बहू की टाइट चूत देख सासुर का लंड पागल हो गया
बहू डिल्डो से अपनी टाइट चूत खुजा रही थी। सासुर ने वो नज़ारा देख लिया। सास मर चुकी थी, बेटा टूर पर था। बस फिर क्या… सासुर का लंड पागल हो गया। तेल लगा-लगा कर मसाज की, फिर मुँह, चूत, गाँड और चूचियाँ… दो पूरे दिन लगातार जबरदस्ती चोदा।

सुबह के ग्यारह बज रहे थे। घर में गहरा सन्नाटा था। सास का देहांत हुए छह महीने हो चुके थे। बेटा राहुल ऑफिस टूर पर था और दो पूरे दिन बाद लौटना था। घर में सिर्फ सासुर और बहू प्रिया।
बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था। अंदर से हल्की, दबी हुई कराहें आ रही थीं—
“आह्ह… और गहरा… हाँ… वहीं… धीरे…”
सासुर ने साँस रोककर दरवाजे की दरार से देखा।
प्रिया बिस्तर पर आधी नंगी लेटी थी। उसने सिर्फ एक पतली काली लेस वाली ब्रा पहनी थी, जो उसकी भारी गोल चूचियों को मुश्किल से समेट पा रही थी। निप्पल इतने सख्त थे कि ब्रा के ऊपर से ही उभर आए थे। नीचे सिर्फ एक मैचिंग स्ट्रिंग पैंटी थी, जो एक तरफ खिसक चुकी थी। उसके हाथ में एक मोटा, लंबा गुलाबी डिल्डो था—गीला चमक रहा था। वह उसे अपनी मुंडाई हुई टाइट चूत में धीरे-धीरे अंदर धकेल रही थी और बाहर निकाल रही थी। हर धक्के के साथ उसकी कमर हल्के से उठ रही थी। दूसरी हाथ से वह अपनी एक चूची को ब्रा के ऊपर से जोर-जोर से मसल रही थी। चूत से पानी की पतली धार जांघों तक बह चुकी थी।
सासुर का लंड एक झटके में पत्थर जैसा तन गया। उन्होंने दरवाजा धक्का दिया और अंदर घुस गए। दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी।
प्रिया चौंककर उठी। डिल्डो हाथ से छूटकर बिस्तर पर गिर गया। उसने जल्दी से चादर खींचने की कोशिश की।
“बाबा… आप… ये… मैं…”
सासुर ने धीरे से कहा, आवाज भारी थी— “डिल्डो से इतना मजा आ रहा था? आज असली लंड मिलेगा… और वो भी जबरदस्ती।”
प्रिया पीछे हटने लगी, लेकिन सासुर ने उसकी कलाई पकड़ ली और जोर से अपनी तरफ खींच लिया। उसका शरीर उनके सीने से चिपक गया। सासुर के हाथ सीधे उसकी गाँड पर चले गए और जोर से दबाने लगे।
“बाबा छोड़ो… गलत बात है… मैं आपकी बहू हूँ…”
सासुर ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने प्रिया की ब्रा खोल दी। भारी गोल चूचियाँ बाहर झूलने लगीं। निप्पल सख्त और काले थे। सासुर ने दोनों हाथों से चूचियाँ पकड़कर जोर-जोर से मसलनी शुरू कर दी। कभी निप्पल को उंगलियों से दबाते, कभी झुककर मुँह में लेकर जोर से चूसते।
प्रिया कराह उठी— “आह्ह… बाबा… छोड़ो… दर्द…”
सासुर ने पैंटी भी खींचकर फेंक दी। प्रिया अब पूरी तरह नंगी थी। उन्होंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और अलमारी से सरसों का तेल निकाला। दोनों हथेलियों पर तेल डालकर प्रिया के पूरे शरीर पर लगाने लगे—गर्दन, कंधे, भारी चूचियाँ, पेट, जांघें, और फिर मोटी गाँड। तेल लगाते हुए वे खूब मसाज कर रहे थे। चूचियों को गोलाकार घुमा-घुमाकर मसल रहे थे, निप्पल को उंगलियों से खींच रहे थे। फिर जांघों को फैलाकर चूत के आसपास तेल लगाकर धीरे-धीरे उंगलियाँ अंदर घुसा दीं।
प्रिया की साँसें तेज हो गईं। शरीर काँप रहा था, लेकिन विरोध जारी था— “बाबा… मत करो… प्लीज…”
सासुर ने अपना लंड बाहर निकाला—मोटा, लंबा, काला और नसों से भरा हुआ। उन्होंने प्रिया के बाल पकड़कर उसका मुँह अपने लंड के पास ले आए।
“मुँह खोल।”
