पापा ने अपनी जवान बेटी को रात भर चोदा - टाइट छेद मे लंड ठूसा
माँ तीन दिन के लिए गई थी और पापा ने अपनी जवान बेटी को रात भर चोदा। टाइट छेद में लंड ठूसकर दोनों होल्स पूरी तरह खोल दिए।

माँ ऑफिस के काम से तीन दिन के लिए बाहर गई हुई थी। घर में सिर्फ पापा और प्रिया रह गए थे।
शाम का समय था। बाहर हल्की बारिश हो रही थी। राजेश लिविंग रूम में सोफे पर बैठे टीवी देख रहे थे, लेकिन मन कहीं और था। प्रिया किचन से चाय लेकर आई। उसने ढीली टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहन रखे थे। बैठते हुए उसकी जांघ पापा की जांघ से छू गई।
दोनों चुप रहे। थोड़ी देर बाद प्रिया बोली, “पापा, आप इन दिनों काफी टेंशन में लग रहे हो… कंधे दबे हुए हैं।”
राजेश ने मुस्कुराकर कहा, “काम का प्रेशर है बेटी, कुछ नहीं।”
प्रिया उठकर उनके पीछे खड़ी हो गई और दोनों हाथों से उनके कंधे दबाने लगी। धीरे-धीरे, अच्छे से। राजेश की आँखें बंद हो गईं। प्रिया के हाथ धीरे-धीरे नीचे सरकते गए – गर्दन, फिर छाती के ऊपरी हिस्से तक।
अचानक प्रिया के अंगूठे उनकी छाती पर रुक गए। दोनों की साँसें थोड़ी तेज हो गईं।
“पापा…” प्रिया ने बहुत धीमे से कहा, “मैं जानती हूँ आप अकेले महसूस कर रहे हो। मैं भी… कई रातों से सो नहीं पा रही।”
राजेश ने गर्दन घुमाकर उसे देखा। प्रिया की आँखों में कुछ था जो पहले कभी नहीं देखा था।
“प्रिया, तुम क्या कहना चाहती हो?”
प्रिया उनके सामने आकर बैठ गई। उसके हाथ अभी भी उनकी जांघों पर थे।
“मैं कहना चाहती हूँ कि मैं बड़ी हो गई हूँ। और… मैं आपको सिर्फ पापा की तरह नहीं देखती अब। काफी समय से।”
कमरे में सन्नाटा छा गया। बारिश की आवाज बाहर से आ रही थी। राजेश ने उसका हाथ पकड़ा, लेकिन हटाया नहीं।
“ये गलत है बेटी…” उनकी आवाज भारी थी।
“तो फिर क्यों नहीं हटा रहे हो मेरा हाथ?” प्रिया ने चुनौती देते हुए पूछा।
राजेश कुछ नहीं बोले। प्रिया धीरे-धीरे उनके करीब आ गई और अपने होंठ उनके होंठों से लगा दिए। पहले हल्का सा, फिर गहरा। राजेश ने जवाब में किस किया। दोनों की जीभ मिल गई।
किस टूटते ही प्रिया ने टी-शर्ट उतार दी। ब्रा नहीं पहनी थी। उसके गोल बूब्स सामने थे। राजेश ने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया और निप्पल मुँह में ले लिए। प्रिया की गर्दन पीछे की तरफ झुक गई।
“पापा… आज रात मुझे रोकना मत,” उसने कहा।
राजेश ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम ले गए। बिस्तर पर लिटाते ही उन्होंने उसकी शॉर्ट्स और पैंटी एक साथ खींच ली। प्रिया पूरी नंगी थी। राजेश ने अपने कपड़े भी उतार दिए।
