कुंवारी बहन की सील तोड़ी
अपनी 19 साल की मासूम बहन की टाइट कुंवारी चूत फाड़ दी। पहला खून, ज़ोरदार चुदाई और क्रीमपाई तक, अब वो रोज़ भाई से चुदवाने को बेताब रहती है।
मेरा नाम राहुल है, 24 साल का। मैं दिल्ली में एक अच्छी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जॉब करता हूँ। मेरी छोटी बहन नेहा अभी 19 साल की है और कॉलेज के पहले साल में पढ़ रही है। नेहा सच में बहुत खूबसूरत लड़की है। उसकी हाइट 5'3" है, रंग दूधिया गोरा, लंबे घने काले बाल कमर तक लहराते हैं। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और चमकदार हैं, होंठ गुलाबी और नाक नुकीली। उसका बदन बेहद आकर्षक है – 32D साइज के गोल, भरे हुए और बिल्कुल टाइट बूब्स, 26 इंच की पतली कमर, 34 इंच की नरम-गोल और उभरी हुई गांड, मोटी-चिकनी जाँघें। उसकी चूत बिल्कुल साफ शेव की हुई, गुलाबी और कुंवारी थी।
उस दिन मम्मी-पापा नानी के घर 10 दिन के लिए चले गए थे। घर में सिर्फ मैं और नेहा थे। गर्मी का मौसम था, इसलिए हम दोनों हल्के कपड़ों में रहते थे। रात के करीब 11:45 बजे मैं लिविंग रूम के सोफे पर टीवी देख रहा था। तभी नेहा अपने कमरे से निकली। उसने पहनी थी बहुत छोटी लाइट पिंक शॉर्ट्स जो उसकी मोटी जाँघों का आधा हिस्सा भी नहीं ढक पा रही थीं और ऊपर एक टाइट व्हाइट स्लीवलेस क्रॉप टॉप जिसमें उसके 32D बूब्स कसकर उभरे हुए थे। अंदर ब्रा नहीं थी, इसलिए निप्पल हल्के से साफ दिख रहे थे। उसके बाल खुले हुए थे और चेहरा थोड़ा लाल था।
वो सीधे मेरे पास आई और मेरी गोद में सिर रखकर लेट गई। “भैया, आज नींद ही नहीं आ रही। बहुत गर्मी लग रही है,” उसने शरमाते हुए कहा। मैंने उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं और धीरे से उसकी गर्दन और कमर सहलाने लगा। उसकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने हिम्मत करके कहा, “नेहा, तू अब बहुत सुंदर और हॉट हो गई है। तेरे ये बूब्स और गांड देखकर मुझे कंट्रोल नहीं हो रहा। हम दोनों अकेले हैं, कोई नहीं देखेगा। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ। आज मैं तुझे औरत बना दूँगा। धीरे-धीरे करूँगा, तुझे दर्द नहीं होगा। ट्रस्ट कर मुझे।”
नेहा पहले शर्मा गई और कुछ देर चुप रही। फिर उसने मेरी शर्ट पकड़ ली और फुसफुसाकर बोली, “भैया... मुझे भी अजीब सा लगता है... लेकिन ये गलत तो नहीं है ना?” मैंने उसे आश्वासन दिया कि ये हमारे बीच का राज रहेगा और मैं उसे कभी दुख नहीं पहुँचाऊँगा। धीरे-धीरे वो मान गई और मेरे सीने से और चिपक गई। मैंने उसके होंठों पर हल्का किस किया। वो पहले हिचकिचाई लेकिन फिर रेस्पॉन्स देने लगी।
मैंने उसे गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले गया। कमरे में सिर्फ हल्की नाइट लैंप जल रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। पहले मैंने उसके क्रॉप टॉप को धीरे-धीरे ऊपर किया। जैसे ही टॉप निकला, उसके 32D टाइट बूब्स आज़ाद होकर उछल पड़े। वो बिल्कुल गोल, सफेद और नरम थे लेकिन बहुत कसे हुए। गुलाबी निप्पल कड़े होकर खड़े थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें सहलाया और दबाया। फिर मैंने उसकी शॉर्ट्स का नाडा खोला और नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ पतली लाल लेस वाली पैंटी में थी। पैंटी उसके चूत पर चिपकी हुई थी और बीच में हल्का गीला धब्बा दिख रहा था।
