रात माँ बनी बेटे की रंडी कहा मेरी चूत भर दे - पूरा पढ़े

बारिश की रात माँ-बेटे अकेले घर में, फिर माँ ने खोले कपड़े और बेटे से कहा 'मेरी चूत भर दे'। जो हुआ उसे पढ़कर आपका दिल धड़क उठेगा।

लेखक: Aman Thakur7 मिनट पढ़ने में
रात माँ बनी बेटे की रंडी कहा मेरी चूत भर दे - पूरा पढ़े

राज 22 साल का एक हैंडसम नौजवान था, जिसकी हाइट 6 फीट थी और बॉडी एकदम फिट और एथलेटिक। उसके चेहरे पर हल्की दाढ़ी और गहरे भूरे आँखें थीं, जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लें। वह अपनी माँ के साथ एक छोटे से अपार्टमेंट में रहता था, जहाँ उसके पिता की 5 साल पहले मौत हो गई थी।

उसकी माँ सुनीता, 43 साल की एक बेहद खूबसूरत और भरी-भरी औरत थीं। उनका फिगर 36-32-38 का था, गोरी-गुलाबी त्वचा जैसे दूध में हल्दी मिला हो। उनके लंबे काले बाल कमर तक आते थे, और उनके स्तन इतने बड़े और भारी थे कि किसी भी blouse में पूरी तरह समा नहीं पाते थे। उनकी सबसे खास चीज थी उनकी मोटी, गोल-मटोल गांड जो हर साड़ी में उभरकर दिखती थी।

राज अक्सर अपनी माँ को देखकर सोचता था कि पापा कितने भाग्यशाली थे जिन्हें इतनी खूबसूरत औरत मिली थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसकी सोच बदलने लगी थी। वह अब माँ को सिर्फ माँ नहीं, बल्कि एक औरत के नजरिए से देखने लगा था। रात को जब सुनीता सोने के लिए तैयार होतीं, तो उनका हल्का पारदर्शी नाइटी में वो उभरता हुआ शरीर राज को बेहोश कर देता था।

एक शुक्रवार की रात थी। बाहर बारिश हो रही थी और गरजने की आवाजें आ रही थीं। सुनीता ने हल्के नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे शरीर पर बिल्कुल चिपकी हुई थी। blouse काफी गहरा था और उनके मोटे स्तनों की गहराई साफ दिख रही थी। वो सोफे पर बैठी टीवी देख रही थीं, जब राज घर आया।

"अरे राज, आ गए बेटा? आज इतनी देर कैसे हो गई?" सुनीता ने मुस्कुराते हुए पूछा। उनका पल्लू सरक गया था और उनकी गोरी कमर दिख रही थी। राज उन्हें देखता ही रह गया। उसकी नजरें माँ के शरीर पर टिकी हुई थीं।

"वो... मम्मी... library में project का काम कर रहा था," राज ने कहा और माँ के पास आकर बैठ गया। उसकी नजर बार-बार माँ के blouse के अंदर जा रही थी, जहाँ से उनके स्तनों का कुछ हिस्सा दिख रहा था।

सुनीता ने नोटिस किया कि बेटा कुछ अलग व्यवहार कर रहा है। "क्या हुआ राज? कुछ परेशान लग रहे हो? आजकल तुम बहुत चुप-चुप रहने लगे हो," उन्होंने प्यार से राज के बालों में हाथ फेरते हुए पूछा। उनका हाथ गर्म और नरम था।

राज ने हिम्मत जुटाई और धीरे से कहा, "मम्मी... मुझे कुछ बात करनी है... बहुत जरूरी..." उसकी आवाज कांप रही थी और दिल जोरों से धड़क रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरुआत करे।

"बोलो ना बेटा, माँ हूँ तुम्हारी... कुछ भी हो, मुझे बता सकते हो," सुनीता ने चिंता से उसका चेहरा अपने हाथों में ले लिया। उनकी आँखों में वो ममता थी जो हर माँ की होती है, लेकिन साथ में एक अलग सी चमक भी थी जो राज को और पागल कर रही थी।

राज ने गहरी सांस ली और बोला, "मम्मी... मैं... मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ... लेकिन ये प्यार अब बदल गया है... मैं आपको... आपको एक औरत के तौर पर देखने लगा हूँ..." उसने आँखें बंद कर लीं, डरते हुए कि माँ क्या प्रतिक्रिया देंगी।