प्रिया ने मना किया, लेकिन सासुर ने बाल और जोर से खींचकर अपना लंड उसके मुँह में ठूस दिया। आधा लंड गले तक चला गया। प्रिया की आँखों से आँसू आ गए। सासुर ने उसके सिर को पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदना शुरू कर दिया। लार बह रही थी, गल-गल की आवाजें आ रही थीं।
थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड निकाला और प्रिया की टाँगें फैला दीं। लंड का सिरा चूत पर रखा और एक जोर का धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह… बाबा… बहुत मोटा… निकालो…”
सासुर रुके नहीं। पूरा लंड एक बार में अंदर धँसा दिया। प्रिया की चूत बहुत टाइट थी। दर्द से उसकी आँखें बंद हो गईं। सासुर ने कमर पकड़कर जोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ चूचियाँ जोर से हिल रही थीं। वे एक हाथ से चूची दबा रहे थे और दूसरे से गाँड मसल रहे थे।
“बहू की चूत कितनी टाइट है… आज दोनों छेद खोल दूँगा।”
कुछ देर चूत चोदने के बाद सासुर ने लंड बाहर निकाला। प्रिया की चूत से तेल और पानी मिला हुआ रस बह रहा था। उन्होंने प्रिया को पेट के बल लिटाया, कूल्हे ऊपर उठाए और तेल लगाकर गाँड के छेद को गीला किया। फिर धीरे-धीरे मोटा लंड वहाँ धकेलने लगे।
प्रिया चीख उठी— “आह्ह्ह्ह… दर्द… निकालो बाबा… बहुत मोटा है…”
सासुर ने पूरा लंड गाँड में ठूस दिया और रुक-रुक कर धक्के लगाने लगे। एक हाथ से चूत में उंगलियाँ घुमा रहे थे, दूसरे से चोटी खींच रहे थे।
थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड गाँड से निकाला और फिर से चूत में डाल दिया। अब वे प्रिया को अपनी गोद में बिठाकर ऊपर-नीचे कर रहे थे। भारी चूचियाँ उनके चेहरे से रगड़ खा रही थीं। सासुर दोनों चूचियों को मुँह में भर-भर कर चूस रहे थे।
आखिर में उन्होंने प्रिया की चूचियों के बीच अपना लंड रखा, तेल लगाकर जोर-जोर से चूची-चोदाई शुरू कर दी। निप्पल को कभी चाटते, कभी काटते। गर्म पानी की धार चूचियों पर ही छोड़ दी।
दोपहर और रात: दोपहर में सासुर ने प्रिया को किचन में ले जाकर स्लैब पर चोदा। शाम को सोफे पर। रात को फिर बिस्तर पर। कभी चूत, कभी गाँड, कभी मुँह। प्रिया का शरीर थक चुका था, लेकिन सासुर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। हर बार तेल लगाकर मसाज करते, फिर दोनों छेद चोदते। प्रिया की आवाजें अब सिर्फ कराहों में बदल चुकी थीं।
Day 2 – सुबह से रात तक: दूसरे दिन सुबह सासुर ने प्रिया को बाथरूम में नहलाया, फिर से तेल लगाकर पूरे शरीर की मसाज की। उसके बाद बिस्तर पर लेटाकर पहले मुँह चोदा, फिर चूत, फिर गाँड। दोपहर में उन्होंने प्रिया को घोड़ी बनाकर गाँड में लंड ठूसा और चोटी पकड़कर जोरदार धक्के लगाए। शाम को चूचियों के बीच लंड रगड़-रगड़ कर पानी छोड़ा। रात को आखिरी राउंड में उन्होंने प्रिया की दोनों टाँगें कंधों पर रखकर इतनी गहराई तक चोदा कि प्रिया की आँखों में पानी आ गया। अंत में चूत और गाँड दोनों में पानी भर दिया।
दो दिन तक सासुर ने प्रिया को लगातार चोदा—अलग-अलग कपड़े पहनाकर (कभी सिर्फ ब्रा, कभी पारदर्शी साड़ी, कभी नंगी), तेल लगाकर मसाज करके, मुँह में, चूत में, गाँड में और चूचियों के बीच। प्रिया का शरीर दर्द और थकान से भर चुका था, लेकिन सासुर की भूख खत्म नहीं हुई थी।
जब राहुल के लौटने का समय नजदीक आया, सासुर ने प्रिया के कान में कहा— “जब भी बेटा टूर पर जाएगा… ये दोनों छेद मेरे लंड के लिए तैयार रहेंगे। समझ गई बहू?”