मैंने पैंटी भी धीरे से उतार दी। नेहा की कुंवारी चूत पूरी तरह सामने थी – बिल्कुल साफ, गुलाबी, पतली दरार और ऊपर छोटा सा क्लिट। उसकी मोटी जाँघें और गोल गांड देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया। मैंने अपना 7 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। नेहा ने देखकर डरते हुए कहा, “भैया... ये तो बहुत बड़ा है... अंदर कैसे जाएगा?” मैंने उसे चूमते हुए समझाया कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।
मैंने लंड को उसकी चूत पर रखकर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। गर्म सुपाड़ा उसके गीले होंठों पर ऊपर-नीचे घिस रहा था। कभी क्लिट पर दबाकर घुमाता। नेहा कराहने लगी, “भैया... आह्ह... अच्छा लग रहा है...” फिर मैं नीचे गया, उसकी जाँघें फैलाईं और जीभ से चूत चाटने लगा। नेहा तड़प उठी। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालीं और तेजी से हिलाने लगा। क्लिट पर जीभ घुमाता रहा। नेहा की कमर उठने लगी। अचानक वो ज़ोर से काँपी और उसकी चूत से गर्म पानी निकल गया। वो पहली बार झड़ गई थी।
मैंने उसके टाँगें चौड़ी करके लंड का सुपाड़ा चूत के छेद पर रखा। धीरे दबाया तो नेहा ने मेरी पीठ पकड़ ली। एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड उसकी कुंवारी चूत में समा गया। हल्का खून निकला। नेहा दर्द से चीखी और रोने लगी। मैं रुका, उसके बूब्स चूसता रहा, निप्पल काटता रहा और बार-बार किस करता रहा। धीरे-धीरे दर्द कम हुआ तो मैंने रफ्तार बढ़ा दी। उसके बूब्स दबाते हुए और गांड पकड़कर ठोके मारने लगा। मैंने उसे पलट दिया। अब वो घुटनों के बल थी और उसकी गोल-मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पर हल्के थप्पड़ मारे और पीछे से पूरा लंड ठोक दिया। जोर-जोर से चोदने लगा। गांड हिल रही थी, थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। नेहा तकिए में मुँह दबाकर चिल्ला रही थी, “भैया... और तेज... बहुत मजा आ रहा है...”
फिर नेहा खुद ऊपर आ गई। मैं लेट गया और वो मेरे लंड पर बैठ गई। उसने खुद लंड पकड़कर अपनी चूत में डाला और धीरे बैठ गई। पूरा अंदर चला गया। फिर वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके बाल बिखरे हुए थे, टाइट बूब्स जोर से उछल रहे थे। मैंने नीचे से बूब्स जोर से दबाए और गांड पकड़कर सहारा दिया। नेहा तेजी से झूम रही थी।
आखिर में मैंने उसे फिर से लिटाया। उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और बहुत तेज-तेज ठोके मारने लगा। उसकी चूत मेरे लंड को कस रही थी। नेहा कई बार झड़ चुकी थी। उसका पूरा बदन पसीने से तर था। आखिर मैं भी रुक नहीं पाया। गाढ़ा गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर भर दिया। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। मैंने उसके माथे पर प्यार से किस किया और कहा, “अब तू पूरी तरह मेरी हो गई है।” नेहा शरमाते हुए मुस्कुराई और बोली, “भैया... मुझे अच्छा लगा...”
