कुंवारी पत्नी की पहली एनल चुदाई – दर्द के बाद दीवानी हो गई

शादी के सिर्फ 10 दिन बाद नई नवेली दुल्हन की कुंवारी चुत की सील तोड़ी गई। घर खाली होते ही पति ने पहले उसकी चुत फाड़ी, फिर पहली बार उसकी टाइट गांड में पूरा लंड घुसेड़ दिया। दर्द के बाद पत्नी दीवानी हो गई और खुद मांगने लगी – और जोर से चोदो। एकदम हॉट, डर्टी और पूरी डिटेल वाली पहली सुहागरात।

लेखक: Aalok Pandey6 मिनट पढ़ने में
कुंवारी पत्नी की पहली एनल चुदाई – दर्द के बाद दीवानी हो गई

शादी को सिर्फ दस दिन हुए थे। नई नवेली दुल्हन आंचल अभी भी सिंदूर और चूड़ियों से सजी रहती थी। उसकी उम्र बाईस साल थी। गोरा-चिट्टा शरीर, पतली कमर, भरे हुए स्तन और गोल-मटोल गांड। शादी के पहले वह बिल्कुल कुंवारी थी। पहली रात पति राहुल ने सिर्फ चुंबन और हल्के स्पर्श किए थे, फिर ऑफिस की व्यस्तता ने दोनों को दूर कर दिया।

राहुल सुबह जल्दी निकल जाता और रात को देर से आता। घर में सास-ससुर, जेठ-जेठानी सब रहते थे। आंचल रोज रात को तरसती थी। उसके शरीर में आग लग जाती थी। वह बाथरूम में जाकर खुद को छूती, लेकिन मन नहीं भरता था। वह चाहती थी कि उसका पति उसे बुरी तरह चोदे, उसकी कुंवारी चुत फाड़े और गांड भी ले।

एक दिन घर में सब रिश्तेदारों के यहां चले गए। सास-ससुर गांव गए, जेठ-जेठानी मायके। पूरा घर खाली हो गया। सिर्फ आंचल और राहुल।

शाम को आंचल ने नहाया। उसने एकदम टाइट, पतली लाल साड़ी पहनी। ब्लाउज इतना छोटा और डीप था कि उसके आधे स्तन बाहर निकल रहे थे। निप्पल्स सख्त हो चुके थे और साड़ी के ऊपर से साफ दिख रहे थे। नीचे उसने पैंटी भी नहीं पहनी थी। साड़ी के अंदर उसकी चिकनी, मुलायम चुत और टाइट गांड नंगी थी।

राहुल ऑफिस से आया तो दरवाजा खोलते ही उसकी नजर पत्नी पर पड़ी। आंचल सोफे पर बैठी थी, एक पैर ऊपर उठाए हुए। साड़ी की स्लिट से उसकी चिकनी जांघ साफ दिख रही थी।

“आज क्या हो गया तुम्हें?” राहुल ने पूछा, आवाज में हैरानी थी।

आंचल धीरे से उठी और पास आ गई। उसने पति का हाथ पकड़कर अपने भरे हुए स्तनों पर रख दिया। “दस दिन हो गए राहुल… मैं कुंवारी की कुंवारी पड़ी हूं। आज घर में कोई नहीं है। आज तुम मुझे पूरी तरह से अपनी बनाओ।”

राहुल का लंड तुरंत सख्त हो गया। उसने पत्नी को जोर से अपनी तरफ खींचा और उसके होठों को चूसने लगा। आंचल की सांस तेज हो गई। उसने पति का हाथ अपने ब्लाउज के अंदर डाल दिया।

राहुल ने ब्लाउज के हुक खोले। आंचल के बड़े, नरम, गोरे स्तन बाहर निकल आए। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त। राहुल ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। दूसरे को उंगलियों से मसलने लगा।

“आह्ह्ह… राहुल… इतना जोर से चूसो… मेरी चुचियां बहुत दुख रही हैं…” आंचल कराह उठी।

राहुल ने दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा, चाटा, काटा। फिर नीचे गया। उसने साड़ी ऊपर उठाई। आंचल की चुत बिल्कुल नंगी और पहले से गीली थी। हल्के बालों वाली, गुलाबी, बंद हुई कुंवारी चुत।

राहुल ने नाक से उसकी खुशबू ली और जीभ से चाटने लगा। क्लिट को मुंह में लेकर चूसा। आंचल की जांघें कांपने लगीं। उसके हाथ पति के बालों में घुस गए।

“हां… ऐसे ही चाटो… मेरी चुत को अच्छी तरह चाट लो… आह्ह्ह… दस दिन से तरस रही हूं…”

राहुल ने जीभ अंदर तक डाल दी। आंचल की कुंवारी चुत की दीवारें कस रही थीं। वह जोर-जोर से कराह रही थी। राहुल ने दो उंगलियां भी अंदर डालने की कोशिश की, लेकिन बहुत टाइट था। सिर्फ एक उंगली मुश्किल से घुसी।

