मालिश करते माँ की चुचियाँ और गुलाबी चूत चोदी
माँ की बड़ी-बड़ी चुचियाँ जोर से दबाईं और उनकी गुलाबी चिकनी चूत में अपना मोटा लंड घुसा दिया। थकी हुई माँ की तड़प को बेटे ने अपनी गर्म सांसों और जोरदार धक्कों से शांत किया। माँ की चीखें और गांड हिलाने का मजा देखकर आपका लंड भी खड़ा हो जाएगा। पूरी रात माँ-बेटे की गर्मागर्म चुदाई की सच्ची कहानी।
मेरा नाम राहुल है, उमर 21 साल। मेरे पापा एक बड़े बिजनेसमैन हैं। उनका एक्सपोर्ट का बिजनेस है, इसलिए वो अक्सर विदेश टूर पर रहते हैं। घर में ज्यादातर मैं और मेरी माँ सुनीता ही होते हैं। माँ की उमर 39 साल है, लेकिन उनका फिगर देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।
माँ का रंग दूध जैसा गोरा है, लंबे घने काले बाल, बड़ी-बड़ी गोल और भरी हुई चुचियां (36D), पतली कमर, चौड़ी कमर के नीचे मोटी-मोटी गोल गांड और लंबी-चौड़ी टांगें। उनकी गांड इतनी उभरी हुई और नरम है कि साड़ी के ऊपर से भी उसका शेप साफ दिखता है।
उस दिन पापा 15 दिनों के यूरोप टूर पर चले गए थे। शाम को माँ मार्केट से वापस आईं। वो बहुत थकी हुई लग रही थीं। उन्होंने उस दिन पतली सिल्की पिंक कलर की साड़ी पहनी थी और अंदर सिर्फ पतला सा मैचिंग पिंक ब्लाउज। ब्लाउज इतना टाइट और लो-कट था कि ब्रा के ऊपर से उनकी बड़ी-बड़ी चुचियों का आधा हिस्सा बाहर झांक रहा था।
माँ घर आकर सीधे सोफे पर बैठ गईं और बोलीं, “बेटा राहुल, आज मम्मी बहुत थक गई है। मार्केट में घूमते-घूमते पीठ में ऐठन आ गई है। आज रात सोने से पहले अच्छे से मालिश कर देना मम्मी को।”
मैं तुरंत तैयार हो गया। तेल की बोतल लेकर माँ के बेडरूम में पहुंचा। माँ पहले से बेड पर उल्टा लेटी हुई थी। उन्होंने मुड़कर कहा, “आ गया तू? अच्छे से मालिश करना बेटा, जोर से दबाकर।”
मैं उनके पास बैठ गया। माँ की पिंक साड़ी में उनकी मोटी गांड का शेप साफ दिख रहा था। मैंने पहले उनकी पीठ पर तेल डाला और मलने लगा। थोड़ी देर बाद माँ ने कहा, “बेटा ब्लाउज खोल दे, तेल अच्छे से लगेगा।”
मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया और ब्रा का हुक भी खोल दिया। अब माँ ऊपर से पूरी तरह नंगी लेटी थीं। उनकी दोनों बड़ी-बड़ी चुचियां दोनों तरफ फैली हुई थीं। मैंने हिम्मत करके उन फैली हुई चुचियों को भी दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया। माँ के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली – “उम्म्म...”
मैं उनकी पीठ और कमर मलता रहा। फिर मैंने साड़ी का नाड़ा धीरे-धीरे नीचे खिसका दिया। अंदर पेटीकोट नहीं था, सिर्फ एक बहुत टाइट रेड कलर की लेस वाली पैंटी थी। पैंटी इतनी टाइट थी कि उनकी मोटी चूत के दोनों लिप्स के बीच घुस गई थी और पतली लेस से गांड की छोटी गुलाबी छेद भी साफ दिख रही थी।
मैं उनकी मोटी गांड पर तेल लगाकर जोर-जोर से मसलने लगा। फिर मैंने पीछे से उनकी दोनों टांगें थोड़ी फैला दीं और खुद उनकी पीठ के ऊपर चढ़ गया। अब मैं बिल्कुल उनकी गांड के ऊपर बैठा था। झुक-झुककर मालिश कर रहा था।
जितनी बार मैं आगे झुकता, मेरा सख्त लंड उनकी मोटी गांड पर जोर-जोर से रगड़ खाता। लंड एकदम तनकर पत्थर जैसा टाइट हो गया था। मैंने अपने हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उनकी दोनों तरफ फैली हुई बड़ी-बड़ी चुचियों को भी जोर से दबाने लगा। माँ अब सिसकारियां भर रही थीं – “आह्ह्ह... राहुल...”
मालिश करते हुए मैंने अपनी उंगली तेल में डुबोकर उनकी गांड की छोटी गुलाबी छेद पर फेरना शुरू किया। फिर धीरे से उंगली अंदर डालने की कोशिश की। जैसे ही उंगली अंदर घुसी, माँ तड़पकर उठ बैठीं।
“राहुल! बेटा ये क्या गंदी हरकत कर रहा है तू? मैं तेरी माँ हूं!”
