पति ने कुँवारी दुल्हन की सील तोड़ डाली

शादी की पहली रात दुल्हन ने बहुत मना किया… फिर भी पति ने जबरदस्ती उसकी कुँवारी सील तोड़ दी! रोते-चीखते रहने के बावजूद बेदर्दी से छेद फैला दिया…

लेखक: Ajay Shikar6 मिनट पढ़ने में
पति ने कुँवारी दुल्हन की सील तोड़ डाली

शादी की पहली रात थी। कमरे में हल्की लाल बत्ती जल रही थी और बिस्तर पर फूल बिखरे हुए थे। नयी दुल्हन अनन्या घूँघट निकाले हुए एक कोने में बैठी काँप रही थी। उसकी साँसें तेज चल रही थीं और दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

उसका पति आरव कमरे में आया। दरवाजा बंद करके उसने धीरे से अनन्या की तरफ देखा। अनन्या ने घूँघट और नीचे कर लिया। आरव पास आकर उसके पास बैठ गया और धीरे से बोला,

“अनन्या… अब हम पति-पत्नी हैं। आज रात हमें एक होना है।”

अनन्या ने सिर झुकाए हुए धीमे स्वर में कहा, “नहीं… मैं डर रही हूँ… कृपया मत करो… मुझे दर्द होगा…”

आरव ने उसका घूँघट हटाया। अनन्या का चेहरा शरमा से लाल हो चुका था। उसकी आँखों में पानी तैर रहा था। आरव ने उसका हाथ पकड़कर बिस्तर पर लिटाने की कोशिश की तो अनन्या ने जोर से हाथ छुड़ा लिया।

“नहीं… छोड़ो… मैं तैयार नहीं हूँ… माँ ने कहा था दर्द होता है…”

आरव ने उसकी दोनों कलाई पकड़ लीं और धीरे से लेकिन मजबूती से बिस्तर पर लिटा दिया। अनन्या छटपटाने लगी। आरव ने उसके ऊपर चढ़कर उसके दोनों हाथ सिर के ऊपर दबा दिए और उसके कान के पास फुसफुसाया,

“तू मेरी पत्नी है। मैं तुझे चोदूँगा। समझ गई? पहली बार दर्द होगा, लेकिन बाद में रोज का हो जाएगा। आज से तेरा शरीर मेरा है।”

अनन्या रोने लगी, “नहीं… मत करो… मैं मना कर रही हूँ… छोड़ दो मुझे…”

आरव ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज की डोरी खोल दी। अनन्या की छोटी लेकिन गोल चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल डर से सिकुड़े हुए थे। आरव ने दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ पकड़कर दबाना शुरू कर दिया। अनन्या कराह उठी और और जोर से छटपटाने लगी।

“आह्ह… छोड़ो… मत दबाओ…”

आरव ने एक चूची मुँह में ले ली और जोर से चूसने लगा। दाँतों से हल्का काटते हुए निप्पल को जीभ से सहलाया। दूसरा हाथ उसकी साड़ी के अंदर डालकर जाँघों पर फेरने लगा। अनन्या की टाँगें काँप रही थीं। वह रोते हुए बार-बार मना कर रही थी,

“नहीं… आरव… मत करो… दर्द होगा… मैं कुँवारी हूँ…”

आरव ने उसकी साड़ी पूरी तरह हटा दी और पैंटी खींचकर उतार दी। अनन्या पूरी तरह नंगी हो गई। उसने दोनों टाँगें जोर से बंद कर लीं। आरव ने उसकी टाँगें अलग करने की कोशिश की तो अनन्या ने और जोर लगाकर बंद रखीं।

आरव ने थोड़ा सख्त स्वर में कहा, “टाँगें खोल। तू मेरी बीवी है। मैं तेरा पति हूँ। आज तेरी सील तोड़नी है।”

अनन्या रोते हुए चीखी, “नहीं… मत तोड़ो… दर्द होगा… छोड़ दो…”

आरव ने उसकी दोनों टाँगें जोर से फैला दीं। अनन्या की गुलाबी, बंद चूत अब पूरी तरह नजर आ रही थी। आरव ने उंगली से उसके छेद को सहलाया। वह बिल्कुल सूखी और कसी हुई थी। अनन्या जोर से काँप उठी।