उस रात के बाद हमारा रिश्ता बदल गया। अगले 10 दिनों में हमने कई बार सेक्स किया – कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी छत पर। नेहा अब खुद मुझे बुलाती है और कहती है कि उसकी चूत हमेशा मेरे लिए तैयार है। ये हमारा गुप्त और गर्म प्यार है जो हमेशा हमारे साथ रहेगा।
मेरा नाम राहुल है, 24 साल का। मैं दिल्ली में एक अच्छी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जॉब करता हूँ। मेरी छोटी बहन नेहा अभी 19 साल की है और कॉलेज के पहले साल में पढ़ रही है। नेहा सच में बहुत खूबसूरत लड़की है। उसकी हाइट 5'3" है, रंग दूधिया गोरा, लंबे घने काले बाल कमर तक लहराते हैं। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और चमकदार हैं, होंठ गुलाबी और नाक नुकीली। उसका बदन बेहद आकर्षक है – 32D साइज के गोल, भरे हुए और बिल्कुल टाइट बूब्स, 26 इंच की पतली कमर, 34 इंच की नरम-गोल और उभरी हुई गांड, मोटी-चिकनी जाँघें। उसकी चूत बिल्कुल साफ शेव की हुई, गुलाबी और कुंवारी थी।
उस दिन मम्मी-पापा नानी के घर 10 दिन के लिए चले गए थे। घर में सिर्फ मैं और नेहा थे। गर्मी का मौसम था, इसलिए हम दोनों हल्के कपड़ों में रहते थे। रात के करीब 11:45 बजे मैं लिविंग रूम के सोफे पर टीवी देख रहा था। तभी नेहा अपने कमरे से निकली। उसने पहनी थी बहुत छोटी लाइट पिंक शॉर्ट्स जो उसकी मोटी जाँघों का आधा हिस्सा भी नहीं ढक पा रही थीं और ऊपर एक टाइट व्हाइट स्लीवलेस क्रॉप टॉप जिसमें उसके 32D बूब्स कसकर उभरे हुए थे। अंदर ब्रा नहीं थी, इसलिए निप्पल हल्के से साफ दिख रहे थे। उसके बाल खुले हुए थे और चेहरा थोड़ा लाल था।
वो सीधे मेरे पास आई और मेरी गोद में सिर रखकर लेट गई। “भैया, आज नींद ही नहीं आ रही। बहुत गर्मी लग रही है,” उसने शरमाते हुए कहा। मैंने उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं और धीरे से उसकी गर्दन और कमर सहलाने लगा। उसकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने हिम्मत करके कहा, “नेहा, तू अब बहुत सुंदर और हॉट हो गई है। तेरे ये बूब्स और गांड देखकर मुझे कंट्रोल नहीं हो रहा। हम दोनों अकेले हैं, कोई नहीं देखेगा। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ। आज मैं तुझे औरत बना दूँगा। धीरे-धीरे करूँगा, तुझे दर्द नहीं होगा। ट्रस्ट कर मुझे।”
नेहा पहले शर्मा गई और कुछ देर चुप रही। फिर उसने मेरी शर्ट पकड़ ली और फुसफुसाकर बोली, “भैया... मुझे भी अजीब सा लगता है... लेकिन ये गलत तो नहीं है ना?” मैंने उसे आश्वासन दिया कि ये हमारे बीच का राज रहेगा और मैं उसे कभी दुख नहीं पहुँचाऊँगा। धीरे-धीरे वो मान गई और मेरे सीने से और चिपक गई। मैंने उसके होंठों पर हल्का किस किया। वो पहले हिचकिचाई लेकिन फिर रेस्पॉन्स देने लगी।
मैंने उसे गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले गया। कमरे में सिर्फ हल्की नाइट लैंप जल रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। पहले मैंने उसके क्रॉप टॉप को धीरे-धीरे ऊपर किया। जैसे ही टॉप निकला, उसके 32D टाइट बूब्स आज़ाद होकर उछल पड़े। वो बिल्कुल गोल, सफेद और नरम थे लेकिन बहुत कसे हुए। गुलाबी निप्पल कड़े होकर खड़े थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें सहलाया और दबाया। फिर मैंने उसकी शॉर्ट्स का नाडा खोला और नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ पतली लाल लेस वाली पैंटी में थी। पैंटी उसके चूत पर चिपकी हुई थी और बीच में हल्का गीला धब्बा दिख रहा था।
