माँ की टाइट छेद में लंड डालकर चीखें निकलीं

38 साल की सेक्सी माँ की मालिश करते-करते बेटे ने उनकी टाइट छेद में लंड डाल दिया। रातभर माँ की चीखें और कराहें घर में गूंजती रहीं।

लेखक: Aman Thakur6 मिनट पढ़ने में
माँ की टाइट छेद में लंड डालकर चीखें निकलीं

नेहा… अड़तीस साल की उम्र में भी ऐसी औरत कि घर का हर कोना उसकी खुशबू से महक उठता। गोरी-चिकनी त्वचा, गोल-गोल थोड़े बड़े स्तन जो साड़ी के नीचे भी अपनी पूरी शक्ल दिखाते, और पीछे थोड़ी बड़ी, नरम-नरम लटकती हुई गाँड़। जब वह झुककर काम करती तो पतली साड़ी के नीचे लेस वाली टाइट अंडरवियर की रेखा साफ उभर आती। वो अंडरवियर इतनी कसकर चूत के बीच फँसी रहती कि दरार तक नज़र आ जाती।

राज बाईस साल का था। माँ को हर दिन देखकर उसका लंड तन जाता। कई बार किचन में माँ के झुकते ही वह पीछे से आकर अपनी सूजी हुई लंड को उनकी गाँड़ की दरार पर रगड़ देता। कभी साड़ी के ऊपर से ही उनकी बड़ी चूचियों पर हाथ फेर लेता। नेहा कुछ नहीं बोलती, बस हल्की सी साँस छोड़ देती।

उस दिन दोपहर का समय था। घर में सिर्फ माँ-बेटा थे। पापा ऑफिस चले गए थे। नेहा सुबह से काम करके पूरी तरह थक चुकी थी। पतली साड़ी पहने, बाल खुले, वह नीचे वाले कमरे के छोटे से बेड पर लेटकर अंगड़ाई ले रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था। गोल स्तन साड़ी के नीचे उभार लिए हुए थे और गाँड़ हल्की सी ऊपर उठी हुई।

राज बगल वाले बेड पर लेटा हुआ माँ को घूर रहा था। थकी हुई अदा, आधी खुली आँखें, और वो नरम शरीर… उसका लंड तुरंत तन गया। उसने मौके का फायदा उठाया।

“माँ… आप बहुत थक गई हो। आ जाओ, मैं तेल से मालिश कर दूँ। कमर दर्द हो रहा होगा न?”

नेहा ने आँखें बंद रखीं और थकी हुई आवाज़ में कहा, “ठीक है बेटा… हल्के हाथ से करना… बहुत नींद आ रही है।”

राज तेल का कटोरा लेकर आया। नेहा को धीरे से उल्टा लिटा दिया। साड़ी ऊपर तक सरकाई। अब उनकी चिकनी पीठ, पतली कमर और गोल-गोल गाँड़ उसके सामने थीं। पतली साड़ी के कारण गाँड़ लगभग नंगी लग रही थी। उसने तेल हथेलियों में गरम किया और कमर पर रखना शुरू किया। उंगलियाँ धीरे-धीरे नीचे सरकती गईं—पहले कमर, फिर कूल्हे।

फिर दोनों हथेलियों से पूरी गाँड़ को दबा-दबाकर मालिश करने लगा। गाँड़ इतनी नरम और गोल थी कि हाथ डूब जाते थे। वह दोनों गोलियों को फैला-फैलाकर तेल लगा रहा था। दरार के बीच उंगलियाँ फेरता, फिर वापस दबाता। नेहा थकान से आँखें बंद किए पड़ी थी। साँसें गहरी थीं, जैसे सोने वाली हो।

राज और नीचे गया। हथेलियों से उनकी चूत को पूरी तरह बाहर निकालकर दबाने लगा। दोनों दरारों में उंगलियाँ घिसने लगा—गाँड़ की गहरी दरार और चूत की नरम दरार। पतली साड़ी और टाइट अंडरवियर के कारण सब कुछ नंगा-सा महसूस हो रहा था। उसने साड़ी थोड़ी और सरकाई। अब गाँड़ और चूत उसके हाथों में लगभग नंगी थीं।

वह दोनों हाथों से गाँड़ को फैलाए हुए तेल लगा रहा था। फिर चूत पर पूरा हाथ रखकर धीरे-धीरे दबाता, सहलाता। उंगलियाँ दरार के अंदर तक घुस जातीं। नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ हुईं, लेकिन वह सोने का नाटक करती रही। शायद थकान इतनी थी कि कुछ समझ नहीं पा रही थी।

