माँ की टाइट यौनि मे जब बेटे का मोटा लंड घुसा - सेक्सी माँ की चुदाई
बेटे का मोटा लंड जब मम्मी की टाइट चूत में घुसा तो वो कराहने लगी। पहले मना कर रही थी पर बाद में खुद मस्त होकर चोदवाने लगी। पूरे दिन और रात बेटे ने मम्मी की चूचियाँ दबा-दबा के, गाँड थपथपा के खूब चोदा।

सुबह के लगभग दस बज रहे थे। घर में सिर्फ माँ और बेटा ही थे। पिताजी ऑफिस चले गए थे और शाम को देर से ही लौटने वाले थे। रसोई में माँ खाना बना रही थी। उसकी साड़ी की पल्लू बार-बार खिसक रही थी और ब्लाउज में बंधी बड़ी-बड़ी चूचियाँ हिल रही थीं।
बेटा रोहित दरवाजे के पास खड़ा चुपचाप माँ को देख रहा था। उसकी नजर माँ की मोटी गाँड और भारी चूचियों पर टिकी हुई थी। कुछ दिनों से उसके मन में गंदी इच्छाएँ उठ रही थीं। आज पिताजी घर पर नहीं थे… मौका था।
रोहित धीरे से पीछे से गया और माँ की कमर में दोनों हाथ रख दिए। माँ चौंक गई।
“रोहित… ये क्या कर रहा है? हट जा पीछे से।”
रोहित ने जवाब नहीं दिया। उसने माँ की कमर और जोर से दबाई और अपना पहले से तना हुआ मोटा लंड उसकी गाँड से सटा दिया। माँ की साँसें तेज हो गईं।
“रोहित… पागल हो गया है क्या? मैं तेरी माँ हूँ… छोड़ मुझे…”
रोहित ने माँ के कान के पास मुँह लाकर धीरे से कहा, “मम्मी… पापा नहीं हैं आज। मैं बहुत दिनों से सोच रहा हूँ। आपकी बॉडी देख-देख कर मेरा लंड हर रात तन जाता है। आज तो मजा लेना ही है।”
माँ ने विरोध करते हुए उसके हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन रोहित ने उसकी दोनों कलाई पकड़ लीं और रसोई के स्लैब से लगा दिया। उसने एक हाथ से माँ की साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी भारी चूचियाँ जोर-जोर से दबाने लगा।
माँ कराह उठी, “आह्ह… छोड़… गलत बात है ये… मैं तेरी माँ हूँ…”
रोहित ने ब्लाउज की डोरी खोल दी। माँ की बड़ी-बड़ी गोल चूचियाँ बाहर झूलने लगीं। निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। रोहित ने दोनों हाथों से चूचियाँ पकड़कर मसलनी शुरू कर दीं। कभी निप्पल को उंगलियों से दबाता, कभी झुककर मुँह में लेकर जोर से चूसता।
माँ की आँखें बंद हो रही थीं। वह अभी भी मना कर रही थी, लेकिन आवाज कमजोर पड़ चुकी थी।
“रोहित… मत कर… पापा को पता चल गया तो…”
रोहित ने माँ की साड़ी ऊपर की और पैंटी खींचकर नीचे कर दी। माँ की मोटी गाँड और उसके नीचे छिपी हुई चूत अब नंगी थी। रोहित ने उंगली से चूत सहलाई तो पाया कि माँ पहले से गीली हो चुकी है।
“देखो मम्मी… आपकी चूत तो पहले से गीली है। आप भी चाहती हो।”
माँ शर्म से लाल हो गई। रोहित ने अपना लंड बाहर निकाला – मोटा, लंबा और नसों से भरा हुआ। उसने माँ की दोनों टाँगें फैलाईं और लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा। फिर एक जोर का धक्का देकर आधा लंड अंदर घुसा दिया।
माँ जोर से कराह उठी, “आह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है तेरा…”
रोहित रुका नहीं। उसने और जोर लगाकर पूरा लंड माँ की चूत में धँसा दिया। माँ की चूत बहुत गरम और टाइट थी। रोहित ने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ माँ की भारी चूचियाँ आगे-पीछे हिल रही थीं।
रोहित एक हाथ से माँ की चूची दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी गाँड मसल रहा था। माँ की कराहें अब रसोई में गूँज रही थीं।
“मम्मी की चूत कितनी मस्त है… आज पूरा दिन चोदूँगा आपको… पापा के आने तक…”
