सोई माँ की चुचियाँ दबाकर चूसी
सोई हुई माँ की सिल्क नाइटी में मैंने अपना हाथ डाल दिया। उनकी भरी-भरी चुचियाँ जोर से दबाई, गांड की दरार में लंड रगड़ा और अपना गर्म वीर्य उनकी नाइटी और पैंटी पर छोड़ दिया।
हम तीनों — मैं (आर्यन), मेरी माँ प्रिया और पापा — हिमाचल के एक सुंदर हिल स्टेशन पर 4 दिन की फैमिली ट्रिप पर गए थे। दिन भर घूमने-फिरने के बाद हम होटल पहुंचे। लेकिन वहाँ रूम की कमी थी, इसलिए हमें सिर्फ एक King Size बेड मिल सका। पापा ने कहा, “चलो, कोई बात नहीं, एक ही बेड में सो लेंगे।”
बेड काफी बड़ा था। पापा दाईं तरफ लेट गए। बीच में माँ और बाईं तरफ मैं सोया। कमरा ठंडा था। बाहर हल्की बर्फ गिर रही थी और अंदर सिर्फ एक छोटी नाइट लैंप जल रही थी, जिसकी हल्की पीली रोशनी कमरे में फैली हुई थी।
माँ प्रिया 42 साल की थीं, लेकिन उनकी खूबसूरती अभी भी जवान थी। गोरा रंग, लंबे घने काले बाल, बड़े-बड़े भरे हुए 36D के टाइट स्तन, पतली कमर और सबसे आकर्षक — उनकी मोटी, गोल, नरम, रसीली और भारी गांड। उन्होंने हल्की गुलाबी रंग की बहुत पतली सिल्क नाइटी पहनी हुई थी। नाइटी उनके शरीर से इतनी चिपकी हुई थी कि उनके टाइट काले अंडरवियर की हर लाइन, गांड की गहरी दरार, गोलाई और आगे चूत का हल्का उभार साफ-साफ दिख रहा था।
रात के 1:50 बज चुके थे। पापा थकान की वजह से गहरी नींद में सो चुके थे। उनकी साँसें भारी और नियमित थीं।
मैं माँ के बगल में लेटा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पूरा शरीर उत्तेजना से काँप रहा था। मैंने धीरे-धीरे माँ की तरफ करवट ली। उनकी सिल्क नाइटी से हल्की मीठी खुशबू आ रही थी।
सबसे पहले मैंने बहुत आहिस्ते से अपना दायाँ हाथ उनकी कमर पर रख दिया। उनकी कमर नरम, गरम और रेशमी थी। मैं कुछ देर तक बस उंगली से उनकी कमर को सहलाता रहा। फिर धीरे-धीरे हाथ ऊपर ले गया और उनके बाएँ स्तन को हल्के से छू लिया।
सिल्क नाइटी के पतले कपड़े के ऊपर से भी स्तन की भारीपन, नरमी और गर्मी हाथ में आ रही थी। मैंने धीरे-धीरे पूरे स्तन को हाथ में भर लिया और बहुत आहिस्ते से दबाने लगा। उंगली से उनके निप्पल को घुमाने लगा। निप्पल धीरे-धीरे सख्त हो रहे थे।
माँ की साँसें थोड़ी भारी हो गईं, लेकिन वे अभी भी गहरी नींद में थीं।
मेरा लंड अब पतलून में पूरी तरह तन गया था। मैंने धीरे से पैंट का बटन खोला और अपना गर्म, मोटा, 7 इंच का लंड बाहर निकाल लिया। फिर मैं माँ की तरफ और करीब सरक गया।
मैंने अपना मुँह उनकी गांड के पास ले जाया। पहले नाक से अच्छे से सूंघा। सिल्क और अंडरवियर की मीठी खुशबू मुझे पागल कर रही थी। फिर मैंने जीभ निकाली और नाइटी के ऊपर से ही उनकी गांड की दरार पर लंबी-लंबी चाटें मारनी शुरू कर दी। जीभ से उनकी गांड को चाटते हुए मैंने मुँह से उनकी गांड को हल्का-हल्का दबाया भी। उनकी नरम, गर्म और भारी गांड मेरे मुँह में आ रही थी।
माँ हल्के से करवट बदलीं और मेरी तरफ मुड़ गईं। उनकी एक टाँग मेरी टाँग पर आ गई। उन्होंने अनजाने में अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया।
अब मैं और आगे बढ़ गया। मैंने उनका पूरा शरीर अपनी तरफ खींच लिया। हम आमने-सामने थे। मैंने अपना मुँह आगे बढ़ाया और पूरा मुँह उनके दाएँ स्तन पर सटा दिया। सिल्क नाइटी के ऊपर से ही मैं उनका पूरा स्तन मुँह में लेने की कोशिश कर रहा था। जोर-जोर से चूस रहा था, निप्पल को जीभ से घुमा रहा था और दाँत से हल्का-हल्का काट रहा था।
मेरा लंड अब उनकी चूत के पास था। मैंने नाइटी को आगे से थोड़ा ऊपर किया और अपना गर्म, सख्त लंड उनकी चूत पर रख दिया। सिल्क और अंडरवियर के पतले कपड़े के ऊपर से मैं लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। लग रहा था जैसे लंड उनकी यौनि के छेद को छू रहा हो और नाइटी फाड़कर अंदर घुस जाएगा।
मैंने हाथ नीचे डाला और उनकी पूरी चूत को हाथ में भर लिया। अंडरवियर के ऊपर से चूत को दबाया, उंगली से दरार को ऊपर से नीचे तक सहलाया और किनारे से अंदर उंगली डालकर छूने लगा। उनकी चूत हल्की गीली होती महसूस हो रही थी।
फिर मैं पीछे गया। उनकी गांड से पूरी तरह चिपककर लंड को गांड की दरार में जोर से रगड़ने लगा। एक हाथ से स्तन दबाते हुए, दूसरे हाथ से गांड सहलाते हुए मैं तेजी से हिल रहा था।
माँ अब हल्के-हल्के कराह रही थीं। उनकी साँसें तेज हो चुकी थीं।
मैं फिर सामने आया। एक हाथ से स्तन चूसते हुए, दूसरे हाथ से चूत सहलाते हुए लंड को उनकी चूत पर रगड़ रहा था।
आखिरकार मैं झड़ने वाला था। मैंने माँ की गांड को कसकर पकड़ा, लंड को गांड की दरार और चूत के बीच दबाया और गर्म-गर्म मोटा वीर्य उनकी सिल्क नाइटी पर छोड़ दिया।
मेरा पूरा माल उनकी गांड की दरार, चूत और नाइटी पर फैल गया। उनकी नाइटी अब मेरे वीर्य से पूरी तरह गीली और चिपचिपी हो चुकी थी। मैं थककर लेट गया। माँ की देह मेरे वीर्य से सनी हुई थी।
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