इस बार जल्दबाजी नहीं थी। राजेश ने पहले उसके पूरे बदन को चूमा – गर्दन, बूब्स, पेट, जांघों के अंदर तक। जब उनकी जीभ उसकी चूत पर पहुँची तो प्रिया की कमर अपने आप उठ गई।
“पापा… अब और मत तड़पाओ,” प्रिया ने हाथ उनके बालों में डालते हुए कहा।
राजेश ऊपर आए। लंड उसकी गीली चूत पर रखा और आँखों में आँखें डालकर धीरे से अंदर धकेला। प्रिया की साँस रुक गई। पूरा लंड अंदर जाने में थोड़ा समय लगा क्योंकि वो बहुत टाइट थी।
एक बार पूरा अंदर गया तो दोनों हिलना बंद कर गए। बस एक-दूसरे को देखते रहे।
“मैं अंदर हूँ… तेरे पापा,” राजेश ने धीमे से कहा।
“और मैं आपकी बेटी… जो अभी आपकी औरत बन गई है,” प्रिया ने जवाब दिया।
फिर संभोग शुरू हुआ। पहले बहुत धीमा और गहरा। हर धक्के के साथ प्रिया के मुँह से हल्की कराह निकलती। राजेश उसके माथे पर, आँखों पर, होंठों पर किस करते रहते।
धीरे-धीरे स्पीड बढ़ी। प्रिया ने अपने पैर उनकी कमर पर लपेट लिए। बिस्तर की हल्की आवाज आने लगी।
“जोर से करो पापा… मैं तैयार हूँ,” प्रिया ने कहा।
राजेश ने उसके दोनों हाथ सिर के ऊपर पकड़ लिए और तेज धक्के देने लगे। प्रिया की आँखें बंद हो गईं। पहला ऑर्गैज्म आते ही उसकी चूत जोर से सिमट गई। राजेश रुके नहीं।
उन्होंने प्रिया को साइड में कर दिया। एक पैर ऊपर उठाकर साइड से चोदने लगे। इस पोजीशन में लंड और गहरा जा रहा था। प्रिया एक हाथ से उनकी पीठ पकड़े हुए थी, दूसरे से अपनी चूत सहला रही थी।
“पापा… मैं दूसरी बार आने वाली हूँ…”
राजेश ने स्पीड और बढ़ा दी। प्रिया का दूसरा ऑर्गैज्म इतना जोरदार था कि उसकी जांघें काँपने लगीं।
उसके बाद राजेश ने उसे डॉगीस्टाइल में कर दिया। लेकिन पहले वाली कहानी जैसी जल्दबाजी नहीं थी। पहले धीमे-धीमे गांड सहलाते हुए अंदर जाते, फिर अचानक जोर के धक्के देते। प्रिया के बाल एक हाथ में थे, दूसरे हाथ से उसकी गांड पर हल्के थप्पड़ पड़ रहे थे।
“बोलो बेटी… कैसा लग रहा है?” राजेश ने पूछा।
“बहुत अच्छा… और जोर से… पापा प्लीज,” प्रिया ने जवाब दिया।
लगभग एक घंटे तक वो इसी तरह बदल-बदल कर सेक्स करते रहे। आखिर में राजेश ने प्रिया को फिर से सीधा किया, उसके पैर कंधों पर रखे और फाइनल धक्के देने लगे।
“अंदर छोड़ोगे?” प्रिया ने भीगी आँखों से पूछा।
“हाँ… आज से तू मेरी है,” राजेश ने कहा और जोर से झड़ गए। गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया।
दोनों लंबे समय तक जुड़े रहे। पसीना, साँसें और चुप्पी।
प्रिया ने उनके सीने पर गाल रखकर कहा, “पापा… ये सिर्फ एक रात की बात नहीं है ना?”
