ट्रेनर ने मालकिन को रंडी बनाकर उसकी चूत चोदी - हिंदी सेक्स स्टोरी
पति सिंगापुर गया और शादीशुदा मालकिन ने यंग जिम ट्रेनर को घर बुला लिया। पहले धीरे-धीरे मनाया, फिर ट्रेनर ने उसे पूरी तरह अपनी रंडी बना लिया। रातभर उसकी टाइट चूत में वीर्य भरा, गांड फाड़ी और इतना चोदा कि सुबह चल भी नहीं पाई।
रियानश को पहली बार कियारा मालहोत्रा ने जब अपने बंगले बुलाया था, तब वह सिर्फ एक और अमीर क्लाइंट लगती थी। 26 साल की, शादीशुदा, पैसे वाली औरत। जिम में हमेशा महंगे कपड़ों में आती, वर्कआउट के दौरान बहुत कम बोलती और जाते-जाते सिर्फ एक ठंडी मुस्कान देकर निकल जाती।
लेकिन उस शाम सब कुछ अलग था। जब रियानश ने बंगले का बड़ा दरवाजा खटखटाया, तो कियारा ने खुद खोला। बाल खुले थे, चेहरे पर हल्की थकान और कुछ भूख थी। उसने सिर्फ एक ढीला सफेद शर्ट पहना था (शायद उसके पति का) और नीचे काले लेगिन्स। शर्ट के दो बटन खुले होने की वजह से उसकी गहरी छाती साफ दिख रही थी।
“आज अकेली हूँ,” उसने सीधे आँखों में देखकर कहा। “पति दो दिन के लिए सिंगापुर गया है। सोचा घर पर वर्कआउट कर लूँ तो बेहतर रहेगा।”
रियानश अंदर घुसा। घर में बहुत शांति थी।
वर्कआउट शुरू हुआ। लेकिन आज कियारा का ध्यान व्यायाम में नहीं था। स्क्वाट करते समय वह जानबूझकर अपनी गाँड रियानश की जांघों से टकराती। जब वह उसे प्लैंक में होल्ड कराता, तो उसकी साँस उसकी गर्दन पर गिरती। एक बार तो वह संतुलन खोने का नाटक करके सीधे उसकी छाती पर गिर गई। रियानश के मजबूत हाथ उसकी कमर पर लग गए।
कुछ पल दोनों ऐसे ही रहे। कियारा ने ऊपर देखा। उसकी आँखों में शर्म नहीं थी… सिर्फ एक साफ सवाल था। “तुम मुझे छूते हो ना कभी-कभी जिम में… जब कोई नहीं देखता?”
रियानश का गला सूख गया।“हाँ।”
“आज कोई नहीं है,” कियारा ने धीरे से कहा। “और मैं… छूना चाहती हूँ।”
उसने खुद रियानश का हाथ पकड़ा और अपनी शर्ट के अंदर रख लिया। उसकी नंगी, भारी, गर्म छाती रियानश की हथेली के नीचे थी। निप्पल पहले से सख्त।
रियानश ने इस बार नियंत्रण नहीं खोया। वह धीरे से उसकी छाती मसलने लगा। कियारा की आँखें बंद हो गईं। वह शर्ट के अंदर ही उसकी दोनों छातियों को उठा-उठाकर वजन तौल रहा था। कभी अंगूठे से निप्पल दबाता, कभी हल्के से पिंच करता। कियारा की साँसें तेज होने लगीं।
“नीचे… और नीचे,” उसने फुसफुसाकर कहा।
रियानश का हाथ उसकी लेगिन्स के अंदर चला गया। उँगलियाँ पहले उसकी चिकनी चूत के ऊपर फिरीं… फिर दो उँगलियाँ अंदर चली गईं। कियारा बुरी तरह गीली थी।
“मैं रोज रात अकेली सोती हूँ,” कियारा ने आँखें बंद किए हुए कहा। “मेरा पति जब आता है भी तो जल्दी खत्म कर देता है। और मैं… भूखी रह जाती हूँ।”
रियानश ने उँगलियाँ और तेज कीं। कियारा की कमर उसके हाथ के साथ हिलने लगी। वह अब शर्ट के बटन खुद खोल रही थी। शर्ट फर्श पर गिरी। फिर लेगिन्स।
अब वह बिल्कुल नग्न उसके सामने खड़ी थी। गोरी त्वचा पर हल्के रोंगटे खड़े थे। छातियाँ भारी और असली। नीचे हल्के बालों वाली चमकती चूत।
रियानश ने उसे उठाया और मास्टर बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटाया। लेकिन खुद ऊपर नहीं चढ़ा।
