ठोकने लगे। अनन्या चिल्ला रही थी—

“पापा… फाड़ दो… अपनी बेटी की चूत फाड़ दो…”

फिर राहुल ने लंड बाहर निकाला। अनन्या को पलट दिया। कुत्ते की पोजीशन। गोल कूल्हे फैलाए। लंड का मुंडा उसकी टाइट, गुलाबी गांड पर रखा।

अनन्या सहम गई। “पापा… वहाँ… बहुत दर्द होगा…”

राहुल ने थूक लगाकर धीरे-धीरे दबाव डाला। मुंडा अंदर घुसा। अनन्या जोर से चिल्लाई। आँसू फिर निकल आए। गांड इतनी टाइट थी कि लंड मुश्किल से आगे बढ़ रहा था। राहुल ने और दबाव डाला। धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी गांड में समा गया।

अनन्या तकिए में मुँह दबाए जोर-जोर से कराह रही थी। शरीर थरथर काँप रहा था। राहुल ने एक हाथ से उसके बाल कसकर पकड़े, दूसरे से कमर दबाई और धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर धक्के पर अनन्या की कराहें और तेज हो रही थीं।

“आह्ह्ह पापा… गांड फट रही है… लेकिन मत निकलो… और डालो…”

राहुल तेज करने लगे। गांड की चमड़ी थपथपा रही थी। लंड पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। अनन्या की चूत से पानी टपक रहा था। थोड़ी देर बाद अनन्या जोर से काँप उठी। उसकी चूत से पानी की तेज धार निकल आई। वह जोर से चिल्लाई। शरीर अकड़ गया।

राहुल ने और जोर से ठोके। फिर लंड बाहर निकाला, अनन्या के मुँह के सामने ले आए। अनन्या ने तुरंत मुँह खोल दिया। राहुल ने पूरा लंड उसके गले में ठूंस दिया और जोर से झड़ गए। गाढ़ा, गर्म वीर्य उसके गले में भर गया। अनन्या ने सब निगल लिया। कुछ बूंदें होठों और ठुड्डी पर रह गईं, जिन्हें उसने जीभ से चाट लिया।

दोनों पसीने से लथपथ थे। अनन्या अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थी। आँखों में आँसू थे, लेकिन चेहरे पर तृप्ति की मुस्कान। उसने पापा के सीने से लगकर फुसफुसाया—

“पापा… आज पहली बार… दर्द भी हुआ, बहुत हुआ… लेकिन इतना अच्छा लगा कि… फिर से करो।”

राहुल का हाथ फिर से उसके गीले स्तन पर चला गया। निप्पल मसलते हुए बोले—

“रात अभी बाकी है मेरी रानी… आज तुझे पूरा लूटूंगा।”

रात और गहरी हो चुकी थी। बारिश बाहर तेज हो रही थी, लेकिन कमरे के अंदर सिर्फ दो शरीर की गर्मी और कराहें गूँज रही थीं। अनन्या अभी भी पापा के सीने से चिपकी हुई थी। उसका शरीर पसीने से चमक रहा था। कुँवारी चूत और गांड दोनों पहली बार लंड से फटी हुई थीं, हल्की जलन अभी भी बाकी थी, लेकिन अंदर एक भूख जाग चुकी थी।

राहुल का हाथ उसके बड़े स्तन पर घूम रहा था। निप्पल को उंगलियों के बीच दबाकर मसल रहे थे। अनन्या की सांसें फिर तेज हो गईं। उसने पापा का लंड हाथ में लिया। अभी भी आधा सख्त था। धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर खुद नीचे सरक गई।

उसने लंड को दोनों हाथों से पकड़ा और मुँह में ले लिया। इस बार बिना किसी झिझक के। गहरी। पूरा गले तक। ‘ग्लक… ग्लक… ग्लक…’ की आवाज़ें तेज हो गईं। लार टपक-टपककर उसके स्तनों पर गिर रही थी। वह एक हाथ से अंडे मसल रही थी, दूसरे से अपनी अभी भी संवेदनशील चूत सहला रही थी। राहुल ने उसके बाल कसकर पकड़ लिए और जोर-जोर से मुँह में ठेलने लगे। अनन्या की आँखों से पानी निकल रहा था, लेकिन वह और गहरा ले रही थी। गला भर रहा था, सांस रुक रही थी, फिर भी छोड़ नहीं रही थी।

थोड़ी देर बाद राहुल ने उसे उठाया। खड़े होकर अनन्या को दीवार से लगा दिया। उसकी एक टाँग अपनी कमर पर चढ़ाई और एक झटके में मोटा लंड फिर से उसकी टाइट चूत में धकेल दिया। अनन्या जोर से चिल्लाई—

“आह्ह्ह्ह पापा… अभी भी बहुत टाइट है… फाड़ रहे हो…”

राहुल रुके नहीं। दीवार से लगाकर जोर-जोर से ठोकने लगे। हर धक्के पर अनन्या के बड़े स्तन उनके चेहरे से टकरा रहे थे। राहुल एक निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगे, दाँतों से काटने लगे। अनन्या की कराहें और तेज हो गईं। उसकी पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी। चूत से ‘चप-चप-चप’ की तेज आवाजें आ रही थीं। खून की हल्की निशानी अभी भी लंड पर चमक रही थी।

राहुल ने उसकी दोनों टाँगें अपनी कमर पर चढ़ा दीं। पूरा वजन संभालते हुए और गहराई तक ठोकने लगे। अनन्या पापा के गले में बाँहें डाले जोर-जोर से कराह रही थी—

