पूरी रात माँ को नंगा करके बेटे ने चूत और गाँड दोनों चोदी
42 साल की गरम माँ को बेटे ने पूरी रात नंगा करके चोदा। पहले बड़ी-बड़ी चूचियाँ चूसीं, फिर चूत चाटी, और आखिर में चूत और गाँड दोनों छेदों में अपना मोटा लंड घुसाकर बुरी तरह कुचला। घर में कोई नहीं था… बेटा रात भर माँ के दोनों छेद मारता रहा।

रमेश 23 साल का था। कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके वह घर पर ही रहता था। उसके पिता अक्सर बाहर रहते थे। घर में सिर्फ वह और उसकी माँ थीं।
माँ का नाम सुमन था। उम्र 42 साल। शरीर अभी भी जवान लड़कियों जैसा कसा हुआ था। गोरी चमकदार त्वचा, लंबे काले बाल जो अक्सर खुले रहते, भारी गोल स्तन जो ब्लाउज में ठसाठस भरे रहते, पतली कमर और गोल-मटोल कसी हुई चूतड़। जब वह घर में साड़ी पहनकर घूमती तो पल्लू बार-बार सरक जाता और उसकी गहरी नाली तथा चिकनी कमर दिखाई दे जाती। रमेश कई महीनों से अपनी माँ को ऐसे ही घूरा करता था। रात को अकेले में सोचता कि इन बड़े स्तनों को हाथ में लेकर मसलने का मजा क्या होगा।
एक गर्मी की दोपहर थी। पिता शहर गए हुए थे और तीन दिन बाद आने वाले थे। घर में सिर्फ माँ-बेटा थे। सुमन रसोई में खाना बना रही थी। साड़ी कमर तक ऊपर की हुई थी। पेट की गोरी त्वचा पसीने से चमक रही थी। रमेश पीछे से आया और चुपके से उसकी कमर पर दोनों हाथ रख दिए।
सुमन चौंक गई। “क्या कर रहे हो रमेश… छोड़ो…” उसने हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन बेटा पीछे से और कसकर चिपक गया।
“माँ… तुम्हारा शरीर इतना गरम है,” रमेश ने धीरे से कान में कहा। उसका हाथ साड़ी के ऊपर से ही पेट पर फिसलने लगा। फिर धीरे-धीरे ऊपर बढ़कर स्तनों के निचले हिस्से को दबाया।
सुमन की साँस अटक गई। “रमेश… पागल हो गए हो क्या… मैं तुम्हारी माँ हूँ… छोड़ो…”
लेकिन रमेश रुकने वाला नहीं था। उसने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और साड़ी तथा ब्लाउज के ऊपर से ही उसके भारी स्तनों को मजबूती से पकड़ लिया। जोर से दबाया। निप्पल उसकी हथेली में सख्त महसूस हो रहे थे।
“माँ… कितने बड़े और नरम हैं ये… सालों से देखने का मन करता था,” रमेश ने कहा और कान के नीचे गीली जीभ फेर दी।
सुमन का शरीर सिहर उठा। वह विरोध तो कर रही थी, लेकिन शरीर धोखा दे रहा था। रमेश ने ब्लाउज के ऊपर से ही निप्पल को उँगलियों से पकड़कर मसलना शुरू कर दिया। सुमन की आँखें बंद हो गईं।
“आह्ह… रमेश… मत करो बेटा… पाप है ये…”
रमेश ने उसे घुमाया और दीवार से सटा दिया। फिर झुककर ब्लाउज के ऊपर से ही एक स्तन को मुँह में लेने की कोशिश की। कपड़े गीले हो गए। उसने दाँतों से हल्का काटा तो सुमन की कराह निकल गई।
“माँ… आज कोई नहीं है घर में… मुझे अपनी माँ को अच्छे से छूने दो,” रमेश ने कहा और ब्लाउज के हुक खोलने लगे। सुमन ने हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन बल उसके बेटे के आगे नहीं चल पाया। ब्लाउज खुल गया। भारी, गोरे स्तन बाहर निकल आए। निप्पल गाढ़े रंग के और पूरी तरह खड़े हो चुके थे।
रमेश ने एक स्तन को मुट्ठी में भर लिया और जोर से मसला। फिर मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से गोल-गोल घुमाता, कभी हल्के दाँत गड़ाता। सुमन की कमर काँपने लगी। उसका एक हाथ बेटे के बालों में घुस गया।
“उँह्ह… रमेश… बहुत जोर से… आह्ह…”
रमेश दूसरे स्तन पर भी वही करने लगा। थोड़ी देर बाद वह घुटनों के बल बैठ गया। उसने माँ की साड़ी ऊपर की और सफेद पैंटी दिखाई दी। बीच का हिस्सा हल्का गीला था। रमेश ने पैंटी के ऊपर से ही उँगली फेरनी शुरू की।
“माँ… इतनी गीली हो गई हो तुम… सिर्फ छूने से?”
