कुवारी साली की चूत चोद के सील तोड़ी - हार्डकोर सेक्स
देवर ने अपनी कुंवारी साली की टाइट और अनछुई चूत का पहला मज़ा लिया! बहन सो रही थी, लेकिन देवर और साली के बीच छुपी हुई आग भड़क उठी। पूरी रात गहरी चुम्बन, छूने और हार्डकोर प्यार की गर्म कहानी जो आपका खून गरम कर देगी।
रात का अंधेरा छाया हुआ था। मुंबई की एक पॉश सोसाइटी के फ्लैट में, 28 साल की ऋतु अपने बेडरूम में लेटी हुई थी। उसकी बहन प्रिया की शादी को अभी सिर्फ 8 महीने हुए थे। प्रिया का पति राहुल ऑफिस के काम से बाहर गया हुआ था, इसलिए ऋतु कुछ दिनों के लिए अपनी बहन के घर आ गई थी ताकि प्रिया को कंपनी मिल सके।
ऋतु एकदम मॉडर्न और खूबसूरत थी – लंबे काले घुंघराले बाल, गोल-गोल स्तन जो 34D साइज के थे, पतली कमर और उभरी हुई गांड। वह सिर्फ एक टाइट पिंक नाइटी पहने हुई थी जो उसके घुटनों तक थी, अंदर कुछ नहीं। प्रिया किचन में कुछ बना रही थी।
तभी दरवाजा खुला और अंदर आया विक्रम – राहुल का छोटा भाई, यानी ऋतु का देवर। विक्रम 24 साल का था, जिम जाने वाला, सॉलिड बॉडी, 6 फीट लंबा, शार्प jawline और वह हमेशा से ऋतु को देखते ही उसकी तरफ आकर्षित होता था। आज भी वह ऑफिस से सीधा आया था, शर्ट के ऊपर से ही उसकी छाती दिखाई दे रही थी।
“अरे भाभी… नहीं, आज तो साली जी आ गई है!” विक्रम मुस्कुराते हुए बोला और अपनी आँखें ऋतु की नाइटी के ऊपर से उसके स्तनों पर घुमाने लगा।
ऋतु शर्मा गई पर अंदर से गर्म हो गई। वह पहले भी नोटिस कर चुकी थी कि विक्रम उसको कैसे देखता है। “अरे देवर जी, आप आ गए? प्रिया किचन में है, जाओ उसके पास।”
लेकिन विक्रम वहाँ से नहीं हिला। वह बेड के पास आकर बैठ गया। “भाभी नहीं, आप ही तो असली मज़ा हो। प्रिया तो बोरिंग है, आप इतनी हॉट हो।” उसने धीरे से अपना हाथ ऋतु के पैर पर रख दिया।
ऋतु का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। “विक्रम… यह क्या कर रहे हो? प्रिया आ जाएगी।” पर उसने हाथ हटाने की कोशिश नहीं की।
विक्रम ने धीरे से उसके पैर को सहलाते हुए ऊपर की तरफ बढ़ाया। “साली जी, बहुत दिनों से सोच रहा था… आपकी यह नाइटी में कितनी सेक्सी लगती हो। देखो ना, मेरी तो पैंट टाइट हो रही है।” उसने ऋतु का हाथ पकड़कर अपनी जींस के ऊपर से अपने लंड पर रख दिया।
ऋतु की सांस तेज हो गई। विक्रम का लंड बहुत मोटा और सख्त था – जैसे लोहे की रॉड। उसने पहली बार टच किया था किसी और मर्द का, और वह भी अपने देवर का। “उफ़… विक्रम… यह गलत है… पर…” उसकी आवाज़ में लस्ट आ चुका था।
तभी प्रिया की आवाज़ आई, “ऋतु! डिनर रेडी है!”
दोनों झट से अलग हो गए। ऋतु का चेहरा लाल था। डिनर के समय दोनों एक दूसरे को चोरी-चोरी देखते रहे। प्रिया कुछ नोटिस नहीं कर रही थी। रात को प्रिया जल्दी सो गई क्योंकि उसको थकान थी।
ऋतु को नींद नहीं आ रही थी। वह हॉल में पानी पीने गई। वहाँ सोफे पर विक्रम बैठा था, सिर्फ शॉर्ट्स में। उसकी छाती और एब्स चमक रहे थे। “साली जी… नींद नहीं आ रही क्या?” विक्रम ने धीरे से कहा और उसको अपने पास खींच लिया।
इस बार ऋतु ने कोई विरोध नहीं किया। विक्रम ने उसको किस करना शुरू कर दिया – पहले धीरे, फिर गहरा। उसके हाथ ऋतु की नाइटी के अंदर घुसे, उसके सॉफ्ट स्तनों को मसलने लगे। ऋतु के स्तन सख्त हो चुके थे, निप्पल बिलकुल टाइट।
“आह्ह्ह… विक्रम… स्लो…” ऋतु सिसकियाँ भर रही थी। विक्रम ने उसकी नाइटी ऊपर कर दी और एक स्तन मुंह में ले लिया। चूसने लगा जैसे कोई भूखा हो। ऋतु के हाथ उसके बालों में थे, दबाते हुए। उसके नीचे की चूत गीली होने लगी थी।
विक्रम ने उसको सोफे पर लिटाया और उसकी नाइटी को पूरी तरह ऊपर कर दिया। ऋतु की शेव्ड, पिंक चूत चमक रही थी। “साली जी… कितनी सुंदर है तेरी चूत।” उसने अपनी उंगली अंदर डाल दी।
ऋतु तड़प उठी। “उफ़्फ़्फ़… देवर जी… अंदर मत… बाहर ही… आह्ह्ह!”
