सेक्सी भाभी की दोनों छेद मे लंड डाला - हिंदी सेक्स स्टोरी
सेक्सी भाभी ने खुद देवर को बिस्तर पर बुलाया और कहा “आज रात मुझे अपनी रंडी बना ले”। फिर देवर ने उसकी दोनों छेद में लंड डालकर पूरी रात चोदा। घर के हर कोने में हुई वो रातें अब पढ़ो।

कव्या 28 साल की थी। शादी को लगभग दो साल हो चुके थे। पति अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता था। इस वजह से घर में ज्यादातर समय कव्या अकेली रहती थी। उसका देवर अर्जुन 24 साल का था। कॉलेज खत्म करके वह घर पर ही जॉब की तैयारी कर रहा था। दोनों एक ही घर में रहते थे।
कव्या गोरी थी। शरीर भरपूर था — बड़ी और गोल छातियाँ, पतली कमर, और चौड़ी भारी गाँड। अर्जुन चुपचाप रहने वाला लड़का था, लेकिन उसकी निगाहें अक्सर कव्या पर ठहर जाती थीं। कव्या यह बात अच्छी तरह समझती थी। पहले वह अनदेखा करती थी, लेकिन पति के बार-बार बाहर रहने से उसके अंदर अकेलापन और एक अधूरी इच्छा बढ़ती जा रही थी।
एक गुरुवार की रात। पति फिर से तीन दिन के लिए बाहर गया था। घर में खामोशी थी। कव्या नहाकर निकली। उसने एक पतली काली नाइट ड्रेस पहन रखी थी। अंदर न ब्रा थी, न पैंटी। बाल खुले हुए थे। वह कुछ देर हॉल में बैठी रही, फिर उठकर अर्जुन के कमरे की तरफ चली गई।
अर्जुन बिस्तर पर लेटा फोन देख रहा था। कव्या ने दरवाज़ा बंद किया और अंदर आ गई। अर्जुन ने हैरानी से देखा।
“भाभी… कुछ चाहिए?”
कव्या उसके बिस्तर के किनारे बैठ गई। थोड़ी देर कुछ नहीं बोली। फिर धीरे से कहा, “अर्जुन… आज बहुत अकेला लग रहा है। मन नहीं लग रहा कुछ भी करने का।”
अर्जुन चुप रहा। कव्या थोड़ा और करीब सरक गई। उसका कंधा अर्जुन के कंधे से छू गया। मोमबत्ती की जगह टेबल लैंप की हल्की रोशनी में कव्या की नाइट ड्रेस के अंदर की आकृति साफ झलक रही थी। अर्जुन की निगाह वहाँ से हट नहीं पा रही थी।
कव्या ने धीरे से अर्जुन का हाथ पकड़ा और अपनी जांघ पर रख दिया। “देखता ही मत रह… छू भी सकता है।”
अर्जुन का हाथ थोड़ा काँपा। कव्या ने उसका हाथ और ऊपर सरका दिया। नाइट ड्रेस के अंदर ले जाकर अपनी बड़ी छाती पर रख दिया। अर्जुन की हथेली में नरम और भारी स्तन आ गया। उसने हल्के से दबाया। कव्या की साँसें तेज हो गईं।
“और जोर से दबा… आज घर में कोई नहीं है,” कव्या ने उसके कान के पास फुसफुसाया।
अर्जुन ने दोनों हाथों से उसकी छातियाँ मसलनी शुरू कर दीं। कव्या ने उसकी गर्दन में मुँह रख दिया और हल्की कराह निकालने लगी। फिर उसने अर्जुन का चेहरा अपने करीब खींचा और होठों पर होठ रख दिए। चुंबन पहले धीमा था, फिर गहरा और भूखा होता चला गया। दोनों की जीभ एक-दूसरे से लड़ने लगीं।
कव्या अर्जुन के ऊपर चढ़ गई। उसने नाइट ड्रेस ऊपर खींच दी। उसकी नंगी बड़ी छातियाँ अर्जुन के चेहरे के सामने आ गईं। अर्जुन ने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। कव्या उसके बाल पकड़कर और जोर से अपने सीने से दबा रही थी।
“आह्ह… अर्जुन… जोर से चूस… काट भी ले…”