सुमन शर्म से आँखें बंद किए हुए थी। रमेश ने पैंटी को एक तरफ सरका दिया। गुलाबी मुलायम चूत बाहर आ गई। उसने दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं। सुमन जोर से कराह उठी।
“आह्ह्ह… बेटा… मत डालो… उँह्ह…”
रमेश उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। अंगूठे से ऊपर वाले हिस्से को रगड़ता रहा। फिर वह और नीचे झुका और जीभ चूत पर लगा दी। लंबी-लंबी चाटें। कभी ऊपर चूसना, कभी जीभ अंदर घुसाकर हिलाना। सुमन की दोनों टाँगें काँप रही थीं। वह दीवार को मजबूती से पकड़े हुए थी।
थोड़ी देर बाद रमेश उठा। उसने अपनी पैंट खोली। मोटा, कड़ा लंड बाहर निकल आया। सुमन की आँखें फटी की फटी रह गईं।
“माँ… पहले मुँह में लो… प्लीज…”
सुमन झिझकती हुई नीचे बैठ गई। उसने धीरे से लंड को हाथ में लिया और जीभ से चाटा। फिर मुँह में लिया। रमेश ने उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। सुमन की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन वह चूसती रही। थूक टपक रहा था।
कुछ देर मुँह में झाड़ने के बाद रमेश ने उसे खींचकर खड़ा किया। साड़ी पूरी तरह हटा दी, पैंटी भी निकाल फेंकी। अब सुमन बिल्कुल नंगी थी। रमेश ने उसे रसोई के काउंटर की ओर मोड़ा, कमर दबाई और अपने लंड को उसकी गीली चूत पर रगड़ा।
“माँ… अब अंदर ले लो…”
एक जोरदार धक्के के साथ रमेश पूरा अंदर घुस गया। सुमन जोर से चिल्ला उठी।
“आह्ह्ह्ह… रमेश… पूरा अंदर… टूट गई मैं…”
रमेश रुकने वाला नहीं था। उसने माँ की कमर पकड़ी और जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ सुमन की बड़ी चूतड़ काँपती थीं। स्तन काउंटर पर रगड़ खा रहे थे। रमेश कभी तेज, कभी धीमा करता। कभी पूरा निकालकर फिर जोर से घुसाता।
सुमन अब मना नहीं कर रही थी। वह कराह रही थी और बेटे को और जोर से करने के लिए कह रही थी।
“और जोर से मारो बेटा… हाँ… ऐसे ही… उँह्ह…”
एक घंटे तक रमेश ने माँ को उसी पोजीशन में चोदा। सुमन दो बार झड़ चुकी थी। आखिर में रमेश ने जोरदार धक्के मारते हुए अपना सारा पानी माँ के अंदर छोड़ दिया।
दोनों हाँफते हुए फर्श पर बैठ गए। सुमन की आँखों में शर्म और सुकून दोनों थे।
रमेश ने माँ के गाल सहलाते हुए कहा, “माँ… आज रात फिर करेंगे… पूरी रात… कोई नहीं आएगा।”
सुमन चुपचाप बैठी रही। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। उसने धीरे से सिर हिला दिया।
रात के ग्यारह बज चुके थे। पूरा घर अँधेरे और सन्नाटे में डूबा था। पिता तीन दिन बाद ही आने वाले थे। रमेश ने सारे दरवाजे अंदर से बंद कर दिए थे।
सुमन बाथरूम से निकलकर आई तो सिर्फ एक पतली साड़ी लपेटे हुए थी। ब्लाउज नहीं पहना था। भारी स्तन साड़ी के ऊपर से साफ उभर रहे थे। रमेश बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था। उसका लंड पहले से ही तनकर खड़ा था।
सुमन के पास जाते ही रमेश ने साड़ी खींचकर फर्श पर गिरा दी। अब माँ बिल्कुल नंगी थी। गोरी चमकदार त्वचा, भारी लटकते स्तन, कसी हुई गोल चूतड़ और जाँघों के बीच की मुलायम चूत—सब कुछ रमेश की आँखों के सामने था।
रमेश ने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया और तुरंत उसके स्तनों पर टूट पड़ा। दोनों स्तनों को मुट्ठी में भर-भरकर मसलने लगा। निप्पल मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसा, दाँतों से हल्का काटा। सुमन कराह रही थी।
“आह्ह… रमेश… बहुत जोर से चूस रहा है बेटा… उँह्ह…”
रमेश नीचे गया। माँ की टाँगें फैला दीं और जीभ सीधे चूत पर लगा दी। इस बार वह बहुत गंदे तरीके से चाट रहा था। जीभ अंदर तक घुसाकर हिलाता, ऊपर वाले हिस्से को जोर से चूसता, कभी-कभी थूक लगाकर उँगलियाँ भी डाल देता। सुमन की कमर बार-बार उछल रही थी।
