सेक्सी चाची की टाइट चूत मे भतीजे का लंड

जवान भतीजे और सेक्सी चाची का अंतरंग रात - जब 21 साल के अनूप ने पहली बार अपनी 29 साल की चाची की चूत और गाँड दोनों में अपना लंड डालकर उन्हें प्रेग्नेंट करने की कसम खाई। होटल के कमरे में चाची की टाइट चूत फाड़कर रात भर चोदा।

लेखक: Ankush Maurya7 मिनट पढ़ने में
सेक्सी चाची की टाइट चूत मे भतीजे का लंड

अनूप सिर्फ 21 साल का था। घर में पापा का इकलौता बेटा और बच्चों में भी अकेला। पापा, मम्मी, चाचा और चाची — सब एक ही घर में रहते थे। छोटे चाचा की शादी को चार साल हो चुके थे, लेकिन अभी तक अलग घर नहीं बना था।

चाची… बस 29 साल की। लेकिन देखने में 25 से भी कम लगती थीं। एकदम गोरी, चमकती हुई त्वचा, थोड़ी उभरी हुई टाइट और गोल-गोल चुचियाँ, और हल्की चौड़ी, गोल गाँड। घर में अक्सर हाफ-कटिंग ब्लाउज और कमर में लपटी हुई साड़ी पहनकर घूमती थीं। ब्लाउज इतना टाइट होता था कि काम करते समय उनकी चुचियाँ साफ-साफ हिलती दिखती थीं, और साड़ी इतनी चिपकती थी कि गाँड की शेप पूरी तरह नजर आ जाती थी।

अनूप का लंड उन्हें देखते ही खड़ा हो जाता। पापा और चाचा ऑफिस चले जाते, मम्मी कभी मंदिर, कभी बाजार… घर में अक्सर सिर्फ माँ और चाची रह जाती थीं। अनूप चाची के पीछे-पीछे घूमता। कभी हँसी-मजाक में उनकी गाँड पर हाथ फेर देता, कभी उनकी कमर से चिपककर अपना टाइट पैंट का लंड उनकी गाँड से सटा देता। चाची जानती थीं। उनकी आँखों में हवस साफ दिखती थी। शायद वे भी प्यासी थीं। जवानी में चाचा उन्हें ठीक से नहीं संभालते थे।

अनूप अक्सर उनकी अंडरवियर, उनके ब्लाउज छुपा-छुपाकर निकाल लेता और बाथरूम में उन्हें सूंघते-सूंघते मुठ मारता। माल गिराते वक्त उनका नाम लेता — “चाची… चाची…”

वो उनके लिए फेवरेट चॉकलेट, छोटे-छोटे गिफ्ट लाता। उनसे प्यारी बातें करता। चाची भी उससे बहुत चाहती थीं। धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए थे।

उस दिन पापा और चाचा ऑफिस चले गए। मम्मी मंदिर गई थीं। घर बिल्कुल सुनसान।

किचन में चाची सब्जी काट रही थीं। कमर में साड़ी लपटी हुई, हाफ-कटिंग ब्लाउज। काम करते समय उनकी चुचियाँ धीरे-धीरे हिल रही थीं। गाँड इतनी टाइट और गोल दिख रही थी कि अनूप का लंड पैंट में दर्द करने लगा।

वो दूर से देख रहा था। संभाल नहीं पाया।

पीछे से आया। सीधा कमर पर दोनों हाथ रख दिए और अपना पूरा खड़ा लंड उनकी गाँड से चिपका दिया। मजबूती से पीछे से जकड़ लिया।

चाची चौंक गईं। “अनूप… ये क्या कर रहे हो? छोड़ दो…”

अनूप ने उनके कान में गरम साँस छोड़ते हुए कहा, “चाची… आप बहुत हॉट हो… बहुत सेक्सी… बहुत दिन से देख रहा हूँ। प्लीज मान जाओ… एक बार… मजा आ जाएगा…”

चाची थोड़ी देर चुप रहीं। फिर उनका हाथ पीछे जाकर अनूप के पैंट के ऊपर से उसके टाइट लंड को सहलाने लगा। “तेरे चाचा ठीक से सेक्स नहीं करते… मैं बहुत प्यासी हूँ… मुझे चोद…”

अनूप ने उनका ब्लाउज के हुक खोल दिए। गोरी, टाइट, गोल चुचियाँ हाथ में आ गईं। उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा, निचोड़ने लगा। चाची की साँस तेज़ी से चल रही थी। “आआआह्ह्ह… ऊऊऊम्मम… हाँ… ऐसे दबाओ…”