वह उसके पैरों से शुरू किया। टखनों को चूमा। फिर पिंडलियाँ। फिर अंदरूनी जांघें। जब उसकी जीभ पहली बार उसकी चूत पर पड़ी, तो कियारा ने मीठी सी आवाज निकाली।
रियानश ने जल्दी नहीं की। वह बहुत देर तक बस चाटता रहा। कभी धीरे, कभी तेज। कभी भगशेफ को मुँह में लेकर गहरी साँस लेता, तो कभी जीभ अंदर डालकर घुमाता। कियारा के हाथ उसके बालों में थे।
जब वह पहली बार झड़ी, तो उसके पैर काँप रहे थे। रियानश रुका नहीं। दूसरी बार जब झड़ी, तो वह लगभग रोने जैसी आवाज में बोल रही थी, “अब काफी है… अब अंदर आओ… प्लीज…”
तभी रियानश उठा। कपड़े उतारे। कियारा ने पहली बार उसका लिंग देखा। आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं। वह खुद उसके पास आई। हाथ से पकड़ा। वजन तौला। फिर धीरे से मुँह में लिया। बस चखा। फिर छोड़ दिया।
“डालो,” उसने बस इतना कहा। रियानश ने उसकी टाँगें फैलाईं। लिंग का मोटा सिरा उसकी भीगी चूत पर रखा… और बहुत धीरे से धकेलना शुरू किया। कियारा की भौंहें सिकुड़ गईं। आधा अंदर गया तो वह रुक गई।
“रुको… थोड़ा… बस एक सेकंड…”
रियानश रुका रहा। पूरी तरह अंदर जाने के बाद भी वह हिला नहीं। बस अंदर पड़ा रहा। दोनों की धड़कनें एक-दूसरे को महसूस हो रही थीं।
फिर उसने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया। लंबे, गहरे धक्के। हर बार पूरा निकलता और फिर जड़ तक जाता। कियारा पहले सिर्फ सह रही थी… फिर उसकी कमर भी उठने लगी।
थोड़ी देर बाद वह खुद बोलने लगी, “और गहरा… हाँ… ऐसे… मुझे लग रहा है जैसे तुम बहुत अंदर हो… मेरे पति ने कभी इतना गहरा नहीं चोदा…”
रियानश ने उसकी एक टाँग अपने कंधे पर रखी और रफ्तार बढ़ा दी। अब धक्के में बल था। कियारा की छातियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं।
जब रियानश ने महसूस किया कि वह करीब है, तो उसने कियारा का चेहरा अपने हाथों में लिया। “मेरी आँखों में देख… जब अंदर छोड़ूँ तो देख।”
कियारा ने देखा और जब रियानश आखिरकार गहरे जाकर अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में छोड़ने लगा, तो कियारा भी उसके साथ झड़ गई। इस बार इतनी जोर से कि उसकी आँखें बंद हो गईं और मुँह से सिर्फ एक लंबी काँपती साँस निकली।
बाद में दोनों लेते रहे। रियानश अभी भी उसके अंदर था। लंबी चुप्पी के बाद कियारा बोली, “कल रात मत जाना। पूरे दो दिन मेरे पति नहीं हैं। और मैं… पूरी रात भूखी नहीं रहना चाहती।”
रियानश ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। “कल रात मैं तुझे चोदूँगा कियारा। लेकिन जल्दी में नहीं। इतने धीरे और इतने लंबे समय तक… कि तू अपने पति का नाम तक भूल जाए।”
कियारा की आँखों में हल्की मुस्कान आई। उसने रियानश के होंठों पर हल्का सा किस किया और फुसफुसाई, “तो फिर… कल रात दरवाजा खुला रहेगा। और रियानश… इस बार मुझे रुलाना।”
अगली रात जब रियानश पहुँचा तो कियारा दरवाजे पर ही खड़ी थी। इस बार सिर्फ एक लंबी सफेद शर्ट में… नीचे कुछ नहीं। बाल गीले थे। त्वचा चमक रही थी।
दोनों ने कुछ नहीं कहा। रियानश अंदर आया। दरवाजा लॉक किया। फिर बस उसे देखता रहा।
कियारा की आँखें थोड़ी नम थीं। “मैं दिनभर सोचती रही कि यह कितना गलत है… कि मैं शादीशुदा हूँ… कि मेरे पति ने मुझ पर भरोसा किया है…”
रियानश पास आया। “और?”