लेकिन विक्रम ने सुनी नहीं। उसने अपनी उंगली अंदर-बाहर करते हुए उसकी क्लिट को चाटना शुरू कर दिया। ऋतु की टांगें काँप रही थीं। वह पहली बार इतना मज़ा ले रही थी। विक्रम का मुंह पूरी तरह उसकी चूत में लगा हुआ था – जीभ अंदर घुसा रहा था।
“मैं… आ रही हूँ… आह्ह्ह्ह्ह्ह!” ऋतु ने ज़ोर से ऑर्गेज्म कर दिया। उसके पानी से विक्रम का मुंह भर गया।
अब विक्रम खड़ा हुआ। उसने अपनी शॉर्ट्स उतारी। उसका 7 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया, बिलकुल खड़ा और टॉप पर से प्री-कम निकल रहा था।
“साली जी… अब मेरा लंड भी टेस्ट करो ना,” उसने कहा और ऋतु के मुंह के पास ले आया। ऋतु ने शर्माते हुए पर उत्साह से उसका लंड मुंह में लिया। पहले सिर्फ टॉप, फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। विक्रम उसके मुंह में धक्के मार रहा था। ऋतु की आँखें लाल हो रही थीं पर वह रुक नहीं रही थी। यह सिर्फ शुरुआत थी…
ऋतु अभी भी सोफे पर लेटी हुई थी, सांस फूली हुई, चूत से पानी टपक रहा था। विक्रम का मोटा लंड उसके मुंह के सामने था, चमकता हुआ। ऋतु ने उसको दोनों हाथों से पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। विक्रम के मुंह से सिसकियाँ निकल रही थीं – “आह्ह्ह साली जी… तेरी जीभ बहुत खतरनाक है… पूरा अंदर ले ले…”
ऋतु ने गहराई से लंड मुंह में लिया, गले तक, और अपनी जीभ से उसके अंडकोष को भी सहलाने लगी। विक्रम उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में धक्के मार रहा था। थोड़ी देर बाद उसने ऋतु को उठाया और दीवार के साथ लगा दिया।
“अब तेरी चूत को चोदना है,” उसने गर्म सांसों में कहा। ऋतु ने अपनी टांगें फैला दीं। विक्रम ने अपना लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ने लगा। टोपा अंदर-बाहर कर रहा था बिना पूरा डाले।
“देवर जी… प्लीज… धीरे से… बहुत मोटा है तेरा…” ऋतु तड़प रही थी।
विक्रम ने एक ज़ोर का धक्का मारा और अपना पूरा 7 इंच का लंड ऋतु की टाइट चूत में घुसेड़ दिया। ऋतु की चीख निकल गई पर उसने मुंह पर हाथ रख लिया। दर्द और मज़ा दोनों साथ में था। विक्रम रुक नहीं रहा – धीरे-धीरे धक्के मारता रहा, फिर स्पीड बढ़ा दी।
“फक… कितनी टाइट है तेरी चूत साली जी… प्रिया से कहीं बेहतर…” वह ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। ऋतु के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। विक्रम ने एक स्तन मुंह में ले लिया और चूसते हुए चोदता रहा।
हॉल में ही, सोफे के पास, दोनों पागल हो रहे थे। ऋतु ने अपनी टांगें विक्रम की कमर पर लपेट लीं और धक्के पर धक्का लेने लगी। “और ज़ोर से… और गहराई से… फाड़ दे मेरी चूत आज!”