रोहित ने माँ को पलटा और स्लैब पर ही लिटा दिया। उसने माँ की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और गहरे धक्के लगाने लगा। माँ की आँखें बंद थीं और मुँह से हल्की-हल्की आवाजें निकल रही थीं। विरोध अब लगभग खत्म हो चुका था।
थोड़ी देर बाद रोहित ने माँ को उठाया और अपने कमरे में ले गया। बिस्तर पर डालते ही उसने माँ की साड़ी पूरी तरह उतार दी। अब माँ बिल्कुल नंगी लेटी थी। रोहित ने फिर से लंड उसकी चूत में डाला और इस बार और तेज गति से चोदने लगा। माँ की चूचियाँ उसके मुँह में थीं। वह कभी एक चूची चूसता, कभी दूसरी को।
“मम्मी… आज रात अगर पापा नहीं आए तो मैं उनकी जगह सोऊँगा… और आपको और गहराई तक चोदूँगा… गाँड में भी डालूँगा…”
माँ ने आँखें खोलकर उसे देखा। कुछ बोल नहीं पाई। सिर्फ कराहते हुए उसके बाल पकड़ लिए।
रोहित ने माँ को घोड़ी बना लिया। पीछे से जोर-जोर से धक्के लगाते हुए एक हाथ से उसकी चोटी खींच रहा था और दूसरे हाथ से चूची दबा रहा था। माँ की गाँड उसकी जाँघों से टकरा-टकराकर लाल हो रही थी।
पूरा दिन इसी तरह चला। कभी रसोई में, कभी सोफे पर, कभी बिस्तर पर। रोहित माँ को बार-बार चोदता, उसकी चूचियाँ दबाता, गाँड थपथपाता और गंदी बातें बोलता। माँ अब खुलेआम कराह रही थी। उसका शरीर पसीने से तर हो चुका था।
शाम होने वाली थी। रोहित अभी भी माँ के अंदर था। उसने माँ के कान में कहा,
“मम्मी… पापा आज रात नहीं आने वाले। मैं उनकी जगह सोऊँगा। रात को आपको और मजे दूँगा… गाँड में भी लंड ठूस दूँगा। तैयार रहना।”
माँ ने सिर्फ आँखें बंद कीं और हल्के से सिर हिलाया। उसका शरीर थक चुका था, लेकिन चूत अभी भी रोहित के मोटे लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
रात के लगभग ग्यारह बज चुके थे। घर में अंधेरा और सन्नाटा पसरा हुआ था। पिताजी का फोन आया था कि आज मीटिंग लंबी चलने वाली है और वे घर नहीं आ पाएंगे। रोहित ने फोन काटते ही माँ की तरफ देखा।
माँ बिस्तर पर लेटी हुई थी। दिन भर की चुदाई से उसका शरीर थका हुआ था, लेकिन आँखों में एक अजीब सी शर्म और इच्छा दोनों साफ दिख रही थीं। रोहित ने कपड़े उतारे और नंगा होकर माँ के बगल में लेट गया। ठीक उसी जगह जहाँ रोज पिताजी सोते थे।
माँ ने धीमे स्वर में कहा, “रोहित… ये सही नहीं है… पापा की जगह…”
रोहित ने जवाब में माँ को अपनी तरफ खींच लिया और उसके होंठों पर जोर से किस कर दिया। एक हाथ से उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज खोलकर भारी चूचियाँ बाहर निकाल लीं। उसने दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाना और मसलना शुरू कर दिया।
“मम्मी… आज रात मैं पापा की जगह हूँ। पूरी रात आपको चोदूँगा… जितना गहरा हो सके।”
रोहित ने माँ की साड़ी और पैंटी पूरी तरह उतार दी। माँ अब बिल्कुल नंगी थी। रोहित उसके ऊपर चढ़ गया और अपना पहले से सख्त मोटा लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। माँ की चूत दिन भर की चुदाई से थोड़ी सूजी हुई और गीली थी। रोहित ने एक जोर का धक्का दिया और पूरा लंड एक बार में अंदर धँसा दिया।
माँ जोर से कराह उठी, “आह्ह्ह… रोहित… धीरे… बहुत अंदर तक जा रहा है…”
रोहित ने माँ की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और पूरी ताकत से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ उसका मोटा लंड माँ की चूत की गहराई तक जा रहा था। माँ की चूचियाँ उसके हाथों में दब-दब कर फैल रही थीं। रोहित कभी झुककर निप्पल चूस लेता, कभी माँ के होंठ काटता।
“मम्मी की चूत कितनी गरम है… पापा से कितना बड़ा लंड है मेरा… महसूस हो रहा है न?”