मैं घुटनों पर बैठ गया और बोला, “माँ प्लीज... आप बहुत सेक्सी हो। मुझे आपसे बहुत प्यार है और हवस भी। बस एक बार मौका दे दो मम्मी...”
माँ कुछ पल चुप रहीं। मैंने आगे बढ़कर उनके होठों पर गहरी किस कर दी। पहले उन्होंने थोड़ा विरोध किया, लेकिन जैसे ही मैं उनके निचले होठ चूसने लगा, वो पिघल गईं। हम दोनों जोरदार किस करने लगे।
मैंने उनकी चुचियों को जोर से दबाया और निप्पल्स को चूसने लगा। माँ अब खुलकर moan कर रही थीं – “आह्ह्ह... राहुल बेटा... बहुत अच्छा लग रहा है...”
मैंने उनकी रेड पैंटी उतार दी। उनकी चूत पूरी तरह गीली और चमक रही थी। मैं नीचे झुककर उनकी चूत चाटने लगा। माँ ने मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत मेरे मुंह पर रगड़ दी – “बेटा जोर से चाट... मम्मी की चूत चूस ले... आह्ह्ह!”
माँ एक बार झड़ गईं। फिर उन्होंने मेरा लंड बाहर निकाला। उन्होंने वही तेल अपनी हथेली पर लिया और मेरे लंड पर लगाकर अच्छे से मालिश करने लगीं। उनकी नरम उंगलियां मेरे मोटे लंड पर ऊपर-नीचे घूम रही थीं। माँ बोलीं, “बेटा तेरा लंड बहुत मोटा है... तेल लगा लेती हूं ताकि मम्मी की चूत में आसानी से घुस जाए और दर्द न हो...”
माँ ने कुछ देर तक मेरे लंड की मालिश की। अब मेरा लंड तेल से चमक रहा था और और भी सख्त हो गया था। फिर मैंने माँ को जोर से पकड़कर अपनी गोद में बिठा लिया। उनका नंगी शरीर मेरे सीने से चिपक गया। मैंने ऊपर से ही कहा, “माँ... कूदो मेरे लंड पर...”
माँ ने मेरे टाइट लंड को पकड़ा और अपनी चूत के ऊपर रखकर धीरे-धीरे बैठ गईं। जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी चूत में घुसा, माँ की आंखें बंद हो गईं और मुंह से निकला – “उफ्फ्फ... उम्म्म... आह्ह्ह...”
माँ मेरे लंड पर बैठकर अपनी मोटी गांड को हिलाने लगीं। मैंने अपना लंड पूरी गहराई तक उनकी चूत में फंसाया और उन्हें गोद में बिठाकर तेजी से चोदने लगा। मेरा पूरा लंड उनकी चूत की गहराई तक घुस रहा था। माँ की आवाज आने लगी – “उफ्फ... उम्म्म... आह्ह्ह... बेटा... बहुत गहरा जा रहा है...”
मैंने तेल की बोतल हाथ में ली और माँ की टाइट गोल चुचियों पर मलना शुरू कर दिया। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर था और वो जोर से अपनी गांड हिला रही थीं। मैंने पूरा तेल उनकी चुचियों पर लगा दिया। माँ ने आह भरते हुए कहा, “बेटा... आज इन टाइट चुचियों को दबा के ढीला कर दे...”
मैंने एक हाथ से अपनी लंड उनकी चूत में डाले रखा और दूसरे हाथ से उनकी पूरी चुचियों को हाथों में भर-भर के जोर से दबाने लगा। उनकी चुचियों की गरमाहट और चूत की गर्मी मुझे पागल कर रही थी। मेरा लंड और भी सख्त हो गया था।
माँ भी चुचियों के दबाव के बाद और जोर से “आह्ह्ह... धीरे... लेकिन जोर से...” करने लगीं। मैंने झुककर उनकी चुची पर जोर से चाटा और कहा, “रंडी... मेरा लंड तेरी चूत में है... गांड हिलाते रह...”
माँ ने मेरी बात सुनकर और जोर से अपनी गांड हिलानी शुरू कर दी। वो ऊपर-नीचे और आगे-पीछे तेजी से हिल रही थीं। मैं भी नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था। कमरे में चूत और लंड की चप-चप की आवाज के साथ माँ की चीखें गूंज रही थीं।
आखिर में माँ ने जोर से चिल्लाया, “बेटा... मैं झड़ने वाली हूं... साथ में आ जा...” मैंने भी आखिरी जोरदार धक्के मारे और माँ की चूत के अंदर ही अपना सारा गर्म वीर्य छोड़ दिया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। माँ ने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा, “बेटा आज से ये हमारा सीक्रेट है। जब भी मन करे, मम्मी को चोद लेना। मम्मी भी बहुत दिनों से अकेली थी।”
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