आरव ने अपना लंड बाहर निकाला। वह सख्त और मोटा हो चुका था। उसने लंड का सिरा अनन्या की चूत पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। अनन्या सिर इधर-उधर हिलाते हुए रो रही थी।

“नहीं… मत डालो… दर्द होगा… छोड़ दो… प्लीज…”

आरव ने उसके माथे पर किस किया और बोला, “पहली बार दर्द होगा। लेकिन बाद में रोज इसी तरह चोदूँगा। तेरा छेद रोज के लिए फैलाना है। अब चुपचाप सह ले।”

फिर उसने एक जोर का धक्का मारा।

अनन्या की चीख पूरे कमरे में गूँज गई। “आह्ह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… निकालो… निकालो…”

आरव का लंड आधा अंदर तक घुस चुका था। अनन्या की चूत से खून की हल्की धार बहने लगी। उसकी सील टूट चुकी थी। अनन्या जोर-जोर से रो रही थी और आरव के सीने पर मुक्के मार रही थी।

आरव रुका नहीं। उसने और जोर लगाकर पूरा लंड अंदर धकेल दिया। अनन्या की आँखों से आँसू बहने लगे। वह कराहते हुए बड़बड़ा रही थी,

“दर्द… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो ना… मैं मर जाऊँगी…”

आरव ने उसकी दोनों चूचियाँ जोर से दबा रखी थीं और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ अनन्या की चीख निकल रही थी। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि आरव को भी जोर लगाना पड़ रहा था।

“देख… तेरा छेद कितना कसा हुआ है… आज फैल जाएगा… रोज ऐसे ही चोदूँगा… समझ गई?”

अनन्या सिर्फ रो रही थी। उसका शरीर काँप रहा था। आरव ने उसकी टाँगें और ज्यादा फैला दीं और और गहरे धक्के लगाने लगा। खून और रस मिलाकर उसकी चूत गीली होने लगी थी, लेकिन दर्द अभी भी साफ था।

आरव झुककर उसकी गर्दन चाटने लगा और कान में बोला, “तू मेरी पत्नी है। तेरा शरीर मेरा है। आज दर्द सह ले… कल से मजा आने लगेगा।”

अनन्या की आँखें बंद थीं। वह दबे स्वर में बस इतना कह पा रही थी, “दर्द… बहुत दर्द… धीरे… कृपया धीरे…”

लेकिन आरव ने गति और तेज कर दी। कमरे में सिर्फ अनन्या की कराहें, रोने की आवाज़ और शरीर की टकराहट गूँज रही थी।

आरव अभी भी अनन्या के अंदर गहराई तक धँसा हुआ था। अनन्या की आँखों से आँसू बह रहे थे और उसका शरीर दर्द से काँप रहा था। आरव ने धीरे से लंड थोड़ा बाहर खींचा और फिर जोर का धक्का मारकर पूरा अंदर कर दिया। अनन्या फिर से चीख पड़ी।

“आह्ह्ह… दर्द… निकालो… बहुत हो गया…”

आरव ने उसके दोनों हाथ सिर के ऊपर दबाए रखे और उसके चेहरे के करीब आकर बोला, “अभी निकालूँगा नहीं। तेरा छेद अभी पूरा फैला नहीं। आज अच्छी तरह खोल दूँगा ताकि रोज चोद सकूँ।”

उसने अनन्या की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहरे, जोरदार धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ अनन्या की चीख निकल रही थी। उसकी चूत से खून और रस मिलाकर गीलापन बढ़ रहा था, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ था।

आरव एक हाथ से उसकी चूची जोर से दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे की ओर खींच रहा था। अनन्या रोते हुए बड़बड़ा रही थी,

“नहीं… मत करो… दर्द सहन नहीं हो रहा… छोड़ दो मुझे…”

आरव ने उसकी बात अनसुनी कर दी। उसने लंड बाहर निकाला और अनन्या को बलपूर्वक पलटा दिया। अब अनन्या पेट के बल लेटी थी। आरव ने उसके कूल्हे उठाए और पीछे से फिर से लंड उसकी चूत में धँसा दिया। अनन्या के मुँह से दबी हुई चीख निकली।

आरव ने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। एक हाथ से उसकी चोटी पकड़कर खींच रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूची मसल रहा था। अनन्या का चेहरा तकिए में धँसा हुआ था। वह रोते हुए बार-बार कह रही थी,

“आरव… दर्द… बहुत दर्द… धीरे करो… प्लीज…”

आरव ने झुककर उसके कान में कहा, “पहली रात है। दर्द तो होगा ही। लेकिन मैं रोज ऐसे ही चोदूँगा। तेरा छेद इतना फैल जाएगा कि बाद में खुद माँगने लगेगी। तू मेरी पत्नी है… समझ गई?”