प्रिया ने सिर्फ आँखें बंद कीं। शरीर में दर्द था, लेकिन चूत अभी भी हल्के-हल्के सिकुड़ रही थी।
दूसरे दिन – सुबह: सुबह के साढ़े आठ बज रहे थे। सूरज की हल्की किरणें बेडरूम की खिड़की से अंदर आ रही थीं।
प्रिया अभी भी बिस्तर पर नंगी लेटी थी। कल रात की लगातार चुदाई से उसका शरीर दर्द से भरा हुआ था। चूत और गाँड दोनों हल्के सूजे हुए और लाल थे। जांघों के अंदर तेल और पानी के सूखे निशान चमक रहे थे।
सासुर बाथरूम से निकले। उनके हाथ में तेल की शीशी और एक साफ तौलिया था। उन्होंने प्रिया को देखा और मुस्कुराए।
“उठ जा बहू… आज दूसरा दिन है। आज और गहराई तक लेना है।”
प्रिया ने आँखें खोलीं। आवाज में थकान थी— “बाबा… बहुत दर्द हो रहा है… छोड़ दो ना… राहुल कल आ जाएगा…”
सासुर ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने प्रिया को गोद में उठाया और बाथरूम ले गए। शॉवर खोलकर उसके पूरे शरीर पर गर्म पानी डाला। फिर अपने हाथों से साबुन लगाकर खूब मसाज की—चूचियाँ, पेट, गाँड, जांघें। उंगलियाँ बार-बार चूत और गाँड के छेद में घुस जाती थीं।
नहाने के बाद उन्होंने प्रिया को पोंछकर बेडरूम ले आए। बिस्तर पर लिटाया और तेल की शीशी खोली। दोनों हथेलियों पर खूब तेल डालकर प्रिया के पूरे शरीर पर लगाने लगे।
पहले गर्दन और कंधे… फिर भारी चूचियाँ। गोलाकार घुमा-घुमाकर मसल रहे थे। निप्पल को उंगलियों से दबा-दबाकर खींच रहे थे। तेल लगते ही चूचियाँ चमकने लगीं। फिर पेट, कमर, और मोटी गाँड। गाँड के दोनों पालियों को फैला-फैलाकर तेल अंदर तक लगा रहे थे। आखिर में जांघें फैलाकर चूत पर तेल डालकर उंगलियाँ अंदर घुमा दीं।
प्रिया की साँसें तेज हो गईं। शरीर काँप रहा था।
सासुर ने अपना लंड बाहर निकाला। वह पहले से ही सख्त और नसों से भरा हुआ था। उन्होंने प्रिया के बाल पकड़कर उसका मुँह अपने लंड के पास ले आए।
“मुँह खोल… आज पूरा निगलना है।”
प्रिया ने मना किया, लेकिन सासुर ने बाल जोर से खींचकर मोटा लंड उसके मुँह में ठूस दिया। आधा लंड गले तक चला गया। प्रिया की आँखों से आँसू बहने लगे। सासुर ने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदना शुरू कर दिया। गल-गल की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। लार बहकर चूचियों तक पहुँच रही थी।
थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड निकाला। प्रिया हाँफ रही थी। सासुर ने उसे बिस्तर पर लिटाया, टाँगें फैलाईं और लंड का सिरा चूत पर रखा।
एक जोर का धक्का…
“आह्ह्ह्ह… बाबा… बहुत अंदर… दर्द…”
सासुर रुके नहीं। पूरा लंड एक बार में धँसा दिया। प्रिया की चूत कल की चुदाई से थोड़ी ढीली हो चुकी थी, लेकिन फिर भी टाइट थी। सासुर ने कमर पकड़कर जोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ चूचियाँ जोर से हिल रही थीं। वे झुक-झुककर निप्पल चूस रहे थे और काट रहे थे।