“इतनी टाइट हो तुम… आज सील तुड़वानी पड़ेगी,” राहुल ने कहा।

आंचल ने पति का चेहरा ऊपर उठाया और उसके होठों को चूसा। “तुड़वाओ… आज पूरी तरह से तुड़वाओ। मेरी चुत भी लो और गांड भी।”

राहुल ने पत्नी को गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटाकर उसने अपनी पैंट खोली। लंबा, मोटा, नसों वाला लंड बाहर निकला। सिर पर पहले से प्रीक्यूम चमक रहा था।

आंचल ने बैठकर पति का लंड मुंह में ले लिया। पहली बार वह इतना बड़ा लंड चूस रही थी। वह जीभ से चाटने लगी, गहरी लेने की कोशिश करने लगी। लार उसके होठों से बहने लगी।

“चूसो अच्छी तरह… अपनी कुंवारी चुत के लिए तैयार करो इसे,” राहुल ने बाल पकड़कर कहा।

आंचल ने पांच-सात मिनट तक चूसा। फिर राहुल ने उसे लिटा दिया। जांघें फैलाईं। उसने अपने लंड को उसकी गीली चुत पर रगड़ा।

“दर्द होगा… लेकिन सहना,” राहुल ने चेताया।

आंचल ने गर्दन हिलाई। “चोदो… फाड़ दो मेरी चुत…”

राहुल ने धीरे-धीरे धक्का मारा। सिर्फ सिर अंदर गया। आंचल ने दांत से होंठ काट लिए। फिर एक जोर का धक्का… और पूरा लंड उसकी कुंवारी चुत में घुस गया। सील टूट गई। खून की कुछ बूंदें चादर पर गिर गईं।

आंचल जोर से चीख पड़ी। “आह्ह्ह्ह… राहुल… फट गई… बहुत दर्द हो रहा है…”

राहुल रुका रहा। उसने पत्नी के स्तन चूसते हुए कहा, “अब आदत पड़ जाएगी… थोड़ी देर रुको।”

धीरे-धीरे आंचल की सांस सामान्य हुई। राहुल ने धीमे-धीमे धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ आंचल की कराह बदल रही थी – दर्द से मजे में।

“हां… अब अच्छा लग रहा है… जोर से चोदो… मेरी चुत को फाड़ दो…”

राहुल का टेम्पो बढ़ गया। बिस्तर चरमरा रहा था। आंचल की गांड हर धक्के पर हिल रही थी। राहुल ने उसके पैर कंधों पर रख दिए और और गहराई तक जाने लगा।

“बोल… कैसी लग रही है तेरी कुंवारी चुत में मेरा लंड?”

“बहुत… बहुत भरी हुई… आह्ह्ह… और जोर से… मैं आने वाली हूं…”

राहुल ने जोरदार धक्के मारकर आंचल को पहले चरमसुख दिया। आंचल की चुत जोर से कांपने लगी और पानी छोड़ने लगी। राहुल ने उसी समय अपना लंड बाहर निकाला।

आंचल अभी भी हांफ रही थी। राहुल ने उसे उल्टा कर दिया। घुटनों के बल। गांड ऊपर की तरफ। उसने थूक लगाकर अपनी उंगली उसकी गांड के छेद में डाली।

“अब यह भी लूंगा… पहली बार,” राहुल ने कहा।

आंचल ने पीछे मुड़कर देखा। आंखों में डर और वासना दोनों थे। “ले लो… आज सब कुछ तुम्हारा है…”

राहुल ने अपना अभी भी सख्त लंड उसकी टाइट गांड पर लगाया और धीरे-धीरे धक्का देना शुरू किया।

राहुल ने आंचल की गांड के टाइट छेद पर अपना लंड रखा और धीरे से दबाव डाला। सिर्फ सिर अंदर गया। आंचल की सांस अटक गई। उसके नाखून चादर में धंस गए।

“आह्ह्ह… राहुल… बहुत टाइट है… धीरे… आह्ह्ह…”

राहुल रुका नहीं। उसने एक और धक्का मारा। आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। आंचल जोर से कराह उठी। उसकी गांड की दीवारें पति के मोटे लंड को कसकर पकड़ रही थीं।

“सह जाओ… थोड़ा और,” राहुल ने कहा और दोनों हाथों से उसकी गांड के गाल फैला दिए। फिर एक जोरदार धक्का… और पूरा लंड अंदर तक चला गया।

आंचल की आंखों से आंसू निकल आए। दर्द बहुत था, लेकिन साथ में एक अजीब सी गर्मी भी फैल रही थी। राहुल ने अंदर ही रुककर उसकी कमर सहलाई।

“अब बताओ… कैसा लग रहा है?”

