बेटे ने रंडी माँ की टाइट चूत पापा के बिस्तर पर रात भर चोदी
बेटे ने अपनी रंडी माँ की टाइट चुत और गाँड पापा के बिस्तर पर रात भर चोदी। पतली सिल्क साड़ी और काली चड्डी में माँ को किचन स्लैब से लेकर बेडरूम तक हर जगह कुदा। सुबह 4 बजे तक बिना रुके चुदाई का कच्चा बवाल। पढ़ते ही खड़ा हो जाएगा।

घर में अकेला सन्नाटा था। पापा ऑफिस चले गए थे और कॉलेज की छुट्टी होने की वजह से राहुल भी घर पर ही था। उम्र 23 साल, लंबा-तगड़ा, जिम जाता था इसलिए बदन सख्त। उसका लंड मोटा और लंबा था, जो पैंट के अंदर ही तनने लगा था।
माँ रसोई में थी। नाम मीना, उम्र 42 लेकिन लगती 32 की। बदन एकदम हॉट। कमर पतली और वहाँ से गाँड एकदम चौड़ी और गोल। चुचियाँ बड़ी-बड़ी और कड़क, गुलाबी निप्पल वाले। चुत पर घने बाल और गाँड की दरार में भी हल्के बाल।
आज उसने एकदम पतली सेक्सी सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी। इतनी पतली कि अंदर की काली चड्डी और चुचियों की शेप साफ़ दिख रही थी। साड़ी गीली-सी चमक रही थी और उसके बदन पर चिपक रही थी। ब्लाउज भी टाइट और गहरा, जिसमें उसकी कड़क चुचियाँ ऊपर को उछल रही थीं।
राहुल अपने कमरे में था तभी माँ की हल्की हँसी सुनाई दी। दरवाज़ा अधखुला था। वह चुपके से गया और झाँका। माँ फोन पर थी, स्पीकर ऑन।
“हाँ जान… वो ऑफिस चले गए हैं। राहुल भी कॉलेज चला जाएगा सुबह। तुम आ जाना… आज मेरी चुत और गाँड दोनों ले लेना। देखो मैंने क्या भेजा है।”
राहुल का खून उबल गया। उसने देखा माँ ने फोन पर फोटो भेजी थीं—अपनी कड़क चुचियों की, बालों वाली चुत की और गाँड के छेद की क्लोज-अप। साथ में मैसेज: “पति ऑफिस, बेटा कॉलेज… घर खाली। आके जोर से चोदना।”
राहुल ने एकदम से अंदर घुसकर फोन छीन लिया। “ये क्या बकवास है माँ?!”
मीना का चेहरा सफेद पड़ गया। “राहुल… तुम… ये… गलतफहमी है…” “गलतफहमी? ये फोटो क्या हैं? और ये बॉयफ्रेंड कौन है? पापा को बताऊँ अभी?”
माँ ने उसके पैर पकड़ लिए। “नहीं बेटा… प्लीज मत बताना। मैं… मैं अकेली पड़ गई थी। पापा हमेशा बाहर रहते हैं। माफ कर दो।”
राहुल की नज़रें उसकी पतली सिल्क साड़ी पर टिक गईं। साड़ी के अंदर काली चड्डी और गोल गाँड साफ़ झलक रही थी। चुचियाँ ब्लाउज में हिल रही थीं। गुस्सा था लेकिन लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था।
“माफ करूँ? पहले ये साड़ी ऐसे ही रहने दे। आज दोपहर मैं तुझे चोदने वाला हूँ। पापा को नहीं बताऊँगा… लेकिन आज से तू मेरी भी है।”
मीना की आँखों में डर और शर्म दोनों थे, लेकिन इनकार नहीं कर सकी। राहुल ने उसे रसोई में खींच लिया। किचन स्लैब पर लिटा दिया। साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के हुक खोल दिए। बड़ी-बड़ी कड़क चुचियाँ बाहर आ गईं, गुलाबी निप्पल तने हुए।
“इतनी कड़क चुचियाँ… और ये गुलाबी निप्पल,” राहुल ने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। दूसरे को हाथ से मसला। “आाह्ह… राहुल बेटा… ये गलत है…” “चुप रह। तू तो औरों को चुत-गाँड की फोटो भेज रही थी। अब मेरे लंड के नीचे झेल।”
उसने साड़ी ऊपर की और काली चड्डी को साइड में सरकाया। बालों वाली चुत पूरी गीली हो चुकी थी। दो उँगलियाँ अंदर डालकर जोर-जोर से चलायीं। “देख… कितनी गीली हो गई सिर्फ चुचियाँ चूसने से। बॉयफ्रेंड के लिए तैयार रहती है तू।”