सुनीता का चेहरा पहले तो सफेद पड़ गया, फिर गहरा लाल हो गया। उनके हाथ कांपने लगे। "राज... ये... ये क्या बोल रहे हो... मैं तुम्हारी माँ हूँ... ये गलत है बेटा..." उनकी आवाज भी कांप रही थी, लेकिन उनके अंदर कुछ और भी हो रहा था जो सालों से दबा हुआ था।

"मुझे पता है मम्मी... लेकिन मैं क्या करूँ... हर रात मैं सो नहीं पाता... आपकी यादों में... आपके शरीर के बारे में सोचकर..." राज रुक गया। उसने हिम्मत करके माँ का हाथ पकड़ लिया और अपने दिल पर रखा। "देखो, कैसे धड़क रहा है आपके लिए..."

सुनीता ने अपना हाथ नहीं हटाया। वो महसूस कर सकती थीं कि बेटे का दिल कितनी तेज़ी से धड़क रहा था। उनकी आँखों में आँसू आ गए। "राज... 5 साल हो गए तुम्हारे पापा को गए... मैंने कभी किसी और मर्द को नहीं देखा... मेरी body... मेरी जरूरतें... सब दबी हुई हैं..." वो रोने लगीं।

राज ने माँ को अपनी बाहों में भर लिया। "मम्मी, प्लीज रो मत... मैं हूँ ना... मैं आपकी हर जरूरत, हर ख्वाहिश पूरी करूँगा... आप मेरी queen हो... मैं आपकी सेवा करना चाहता हूँ..." वो माँ के कान में फुसफुसाया, "हर तरह से..."

सुनीता ने आँखें बंद कर लीं। उनके शरीर में एक अजीब सी गर्माहट फैल रही थी। वो जानती थीं कि ये गलत है, बहुत गलत है, लेकिन उनकी दबी हुई desires उन्हें काबू में नहीं रख पा रही थीं। "तुम... तुम सच में मुझे चाहते हो बेटा? मुझे... इस तरह?" उन्होंने शर्माते हुए पूछा।

"बहुत ज्यादा मम्मी... आपके बिना मैं जी नहीं सकता..." कहते हुए राज ने धीरे से माँ के गाल पर किस कर दिया। फिर दूसरे गाल पर, फिर उनकी गर्दन पर। सुनीता कांप उठीं, लेकिन उन्होंने रोका नहीं।

सुनीता ने धीरे से अपने हाथों से राज का चेहरा उठाया। उनकी आँखों में वो चमक थी जो सालों से गायब थी। "तो फिर... आज रात... माँ तुम्हें वो सब देगी जो तुम चाहते हो..." उन्होंने धीमी, कांपती हुई आवाज में कहा।

राज का दिल खुशी से फूलने लगा। उसने माँ को उठाया और अपने बेडरूम में ले गया। वहाँ उसने लाइट्स डिम कर दीं और माँ को बिस्तर पर बैठने के लिए कहा। सुनीता शर्मा रही थीं, उनके हाथ कांप रहे थे।

राज घुटनों के बल बैठ गया माँ के सामने। वो धीरे से उनकी साड़ी का पल्लू खींचने लगा। साड़ी धीरे-धीरे खुलती गई और सुनीता का गोरा, गुलाबी पेट सामने आ गया। उनकी नाभि इतनी गहरी और सेक्सी थी कि राज उसे चूमने लगा।

"आह्ह... राज... धीरे बेटा..." सुनीता ने अपने हाथों से बेटे के सिर को सहलाया। उनके शरीर में एक अजीब सी कम्पन हो रही थी। वो जानती थीं कि ये गलत था, लेकिन उनका शरीर बगावत कर रहा था।

राज ने धीरे-धीरे माँ की साड़ी पूरी उतार दी। अब सुनीता सिर्फ blouse और petticoat में थीं। राज ने पीछे हाथ ले जाकर blouse के hook खोलने शुरू किए। एक-एक करके तीनों hook खुले और blouse हट गया। अंदर सफेद रंग की lace bra में उनके मोटे, गोल-गोल स्तन कैद थे, जिनका आधा हिस्सा ऊपर से झाँक रहा था।

"वाह मम्मी... आपकी चूचियाँ तो... इतनी बड़ी और सुंदर..." राज की आँखें चौड़ी हो गईं। उसने कभी सोचा नहीं था कि माँ के स्तन इतने परफेक्ट होंगे। वो दोनों हाथों से उन्हें दबाने लगा, मसलने लगा।