“पापा… और जोर से… अपनी बेटी की चूत चोद दो… फाड़ दो पूरी…”

राहुल ने उसे बिस्तर पर पटक दिया। इस बार मिशनरी में। अनन्या की टाँगें उसके कंधों पर। लंड पूरा अंदर तक। राहुल ने दोनों हाथों से उसके स्तन मसलते हुए तेज-तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था। अनन्या की आँखें पलकें झपकाने की हालत में नहीं थीं। मुँह खुला हुआ, कराहें निकल रही थीं। हर धक्के पर उसका शरीर हिल रहा था।

फिर राहुल ने अचानक लंड बाहर निकाला। अनन्या को चारों घुटनों पर कर दिया। कूल्हे ऊँचे। उसने उसके गोल कूल्हों को दोनों हाथों से फैलाया। पहले चूत में दो-तीन जोर के धक्के दिए, फिर लंड निकालकर सीधे उसकी गांड पर रख दिया।

अनन्या सहम गई। “पापा… गांड में… अभी भी दर्द है…”

लेकिन राहुल ने थूक का भरपूर लेप लगाया और एक झटके में आधा लंड गांड में धकेल दिया। अनन्या जोर से चिल्लाई। आँसू फिर निकल आए। शरीर थरथर काँप उठा। राहुल ने और दबाव डाला। धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी टाइट गांड में समा गया। अनन्या तकिए में मुँह दबाए जोर-जोर से रो रही थी और कराह रही थी—

“आह्ह्ह्ह… पापा… गांड फट गई… निकालो… नहीं… मत निकालो… और डालो…”

राहुल ने एक हाथ से उसके बाल कसकर पकड़े, दूसरे हाथ से कमर दबाई और जोर-जोर से गांड चोदने लगे। हर धक्के पर अनन्या की कराहें घर में गूँज रही थीं। गांड की चमड़ी थपथपा रही थी। लंड पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। अनन्या की चूत से पानी की धारा टपक रही थी। वह एक हाथ से अपनी क्लिट मसलने लगी।

राहुल ने अचानक लंड गांड से निकाला और फिर चूत में डाल दिया। फिर गांड में। फिर चूत में। बारी-बारी से दोनों छेदों को बेरहमी से चोदने लगे। अनन्या पागल हो रही थी। कराहें, चीखें, गालियाँ सब निकल रही थीं—

“पापा… चोदो… दोनों छेद चोदो… अपनी बेटी को रांड बना दो…”

थोड़ी देर बाद राहुल ने उसे फिर पलट दिया। इस बार अनन्या के ऊपर लेट गए। लंड चूत में। उन्होंने अनन्या के दोनों हाथ पकड़कर उसके सिर के ऊपर दबा दिए। पूरे वजन के साथ जोर-जोर से ठोकने लगे। अनन्या के स्तन उनके सीने से दब रहे थे। होठों को काट-काट कर चूम रहे थे। अनन्या के नाखून उनकी पीठ में धँस गए। खून की हल्की लकीरें निकल आईं।

अनन्या जोर से काँप उठी। उसकी चूत ने लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि राहुल भी कराह उठे। पानी की तेज धार निकल आई। अनन्या की आँखें पलट गईं। शरीर अकड़ गया। वह जोर से चिल्लाई। ऑर्गैज्म इतना तेज था कि उसके पैर काँप रहे थे।

राहुल रुके नहीं। उन्होंने लंड बाहर निकाला, अनन्या के मुँह में ठूंस दिया। अनन्या ने आधे होश में भी मुँह खोल रखा था। राहुल ने गले तक लंड डालकर जोर से झड़ गए। गाढ़ा वीर्य सीधा उसके गले में गया। इतना ज्यादा कि अनन्या को निगलने में मुश्किल हो रही थी। कुछ बाहर निकलकर उसके होठों, ठुड्डी और स्तनों पर फैल गया।

राहुल ने लंड निकालकर अनन्या के स्तनों पर रगड़ा। वीर्य को उसके निप्पल्स पर मल दिया। अनन्या ने जीभ निकालकर अपने होठों और स्तनों से वीर्य चाटा। आँखों में अभी भी आँसू थे, लेकिन चेहरे पर एक पागल सी तृप्ति।

दोनों बिस्तर पर लुढ़क गए। पसीने से लथपथ। अनन्या की चूत और गांड दोनों लाल और सूजी हुई थीं। हल्की जलन हो रही थी, लेकिन अंदर एक मीठी सी दर्द भरी खुशी थी।

अनन्या ने पापा के सीने पर सिर रखा। धीरे से बोली—

“पापा… आज तुमने मुझे पूरी तरह से ले लिया। चूत भी, गांड भी… सब तुम्हारा हो गया। माँ नहीं रहीं… अब मैं तुम्हारी हूँ… पूरी।”

राहुल ने उसके गीले बाल सहलाए। हाथ फिर से उसकी चूत पर चला गया। उंगलियाँ अंदर डाल दीं। अनन्या हल्की कराह के साथ मुस्कुराई।

“रात अभी खत्म नहीं हुई मेरी रानी,” राहुल ने धीरे से कहा। “सुबह तक तुझे और चोदूंगा। जब तक तू चल न पाए।”

अनन्या ने पापा का लंड फिर से हाथ में ले लिया। धीरे-धीरे सहलाने लगी। आँखों में फिर वही भूख आ गई।

“तो फिर देर किस बात की पापा… डालो फिर से।”

बाहर बारिश और तेज हो रही थी। कमरे के अंदर फिर से कराहें गूँजने वाली थीं।

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Vikram Sen
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