मीना कराह रही थी। राहुल ने अपना मोटा लंबा लंड निकाला। कंडोम नहीं पहना। काली चड्डी को पूरा नहीं उतारा, बस साइड में करके एक जोरदार धक्के में पूरा लंड उसकी बालों वाली चुत में धँस गया।
“आाह्ह्ह… बेटा… बहुत मोटा है… धीरे…” “धीरे नहीं। तू तो रात भर चुदवाने वाली थी ना? अब मेरे से चुद।”
राहुल ने स्लैब पर ही जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ माँ की बड़ी गाँड थपथपा रही थी और पतली सिल्क साड़ी सरक रही थी। उसने माँ की दोनों टाँगें फैला दीं और और गहराई तक कुदने लगा। चुचियाँ उसके मुँह में थीं, कभी चूसता कभी काटता।
“बोल… कैसा लग रहा है बेटे का लंड?” “आाह्ह… बहुत बड़ा… और तेज़ चोद… माफ़ कर… लेकिन मत रुक…”
राहुल ने पोजीशन बदली। माँ को उलट दिया, पेट के बल स्लैब पर लिटाया। साड़ी को कमर तक समेट लिया और काली चड्डी को और ऊपर खींचकर उसकी चौड़ी गोल गाँड को दोनों हाथों से फैलाया। पहले थूक लगाया, फिर उँगली गाँड के छेद में डाली।
“ये छेद भी भेजा था तूने फोटो में। अब इसमें भी लंड जाएगा।” “नहीं बेटा… वहाँ मत डाल… आाह्ह…”
लेकिन राहुल ने नहीं माना। धीरे-धीरे अपना मोटा लंड उसकी गाँड में धकेलना शुरू किया। आधा अंदर जाने पर माँ जोर से चिल्लाई। पूरा अंदर करते ही वह काँपने लगी।
“आाह्ह्ह… निकल… दर्द हो रहा है… लेकिन… मत निकाल…”
राहुल ने गाँड पकड़कर जोर-जोर के धक्के दिए। थप्पड़ मार-मारकर चोदने लगा। काली चड्डी अभी भी कमर में अटकी हुई थी और पतली सिल्क साड़ी बिखरी पड़ी थी, जिससे और भी गंदा और हॉट लग रहा था।
दोपहर भर वह रसोई में ही माँ को चोदता रहा। कभी चुत में, कभी गाँड में, कभी मुँह में लंड ठूसकर। माँ की चुचियाँ मसलता, बालों वाली चुत चाटता, गाँड पर थप्पड़ मारता। आखिर में दोनों जगह अंदर ही माल छोड़ दिया।
जब सब खत्म हुआ तो माँ स्लैब पर ही गिरी हुई थी—पसीने से लथपथ, पतली सिल्क साड़ी गंदी और बिखरी हुई, काली चड्डी फटी हुई, चुचियाँ लाल, चुत और गाँड दोनों से उसका पानी और राहुल का माल रिस रहा था।
राहुल ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “आज तो बस शुरुआत है माँ।
कल पापा रात को नहीं आ रहे। कल रात मैं पापा के बिस्तर पर सोऊँगा… और तुझे सुबह 4 बजे तक हर जगह से चोदूँगा।”
माँ ने आँखें बंद करके सिर्फ कराह भरी। इंकार की ताकत उसमें नहीं बची थी।
अगला दिन, पापा ने फोन पर बता दिया था कि मीटिंग लंबी चलेगी और रात को घर नहीं आ पाएँगे। राहुल ने माँ को सुबह ही साफ़ कह दिया था,
“आज रात तू पापा के बिस्तर पर मेरे साथ सोएगी। साड़ी वही पतली सिल्क वाली पहनना… और काली चड्डी भी। पूरी रात मैं तुझे चोदने वाला हूँ।”
मीना ने कुछ नहीं कहा। सिर्फ सिर नीचे किया। शाम होते-होते उसने वही पतली सेक्सी सिल्क साड़ी पहन ली। ब्लाउज टाइट, साड़ी इतनी पतली कि अंदर की काली चड्डी और कड़क चुचियाँ साफ़ झलक रही थीं।
रात के 9 बजे राहुल ने माँ का हाथ पकड़कर पापा के बेडरूम में ले गया। दरवाज़ा बंद किया, लाइट कम की।
“आज रात तू मेरी बीवी है। पापा की जगह मैं लूँगा।”
उसने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया। साड़ी का पल्लू हटाया, ब्लाउज के हुक खोले। बड़ी-बड़ी कड़क चुचियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल पहले से तने हुए। राहुल ने दोनों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसा, काटा, मसला।
“आाह्ह… बेटा… धीरे…” “धीरे नहीं। कल तू रसोई में चुदी थी, आज पूरी रात इस बिस्तर पर चुदेगी।”