सुनीता ने शर्माते हुए कहा, "बेटा... ये... ये तुम्हारे लिए हैं... जो चाहो करो..." उन्होंने आँखें बंद कर लीं। उनके चेहरे पर शर्मिंदगी और उत्तेजना का मिश्रण था। वो अपने बेटे के सामने नंगी होने जा रही थीं, और ये बात उन्हें और भी ज्यादा horny कर रही थी।

राज ने bra का hook खोला और धीरे से हटा दिया। दोनों स्तन आजाद हो गए। गुलाबी निप्पल कड़े हो चुके थे, जैसे छोटे-छोटे अंगूर हों। राज ने एक स्तन को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे मुँह में ले लिया। वो जोर-जोर से चूसने लगा, काटने लगा।

"आह्ह... हाँ राज... ऐसे ही चूसो... मम्मी को बहुत मजा आ रहा है..." सुनीता अपने सिर को पीछे की तरफ झुका दियां। उनके मुँह से हल्की-हल्की आहें निकल रही थीं। वो अपने बेटे के सिर को अपने स्तनों पर दबा रही थीं, जैसे कि वो दूध पी रहा हो।

राज दूसरे स्तन को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को घुमा रहा था। फिर वो दूसरे स्तन पर गया और उसे भी वैसे ही चूसने लगा। सुनीता पागल हो रही थीं। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी, जो उनके petticoat में एक damp patch बना रही थी।

15 मिनट तक स्तनों की सेवा करने के बाद राज नीचे की तरफ बढ़ा। उसने माँ का petticoat ऊपर उठाया। सुनीता ने अपनी कमर उठा दी ताकि वो निकाल सके। petticoat हटते ही सामने का नजारा देखकर राज स्तब्ध रह गया।

सुनीता ने आज हल्के गुलाबी रंग की lace panty पहनी थी, जो उनकी clean shaved चूत के ऊपर एक गीला stain बनाए हुए थी। "मम्मी... आप... आप तो पहले से ही गीली हो..." राज ने उनकी जाँघों पर किस किया।

"शर्म आ रही है बेटा... मैं... मैं बहुत दिनों से... तड़प रही हूँ..." सुनीता ने अपना चेहरा हाथों में छिपा लिया। वो इतनी horny थीं कि उनकी चूत से पानी रिस रहा था। राज ने उनके हाथ हटाए और उनके होंठों पर किस कर दिया।

"कोई शर्म नहीं मम्मी... ये तो अच्छी बात है... आपको मजा आएगा..." कहते हुए राज ने माँ की panty को धीरे से नीचे खींचा। सुनीता ने अपनी टाँगें थोड़ा फैलाईं ताकि वो निकल सके। अब माँ पूरी तरह नंगी थीं, और वो इतनी खूबसूरत लग रही थीं कि राज का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

सुनीता की चूत perfectly shaved थी, गुलाबी और चिकनी। बीच से एक पतली लकीर जिसके ऊपर छोटा सा क्लिटोरिस था। राज ने अपनी उंगली से वहाँ टच किया तो सुनीता कांप उठीं। "उफ्फ... बेटा... वहाँ मत... बहुत sensitive है..."

राज ने कहा, "मम्मी, relax रहो... मैं आपको सिर्फ प्यार दे रहा हूँ..." वो धीरे से उनकी टाँगें और फैलाने लगा। सुनीता ने पूरी तरह अपने आप को खोल दिया, अब उनकी चूत पूरी तरह खुली थी, जैसे एक खिला हुआ फूल।

राज ने अपनी जीभ निकाली और माँ की चूत पर लिक किया। "आआह्ह्ह... राज... क्या कर रहे हो..." सुनीता की पूरी बॉडी सिहर गई। वो कभी सोच भी नहीं सकती थीं कि उनका अपना बेटा उनकी चूत चाटेगा।

राज ने पूरी जीभ से चूत की लकीर पर चाटना शुरू किया, ऊपर से नीचे तक। फिर वो क्लिटोरिस पर आ गया और उसे चूसने लगा, जीभ से घुमाने लगा। सुनीता पागल हो रही थीं, वो अपनी कमर हवा में उठा-उठा कर बेटे के मुँह में चूत दे रही थीं।

"हाँ राज... और चूसो... मम्मी की चूत चाटो... आह्ह... बहुत अच्छा लग रहा है... ऐसे ही... हाँ..." सुनीता के मुँह से अश्लील शब्द निकल रहे थे, जो उन्हें और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहे थे। वो अब पूरी तरह एक औरत बन चुकी थीं, माँ नहीं।