माँ सिर्फ कराह रही थी। उसके नाखून रोहित की पीठ में गड़ रहे थे। रोहित ने गति और तेज कर दी। बिस्तर चरमरा रहा था। माँ की आवाजें अब दब नहीं पा रही थीं।
थोड़ी देर बाद रोहित ने लंड बाहर निकाला। माँ की चूत से रस की धार बह निकली। उसने माँ को बलपूर्वक पेट के बल लिटा दिया और उसके कूल्हे ऊपर उठाए। माँ समझ गई क्या होने वाला है। उसने हल्के स्वर में विरोध किया,
“रोहित… वहाँ मत डालना… दर्द होगा…”
रोहित ने थूक लगाकर माँ की गाँड के छेद को गीला किया। फिर अपना मोटा लंड वहाँ लगाकर धीरे-धीरे धकेलने लगा। माँ की मुट्ठियाँ कस गईं और मुँह से दर्द भरी आवाज निकली।
“आह्ह्ह्ह… दर्द… निकाल… बहुत मोटा है…”
रोहित रुका नहीं। उसने धीरे-धीरे पूरा लंड माँ की गाँड में ठूस दिया। माँ का शरीर तन गया। रोहित ने उसकी कमर पकड़ी और रुक-रुक कर धक्के लगाने शुरू किए। एक हाथ से माँ की चूत में उंगली डालकर सहला रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूची जोर से दबा रहा था।
“मम्मी की गाँड कितनी टाइट है… आज पूरी तरह खोल दूँगा… रोज ऐसे ही चोदूँगा जब पापा नहीं होंगे।”
माँ की आवाजें अब दर्द और मजे दोनों से भरी हुई थीं। रोहित ने गति बढ़ा दी। गाँड की चुदाई करते हुए वह माँ की चोटी खींच रहा था और कभी-कभी उसके गाल पर थप्पड़ भी मार रहा था। माँ का चेहरा तकिए में धँसा हुआ था। वह कराहते हुए बड़बड़ा रही थी।
कुछ देर बाद रोहित ने लंड गाँड से निकाला और फिर से चूत में डाल दिया। अब वह माँ को अपनी गोद में बिठाकर ऊपर-नीचे कर रहा था। माँ की भारी चूचियाँ उसके चेहरे से रगड़ खा रही थीं। रोहित दोनों चूचियों को मुँह में भर-भर कर चूस रहा था और नीचे से जोरदार धक्के लगा रहा था।
माँ खुद भी कमर हिलाने लगी थी। उसका शरीर पसीने से तर था। रोहित ने माँ को फिर से लिटाया, उसकी दोनों टाँगें फैलाईं और पूरी गहराई तक धक्के लगाने लगा। माँ की आँखें बंद थीं। वह चरम के करीब पहुँच चुकी थी।
रोहित की भी साँसें तेज चल रही थीं। उसने आखिरी जोरदार धक्के लगाए और माँ की चूत के अंदर ही अपना पूरा पानी छोड़ दिया। गर्म धार माँ के अंदर फैल गई। उसी समय माँ भी जोर से काँपते हुए झड़ गई। उसकी चूत रोहित के लंड को और कसकर पकड़ रही थी।
रोहित कुछ देर तक माँ के ऊपर पड़ा रहा। फिर धीरे से लंड बाहर निकाला। माँ की चूत और गाँड दोनों से उसका पानी बह रहा था। छेद थोड़े फैले हुए और लाल दिख रहे थे।
रोहित ने माँ को अपनी बाँहों में ले लिया और उसकी चूचियों को हल्के हाथों से सहलाने लगा। माँ थकी हुई आँखें खोलकर बोली,
“रोहित… तूने आज बहुत दूर तक कर दिया…”
रोहित ने उसके माथे पर किस किया और धीरे से कहा, “मम्मी… जब भी पापा रात को नहीं आएंगे… मैं उनकी जगह सोऊँगा। और आपको ऐसे ही गहराई तक चोदूँगा… चूत में भी, गाँड में भी। आपकी दोनों छेद मेरे लंड के लिए हमेशा तैयार रहेंगी।”
माँ ने कुछ नहीं कहा। बस रोहित के सीने से चिपक गई। बाहर रात गहरी थी और कमरे में माँ-बेटे नंगे शरीर एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे थे। बिस्तर पर अभी भी दिन भर और रात की चुदाई के निशान मौजूद थे।

