रात भर चूचियाँ दबाते हुए भाभी के दोनों छेद फैला दिए देवर ने
रात भर भाभी के दोनों छेद इतने फैल गए कि सुबह तक बंद ही नहीं हुए! देवर ने छाती दबाते-दबाते ऐसा किया कि भाभी चीखने पर मजबूर हो गई…

घर में आज सिर्फ दो लोग थे। भाई साहब ऑफिस के तीन दिन के टूर पर गए हुए थे। भाभी पूनम और देवर रोहित अकेले रह गए थे। पूनम 26 साल की थी। गोरी, भरी हुई बॉडी, बड़ी चूचियाँ, पतली कमर और गोल मटोल गांड। रोहित 22 का था, कॉलेज का लड़का।
शाम के 7 बज रहे थे। पूनम किचन में चाय बना रही थी। उसने हल्की सी नाइटी पहनी हुई थी। नीचे की रोशनी से उसके बदन की आकृति साफ झलक रही थी। रोहित पीछे से आया और बिना कुछ कहे उसके कंधे पर हाथ रख दिया।
“भाभी… अकेली तो लग रही हो आज,” उसने धीमे से कहा।
पूनम मुस्कुराई, “तेरा भाई गया है ना… तो अकेली ही हूँ।”
रोहित का हाथ धीरे-धीरे नीचे सरका। कमर पर रुक गया। “भाभी… मैं कुछ दिनों से तुम्हें देख रहा हूँ। बहुत याद आती हो।”
पूनम ने गर्दन घुमाकर देखा। “रोहित… ये क्या बातें कर रहा है तू?”
रोहित ने हिम्मत करके नाइटी के अंदर हाथ बढ़ा दिया और सीधे उसकी चूची पकड़ ली। जोर से दबाया। पूनम की साँस रुक गई।
“आह्ह… रोहित… छोड़…” लेकिन आवाज में मना करने वाला जोर नहीं था।
रोहित ने दूसरी चूची भी पकड़ ली। दोनों हाथों से मसलने लगा। निप्पल को उंगलियों से घुमाया। पूनम की पीठ उसके सीने से चिपक गई।
“भाभी… तुम्हारी ये बड़ी चूचियाँ… रात भर सताती हैं मुझे,” रोहित ने कान में कहा।
पूनम की आँखें बंद हो गईं। “पागल हो गया है तू… तेरा भाई…”
“भाई तीन दिन बाद आएगा। तब तक तुम मेरी हो,” रोहित ने नाइटी ऊपर उठा दी। पूनम की नंगी बड़ी चूचियाँ बाहर आ गईं। रोहित ने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरी को हाथ से मसल रहा था।
पूनम कराह उठी। “रोहित… जोर से चूस… आाह्ह…”
रोहित ने नाइटी पूरी उतार दी। पूनम अब सिर्फ टाइट काली पैंटी में थी। रोहित ने उसे काउंटर पर बैठा दिया। पैंटी साइड में सरकाई और उंगली उसकी गीली चूत में डाल दी।
“भाभी… इतनी गीली… मेरे लिए?” रोहित ने पूछा।
पूनम शर्म से लाल हो गई लेकिन बोली, “चुपचाप कर जो करना है…”
रोहित ने अपनी पैंट खोली। मोटा लंड बाहर निकला। पूनम की आँखें बड़ी हो गईं। रोहित ने लंड उसकी चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर धकेल दिया।
“आाह्ह रोहित… धीरे… तू बड़ा हो गया है,” पूनम ने कराहते हुए कहा।
रोहित ने कमर पकड़ ली और जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। पूनम की बड़ी चूचियाँ हिल-हिल कर उसके चेहरे से टकरा रही थीं। रोहित उन्हें मुँह में ले-लेकर चूस रहा था।
“भाभी की चूत कितनी टाइट है… भाई साहब ऐसे नहीं चोदते होंगे,” रोहित बोला।
“चुप रह… और जोर से… हाँ वहाँ… आाह्ह,” पूनम खुद बोल रही थी।
20 मिनट तक किचन में ही खड़े-खड़े चोदता रहा। पूनम का पहला ऑर्गैज्म आ गया। उसकी टाँगें काँपने लगीं। रोहित ने लंड बाहर निकाला।
“बेडरूम चल भाभी। आज रात पूरी तेरी है।”
कमरे में जाकर रोहित ने पूनम को बिस्तर पर लिटा दिया। उसने पैंटी पूरी उतार दी। फिर पूनम के पैर फैलाए और बिना रुके फिर से लंड अंदर डाल दिया। इस बार मिशनरी में। पूनम के दोनों हाथ उसके सिर के ऊपर थे। रोहित उसकी बड़ी चूचियों को मसलते, थप्पड़ मारते और चूसते हुए जोर-जोर से ठोक रहा था।
“रोहित… और गहरा… मेरी चूचियाँ दबा… आाह्ह,” पूनम पागल हो रही थी।
दूसरा ऑर्गैज्म आया। रोहित ने स्पीड और बढ़ा दी। पूनम की कराहें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।
आखिर में रोहित ने पूछा, “अंदर छोड़ूँ भाभी?”