राज ने अपनी एक उंगली पर थूक लगाया और धीरे से चूत के अंदर डाल दी। "उम्म्म... बेटा... और अंदर..." सुनीता ने कमर उठाई। उनकी चूत बहुत टाइट थी, लेकिन बहुत गीली भी। उंगली आसानी से अंदर-बाहर होने लगी।

फिर राज ने दूसरी उंगली भी डाल दी। अब दो उंगलियों से वो माँ की चूत को चोद रहा था, और साथ में क्लिटोरिस चूस रहा था। ये double attack सुनीता को बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उनका पहला orgasm आने वाला था सालों बाद।

"राज... मम्मी आ रही है... मैं... मैं झड़ने वाली हूँ... आह्ह... हाँ... और तेज़..." सुनीता ने तकिया मुँह में दबा लिया और जोर से चीखीं। उनकी पूरी बॉडी कांप उठी, चूत से पानी की धार निकलने लगी। राज ने सब चाट लिया, एक भी बूँद बर्बाद नहीं होने दी।

सुनीता थककर बिस्तर पर गिर गईं, सांसें तेज़ चल रही थीं। "बेटा... इतने सालों बाद... मुझे इतना मजा आया... तुम... तुम बहुत अच्छे हो..." उन्होंने प्यार से राज के सिर को सहलाया।

राज ने अपने कपड़े उतारे। जब उसने अपना underwear हटाया तो उसका 7 इंच का मोटा, लंबा लंड हवा में तani हुई थी, जिसके सिरे पर पहले से ही precum की बूंदें लगी हुई थीं। सुनीता ने उसे देखा तो उनकी आँखें चौड़ी हो गईं।

"ये... ये तो... तुम्हारे पापा से भी बड़ा है बेटा..." सुनीता ने लंड को हाथ में पकड़ा। वो इतना गर्म और कड़क था कि उनके हाथ कांपने लगे। "मम्मी... ये आज से सिर्फ आपका है... जब चाहें इस्तेमाल करें..." राज ने कहा।

सुनीता उठकर बैठ गईं। उन्होंने लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और उसे देखने लगीं। "कितना सुंदर है... गुलाबी सिरा... मोटा... लंबा..." कहते हुए उन्होंने उसे अपने मुँह में ले लिया।

"उफ्फ... मम्मी..." राज के मुँह से सिसकी निकली। सुनीता बहुत अच्छे से चूस रही थीं। वो पूरा लंड अपने गले तक ले रही थीं, जीभ से घुमा रही थीं, और फिर ऊपर नीचे कर रही थीं। उनका थूक लंड पर लग रहा था जिससे वो और भी चिकना हो गया था।

राज ने माँ के बाल पकड़े और धीरे-धीरे उनके मुँह में धक्के देने शुरू किए। "मम्मी... आपका मुँह बहुत गर्म है... बहुत टाइट..." वो कहता रहा। सुनीता ने भी साथ दिया और उसकी गति में साथ देने लगीं।

10 मिनट तक मुँह चुदाई के बाद राज ने माँ को रोका। "मम्मी... अब मैं आपकी चूत में आना चाहता हूँ... प्लीज..." वो बेगारह हो रहा था। सुनीता ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ बेटा... आ जाओ... मम्मी तुम्हारी इंतज़ार कर रही है..."

राज ने माँ को बिस्तर पर लिटाया। उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं। अब सुनीता की खुली हुई चूत उसके सामने थी, जो अभी भी orgasm के बाद गीली थी। राज ने अपने लंड की नोक माँ की चूत के मुँह पर रखी।

"मम्मी... मैं अंदर जा रहा हूँ... relax रहना..." राज ने धीरे से दबाया। लंड की नोक अंदर घुसी। सुनीता की चूत बहुत टाइट थी, लेकिन इतनी गीली थी कि लंड फिसलता हुआ अंदर जा रहा था।

"आह्ह... बेटा... और अंदर डालो... पूरा डाल दो..." सुनीता ने कमर उठाई। राज ने एक जोरदार धक्का दिया और पूरा 7 इंच का लंड माँ की चूत में समा गया। दोनों एक साथ चीखे — "आआह्ह्ह..."

