सेक्सी चुची वाली माँ की रंडी चुदाई - बहुत चोदा
रात भर माँ को बांधकर, चुचियों पर बेल्ट मारकर, गांड लाल करके और दोनों छेदों में जोर-जोर से चोदा। माँ चीखती रही लेकिन मजा लेती रही। पूरी रात की गंदी और खतरनाक बीडीएसएम चुदाई। पढ़कर आपका लंड खड़ा हो जाएगा!
बारिश रात के अंधेरे में तेज हो रही थी। पानी की बूंदें खिड़की के शीशे पर जोर-जोर से गिर रही थीं, जिसकी आवाज पूरे घर को और भी ज्यादा रोमांचक और डरावना बना रही थी। घड़ी में समय रात के 1:45 बज चुके थे।
पूरा घर सन्नाटे में डूबा हुआ था। रोहन 24 साल का जवान लड़का था। उसका शरीर अच्छा बना हुआ था और मन पिछले कई सालों से अपनी माँ राधिका के लिए बेकाबू लालच से भरा हुआ था।
आज उसने महीनों की सोच-विचार के बाद आखिरी फैसला ले लिया था कि वो अपनी माँ को पूरी तरह तोड़कर, उनकी सारी इज्जत और माँ वाली छवि को चूर-चूर करके अपनी निजी गुलाम बना लेगा।
राधिका 44 साल की थीं। घर की सख्त और अनुशासन वाली मालकिन थीं। बाहर से वो बहुत शालीन, पढ़ी-लिखी और सम्मान वाली औरत लगती थीं। लेकिन उनका शरीर बेहद कामुक था — गोरा चमकदार रंग, पतली कमर, भारी और गोल-मटोल मोटी गांड, और दो बड़े-बड़े, भारी-भारी दूध जैसे स्तन जो हर हलचल के साथ लहराते थे।
रोहन कई रातों से उनके बारे में सोचकर अपने लंड को हिलाता रहता था। आज पापा 10 दिन के लिए बाहर गए हुए थे, इसलिए रोहन को पूरा मौका मिल गया था।
रोहन चुपके से माँ के कमरे में घुसा। माँ हल्के सफेद नाइट सूट में करवट लेकर सो रही थीं। रोहन ने पहले से तैयार रखा सामान निकाला — ब्लैक हैंडकफ, सिल्क का ब्लाइंडफोल्ड, चमड़े की बेल्ट, छोटा वाइब्रेटर और तेल की बोतल।
वो धीरे से बेड पर चढ़ गया। अचानक माँ के दोनों हाथ पकड़कर बेड के सिरहाने से कसकर बांध दिए। राधिका चौंककर जाग गईं। उनकी आंखें फैल गईं और वो घबरा गईं।
“रोहन! ये क्या बेवकूफी कर रहा है तू? हाथ छोड़ दे अभी! मैं तेरी माँ हूँ!” माँ गुस्से और डर के साथ बोलीं।
रोहन ने उनकी आंखों में सीधे देखते हुए ठंडी और दबंग आवाज में कहा, “आज की पूरी रात तुम मेरी गुलाम हो माँ। अब से तुम्हें सिर्फ ‘जी मालिक’ या ‘हाँ मालिक’ बोलना है। कोई विरोध नहीं चलेगा।”
माँ अभी भी विरोध कर रही थीं। रोहन ने तुरंत सिल्क का ब्लाइंडफोल्ड निकालकर उनकी आंखों पर कसकर बांध दिया। अब माँ पूरी तरह अंधेरे में थीं। वो सिर्फ रोहन की आवाज और हाथों का स्पर्श महसूस कर पा रही थीं।
रोहन ने पहले माँ के नाइट सूट के ऊपर से ही उनके बड़े स्तनों को दबाना शुरू किया। ब्रा के कपड़े के ऊपर से दोनों भारी स्तनों को जोर से पकड़कर मसलने लगा। निप्पल को ब्रा के कपड़े के ऊपर से उंगलियों से दबाता, घुमाता और खींचता रहा। माँ की सांसें तेज हो गईं।
“आह्ह… मालिक… क्या कर रहे हो…” माँ दबी हुई आवाज में बोलीं।
रोहन ने नीचे हाथ डाला और पैंटी के ऊपर से ही चूत को दबाने लगा। पैंटी के कपड़े के ऊपर से उंगलियों से चूत की लाइन पर रगड़ने लगा। माँ की पैंटी धीरे-धीरे गीली होने लगी।