विक्रम ने उसको डॉगी स्टाइल में घुमा दिया। ऋतु सोफे पर घुटनों के बल, गांड ऊपर। विक्रम ने उसकी उभरी गांड पर थप्पड़ मारा और पीछे से पूरा लंड अंदर पेल दिया। अबकी बार बहुत गहरा था। हर धक्के के साथ ऋतु की चूत से “पुच-पुच” की आवाज़ आ रही थी।
विक्रम उसके बाल पकड़कर पीछे से चोद रहा था जैसे कोई जंगली जानवर। ऋतु का दूसरा हाथ अपनी क्लिट पर था, रगड़ रही थी। “मैं फिर से आ रही हूँ देवर जी… आह्ह्ह्ह्ह्ह!” उसने ज़ोर से ऑर्गेज्म किया, चूत से पानी निकलकर विक्रम के लंड पर बह गया।
विक्रम अब रुकने वाला नहीं था। उसने ऋतु को उठाया और अपने बेडरूम में ले गया (प्रिया दूसरे रूम में सो रही थी)। वहाँ उसने ऋतु को बेड पर लिटाया और मिशनरी पोजीशन में फिर से डाल दिया।
अब दोनों बिलकुल नंगे थे। विक्रम की छाती ऋतु के स्तनों पर रगड़ रही थी। वह गहरे किस करते हुए ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। ऋतु के नाखून उसकी पीठ पर गड़ रहे थे। “तेरा लंड बहुत मस्त है… रोज़ चाहिए मुझे…”
विक्रम की स्पीड और तेज़ होती गई। बेड हिल रहा था। आखिर में उसने ऋतु की चूत के अंदर ही अपना गरम माल भर दिया – “ले साली जी… पूरा अंदर ले ले मेरा कम!”
दोनों थककर एक दूसरे से लिपटकर लेट गए। पर यह रात अभी खत्म नहीं हुई थी…
सुबह होने वाली थी पर दोनों की भूख अभी नहीं बुझी थी। प्रिया अभी भी गहरी नींद में थी। विक्रम ने ऋतु को उठाया और बाथरूम ले गया। शावर ऑन किया।
गरम पानी के नीचे दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे। विक्रम ने ऋतु को दीवार से लगा दिया और उसकी टांगें अपनी कमर पर चढ़ा ली। फिर से उसका लंड अंदर घुस गया – इस बार स्टैंडिंग पोजीशन में।
“उफ़्फ़्फ़… यह पोजीशन बहुत वाइल्ड है…” ऋतु कराह रही थी। पानी दोनों के शरीर पर बह रहा था। विक्रम उसके स्तनों को चूस रहा था और नीचे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था। ऋतु की गांड दीवार से टकरा रही थी हर धक्के में।
थोड़ी देर बाद विक्रम ने उसको नीचे घुटनों के बल बिठा दिया और शावर के नीचे ही ब्लोजॉब करवाया। ऋतु अब एक्सपर्ट बन चुकी थी – पूरा लंड मुंह में ले लेती, अंडकोष को चाटती, और हाथ से भी साथ देती।
वापस बेडरूम आकर विक्रम ने नया एक्सपेरिमेंट किया। उसने ऋतु की गांड पर फोकस किया। पहले उंगली से, फिर अपना लंड धीरे से उसकी टाइट गांड में घुसेड़ने लगा।
“देवर जी… दर्द हो रहा है… पर मत रुकना…” ऋतु के मुंह से सिसकियाँ निकल रही थीं। विक्रम ने लुब्रिकेशन के लिए थोड़ा थूक लगाया और धीरे से पूरा अंदर कर दिया। गांड चोदने का मज़ा कुछ और ही था।
दोनों 69 पोजीशन में भी गए – ऋतु ऊपर, विक्रम नीचे। वह एक दूसरे की चूत और लंड को चाट रहे थे। ऋतु का पानी विक्रम के मुंह में जा रहा था और विक्रम का प्री-कम ऋतु के गले तक।
आखिर में क्लाइमेक्स का समय आया। विक्रम ने ऋतु को मिशनरी में लिटाया, उसकी टांगें कंधे पर रखकर बहुत गहरा चोदना शुरू किया। हर धक्का इतना ज़ोर का था कि ऋतु की आँखें बंद हो रही थीं।
“साली जी… मैं आ गया… तेरी चूत में भर दूंगा!” “हां देवर जी… मुझे भी साथ ले लो… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!”
दोनों एक साथ झड़ गए। विक्रम का गरम कम ऋतु की चूत के अंदर भर गया। ऋतु का पूरा शरीर काँप रहा था। दोनों बहुत देर तक एक दूसरे को किस करते रहे।
सुबह होने तक दोनों ने एक और राउंड लिया – इस बार ऋतु ऊपर थी, काउगर्ल स्टाइल में। वह खुद कंट्रोल लेकर ऊपर-नीचे हो रही थी, अपने स्तन हिलाते हुए। विक्रम नीचे से उसकी गांड पकड़कर धक्के दे रहा था।
रात भर का मज़ा खत्म होने के बाद दोनों थककर सो गए। प्रिया जब उठी तो दोनों नॉर्मल बिहेव कर रहे थे, पर उनकी आँखों में एक नई चमक थी।
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