"मम्मी... आपकी चूत बहुत टाइट है... बहुत गर्म..." राज ने माँ के स्तनों को दबाते हुए कहा। उसने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। हर thrust के साथ "पच पच" की आवाज आ रही थी।

सुनीता पागल हो रही थीं। उनके बड़े स्तन उछल-उछल कर हिल रहे थे। "चोदो राज... मम्मी को चोदो... जोर से चोदो... मेरी चूत फाड़ दो... आह्ह... हाँ... ऐसे ही..." वो अश्लील बातें कर रही थीं जो राज को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थीं।

राज की speed बढ़ती जा रही थी। वो अब पूरी ताकत से माँ की चूत चोद रहा था। बिस्तर की कड़कड़ाहट, दोनों की सांसों की आवाज़, और चूत-लंड की आवाज़ मिलकर एक सेक्सी symphony बना रही थी।

"मम्मी... मैं आपको पीछे से भी चोदना चाहता हूँ... आपकी गांड देखनी है..." राज ने कहा। सुनीता ने शर्माते हुए कहा, "हाँ बेटा... जैसे चाहो वैसे करो... मैं आज तुम्हारी हूँ..."

राज ने लंड बाहर निकाला और माँ को doggy style में घुमा दिया। अब सुनीता अपने हाथों और घुटनों पर थीं, और उनकी मोटी, गोल-मटोल गांड सामने थी। राज ने दोनों हाथों से उनके गाल फैलाए तो बीच में उनकी गुलाबी चूत और छोटा सा गांड का छेद दिखा।

"क्या गांड है मम्मी... इतनी मोटी और सुंदर..." राज ने उस पर थप्पड़ मारा। "आह्ह... बेटा... मत मारो... शर्म आ रही है..." सुनीता ने कहा, लेकिन उनकी आवाज में वो चाहत थी।

राज ने लंड को फिर से चूत पर रखा और एक ही धक्के में पूरा अंदर कर दिया। इस angle में लंड और भी गहरा जा रहा था। सुनीता के मुँह से जोर की आह निकली।

"आह्ह... पीछे से और अंदर जा रहा है... बहुत गहरा... राज... मेरी जान..." सुनीता ने अपनी गांड पीछे धकेलनी शुरू कर दी ताकि और गहरा ले सकें। राज ने उनके बाल पकड़े और जोर-जोर से चोदने लगा।

"मम्मी... आपकी चूत बहुत मस्त है... मैं रोज़ चोदूँगा आपको..." राज ने कहा। वो एक हाथ से माँ की कमर पकड़े था और दूसरे हाथ से उनकी गांड के थप्पड़ मार रहा था।

"हाँ बेटा... रोज़ चोदना... सुबह-शाम चोदना... जब मन करे चोदना... मैं तुम्हारी रंडी हूँ... तुम्हारी वेश्या हूँ..." सुनीता पूरी तरह बदल चुकी थीं। वो अब सिर्फ एक औरत थीं जो चुदना चाहती थीं।

25 मिनट तक लगातार चोदने के बाद राज अपने चरम पर था। उसका लंड फड़कने लगा था। "मम्मी... मैं आने वाला हूँ... कहाँ निकालूँ?"

सुनीता ने पीछे मुड़कर कहा, "अंदर बेटा... मम्मी की चूत में ही डाल दो... मुझे फिर से माँ बनाओ... पूरा अपना पानी मेरी चूत में भर दो..."

राज ने आखिरी जोरदार धक्के लगाए और माँ की चूत के सबसे गहरे हिस्से में अपना गाढ़ा, गर्म वीर्य छोड़ दिया। दोनों एक साथ चीखे, दोनों एक साथ झड़े।

राज का लंड माँ की चूत में फड़कता रहा, और वीर्य भरता रहा। वो इतना ज्यादा था कि बाहर भी निकलने लगा। सुनीता ने अपनी चूत को कसकर पकड़ा ताकि एक भी बूंद बाहर ना जाए।

कुछ देर बाद राज ने लंड बाहर निकाला। सुनीता की चूत से वीर्य बह रहा था, लेकिन वो संतुष्ट थीं। राज माँ के पास गिर गया और उन्हें अपनी बाहों में भर लिया।

"मम्मी... ये रात मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात थी..." राज ने कहा।

सुनीता ने बेटे के माथे पर किस किया। "मेरी राज... तुमने मुझे फिर से औरत बना दिया... अब मैं तुम्हारी हूँ... हमेशा... जब चाहो मेरी चूत ले लेना... मेरी गांड ले लेना... मेरा मुँह ले लेना... मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ..."

दोनों एक-दूसरे में लिपटकर सो गए। बाहर बारिश अब भी हो रही थी, लेकिन अंदर दो शरीर एक हो चुके थे, एक ऐसे रिश्ते में जो अब कभी नहीं टूटेगा।

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