उसने गति और तेज कर दी। कमरे में अनन्या की कराहें और आरव की साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। थोड़ी देर बाद आरव ने लंड बाहर निकाला। अनन्या की चूत पूरी तरह लाल और थोड़ी सूजी हुई थी। खून के हल्के निशान अभी भी दिख रहे थे।

आरव ने अनन्या को फिर से चित लिटाया। उसने उसकी दोनों टाँगें फैलाकर घुटनों तक मोड़ दिए और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। इस बार उसने लंड को उसके छेद पर रखकर एक झटके में पूरा अंदर कर दिया। अनन्या की आँखें फटी की फटी रह गईं।

“आह्ह्ह्ह… मत डालो इतना अंदर… फट जाएगा…”

आरव ने उसकी दोनों कलाई एक हाथ से पकड़ लीं और दूसरे हाथ से उसकी गर्दन हल्के से दबाई। वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। अनन्या का शरीर बिस्तर पर ऊपर-नीचे हो रहा था। उसकी चूचियाँ आरव के हाथों में दब-दब कर लाल हो चुकी थीं।

आरव ने उसके होंठ जबरदस्ती चूम लिए। अनन्या ने मुँह मोड़ने की कोशिश की लेकिन आरव ने उसका चेहरा पकड़कर किस करते हुए धक्के लगाए। कुछ देर बाद उसने अपना मुँह हटाया और अनन्या की आँखों में देखते हुए बोला,

“देख… तेरा छेद अब थोड़ा ढीला पड़ने लगा है। आज अच्छी तरह फैला दूँगा। कल से रोज सुबह-शाम चोदूँगा। दर्द धीरे-धीरे कम हो जाएगा।”

अनन्या सिर्फ आँसू बहा रही थी। उसका विरोध अब कमजोर पड़ चुका था। शरीर में दर्द इतना था कि वह ज्यादा छटपटा भी नहीं पा रही थी। आरव ने उसकी टाँगें और ज्यादा फैला दीं और पूरी ताकत से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ अनन्या की दबी हुई आवाज़ निकल रही थी।

थोड़ी देर बाद आरव की साँसें तेज हो गईं। उसने अनन्या की दोनों चूचियाँ जोर से दबाईं और गहरे धक्के लगाते हुए उसके अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया। गर्म तरल अनन्या की चूत में फैल गया। अनन्या ने दर्द और अजीब से एहसास से और जोर से कराह निकाली।

आरव कुछ देर तक उसी तरह उसके ऊपर पड़ा रहा। फिर धीरे से लंड बाहर निकाला। अनन्या की चूत से खून, रस और उसके पानी का मिश्रण बह निकला। छेद थोड़ा फैला और लाल दिख रहा था।

आरव ने अनन्या के बगल में लेटकर उसे अपनी बाँहों में लेने की कोशिश की। अनन्या ने थोड़ा विरोध किया लेकिन ताकत नहीं बची थी। आरव ने उसके माथे पर किस किया और धीरे से बोला,

“अब रो मत। तू मेरी पत्नी है। आज पहली रात थी इसलिए दर्द हुआ। कल से रोज ऐसे ही होगा। मैं तेरे छेद को इतना फैला दूँगा कि बाद में दर्द नहीं रहेगा। समझ गई न?”

अनन्या ने आँसुओं भरी आँखों से उसे देखा। कुछ बोल नहीं पाई। बस धीमे से सिर हिला दिया। शरीर में दर्द चल रहा था और नीचे का हिस्सा जल रहा था।

आरव ने उसका सिर अपने सीने से लगा लिया और धीरे-धीरे उसके बाल सहलाने लगा। कमरे में अब सिर्फ दोनों की साँसों की आवाज़ थी। बाहर रात गहरी हो चुकी थी और नयी दुल्हन अपने पति की बाँहों में दर्द और थकान के साथ लेटी हुई थी।

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