कियारा की आवाज काँपी, “और… मैं बार-बार गीली हो जाती रही।”
रियानश ने उसे चूमा। बहुत धीरे। जैसे चख रहा हो। उसकी जीभ कियारा के होंठों को खोलती गई। कियारा का शरीर धीरे-धीरे उसके साथ चिपकता गया। शर्ट के अंदर रियानश के हाथ चले गए… सीधी नंगी कमर पर, फिर ऊपर उठकर भारी छातियों को थाम लिया।
वह शर्ट के साथ ही उसे उठाकर बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटाया। शर्ट खोल दी। कियारा अब पूरी तरह खुली हुई थी।
रियानश ने कपड़े नहीं उतारे। वह बस उसके जिस्म को देखता रहा। आँखों से छूता रहा। फिर हाथ से।
उसने एक-एक करके उसकी दोनों छातियों को उठाया, वजन महसूस किया, अंगूठे से निप्पल घुमाए। जब उसने मुँह झुकाकर एक निप्पल को मुँह में लिया तो कियारा की उँगलियाँ उसके बालों में घुस गईं।
वह देर तक बस यही करता रहा। कभी बाईं छाती, कभी दाईं। कभी हल्के दाँत लगाता, कभी सिर्फ जीभ से गोल-गोल घुमाता। कियारा के मुँह से छोटी-छोटी आवाजें निकल रही थीं।
फिर रियानश नीचे गया। उसने कियारा की टाँगें धीरे से खोलीं। पहले सिर्फ साँस से छुआ। फिर जीभ निकाली। पहला स्पर्श इतना हल्का था कि कियारा की कमर काँप गई। रियानश ने जल्दी नहीं की। वह बहुत देर तक बस बाहर-बाहर चाटता रहा। कभी भगशेफ को होंठों में लेकर हल्के से चूसता… तो कभी छोड़ देता।
कियारा अब सिसकने लगी थी। “रियानश… मत सताओ… प्लीज…”
लेकिन वह सताता रहा। जब आखिरकार उसने दो उँगलियाँ अंदर डालीं और जीभ भगशेफ पर तेजी से चलानी शुरू की, तो कियारा जोर से काँपी। उसका पानी रियानश के मुँह और ठोड़ी पर लग गया। रियानश रुका नहीं। दूसरी बार… तीसरी बार… जब तक कियारा की टाँगें काँप-काँप कर उसके कंधों से लग नहीं गईं।
तभी वह उठा। कपड़े उतारे। कियारा ने आँखें खोलीं और उसे देखा। उसका लिंग सख्त, भारी और थोड़ा ऊपर की तरफ मुड़ा हुआ था। वह खुद अपने हाथ से उसे पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी। “इसे अंदर रखो… अब और बर्दाश्त नहीं होगा।”
रियानश ने उसकी कलाई पकड़ी और हाथ हटाया। फिर खुद लिंग लेकर उसके छेद पर रखा… और बहुत धीरे से धकेलना शुरू किया।
कियारा की भौंहें तन गईं। आधा अंदर जाने पर रियानश रुक गया। “देख मुझे,” उसने कहा।
कियारा ने आँखें खोलीं। रियानश ने बाकी का लिंग भी धीरे-धीरे अंदर धकेल दिया। अब वह जड़ तक था। दोनों की साँसें एक-दूसरे से मिल रही थीं। वह हिला नहीं। बस अंदर पड़ा रहा। कियारा की चूत उसके चारों तरफ धड़क रही थी।
“मैं अभी निकलूँ तो?” रियानश ने पूछा।
कियारा ने सिर हिलाया। आँखों में आँसू थे। “नहीं… मत निकलना। कभी मत निकलना।”
फिर रियानश ने पेलना शुरू किया। धीमे। बहुत गहरे। हर धक्का ऐसा जैसे वह उसकी कोख को छू रहा हो। कियारा पहले सिर्फ लेटी सहती रही… फिर उसकी टाँगें रियानश की कमर के चारों तरफ लिपट गईं। फिर उसकी बाँहें उसकी गर्दन पर।