राजेश ने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “नहीं। माँ के आने तक… और उसके बाद भी जब भी मौका मिलेगा। अब मैं रोक नहीं सकता खुद को।”
बाहर बारिश तेज हो गई थी। घर के अंदर पहली रात अभी खत्म नहीं हुई थी।
आधी रात हो चुकी थी। दोनों ने थोड़ा आराम किया, लेकिन शरीर अभी भी एक-दूसरे से चिपके थे।
प्रिया ने अचानक राजेश का लंड हाथ में ले लिया जो फिर से सख्त होने लगा था। “पापा, मैं कुछ अलग करना चाहती हूँ।”
वो नीचे चली गई और लंड को मुँह में ले लिया। इस बार जल्दी-जल्दी नहीं, बल्कि बहुत धीरे और प्यार से चूस रही थी। आँखें ऊपर उठाकर पापा को देखती हुई। राजेश के हाथ उसके बालों में थे, लेकिन जबरदस्ती नहीं कर रहे थे।
जब लंड पूरी तरह खड़ा हो गया तो प्रिया बोली, “आज मेरी गांड भी ले लो पापा… पहली बार।”
राजेश ने उसे पेट के बल लिटाया। पहले उंगली से बहुत धैर्य से तैयार किया, फिर लुब्रिकेंट लगाया। जब लंड का सिर गांड में प्रवेश करने लगा तो प्रिया ने तकिया दबा लिया।
“दर्द हो रहा है तो बता,” राजेश ने कहा।
“हो रहा है… लेकिन मत रुको,” प्रिया ने जवाब दिया।
धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। राजेश कुछ देर रुके रहे ताकि प्रिया अभ्यस्त हो जाए। फिर बहुत धीमे धक्के शुरू किए। प्रिया की कराहें पहले दर्द की थीं, फिर धीरे-धीरे मजे में बदलने लगीं।
“अब थोड़ा तेज कर सकते हो,” उसने कहा।
राजेश ने स्पीड बढ़ाई। एक हाथ से उसकी चूत सहला रहे थे। प्रिया का ऑर्गैज्म गांड सेक्स के दौरान ही आ गया। उसके बाद राजेश ने भी उसकी गांड में ही झड़ गए।
दोनों नहाकर फिर बिस्तर पर आए। बाकी रात वो कभी धीमे, कभी तेज सेक्स करते रहे। कभी बातें करते, कभी चुपचाप एक-दूसरे को छूते। सुबह होते-होते दोनों थक चुके थे।
दूसरा दिन:
दिन में दोनों ने नॉर्मल रहने की कोशिश की, लेकिन बार-बार हाथ छू जाते, नज़रें मिल जातीं। दोपहर में प्रिया किचन में खाना बना रही थी। राजेश पीछे से आए और उसकी कमर में हाथ डाल दिए।
“पापा… दिन में?” प्रिया मुस्कुराई।
“दिन में भी तू मेरी है,” कहकर उन्होंने शॉर्ट्स नीचे किए और खड़े-खड़े पीछे से चोदना शुरू कर दिया। प्रिया ने सिंक पकड़ रखा था। 20 मिनट तक किचन में ही सेक्स चला।
शाम को लिविंग रूम के सोफे पर प्रिया ऊपर बैठकर राइड कर रही थी। राजेश उसके बूब्स चूस रहे थे। टीवी चालू था, लेकिन आवाज कम थी।
रात को आखिरी सेशन सबसे अलग था। राजेश ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया और बोले, “आज मैं सिर्फ तुझे सहलाऊँगा… जब तक तू खुद नहीं मांगती।”
उन्होंने घंटे भर तक उसके पूरे शरीर को चूमा, चाटा, उंगलियों से खिलाया। प्रिया बार-बार कह रही थी “अब डालो पापा”, लेकिन राजेश मना करते रहे। जब प्रिया लगभग रोने लगी तो उन्होंने आखिरकार लंड अंदर डाला।
इस बार का सेक्स बहुत धीमा और गहरा था। दोनों आँखों में आँखें डाले हुए थे। प्रिया के कई छोटे-छोटे ऑर्गैज्म आए। आखिर में राजेश ने भी अंदर ही वियर्य छोड़ा।
खत्म होने के बाद प्रिया उनके ऊपर लेटी हुई बोली, “पापा, माँ जब आएगी… तब क्या होगा?”
राजेश ने उसके माथे पर किस करते हुए कहा, “तब हम पहले जैसे बन जाएँगे। लेकिन रात को जब घर शांत होगा… मैं तेरे कमरे में आ जाऊँगा। और तू भी मेरे में आ सकती है।”
प्रिया मुस्कुरा दी। “मैं आऊँगी।”
बाहर बारिश रुक चुकी थी। घर फिर से शांत हो गया था। लेकिन दोनों के बीच जो रिश्ता बना था, वो अब छुपाकर रखा जाने वाला था।

