नेट वाली चड्डी में मेड की पूरी रात की चुदाई

शाम को नेट साड़ी और नेट चड्डी पहनकर जब वो आई… तो पूरी रात हर पोजीशन में, हर छेद में चोदा गया। बेहोश होने तक चली वो रात… जिसमें मेड की हवस और जवान लंड दोनों ने आग लगा दी।

लेखक: Vikas Gupta6 मिनट पढ़ने में
नेट वाली चड्डी में मेड की पूरी रात की चुदाई

सुबह 9:30 बजे घर एकदम खाली पड़ा था। मालिक-मालकिन दोनों फंक्शन पे चले गए थे और दो पूरे दिन का अकेला घर छोड़ गए थे। रसोई में खड़ी थी रानी दीदी। उम्र 36 साल की, लेकिन बदन ऐसा कि कोई भी 25 साल की समझ ले। आज उसने जो साड़ी पहनी थी, वो साड़ी तो जैसे जानबूझ के फंसा रही थी। टाइट साड़ी कमर पे ऐसे कसी हुई कि उसकी मोटी-मोटी जाँघें और गोल-गोल चूतड़ साफ-साफ दिख रहे थे। ब्लाउज इतना टाइट था कि दो भारी स्तन अंदर से फूटने को तैयार थे और गले की गहराई में गहरी लाइन चमक रही थी। बाल खुले थे, थोड़े से माथे पे पसीने से चिपक गए थे और त्वचा इतनी चिकनी व चमकदार थी कि देख के पागल हो जाओ।

राहुल दरवाजे के पास खड़ा बस देख रहा था। 25 साल का जवान लड़का पिछले आठ महीने से यही सीन रोज देखता आ रहा था। हर सुबह जब रानी झुक के झाड़ू लगाती, उसकी साड़ी और ऊपर उठ जाती और राहुल का लंड तन जाता। रात को वह खुद को हिला-हिला के उसी की कल्पना में झड़ जाता। आज मौका था, आज घर में कोई नहीं था। वह धीरे-धीरे रसोई में घुसा। रानी बर्तन धो रही थी, साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरक गया था और कमर का गड्ढा साफ दिख रहा था। राहुल पीछे से आया और उसके कंधे पर हाथ रख दिया।

“रानी दीदी…” उसकी आवाज धीमी और गरम थी। रानी चौंक गई और मुड़ी तो देखा राहुल उसकी तरफ घूर रहा है। उसकी नजरें सीधे उसके स्तनों पर थीं। “क्या हुआ बेटा?” उसने धीरे से पूछा, लेकिन आवाज में हल्की कपकपी थी। राहुल और पास आया, इतना पास कि उसकी सांस रानी के गले पर पड़ने लगी। “दीदी… तुम्हें देख-देखकर मेरा दिल नहीं मानता। तुम्हारा ये बदन, ये टाइट साड़ी… हर दिन मुझे पागल कर देती हो। आज घर में कोई नहीं है। दो दिन। मैं तुम्हें लेना चाहता हूँ।”

रानी की सांसें तेज हो गईं। वह थोड़ी-सी राहुल के प्यार में भी थी। इतने दिनों से लड़के की नजरें और उसकी भूखी निगाहें उसे भी अंदर तक छू जाती थीं। लेकिन डर भी था। “राहुल… ये गलत है… मैं तुम्हारी उम्र की माँ जैसी हूँ…” राहुल ने अपना मोबाइल निकाला, अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए और स्क्रीन दिखा दी। “पचास हजार। अभी। और जो चाहो उतना और। बस आज और कल मेरे हो जाओ। कोई नहीं जानेगा।”

रानी की आँखें पैसे देखकर चमक उठीं। घर की हालत ठीक नहीं थी, पति शराबी था और बच्चे पढ़ रहे थे। पैसे की जरूरत थी। और राहुल बहुत ही हैंडसम और जवान था। उसकी खुशबू और मजबूत बाहें… रानी के अंदर कुछ पिघलने लगा। वह चुपचाप खड़ी रही। राहुल ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और अपने जाँघों पर रख दिया। वहाँ एकदम सख्त, गर्म और भारी लंड धड़क रहा था। “देखो दीदी… ये तुम्हारे लिए खड़ा है। इतने दिनों से।”