राज अब पूरा शरीर छूने लगा। पीठ, कमर, गाँड़, जाँघें… फिर साड़ी के अंदर हाथ डालकर उनकी बड़ी गोल चूचियों को दबाया। निपल्स पहले से ही थोड़े कड़े थे। वह दोनों स्तनों को मुट्ठी में भर-भरकर मसल रहा था। नेहा हल्की सी कराह निकाली, लेकिन आँखें नहीं खोलीं।

फिर राज उनके ऊपर चढ़ गया। दोनों घुटने उनकी गाँड़ के दोनों तरफ रखे और अपना तना हुआ लंड ठीक बीच में लाया। झुककर लंड को उनकी गाँड़ की दरार में सटा दिया और जोर-जोर से रगड़ने लगा। लंड की नोक गाँड़ के छेद और चूत के मुँह पर बार-बार टकरा रही थी। साड़ी और अंडरवियर के बीच फिसलते हुए वह रगड़ता रहा।

नेहा ने हल्की सी सिसकी ली।

राज ने धीमे से कहा, “आराम करो माँ… आज आपकी पूरी मालिश करूँगा। कुछ मत बोलो… सो जाओ।”

वह लगातार रगड़ता रहा। लंड गाँड़ की दरार में फिसलता, चूत के गीले मुँह को छूता, फिर वापस। नेहा की गाँड़ अब हल्के-हल्के हिलने लगी थी, लेकिन आँखें बंद ही रहीं। राज जानता था—माँ को पूरा पता नहीं चल रहा। थकान और नींद के कारण वह सब सह रही है।

मालिश के बहाने उसने उनकी पूरी बॉडी छू ली, दबा ली, रगड़ ली। आखिर में वह अपने लंड को उनकी गाँड़ पर रखकर जोर से रगड़ते-रगड़ते लगभग झड़ने ही वाला था, लेकिन उसने खुद को रोक लिया।

अंदर ही अंदर उसके मन में एक बात पक्की हो गई—

आज रात… जब पापा नहीं होंगे… तब माँ को पूरी तरह चोदूँगा।

नेहा अभी भी आँखें बंद किए पड़ी थी। राज ने साड़ी ठीक की, तेल का कटोरा हटाया और बगल वाले बेड पर लेट गया। उसका लंड अभी भी तना हुआ था। वह छत की ओर देखते हुए सोच रहा था—

रात का इंतज़ार… और माँ की वो नरम गाँड़… वो टाइट अंडरवियर… वो गोल चूचियाँ…

आज रात सब उसका होगा।

रात गहरा चुकी थी। घर में सन्नाटा था। पापा की नाइट ड्यूटी थी, वे सुबह तक नहीं आने वाले थे।

नेहा ने रोज की तरह पतली नाइटी पहन ली थी—एकदम हल्की, लगभग पारदर्शी। नीचे फिर वही लेस वाली टाइट अंडरवियर। बेड पर लेटते ही उनकी बड़ी गोल चूत राज की तरफ हो गई। नाइटी ऊपर सरक गई थी और अंडरवियर चूत के बीच इतनी कसकर फँसी हुई थी कि दोनों होंठ बाहर निकले हुए लग रहे थे। गाँड़ मखमली और गोल, नाइटी के नीचे अपनी शक्ल दिखा रही थी।

राज ने दरवाज़े की तरफ देखा, फिर धीमे से बोला, “माँ… आज डर लग रहा है। आपके बगल में सो जाऊँ?”

नेहा थकी हुई आवाज़ में बोली, “आ जा… लेकिन शांति से सोना।”

राज उनके बगल में लेट गया। अंधेरा था। वह माँ की तरफ मुँह करके लेटा रहा और उनकी बड़ी चूत को घूरता रहा। थोड़ी देर बाद वह और नज़दीक सरक आया। एक हाथ हल्के से बढ़ाकर उनकी गाँड़ पर रख दिया।

गाँड़ इतनी नरम और गोल थी कि हाथ रखने भर से उसका लंड तुरंत तन गया। वह धीरे-धीरे सहलाने लगा—पहले ऊपर, फिर नीचे, फिर दोनों गोलियों को हल्के से दबाने लगा। नेहा की साँसें गहरी थीं, जैसे सो रही हो।

राज और करीब आया। पीछे से कसकर पकड़ लिया। एक हाथ उनकी बड़ी चूची पर रख दिया, दूसरा गाँड़ पर। लंड को नाइटी के ऊपर से ही गाँड़ पर रगड़ने लगा। चूची मुट्ठी में भरकर मसलने लगा। निपल पहले से ही कड़ा था।