कुछ देर बाद रोहन ने माँ की पैंटी को साइड में सरका दिया। अब माँ की गीली, गुलाबी चूत पूरी तरह खुले में थी। उसने दो उंगलियां अंदर डालीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। उंगलियों को मोड़कर चूत की अंदर की दीवार को रगड़ने लगा। माँ का शरीर तड़पने लगा। उनकी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी।
“मालिक… आह्ह्ह… तेज करो… बहुत अच्छा लग रहा है…” माँ अब खुद कह रही थीं।
रोहन ने उंगलियों की स्पीड बढ़ा दी। कुछ देर बाद माँ का शरीर अचानक कांपने लगा और उनकी चूत से जोर का गर्म पानी फूट निकला। माँ जोर से झड़ गईं। उनका पानी रोहन की उंगलियों, हाथ, जांघों और बेड पर फैल गया।
रोहन ने अपनी उंगलियां माँ के मुंह के पास कीं और बोला, “चूसो गुलाम। अपना पानी चूसकर साफ करो।” माँ ने शर्माते हुए रोहन की उंगलियां मुंह में लीं और अच्छे से चूस लीं।
रोहन ने अब अपना 8.5 इंच का मोटा, नसों वाला, गर्म लंड बाहर निकाला और माँ के होठों पर रख दिया। फिर उनके बाल पकड़कर पूरा लंड मुंह में ठेल दिया। पूरे 15 मिनट तक वो माँ का मुंह चोदता रहा।
कभी गला तक अंदर डालता, कभी बाहर निकालकर माँ के चेहरे, स्तनों और गालों पर रगड़ता। माँ की आंखों से आंसू निकल रहे थे, लेकिन वो लगातार चूसती रही।
15 मिनट बाद रोहन ने माँ को घुटनों के बल कर दिया। पहले उसने माँ की चूत में पूरा लंड घुसाया और जोर-जोर से चोदा। चूत की गर्मी और नमी उसे पागल कर रही थी। काफी देर तक चूत चोदने के बाद उसने लंड निकाला और माँ की गांड के छोटे, टाइट छेद पर रख दिया। “मालिक… धीरे… गांड बहुत टाइट है…” माँ डरते हुए बोलीं।
रोहन ने एक जोरदार झटका मारा और पूरा लंड माँ की गांड में घुसा दिया। माँ जोर से चीख पड़ीं। रोहन ने दोनों छेद — चूत और गांड — बारी-बारी चोदा। पहले चूत में लंबे समय तक, फिर गांड में गहरी चुदाई की।
आखिर में उसने माँ की चूत में पहला गाढ़ा वीर्य भर दिया। फिर थोड़ी देर बाद माँ की गांड में भी पूरा वीर्य छोड़ दिया। दोनों छेद माँ के वीर्य से भरे हुए थे और बाहर रिस रहा था।
रोहन ने अब बेल्ट ली। पहले माँ के हाथों को पीछे से और मजबूती से बांध दिया। फिर बेल्ट से माँ की चुचियों पर हल्के-हल्के लेकिन बार-बार मारना शुरू किया। चटाक! चटाक! माँ की स्तन लाल होने लगे। फिर गांड पर भी कई जोरदार मारें मारीं। माँ की मोटी गांड पूरी लाल हो गई।
“आह्ह्ह… मालिक… दर्द हो रहा है… लेकिन बहुत मजा आ रहा है…” माँ बोलीं।
रोहन ने फिर माँ की लाल हो चुकी गांड और चूत को अच्छे से चाटा। अपना थूक, वीर्य और माँ का पानी सब चाट-चाटकर साफ किया। फिर दोबारा माँ को चोदने लगा।
पूरी रात रोहन माँ को बांधे रखकर, थप्पड़ मारकर, चाटकर, मुंह चोदकर और दोनों छेदों को चोदकर रखा। माँ कई बार झड़ चुकी थीं। सुबह होने से पहले माँ ने थकी हुई लेकिन खुश आवाज में कहा,
“मालिक… अब मैं सच में तुम्हारी गुलाम हूँ। मेरी चूत, गांड और मुंह — सब तुम्हारा है। जब चाहो मुझे बांधकर चोद लेना।”
रोहन ने माँ की लाल गांड पर आखिरी थप्पड़ मारा और बोला, “हाँ माँ, अब ये दोनों छेद रोज मेरे लंड के लिए तैयार रहेंगे।”
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