रानी का हाथ काँप रहा था, लेकिन उसने धीरे से लंड को सहलाया। कपड़े के ऊपर से ही उसकी मोटाई और लंबाई महसूस हुई। वह निगल गई। राहुल ने उसे दीवार से सटा दिया। एक हाथ से उसके स्तनों को दबाया। टाइट ब्लाउज के ऊपर से ही निपल्स सख्त हो चुके थे। दूसरे हाथ से साड़ी का पल्लू खींचा और उसकी जांघों को सहलाया। “सुबह हल्की चोदना चाहता हूँ। शाम को पूरी रात तुम्हें चोदूँगा।”

रानी की आँखें बंद हो गईं। राहुल ने उसके होंठों पर अपना मुँह रख दिया। पहले धीरे, फिर जोर से। जीभ घुसाई। रानी ने भी जवाब दिया। दोनों की जीभें लड़ने लगीं। राहुल का हाथ साड़ी के अंदर घुस गया। पेट पर, फिर नीचे। वह नेट वाली चड्डी पहने थी। पहले से ही गीली। “वाह दीदी… इतनी गीली हो चुकी हो?” राहुल ने दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं। रानी की कमर लचक गई। “आह्ह… राहुल…”

वह उसे रसोई की काउंटर पर बैठा दिया। साड़ी ऊपर उठाई। टाइट नेट वाली चड्डी एक तरफ सरकाई। उसकी चूत चिकनी, भरी हुई और चमक रही थी। राहुल ने घुटनों के बल बैठकर जीभ से चाट लिया। रानी की टाँगें काँपने लगीं। “उफ़्फ़… मत करो… मैं पागल हो जाऊँगी…” राहुल ने उसकी चूत को चाटते हुए क्लिट पर जोर से चूसा। दो उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। रानी की आवाज दबने लगी। वह काउंटर को कसकर पकड़े हुए थी। स्तन ब्लाउज के अंदर उछल रहे थे।

थोड़ी देर बाद राहुल खड़ा हुआ। पैंट खोली। उसका लंड बाहर निकला—मोटा, लंबा, नसों से भरा हुआ, सिर पर पहले से ही पानी टपक रहा था। रानी की आँखें फटी की फटी रह गईं। “इतना बड़ा…” उसने फुसफुसाया। राहुल ने उसके होंठों पर रख दिया। “चूसो दीदी। सुबह का नाश्ता।” रानी ने पहले जीभ से चाटा, फिर मुँह में ले लिया। इतना मोटा कि जबड़े फैल गए। वह धीरे-धीरे चूसने लगी। लार टपक रही थी। राहुल उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के देने लगा। “हाँ… ऐसे ही… गहरी लो…”

कुछ देर बाद वह लंड निकालकर रानी की चूत पर लगा। सिर को फाड़ते हुए अंदर घुसाया। रानी की चीख निकल गई। “आह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है…” राहुल ने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे पूरा अंदर डाल दिया। फिर धक्के शुरू किए। पहले हल्के, फिर तेज। साड़ी की चुन्नटें उखड़ रही थीं। ब्लाउज के बटन खुल गए। भारी स्तन बाहर निकल आए। राहुल ने एक स्तन मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। रानी की आँखें बंद थीं। वह कराह रही थी। “राहुल… और अंदर… हाँ… वहाँ… मारो…”

सुबह की चोदाई हल्की थी, लेकिन गहरी। राहुल ने उसे कई पोजीशन में लिया। पहले काउंटर पर, फिर खड़े-खड़े दीवार से सटाकर, फिर रानी को घुटनों के बल झुकाकर पीछे से। हर धक्के के साथ रानी की चूत की आवाज आ रही थी—छप-छप-छप। आखिर में राहुल ने जोर से धक्के मारते हुए उसके अंदर ही झड़ दिया। गर्म वीर्य की धारें अंदर भर गईं। रानी भी काँपते हुए पानी छोड़ चुकी थी।

दोनों पसीने से भीगे हुए थे। रानी की साड़ी पूरी तरह बिखरी हुई थी। स्तन बाहर, चूत से वीर्य रिस रहा था। राहुल ने उसके गाल पर चुम्मा लिया। “शाम को तैयार रहना दीदी। नेट वाली साड़ी पहनना… और नेट वाली चड्डी। आज रात तुम्हें पूरी तरह चोदकर बेहोश कर दूँगा। हर छेद।” रानी ने आँखें उठाकर देखा। उसके चेहरे पर शर्म थी, लेकिन आँखों में भूख भी। “ठीक है… शाम को आना।”

राहुल मुस्कुराया और चला गया। रानी वहीं खड़ी रही। उसके अंदर अभी भी राहुल का गर्म वीर्य भरा हुआ था। टाँगें काँप रही थीं। और दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—शाम की रात।