दूसरे हाथ से उनकी गाँड को मसलने लगा। साड़ी के ऊपर से ही गाँड के दोनों हिस्से को पकड़-पकड़कर निचोड़ रहा था। अपना लंड उनकी गाँड की दरार में रगड़ रहा था।

चाची अब पीछे की तरफ धकेल रही थीं। “बहुत मजा आ रहा है… और दबाओ… मेरी चुचियाँ निचोड़…”

अनूप ने उनकी एक चुची मुँह में ले ली और चूसने लगा। दूसरी को उँगलियों से पिंच कर रहा था। चाची की आँखें बंद हो गई थीं। वो किचन के काउंटर से लिपट गई थीं।

तभी… दरवाज़े की बेल बज गई।

दोनों एकदम अलग हो गए। चाची ने जल्दी से ब्लाउज के हुक लगाए, साड़ी ठीक की। अनूप ने पैंट एडजस्ट की।

मम्मी आ गई थीं।

उस दिन के बाद दोनों के दिल में आग लग चुकी थी। रात को अनूप ने चाची को मैसेज किया। “चाची… आज नहीं हो पाया… लेकिन मैं आपको चोदना चाहता हूँ। पूरी रात।”

चाची ने रिप्लाई किया, “मैं भी… प्लान बनाओ।”

अगले दिन दोनों ने मिलकर प्लान बनाया।

अनूप ने कॉलेज का बहाना बनाया — दोस्तों के साथ नाइट स्टडी। चाची ने मायके के किसी फंक्शन का बहाना बनाया।

शाम 4-5 बजे दोनों घर से निकल गए।

अनूप ने पहले से ही होटल बुक कर रखा था। उसने चाची को कहा था, “आप वही टाइट साड़ी पहनके आना… वही जिसमें आप बहुत सेक्सी लगती हो। आज रात मैं आपको पहली बार हाथ लगाऊँगा… आप मुझे सिखाना… आज मैं आपको इतना चोदूँगा कि आप प्रेग्नेंट हो जाओ…”

होटल के कमरे में अनूप पहले पहुँच गया। नंगा होकर बिस्तर पर बैठ गया। अपना लिंग सहला रहा था।

थोड़ी देर बाद दरवाज़ा खुला। चाची अंदर आई।

कसी हुई साड़ी, आधी-कटिंग ब्लाउस। खुशबू इतनी तेज़ थी कि पूरा कमरा महक उठा। अनूप का लिंग देखते ही पत्थर की तरह तन गया।

होटल रूम का दरवाज़ा बंद होते ही अनूप ने चाची को पीछे से मजबूती से जकड़ लिया। उसके दोनों हाथ उनकी कमर पर थे, और उसका पत्थर जैसा तन हुआ लंड उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी गाँड की दरार में दब गया।

चाची की साँस रुक-सी गई। “अनूप… धीरे…”

लेकिन अनूप अब रुकने वाले मूड में नहीं था। उसने उनकी गर्दन पर गरम साँस छोड़ते हुए कहा, “चाची… आज तक मैंने किसी लड़की को हाथ नहीं लगाया। आज आपको ही पहली बार चोदूँगा। आप मुझे अच्छे से सिखाओ… आज मैं आपको इतना चोदूँगा कि आप प्रेग्नेंट हो जाओ।”

उसने उनकी चुचियों पर जोर का थप्पड़ मारा। एक, दो, तीन। फिर उनका मुँह घुमाकर जोर से चूम लिया। ज़ुबान अंदर डाल दी। चाची भी अब जवाब दे रही थीं। उनकी ज़ुबान अनूप की ज़ुबान से लिपट गई।

अनूप ने उनका ब्लाउज के सारे हुक एक-एक करके खोल दिए। ब्लाउज नीचे गिर गया। गोरी, टाइट, गोल-गोल चुचियाँ नंगी हो गईं। उन पर हल्का सा पिंक निप्पल था। अनूप ने दोनों चुचियों को हाथ में भर लिया और जोर-जोर से दबाने लगा, निचोड़ने लगा। फिर एक चुची मुँह में ले ली और चूसने लगा जैसे कोई बच्चा दूध पी रहा हो। दूसरी चुची को उँगलियों से पिंच कर रहा था।

चाची की आँखें बंद हो गईं। “आआआह्ह्ह… ऊऊऊम्मम… हाँ बेटा… ऐसे चूसो… मेरी चुचियाँ बहुत प्यासी हैं…”

अनूप ने उनकी साड़ी धीरे-धीरे खोल दी। अब चाची सिर्फ पतली लेस वाली चड्डी में थीं। उनकी गाँड इतनी गोल और टाइट थी कि अनूप का लंड दर्द करने लगा। उसने चड्डी को भी नीचे सरका दिया। अब चाची बिल्कुल नंगी थीं।