अर्जुन ने दोनों छातियों को बारी-बारी से चूसा, काटा और मसला। फिर उसने कव्या को बिस्तर पर लिटा दिया। नाइट ड्रेस पूरी तरह उतार दी। अब कव्या उसके सामने पूरी नंगी लेटी थी। अर्जुन ने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। उसने जीभ से लंबा चाटा, क्लिट को चूसा और दो उंगलियाँ अंदर तक डाल दीं। कव्या की कमर बार-बार ऊपर उठने लगी।
“अब लंड डाल अर्जुन… एकदम अंदर तक… आज रात मुझे अपनी बना ले,” कव्या ने हाँफते हुए कहा।
अर्जुन ने अपने कपड़े जल्दी-जल्दी उतारे। उसका लंड पूरी तरह सख्त और मोटा था। कव्या ने खुद उसे पकड़कर अपनी गीली चूत के मुँह पर रखा। अर्जुन ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। कव्या की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से लंबी कराह निकल गई।
“आह्ह्ह… कितना गहरा जा रहा है… और जोर से मार…”
अर्जुन ने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर चढ़ा दीं और गहराई तक चोदने लगा। हर धक्के के साथ कव्या की बड़ी छातियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। वह अर्जुन की पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। थोड़ी देर बाद अर्जुन ने उसे पलटा। अब कव्या पेट के बल लेटी थी। अर्जुन ने उसकी चौड़ी गाँड को ऊपर उठाया और पीछे से फिर से अंदर घुस गया। इस बार उसकी गति और तेज थी।
कव्या ने तकिया दबा रखा था और कराह रही थी। “आज रात पूरी… मत छोड़ना… जितना मारना है मार…”
अर्जुन ने उसके बाल पकड़ लिए और और जोर से धक्के मारने लगा। एक हाथ से उसकी छाती को मसल रहा था। कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसें, कराहें और गीली आवाजें गूंज रही थीं।
उस रात अर्जुन ने कव्या को दो बार लिया। एक बार उसकी चूत में और आखिरी बार उसके मुँह में। कव्या उसके नीचे पूरी तरह थक चुकी थी। दोनों के शरीर पसीने से भीगे हुए थे।
कव्या ने अर्जुन की छाती पर अपना सिर रखकर धीरे से कहा, “जब तक तेरा भाई घर नहीं आता… हर रात तू ही मेरे कमरे में आना। समझा?”
अर्जुन ने उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। “हर रात… जितना तू चाहेगी।”
रात गहरी हो चुकी थी। भाभी और देवर के बीच वह सीमा पार हो चुकी थी, जो अब वापस नहीं आने वाली थी।
पहली रात के बाद दोनों के बीच की दूरी पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। सुबह कव्या देर तक सोई रही। शरीर में एक अजीब सी थकान और संतुष्टि दोनों थी। अर्जुन उसके कमरे से निकलकर अपनी जगह जा चुका था, लेकिन दोनों जानते थे कि रात फिर दोहराई जाएगी।
अगली शाम। कव्या ने जानबूझकर एक छोटी सी टॉप और टाइट लेगिंग पहन रखी थी। अर्जुन हॉल में टीवी देख रहा था। कव्या उसके पास जाकर सोफे पर बैठ गई। बिना कुछ बोले अर्जुन का हाथ पकड़कर अपनी जांघ पर रख दिया। अर्जुन ने उसकी तरफ देखा। कव्या ने सिर्फ सिर हिलाया।
अर्जुन ने उसे सोफे पर लिटा दिया। टॉप ऊपर किया और उसकी बड़ी छातियों को मुँह में लेकर जोर से चूसने लगा। कव्या उसके बाल पकड़े हुए कराह रही थी। फिर अर्जुन ने उसकी लेगिंग और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। उसने कव्या की टाँगें फैलाईं और खड़े-खड़े ही लंड अंदर डाल दिया। सोफे पर ही जोर-जोर से चोदने लगा। कव्या की कराहें हॉल में गूंज रही थीं।