शाम के 7 बज चुके थे। घर एकदम शांत था। बाहर हल्की अँधेरी हो रही थी और अंदर सिर्फ बेडरूम की लाइट जल रही थी। राहुल पहले से तैयार बैठे था। उसने अपनी पैंट-शर्ट उतार दी थी, सिर्फ बॉक्सर पहना हुआ था। उसका लंड पहले से ही आधा खड़ा था, क्योंकि दिमाग में सिर्फ रानी दीदी घूम रही थी।

दरवाजे पर हल्की सी खटखटाहट हुई। राहुल उठा और दरवाजा खोला। सामने खड़ी थी रानी। जो नजारा उसके सामने था, वो देख के राहुल का लंड एकदम तन गया। उसने वही पहना था जो राहुल ने कहा था। एकदम काली नेट वाली साड़ी। साड़ी इतनी पतली और सेमी-ट्रांसपेरेंट थी कि उसके अंदर का सब कुछ लगभग दिख रहा था। ब्लाउज भी नेट का था, भारी स्तन अंदर से साफ नजर आ रहे थे और निपल्स की नोकें साड़ी के ऊपर से उभरी हुई थीं। कमर पर साड़ी इतनी टाइट कसी हुई थी कि उसकी गोल-गोल चूतड़ और जाँघों की हर लकीर साफ झलक रही थी। नीचे नेट वाली छोटी सी चड्डी पहनी हुई थी, जो पहले से ही थोड़ी गीली लग रही थी। बाल खुले थे, हल्की लिपस्टिक लगाई हुई थी और आँखों में एक अलग ही चमक थी।

राहुल कुछ देर बस देखता रहा। फिर धीरे से बोला, “आ जाओ अंदर दीदी… आज रात तुम्हें छोड़ने वाला नहीं हूँ।” रानी अंदर आई। उसके गाल हल्के लाल हो रहे थे। राहुल ने पीछे से दरवाजा बंद किया और तुरंत उसके पास आकर दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ ली। “देखो तुमने क्या पहना है… पागल बना दिया।” उसने रानी के होंठों पर जोर से मुँह रख दिया। इस बार चुंबन धीरे नहीं था। जीभ घुसाई, होंठ चूसे, दाँत से हल्का काटा। रानी भी जवाब देने लगी। दोनों की साँसें तेज हो गईं।

राहुल ने साड़ी का पल्लू खींच कर फर्श पर गिरा दिया। नेट ब्लाउज के ऊपर से ही उसके स्तनों को जोर से दबाने लगा। निपल्स इतने सख्त हो चुके थे कि उंगलियों से दबाने पर रानी कराह उठी। “आह्ह… राहुल… धीरे…” लेकिन राहुल का मूड अब हल्का नहीं था। उसने ब्लाउज के हुक खोल दिए। दो भारी, गदराए हुए स्तन बाहर आ गए। राहुल ने एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, जीभ से निपल को घुमाने लगा। दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को मसल रहा था। रानी की कमर लचक रही थी, वह राहुल के बाल पकड़ कर खींच रही थी।

थोड़ी देर बाद राहुल ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। नेट साड़ी अभी भी कमर पर बंधी हुई थी। राहुल ने उसकी टाँगें फैला दीं और नेट चड्डी को एक तरफ सरकाया। चूत पहले से ही चमक रही थी, गीली और फूल हुई। राहुल ने बिना देर किए मुँह लगा दिया। जीभ से लंबी-लंबी चाटने लगा, क्लिट को मुँह में लेकर जोर से चूसने लगा। दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। रानी की कमर उछलने लगी। “उफ़्फ़ राहुल… मत करो इतना… मैं झड़ जाऊँगी…” लेकिन राहुल रुकने वाला नहीं था। वह और जोर से चाटने लगा। रानी की आवाज तेज होती गई, टाँगें काँपने लगीं और वह जोर से कराहते हुए पानी छोड़ दी।

राहुल उठा। अपना बॉक्सर उतारा। मोटा, लंबा, नसों से भरा लंड बाहर निकला। सिर पर पहले से पानी टपक रहा था। रानी बिस्तर पर लेटी हुई साँसें ले रही थी। राहुल उसके पास गया और लंड उसके होंठों पर रख दिया। “अब पूरा चूसो दीदी। आज रात भर।” रानी ने मुँह खोला। राहुल ने धीरे-धीरे अंदर धकेला। रानी की आँखें पानी से भर गईं, लेकिन वह चूसने लगी। लार टपक रही थी। राहुल उसके बाल पकड़ कर धीरे-धीरे धक्के देने लगा। कभी पूरा अंदर ले जाता, कभी सिर्फ सिर बाहर निकाल कर फिर घुसा देता। रानी गैग कर रही थी, लेकिन छोड़ नहीं रही थी।