“बहू की चूत आज भी कितनी गरम है… आज रात तक चोदूँगा।”
दोपहर: दोपहर में सासुर ने प्रिया को किचन में ले गए। उन्होंने उसे सिर्फ एक पतली सफेद साड़ी पहनाई… ब्लाउज नहीं, पैंटी नहीं। साड़ी के नीचे उसका पूरा शरीर नंगा था। चूचियाँ साड़ी के पारदर्शी कपड़े से झलक रही थीं।
स्लैब पर लिटाकर उन्होंने फिर से तेल लगाया। फिर पीछे से आकर लंड चूत में डाल दिया। एक हाथ से चोटी पकड़ी और दूसरे हाथ से चूची मसलने लगे। धक्के इतने जोरदार थे कि बर्तन खनक रहे थे।
थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड निकालकर गाँड में डाल दिया। प्रिया चीख उठी, लेकिन सासुर ने मुँह दबा दिया। गाँड की चुदाई करते हुए वे गंदी बातें बोल रहे थे— “तेरी ये मोटी गाँड अब सिर्फ मेरे लंड के लिए है… जब भी बेटा जाएगा, मैं इसे खोलता रहूँगा।”
शाम: शाम को सासुर ने प्रिया को सोफे पर बिठाया। उन्होंने उसे एक बार फिर नंगा किया और तेल लगाकर मसाज की। फिर प्रिया को अपनी गोद में बिठाकर लंड चूत में डाल दिया। प्रिया की पीठ उनके सीने से चिपकी थी। सासुर दोनों हाथों से उसकी भारी चूचियाँ पकड़कर जोर-जोर से मसल रहे थे और नीचे से धक्के लगा रहे थे।
फिर उन्होंने प्रिया को नीचे लिटाया। अपनी चूचियों के बीच लंड रखकर तेल लगाकर जोर-जोर से चूची-चोदाई शुरू कर दी। निप्पल को कभी चाटते, कभी दाँतों से दबाते। गर्म पानी की धार दोनों चूचियों पर छोड़ दी। प्रिया के चेहरे और गर्दन तक सफेद पानी फैल गया।
रात – आखिरी राउंड: रात के ग्यारह बज चुके थे। सासुर ने प्रिया को बिस्तर पर पेट के बल लिटाया। कूल्हे ऊपर उठाए। खूब तेल लगाकर पहले उंगलियों से गाँड का छेद खोला, फिर अपना मोटा लंड धीरे-धीरे अंदर धकेल दिया।
प्रिया की मुट्ठियाँ कस गईं। तकिया में मुँह गड़ाकर वह कराह रही थी। सासुर ने पूरी लंबाई तक लंड गाँड में ठूस लिया और जोरदार धक्के लगाने लगे। एक हाथ से चोटी खींच रहे थे, दूसरे हाथ से चूत में तीन उंगलियाँ घुमा रहे थे।
“आह्ह्ह… बाबा… बहुत गहरा… निकल जाएगा…”
सासुर की साँसें तेज हो गईं। उन्होंने आखिरी तेज धक्के लगाए और गाँड के अंदर ही पूरा पानी छोड़ दिया। गर्म धार अंदर फैल गई। फिर लंड निकालकर तुरंत चूत में डाल दिया और वहाँ भी बाकी पानी छोड़ दिया।
प्रिया थककर बिस्तर पर गिर गई। चूत और गाँड दोनों से सफेद पानी बह रहा था। छेद फैले हुए और लाल थे। शरीर तेल और पसीने से चमक रहा था।
सासुर उसके पास लेट गए। एक हाथ से उसकी चूची सहलाते हुए बोले—
“दो दिन पूरे हो गए बहू। कल राहुल आ जाएगा। लेकिन याद रखना… जब भी वह टूर पर जाएगा, ये दोनों छेद मेरे लंड के लिए तैयार रहेंगे। समझ गई?”
प्रिया ने आँखें बंद कीं। कुछ नहीं बोली। बस साँसें ले रही थी। शरीर में दर्द था, लेकिन चूत हल्के-हल्के अभी भी सिकुड़ रही थी।
बाहर रात गहरी थी। कमरे में तेल और सेक्स की तेज महक फैली हुई थी।