थोड़ी देर बाद वह खुद बोलने लगी… आवाज में रोना घुला हुआ, “और अंदर… हाँ… ऐसे ही… मुझे लगता है जैसे तुम मुझे भर रहे हो… मेरे पति ने कभी इतना गहरा नहीं…”
रियानश ने उसकी एक टाँग अपने कंधे पर चढ़ाई और थोड़ी रफ्तार बढ़ाई। अब गीली आवाजें आने लगीं। कियारा की छातियाँ हर धक्के के साथ काँप रही थीं। रियानश ने झुककर एक निप्पल फिर से मुँह में ले लिया और काटते हुए पेलता रहा।
रात बीतती गई।
कभी वह कियारा को ऊपर कर देता… तो कियारा खुद धीरे-धीरे अपने आप को उसके लिंग पर उठाने-गिराने लगती। बाल उसके चेहरे पर बिखरे होते, मुँह थोड़ा खुला, आँखें आधी बंद। कभी रियानश पीछे से लेटता… एक हाथ से उसकी छाती मसलता, दूसरे हाथ से भगशेफ सहलाता और धीरे-धीरे गाँड में प्रवेश करता। कियारा पहले तन जाती… फिर धीरे-धीरे खुद पीछे की तरफ धकेलने लगती।
एक बार दोनों ने बातें भी कीं… चुदाई के बीच में।
“अगर मैं गर्भवती हो जाऊँ तो?” कियारा ने हाँफते हुए पूछा। रियानश ने गहरा धक्का मारते हुए जवाब दिया, “तो पालना। मेरे बच्चे को। तेरे पति के नाम से।” कियारा की आँखों से आँसू बह निकले। वह हँसते-हँसते रोने लगी… और और जोर से अपने आप को उसके लिंग पर दे मारने लगी।
जब रियानश को लगा कि अब और कंट्रोल नहीं होगा, तो उसने कियारा को फिर से नीचे किया। उसकी दोनों टाँगें फैलाईं… लगभग मोड़ दिया… और बहुत तेज, बहुत गहरे धक्के मारने लगा।
कियारा अब बोल नहीं पा रही थी। सिर्फ आवाजें निकाल रही थी। उसकी चूत लगातार काँप रही थी। अचानक वह जोर से तन गई… इतनी जोर से कि रियानश को भी लग गया। उसका पानी फिर से निकला… इस बार इतना कि चादर गीली हो गई।
उसी पल रियानश भी टूट गया। उसने कियारा के चेहरे को दोनों हाथों में पकड़ा, आँखों में आँखें डालीं और गहरे जाते हुए अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया। एक-एक बूँद करके। लंबे समय तक। कियारा की चूत उसे निचोड़ती रही।
बाद में लंबे समय तक दोनों हिल नहीं पाए। रियानश अभी भी अंदर था। कियारा की उँगलियाँ उसकी पीठ पर धीरे-धीरे घूम रही थीं।
कियारा ने आखिरकार आँखें खोलीं। उसके होंठ काँप रहे थे। “मैं बर्बाद हो गई हूँ… ना?”
रियानश ने उसके माथे पर होंठ रखे। “नहीं। तू अब मेरी हो गई है।”
कियारा हल्के से मुस्कुराई। आँखों में अभी भी आँसू थे। उसने रियानश को और पास खींचा और फुसफुसाई,
“तो फिर… इस बार निकलना मत। पूरी रात अंदर ही रहना। मुझे महसूस होता रहे… कि मैं भरी हुई हूँ।”
रियानश ने जवाब में सिर्फ उसे और गहरा चूमा… और अपना लिंग हल्के से उसके अंदर और धकेल दिया।
बाहर रात अभी बहुत बाकी थी। अंदर एक शादीशुदा औरत अपने यंग ट्रेनर की बाँहों में लेटी हुई थी — पूरी तरह खुली, पूरी तरह भरी हुई, और पहली बार… पूरी तरह संतुष्ट।
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