अनूप ने उन्हें बेड पर लिटाया। खुद उनके ऊपर आ गया। पहले उनकी चूत को देखने लगा। गोरी, हल्की सी गीली, और बिल्कुल साफ। उसने अपनी ज़ुबान निकाली और सीधा उनकी चूत पर रख दी। लंबी-लंबी चाटने लगा। क्लिट को चूसने लगा। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और तेज़-तेज़ हिलाने लगा।

चाची की कमर उठने लगी। “आआआह्ह्ह… अनूप… बस… मैं गीली हो गई… अब लंड डालो…”

अनूप उठा। अपना लंड उनके मुँह के पास ले गया। “पहले चूसो चाची… अच्छे से गीला करो।”

चाची ने मुँह खोला। अनूप का मोटा, लंबा लंड उनके मुँह में घुस गया। वो चूसने लगीं। थूक से गीला करने लगीं। अनूप उनके बाल पकड़कर धीरे-धीरे उनके गले तक धकेलने लगा।

फिर उसने चाची को चारपाई पर घोड़ी बना दिया। पीछे से उनकी गाँड को फैलाया। अपना थूक उनकी चूत पर लगाया। लंड का टोपा उनकी चूत के छेद पर रखकर धीरे-धीरे धकेलने लगा।

चाची चिल्लायीं, “आआआह्ह्ह… दर्द… बहुत बड़ा है तेरा… धीरे…”

लेकिन अनूप ने रुकना नहीं था। एक जोर का धक्का मारा और आधा लंड अंदर घुस गया। फिर दूसरा धक्का… पूरा लंड उनकी चूत में समा गया।

“ऊऊऊम्ममफ्फ… बस… अब हिलाओ…”

अनूप ने पीछे से उनकी कमर पकड़ी और तेज़-तेज़ चोदने लगा। थप-थप-थप की आवाज़ रूम में गूँजने लगी। चाची की चुचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। अनूप ने उनकी चुचियों को पीछे से पकड़ लिया और निचोड़ते हुए चोदता रहा।

थोड़ी देर बाद उसने लंड निकाला और उनकी गाँड के छेद पर रख दिया। “अब गाँड भी दूँगा चाची…”

चाची थोड़ी सी डर गईं, “अनूप… पहली बार… धीरे…”

अनूप ने थूक लगाया, उँगली से छेद खोला, फिर धीरे-धीरे अपना लंड उनकी गाँड में धकेलने लगा। बहुत मुश्किल से आधा घुसाया। चाची ने तकिया मुँह में दबा लिया और चिल्लायीं।

अनूप ने उनकी ही लेस वाली चड्डी उनके मुँह में ठूँस दी ताकि आवाज़ न आए, फिर पूरा लंड उनकी गाँड में धकेल दिया। अब वो उनकी गाँड को भी उसी तरह चोदने लगा जैसे चूत को चोद रहा था। गहराई तक। जोर-जोर से।

चाची की आँखों से आँसू निकल रहे थे, लेकिन वो पीछे से गाँड उठाये हुए थीं। अनूप बीच-बीच में उनकी चूत और गाँड दोनों बदल-बदल कर चोद रहा था। कभी चूत, कभी गाँड। कभी उन्हें ऊपर बिठाकर, कभी उनके ऊपर लेटकर।

रात भर यही चलता रहा। अनूप ने तीन-चार बार झड़ाया। पहली बार उनकी चूत के अंदर, दूसरी बार गाँड के अंदर, तीसरी बार उनके मुँह में। हर बार थोड़ा आराम करके फिर से शुरू कर देता।

सुबह 5 बजे तक अनूप उनकी चुचियों को चूस-चूस कर, उनकी चूत और गाँड दोनों को बेहोश करके चोदता रहा। चाची बिल्कुल थक चुकी थीं। उनका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था। उनकी चूत और गाँड दोनों से अनूप का माल निकल रहा था।

आखिर में दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपट कर सो गए।

सुबह 9 बजे अनूप उठा। चाची अभी भी सो रही थीं। उसने उन्हें उठाया। दोनों ने साथ में नहाया। बाथरूम में भी अनूप ने उनकी चुचियों को दबाया, उनकी चूत में उँगली की, लेकिन अब दोनों बहुत थक चुके थे।

नहा कर, कपड़े पहन कर, थोड़ा नाश्ता करके दोनों होटल से निकल गए।

घर लौटते वक्त अनूप ने चाची के कान में कहा, “चाची… अब ये सिर्फ शुरुआत है। अब हर मौका मिलते ही मैं आपको चोदूँगा… घर में भी… बाथरूम में भी… रात को भी…”

चाची ने बस मुस्कुराते हुए उसका हाथ दबाया। उनकी आँखों में अब भी वही प्यास थी।

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