फिर उसने नाइटी ऊपर उठाई। अब नंगी गाँड़ उसके सामने थी। लंड निकालकर सीधे गाँड़ की दरार में रगड़ने लगा। एक हाथ से गाँड़ को दबाता, फैलाता और लंड को बीच में घुमाता। लंड की नोक गाँड़ के छेद पर बार-बार टकरा रही थी।

उसकी नज़र टाइट अंडरवियर पर पड़ी। उसने आराम से अंडरवियर को एक तरफ सरकाया। नेहा की चूत अब पूरी तरह खुली थी—गुलाबी, थोड़ी सूजी हुई, और बीच का छेद हल्का सा लाल चमक रहा था। रस की हल्की चमक भी दिख रही थी।

राज ने एक उँगली धीरे से छुआ, फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाना शुरू किया।

नेहा अचानक सिसक उठी। “आह… क्या… कर रहे हो राज…”

राज ने तुरंत उनका मुँह हाथ से दबा दिया और कान में धीमे से बोला, “माँ… आज मुझे चोदने दो। आप बहुत सेक्सी हो… मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।”

उँगली अब पूरी अंदर थी। नेहा हम्म… ऊूँ… आह… करने लगी। राज ने उँगली निकालकर अपना नंगा लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा और हल्के से दबाने लगा। नेहा की कमर अपने आप हिलने लगी। लंड धीरे-धीरे अंदर सरकता गया।

“आह्ह… राज… मत… कर…” नेहा कराहते हुए बोली, लेकिन शरीर विरोध नहीं कर रहा था।

राज ने पूरा लंड अंदर धकेल दिया। फिर जोर-जोर से चोदने लगा। नेहा मना करती रही, लेकिन उसकी गाँड़ पीछे की ओर धकेल रही थी।

“माँ… तुम हमेशा इतनी बड़ी चूची और गाँड़ लेकर घूमती हो… मन तो करेगा ही न… मेरी रंडी…”

नेहा कराहते हुए बोली, “मैं… नहीं जानती थी कि तू मुझे इतना चोदना चाहता है… माँचोद… आह्ह…”

राज और तेजी से धक्के मारने लगा। चूत की दीवारें उसके लंड को कसकर पकड़ रही थीं। हर धक्के के साथ रस की आवाज़ आ रही थी। नेहा की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी।

थोड़ी देर बाद नेहा ने खुद कहा, आवाज़ में शर्म और मज़ा दोनों थे— “आज… मेरी गाँड़ का छेद भी… अपने मोटे लंड से फैला दे…”

राज ने लंड निकाला। चूत से निकलते ही रस की धार बह निकली। उसने लंड को गाँड़ के छोटे छेद पर लगाया। धीरे-धीरे धकेलने लगा। नेहा हल्की-हल्की साँसें लेती रही, सिसकियाँ निकालती रही।

“आह्ह… धीरे… राज… बहुत मोटा है…”

राज ने धीरे-धीरे पूरा लंड गाँड़ के अंदर धकेल दिया। अब वह गाँड़ भी चोदने लगा। पहले धीरे, फिर जोर से। नेहा की दोनों दरारों से रस बह रहा था। गाँड़ और चूत दोनों चमक रहे थे।

राज ने एक हाथ से उनकी बड़ी चूची मसलनी शुरू की, दूसरे हाथ से चूत की फँसी हुई अंडरवियर को और सरकाया। वह बारी-बारी से चूत और गाँड़ दोनों में लंड डालने लगा। नेहा अब खुलेआम कराह रही थी।

“माँ… तुम्हारी ये गाँड़… ये चूत… अब सिर्फ मेरी हैं…”

नेहा कराहते हुए बोली, “चोद… जैसे चाहे चोद… आज रात पूरी मेरी है…”

राज ने आखिर में जोर के धक्के मारकर अपना सारा वीर्य माँ के अंदर ही छोड़ दिया—पहले चूत में, फिर गाँड़ में। दोनों जगह गरम वीर्य भर गया। नेहा की चूत और गाँड़ से सफेद रस बाहर निकल रहा था।

दोनों थककर एक-दूसरे से चिपक गए। नेहा ने राज के बालों में हाथ फेरते हुए धीमे से कहा, “जब भी मौका मिलेगा… जरूर करेंगे।”

राज ने उनकी बड़ी चूची को मुँह में लेते हुए जवाब दिया, “हर मौका लूँगा माँ… तुम्हारी ये नरम गाँड़ और गीली चूत अब सिर्फ मेरे लंड की हैं।”

रात अभी बाकी थी। राज का लंड फिर से तन चुका था। उसने नेहा को फिर से पलट दिया और उनकी गाँड़ को दोनों हाथों से फैलाते हुए दोबारा लंड अंदर डालने लगा।

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