“जीभ और अंदर डालो बेटा… हाँ… ऐसे चाटो… आह्ह्ह…”
थोड़ी देर बाद रमेश उठा। उसने माँ को घुटनों के बल कर दिया। खुद पीछे से आया और अपने मोटे लंड को उसकी गीली चूत पर रगड़ा। फिर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… पूरा घुस गया… रमेश…”
रमेश ने माँ के बाल पकड़ लिए और जोर-जोर से ठोके मारने लगा। हर धक्के के साथ सुमन की बड़ी चूतड़ उसके पेट से टकरा-टकराकर आवाज कर रही थीं। स्तन हवा में झूल रहे थे। रमेश कभी कमर पकड़ता, कभी आगे झुककर स्तन मसलता।
आधे घंटे तक वह माँ की चूत बुरी तरह कुचलता रहा। सुमन दो बार जोर से झड़ चुकी थी। उसका पानी रमेश की जाँघों तक बह रहा था।
फिर रमेश ने लंड बाहर निकाला। उसने माँ की चूतड़ के दोनों हिस्सों को फैलाया और अंगूठे से उसकी गाँड के छेद पर दबाव डाला।
“माँ… अब यहाँ भी डालूँगा…”
सुमन सहम गई। “रमेश… वहाँ मत डालो बेटा… दर्द होगा… प्लीज…”
लेकिन रमेश ने नहीं माना। उसने थूक लगाकर लंड को चिकना किया और धीरे-धीरे गाँड के छेद पर दबाव बढ़ाना शुरू किया। सुमन की मुट्ठी बिस्तर की चादर कसकर पकड़े हुए थी। धीरे-धीरे लंड का सिरा अंदर घुस गया।
“आह्ह्ह्ह… दर्द हो रहा है… निकालो… उँह्ह्ह…”
रमेश थोड़ा रुक गया, फिर और अंदर धकेलने लगा। आखिरकार आधा लंड गाँड में चला गया। सुमन की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन उसके मुँह से कराहें भी निकल रही थीं।
रमेश ने अब जोर लगाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पूरा लंड गाँड में समा गया। फिर वह ठोके मारने लगा। पहले धीमे, फिर तेज। हर धक्के के साथ सुमन की आवाज बदल रही थी।
“उँह्ह… रमेश… गाँड फट गई… लेकिन… और जोर से मारो… हाँ… ऐसे…”
रमेश पागलों की तरह माँ की गाँड चोदने लगा। एक हाथ से उसके बाल पकड़े हुए थे, दूसरे हाथ से आगे झुककर स्तन मसल रहा था। कमरा सिर्फ मांस की थप-थप आवाज और सुमन की जोर-जोर की कराहों से गूँज रहा था।
कुछ देर बाद रमेश ने लंड गाँड से निकाला और फिर से चूत में घुसा दिया। इस बार वह बारी-बारी दोनों छेदों में डालने लगा। कभी चूत, कभी गाँड। सुमन अब पूरी तरह टूट चुकी थी। वह बिस्तर पर मुँह गड़ाए हुए बस कराह रही थी।
“दोनों छेद मारो बेटा… जितना जोर से मार सकते हो मारो… आज रात मैं तुम्हारी हूँ…”
रमेश ने माँ को पलटा। उसे अपनी गोद में बिठाया और लंड चूत में डालकर ऊपर-नीचे करने लगा। फिर अचानक उठाया और गाँड में घुसा दिया। सुमन की चीख निकल गई, लेकिन उसने खुद ही कमर हिलानी शुरू कर दी।
रात के दो बज चुके थे। रमेश थका नहीं था। उसने माँ को दीवार से सटाया, एक टाँग ऊपर उठाई और खड़े-खड़े पहले चूत, फिर गाँड में जोर-जोर से ठोके मारे। सुमन की पीठ दीवार पर रगड़ खा रही थी। उसके स्तन रमेश की छाती से दब रहे थे।
आखिर में रमेश ने माँ को चारों खाने चित लिटाया, दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और चूत में इतनी जोर से ठोके मारे कि बिस्तर चरमरा उठा। कुछ देर बाद लंड निकालकर गाँड में घुसा दिया और उसी जोर से मारते हुए अपना सारा गर्म पानी माँ की गाँड के अंदर छोड़ दिया।
सुमन का शरीर काँप रहा था। वह भी उसी समय जोर से झड़ गई।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। शरीर पसीने और पानी से लथपथ थे। रमेश का लंड अभी भी半硬 था। उसने माँ के स्तन सहलाते हुए कहा,
“माँ… अभी तो रात बाकी है। थोड़ा आराम कर लो… फिर से शुरू करेंगे।”
सुमन ने थकी हुई आँखों से बेटे को देखा। उसकी गाँड और चूत दोनों में से रमेश का पानी रिस रहा था। उसने धीरे से सिर हिला दिया और बेटे के सीने से चिपक गई।