“हाँ… अंदर ही… भर दे मुझे,” पूनम ने आँखें बंद करके कहा।
रोहित ने लास्ट के जोरदार धक्के मारे और पूनम की चूत में गाढ़ा वीर्य उड़ेल दिया। दोनों हांफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे।
रोहित ने पूनम की चूची को सहलाते हुए कहा, “ये तो सिर्फ शुरुआत है भाभी। आज रात तेरी गांड भी लेनी है। और अगले दो दिन… जब तक भाई साहब नहीं आते।”
पूनम ने आँखें खोलीं। शर्म और मजे से भरी नजरों से देखा। “रोहित… गांड में भी…?”
रोहित मुस्कुराया और उसकी चूची पर हल्का थप्पड़ मारा। “हाँ। थोड़ा आराम कर। फिर तैयार हो जाना। आज तेरी गोल गांड में भी मेरा लंड जाएगा।”
पूनम की साँसें तेज थीं। लेकिन उसने धीमे से सिर हिला दिया।
“जैसी तेरी मर्जी… देवर जी।”
थोड़ा आराम करने के बाद रोहित ने पूनम से कहा, “अब पेट के बल लेट जा भाभी।”
पूनम बिस्तर पर पेट के बल लेट गई। उसकी गोल मटोल गांड ऊपर उठी हुई थी। रोहित ने दोनों हाथों से उसकी गांड को जोर-जोर से मसलना शुरू किया। थप्पड़ मारे। पूनम की गांड लाल होने लगी।
“रोहित… जोर से मार… आाह्ह,” पूनम ने तकिया दबाते हुए कहा।
रोहित ने तेल निकाला और उसके गांड के छेद पर अच्छी तरह लगाया। उंगली से अंदर तक धीरे-धीरे मला। पूनम सिसक रही थी। फिर रोहित ने अपना लंड उसकी गांड की दरार में रखकर देर तक रगड़ा। जब लंड अच्छी तरह चिकना हो गया तो उसने सिर छेद पर रखा और धीरे से दबाव दिया।
“आह्ह रोहित… दर्द… धीरे…” पूनम की आवाज काँप रही थी।
“सहन कर भाभी… अभी पूरा जाएगा,” रोहित ने कहा और एक जोर का धक्का मारा।
आधा लंड उसकी गांड में चला गया। पूनम की आँखों से आँसू आ गए। रोहित रुका, फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेलता गया। पूरा मोटा लंड उसकी गांड में समा गया।
“अब पूरा अंदर है भाभी… तेरी गांड में,” रोहित ने कहा।
फिर बहुत धीमे धक्के शुरू किए। पूनम की कराहें दर्द और मजे से मिली हुई थीं। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ने लगी। रोहित एक हाथ से उसकी बड़ी चूचियों को नीचे से मसल रहा था।
“रोहित… अब थोड़ा तेज कर… आाह्ह,” पूनम बोल बैठी।
रोहित ने स्पीड बढ़ा दी। गांड पर थप्पड़ मार-मार कर जोर-जोर से ठोकने लगा। पूनम की बड़ी चूचियाँ बिस्तर से रगड़ खा रही थीं। उसका ऑर्गैज्म गांड में लंड रहते हुए ही आ गया। चूत से पानी निकल आया।
रोहित ने और 15 मिनट लगातार गांड चोदी। आखिर में जोर से धक्के मारकर उसकी गांड में ही गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। निकालने पर सफेद वीर्य छेद से बाहर आने लगा।