“और जोर से… आज और गहराई तक ले…” कव्या ने हाँफते हुए कहा।
अर्जुन ने उसकी दोनों टाँगें ऊपर उठाईं और और तेज धक्के मारने लगा। थोड़ी देर में ही कव्या चरम पर पहुँच गई। अर्जुन ने उसी हालत में अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।
रात को कव्या खुद अर्जुन के कमरे में चली गई। इस बार वह पूरी नंगी थी। अर्जुन बिस्तर पर लेटा था। कव्या उसके ऊपर चढ़ गई और बिना कुछ बोले उसका लंड अपनी चूत में डाल लिया। वह खुद कमर हिलाने लगी। अर्जुन उसकी छातियाँ मसल रहा था और कभी-कभी मुँह में लेकर चूस रहा था।
“आज तू नीचे रह… मैं ऊपर से लूँगी,” कव्या ने कहा।
वह जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी बड़ी छातियाँ अर्जुन के चेहरे के सामने हिल रही थीं। थोड़ी देर बाद अर्जुन ने उसे पकड़कर पलटा। अब कव्या पेट के बल थी। अर्जुन ने उसकी गाँड ऊपर उठाई और पीछे से अंदर घुस गया। इस बार उसने कव्या के बाल पकड़कर और रफ तरीके से चोदना शुरू कर दिया।
कव्या तकिया दबाए कराह रही थी। “गाँड में भी डाल… आज दोनों जगह ले…”
अर्जुन ने लंड निकाला, थूक लगाया और धीरे-धीरे उसकी गाँड के छेद में धकेल दिया। कव्या की शरीर में ऐंठन हुई, लेकिन उसने रोका नहीं। अर्जुन ने पूरा लंड अंदर तक ले लिया और चोदने लगा। एक हाथ से उसकी छाती मसल रहा था। उस रात अर्जुन ने दोनों छेदों में पानी छोड़ा।
तीसरी रात और भी बेकाबू थी। कव्या किचन में खाना बना रही थी। अर्जुन पीछे से आया और उसकी गाँड दोनों हाथों से पकड़ ली। कव्या ने पीछे मुड़कर देखा। अर्जुन ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के हुक खोल दिए। उसकी बड़ी छातियाँ बाहर आ गईं। अर्जुन ने उन्हें मसलते हुए कव्या को किचन की स्लैब पर झुका दिया। साड़ी ऊपर की और पैंटी साइड में सरकाकर पीछे से लंड अंदर डाल दिया।
कव्या हाथों से स्लैब पकड़े हुए कराह रही थी। अर्जुन उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से चोद रहा था। हर धक्के के साथ कव्या की छातियाँ स्लैब से टकरा रही थीं। अर्जुन ने इस बार बहुत देर तक चोदा। आखिर में उसने कव्या को घुटनों के बल बिठाया और उसका मुँह चोदने लगा। कव्या ने बिना रोके सब निगल लिया।
उसके बाद हर रात यही सिलसिला चलता रहा। कभी बेडरूम में, कभी हॉल के सोफे पर, कभी किचन में, कभी बाथरूम में। कभी कव्या ऊपर रहती, कभी अर्जुन। कभी सिर्फ चूत, कभी गाँड, कभी मुँह। कव्या अब खुद अर्जुन को उकसाती। कभी नंगी होकर उसके कमरे में चली जाती, कभी उसकी गोद में बैठकर लंड बाहर निकाल लेती।
एक रात कव्या ने अर्जुन से कहा, “जब तेरा भाई आएगा… तब भी मौका मिलते ही तू लेना। मैं मना नहीं करूँगी।”
अर्जुन ने उसे कसकर पकड़ते हुए जवाब दिया, “जब तक तू चाहेगी… मैं लेता रहूँगा।”
कव्या उसकी छाती से चिपक गई। घर में पति के आने में अभी दो दिन बाकी थे। लेकिन भाभी और देवर दोनों जानते थे कि अब यह रिश्ता सिर्फ इन तीन दिनों तक सीमित नहीं रहने वाला था।