उसने साड़ी कमर तक समेट ली और काली चड्डी को साइड में सरकाया। बालों वाली चुत पहले से गीली थी। राहुल ने पहले जीभ से चाटा, चूसा, उँगलियाँ अंदर डालकर जोर-जोर से चलायीं। मीना कराहती रही, कमर उठा-उठाकर उसके मुँह पर दबाव डालती रही।
फिर राहुल ने अपना मोटा लंबा लंड निकाला। कंडोम नहीं। काली चड्डी को पूरा नहीं उतारा, बस साइड करके एक जोरदार धक्के में पूरा लंड उसकी चुत में धँस गया।
“आाह्ह्ह… बहुत गहरा… बेटा…” “सह ले। आज सुबह 4 बजे तक यही होगा।”
राहुल ने मिशनरी में जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ माँ की चौड़ी गाँड बिस्तर पर थपथपा रही थी। उसने माँ की टाँगें कंधों पर चढ़ा दीं और और गहराई तक कुदने लगा। चुचियाँ उसके मुँह में थीं।
थोड़ी देर बाद उसने माँ को घोड़ी बना दिया। साड़ी बिखेर दी, काली चड्डी को और ऊपर खींचा। पीछे से गाँड पकड़कर जोर-जोर से चुत कुदने लगा। थप्पड़ मार-मारकर।
“बोल… कैसी लग रही है बेटे की चुदाई?” “आाह्ह… बहुत जोर से… और तेज़ चोद… माँ की चुत तोड़ दे…”
फिर राहुल ने लंड निकाला, थूक लगाया और धीरे-धीरे माँ की गाँड में धकेलना शुरू किया। आधा अंदर जाते ही मीना चिल्लाई। पूरा अंदर करने पर वह काँपने लगी।
“आाह्ह्ह… गाँड फट जाएगी… निकल… आाह्ह… मत निकाल… जोर से ही चोद…”
राहुल ने गाँड पकड़कर जोरदार धक्के दिए। एक हाथ से माँ की चुची मसलता, दूसरे से बाल खींचता। काली चड्डी अभी भी कमर में अटकी थी और पतली सिल्क साड़ी बिस्तर पर बिखरी पड़ी थी।
रात के 12 बज गए। राहुल ने माँ को उल्टा लिटाया, खुद ऊपर लेट गया। दोनों टाँगें फैला दीं और बारी-बारी से चुत और गाँड दोनों में लंड डालने लगा। कभी चुत, कभी गाँड, कभी दोनों जगह उँगलियाँ। माँ की बालों वाली चुत और गाँड दोनों लाल और सूज चुके थे।
“आाह्ह… बेटा… अब और नहीं… थक गई…” “थकने का समय नहीं। अभी तो आधी रात ही हुई है।”
राहुल ने माँ को ऊपर बिठाया। काउगर्ल में। माँ खुद कमर हिला-हिलाकर लंड ले रही थी। राहुल नीचे से धक्के देता, चुचियाँ चूसता। फिर उल्टा कर दिया—गाँड उसके चेहरे की तरफ। माँ ने खुद लंड मुँह में ले लिया जबकि राहुल नीचे से उसकी चुत और गाँड चाट रहा था।
रात के 2 बज गए। दोनों पसीने से लथपथ थे। राहुल ने माँ को दीवार के सहारे खड़ा किया। एक टाँग उठाई और खड़े-खड़े चुत में जोर-जोर से कुदने लगा। फिर वही पोजीशन गाँड में। माँ की चुचियाँ दीवार से रगड़ खा रही थीं।
“पापा का बिस्तर… पापा की बीवी… और बेटे का लंड,” राहुल ने कान में कहा। “आाह्ह… चुप रह… और चोद… पूरा अंदर डाल…”
आखिरी राउंड में राहुल ने माँ को बिस्तर पर चित लिटाया। टाँगें पूरी फैला दीं। पहले चुत में जोरदार धक्के दिए, फिर गाँड में। आखिर में वापस चुत में डालकर एकदम गहराई में सारा माल छोड़ दिया। माँ भी उसी समय काँपते हुए झड़ गई।
घड़ी में 4:10 बज रहे थे।
दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर पड़े थे। पतली सिल्क साड़ी फटी और गंदी पड़ी थी, काली चड्डी पूरी तरह भीगी और साइड में खिसकी हुई। माँ की चुचियाँ लाल, निप्पल सूजे, चुत और गाँड दोनों से राहुल का माल रिस रहा था।
राहुल ने माँ के बाल सहलाते हुए कहा, “अब तू सिर्फ पापा की नहीं… मेरी भी है। अगली बार जब पापा बाहर होंगे… फिर से यही होगा।”
मीना ने आँखें बंद करके सिर्फ एक शब्द कहा, “हम्म…”
बाहर सुबह होने वाली थी। और पापा के बिस्तर पर माँ-बेटे की वो रात खत्म हो चुकी थी।