दोनों पसीने से तरबतर थे। रोहित ने पूनम को घुमाया और उसकी बड़ी चूचियों को फिर से मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा, काटने लगा, थप्पड़ मारने लगा।
“रोहित… फिर से खड़ा हो गया तेरा…” पूनम हैरान थी।
रोहित मुस्कुराया। “तेरी ये भारी चूचियाँ और गांड देखकर बार-बार खड़ा हो जाएगा भाभी।”
उसने पूनम को ऊपर बैठा लिया। पूनम ने खुद लंड अपनी चूत में डाल लिया और उछल-उछल कर बैठने लगी। उसकी बड़ी चूचियाँ रोहित के चेहरे पर गिर-गिर रही थीं। रोहित उन्हें मुँह में लेकर चूस रहा था।
“और तेज बैठ भाभी… अपनी चूचियाँ मेरे मुँह में डाल,” रोहित बोला।
पूनम पागलों की तरह उछल रही थी। उसके कई छोटे-छोटे ऑर्गैज्म आ गए। फिर रोहित ने उसे डॉगीस्टाइल में कर दिया। एक हाथ से बाल पकड़े, दूसरे से चूची मसलते हुए पीछे से जोर-जोर से ठोकने लगा।
रात भर दोनों थकने का नाम नहीं ले रहे थे। कभी मिशनरी में चूचियाँ दबा-दबा कर, कभी साइड से, कभी पूनम को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े। हर बार रोहित उसकी बड़ी चूचियों को मसलता, थप्पड़ मारता, मुँह में लेता।
आखिरी राउंड में रोहित ने फिर से उसकी गांड ली। इस बार पूनम खुद गांड ऊपर करके मांग रही थी।
“रोहित… गांड में डाल… जोर से… आाह्ह,” वो चिल्ला रही थी।
रोहित ने थोड़ा जोर लगाकर लंड गांड में घुसा दिया और फुल स्पीड में ठोकने लगा। पूनम की कराहें पूरे घर में गूंज रही थीं। आखिर में रोहित ने एक बार चूत में और एक बार गांड में वीर्य छोड़ दिया।
सुबह होते-होते दोनों पूरी तरह थक चुके थे। पूनम रोहित की बाँहों में लेटी हुई थी। उसकी बड़ी चूचियाँ अभी भी उसके हाथ में थीं।
“रोहित… तेरा भाई जब आएगा तब क्या होगा?” पूनम ने धीमे से पूछा।
रोहित ने उसकी चूची को दबाते हुए कहा, “तब हम नॉर्मल बन जाएँगे। लेकिन जब भी भाई साहब ऑफिस जाएंगे या बाहर होंगे… मैं तेरे कमरे में आ जाऊँगा। और तू भी मेरे पास आ सकती है। तेरी ये बड़ी चूचियाँ और गांड अब सिर्फ मेरी हैं।”
पूनम मुस्कुराई और उसके लंड को हाथ में ले लिया जो फिर से हल्का सख्त हो रहा था।
“जैसी तेरी मर्जी देवर… जब भी बुलाना। मैं तैयार रहूँगी।”
बाहर सुबह की रोशनी फैल रही थी। घर फिर से शांत हो गया था। लेकिन भाभी और देवर के बीच जो तगड़ा और गन्दा सेक्स शुरू हुआ था, वो अब छुपाकर चलता रहने वाला था।