कुछ देर बाद राहुल ने लंड निकाला और रानी की टाँगें अपने कंधों पर रख दीं। चूत पर लंड का सिर लगा कर एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। रानी की तेज चीख निकल गई। “आह्ह्ह्ह… बहुत गहरा… राहुल…” राहुल रुकने वाला नहीं था। उसने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ रानी की स्तन उछल रहे थे, साड़ी की चुन्नटें बिखर रही थीं। राहुल कभी झुक कर उसके स्तन चूसता, कभी उसके होंठ चूमता। रानी की कराहें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। “हाँ… मारो… और जोर से… आज पूरा ले लो मुझे…”

राहुल ने पोजीशन बदली। रानी को घुटनों के बल कर दिया। पीछे से साड़ी ऊपर उठाई और एक झटके में फिर से अंदर घुसा दिया। अब धक्के और तेज हो गए। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी हुई थी, दूसरे हाथ से उसके बाल खींच रहा था। छप-छप-छप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। रानी का मुँह तकिये में दबा हुआ था, लेकिन आवाजें दब नहीं पा रही थीं। राहुल ने अचानक अपना अँगूठा उसके पिछले छेद पर रखा और धीरे से अंदर घुसाने लगा। रानी सहम गई। “राहुल… वो मत… पहले कभी नहीं…” लेकिन राहुल धीरे-धीरे अँगूठा अंदर ले गया और साथ में लंड से चूत भी चोदता रहा। रानी की आवाज बदल गई। दर्द और मजे का मिश्रण था।

थोड़ी देर बाद राहुल ने लंड चूत से निकाला और पिछले छेद पर लगा दिया। धीरे-धीरे सिर अंदर घुसाया। रानी जोर से चिल्लाई। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है…” राहुल रुका नहीं। थूक लगा कर धीरे-धीरे पूरा अंदर ले गया। फिर धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। रानी की आँखों से आँसू निकल रहे थे, लेकिन वह मना भी नहीं कर रही थी। राहुल एक हाथ से उसकी चूत सहला रहा था, दूसरे से कमर पकड़े हुए था। धीरे-धीरे रानी की कराहें दर्द से मजे में बदलने लगीं। “हाँ… अब… धीरे-धीरे… अंदर…”

पूरी रात ऐसे ही चली। राहुल ने उसे हर पोजीशन में लिया। कभी मिशनरी में गहराई तक, कभी डॉगी में जोरदार धक्के, कभी रानी को ऊपर बैठा कर अपनी मर्जी से चोदने दिया, कभी खड़े-खड़े दीवार से सटा कर। बीच-बीच में वह रानी को चूसने पर मजबूर करता, कभी उसके स्तनों के बीच लंड रगड़ता, कभी उसके चेहरे पर थूक कर फिर चूमता। रानी कई बार झड़ चुकी थी। उसका बदन पसीने से चमक रहा था, बाल बिखरे हुए थे, साड़ी पूरी तरह उतर चुकी थी। सिर्फ नेट चड्डी एक तरफ लटक रही थी।

रात के करीब 2 बजे राहुल ने आखिरी राउंड शुरू किया। रानी लगभग बेहोशी की हालत में थी। आँखें आधी बंद, साँसें उखड़ी हुई। राहुल ने उसकी दोनों टाँगें फैला दीं और पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ रानी की आवाज निकल रही थी, लेकिन अब वह बोल नहीं पा रही थी। सिर्फ “आह्ह… अह्ह…” की आवाजें आ रही थीं। आखिर में राहुल ने जोर से गुर्राते हुए उसके अंदर ही झड़ दिया। इतना ज्यादा कि वीर्य बाहर तक निकल आया। रानी की बॉडी एक बार जोर से काँपी और फिर वह पूरी तरह ढीली पड़ गई। आँखें बंद, साँसें धीमी।

राहुल उसके पास लेट गया। पसीने से भीगा हुआ शरीर। उसने रानी के माथे से बाल हटाए और धीरे से उसके गाल पर चुम्मा लिया। रानी भी हल्की मुस्कान लिए हुए थी। राहुल ने धीरे से कहा, “सो जाओ दीदी… कल सुबह फिर से शुरू करेंगे।”

बाहर रात गहरी हो चुकी थी। कमरे में सिर्फ दोनों की साँसें चल रही थीं और बिस्तर पर नेट साड़ी के टुकड़े बिखरे पड़े थे।

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