मैंने पैंटी भी धीरे से उतार दी। नेहा की कुंवारी चूत पूरी तरह सामने थी – बिल्कुल साफ, गुलाबी, पतली दरार और ऊपर छोटा सा क्लिट। उसकी मोटी जाँघें और गोल गांड देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया। मैंने अपना 7 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। नेहा ने देखकर डरते हुए कहा, “भैया... ये तो बहुत बड़ा है... अंदर कैसे जाएगा?” मैंने उसे चूमते हुए समझाया कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।
मैंने लंड को उसकी चूत पर रखकर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। गर्म सुपाड़ा उसके गीले होंठों पर ऊपर-नीचे घिस रहा था। कभी क्लिट पर दबाकर घुमाता। नेहा कराहने लगी, “भैया... आह्ह... अच्छा लग रहा है...” फिर मैं नीचे गया, उसकी जाँघें फैलाईं और जीभ से चूत चाटने लगा। नेहा तड़प उठी। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालीं और तेजी से हिलाने लगा। क्लिट पर जीभ घुमाता रहा। नेहा की कमर उठने लगी। अचानक वो ज़ोर से काँपी और उसकी चूत से गर्म पानी निकल गया। वो पहली बार झड़ गई थी।
मैंने उसके टाँगें चौड़ी करके लंड का सुपाड़ा चूत के छेद पर रखा। धीरे दबाया तो नेहा ने मेरी पीठ पकड़ ली। एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड उसकी कुंवारी चूत में समा गया। हल्का खून निकला। नेहा दर्द से चीखी और रोने लगी। मैं रुका, उसके बूब्स चूसता रहा, निप्पल काटता रहा और बार-बार किस करता रहा। धीरे-धीरे दर्द कम हुआ तो मैंने रफ्तार बढ़ा दी। उसके बूब्स दबाते हुए और गांड पकड़कर ठोके मारने लगा। मैंने उसे पलट दिया। अब वो घुटनों के बल थी और उसकी गोल-मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पर हल्के थप्पड़ मारे और पीछे से पूरा लंड ठोक दिया। जोर-जोर से चोदने लगा। गांड हिल रही थी, थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। नेहा तकिए में मुँह दबाकर चिल्ला रही थी, “भैया... और तेज... बहुत मजा आ रहा है...”
फिर नेहा खुद ऊपर आ गई। मैं लेट गया और वो मेरे लंड पर बैठ गई। उसने खुद लंड पकड़कर अपनी चूत में डाला और धीरे बैठ गई। पूरा अंदर चला गया। फिर वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके बाल बिखरे हुए थे, टाइट बूब्स जोर से उछल रहे थे। मैंने नीचे से बूब्स जोर से दबाए और गांड पकड़कर सहारा दिया। नेहा तेजी से झूम रही थी।
आखिर में मैंने उसे फिर से लिटाया। उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और बहुत तेज-तेज ठोके मारने लगा। उसकी चूत मेरे लंड को कस रही थी। नेहा कई बार झड़ चुकी थी। उसका पूरा बदन पसीने से तर था। आखिर मैं भी रुक नहीं पाया। गाढ़ा गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर भर दिया। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। मैंने उसके माथे पर प्यार से किस किया और कहा, “अब तू पूरी तरह मेरी हो गई है।” नेहा शरमाते हुए मुस्कुराई और बोली, “भैया... मुझे अच्छा लगा...”
उस रात के बाद हमारा रिश्ता बदल गया। अगले 10 दिनों में हमने कई बार सेक्स किया – कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी छत पर। नेहा अब खुद मुझे बुलाती है और कहती है कि उसकी चूत हमेशा मेरे लिए तैयार है। ये हमारा गुप्त और गर्म प्यार है जो हमेशा हमारे साथ रहेगा।
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