आंचल ने दबी आवाज में कहा, “भर गया… पूरा भर गया… अब हिलो… धीरे-धीरे हिलो…”

राहुल ने धीमे धक्के शुरू किए। हर बार लंड लगभग पूरा बाहर निकलता और फिर जोर से अंदर जाता। आंचल की मोटी गांड हर धक्के पर कांप रही थी। थप-थप की आवाज कमरे में गूंजने लगी।

धीरे-धीरे दर्द मजे में बदलने लगा। आंचल खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगी।

“हां… अब अच्छा लग रहा है… जोर से चोदो… मेरी गांड चोदो राहुल…”

राहुल का टेम्पो तेज हो गया। उसने एक हाथ आगे ले जाकर आंचल की अभी भी गीली चुत में उंगलियां डाल दीं। दो उंगलियां उसकी चुत में और मोटा लंड उसकी गांड में। दोनों जगह एक साथ।

आंचल पागल होने वाली थी। “आह्ह्ह्ह… दोनों जगह… मुझे दोनों जगह महसूस हो रहा है… और तेज… और तेज चोदो…”

राहुल ने बाल पकड़कर उसका सिर पीछे खींचा और उसके कान में गंदी बातें करने लगा।

“तेरी यह टाइट गांड आज से मेरी हो गई। रोज चोदूंगा। कभी चुत में, कभी गांड में। बोल… किसकी गांड चोद रहा हूं?”

“तुम्हारी… तुम्हारी पत्नी की गांड… आह्ह्ह… जोर से फाड़ दो इसे…”

राहुल ने उसे खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया। लंड अभी भी उसकी गांड में था। अब आंचल ऊपर थी। राहुल ने नीचे से जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। एक हाथ से उसके भारी स्तन मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चुत की क्लिट रगड़ रहा था।

आंचल की कराहें अब बेकाबू हो चुकी थीं। उसका पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था। स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। गांड राहुल के लंड पर बार-बार बैठ रही थी।

“मैं आने वाली हूं… राहुल… जोर से… अंदर तक डालो…”

राहुल ने आखिरी कुछ धक्के पूरे जोर से मारे। आंचल की गांड कसकर उसके लंड को निचोड़ने लगी। उसी पल आंचल को जोरदार चरमसुख आया। उसकी चुत से पानी की धार छोड़ने लगी और गांड अनियंत्रित रूप से कांपने लगी।

राहुल भी नहीं रुक सका। उसने गहरी सांस ली और अपना गाढ़ा, गरम वीर्य सीधा उसकी गांड के अंदर छोड़ दिया। एक के बाद एक झटके में भरता गया।

दोनों हिलते-हिलते थम गए। राहुल का लंड अभी भी अंदर था। वीर्य धीरे-धीरे उसकी गांड से निकलकर जांघों पर बहने लगा।

आंचल पूरी तरह ढीली पड़ गई। वह पति की छाती पर गिर गई। दोनों की सांसें तेज चल रही थीं।

राहुल ने धीरे से लंड बाहर निकाला। आंचल की गांड का छेद थोड़ा खुला हुआ था और उसमें से सफेद वीर्य निकल रहा था। उसने उंगली से वह वीर्य लिया और आंचल के होठों पर लगा दिया। आंचल ने जीभ निकालकर चाट लिया।

“कड़वा है… लेकिन तुम्हारा है,” आंचल ने मुस्कुराते हुए कहा।

राहुल ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। आंचल ने पति का अभी भी आधा सख्त लंड हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी।

“आज रात अभी खत्म नहीं हुई है,” आंचल ने धीरे से कहा। “थोड़ी देर बाद फिर से चोदना। इस बार पहले मेरी चुत में डालना… फिर गांड में। मैं और लेना चाहती हूं।”

राहुल ने उसकी आंखों में देखा। “दस दिन से तरस रही थी न? अब रोज तरसाऊंगा। जब घर में कोई नहीं होगा… तब तुम्हें इतना चोदूंगा कि चलते समय गांड दुखे।”

आंचल ने होठों पर मुस्कान के साथ कहा, “दुखे तो सही… लेकिन चोदते रहना।”

थोड़ी देर बाद राहुल फिर सख्त हो गया। इस बार उसने आंचल को अपनी गोद में बैठाया। पहले उसकी अभी भी संवेदनशील चुत में लंड डाला और जोर-जोर से ऊपर-नीचे करवाया। आंचल खुद उछल-उछल कर चुदवा रही थी। फिर राहुल ने लंड निकालकर फिर से उसकी गांड में डाल दिया।

इस बार गांड थोड़ी आसानी से खुल गई। दोनों ने लगभग एक घंटे तक बिना रुके चुदाई की। कभी चुत, कभी गांड, कभी मुंह में। आंचल कई बार चरमसुख पर पहुंच चुकी थी। राहुल ने आखिर में फिर से उसकी गांड के अंदर ही वीर्य छोड़ दिया।

रात के दो बज गए थे जब दोनों थककर सो गए। आंचल पति की बांहों में सोई थी। उसकी चुत और गांड दोनों हल्के दर्द और वीर्य से भरी हुई थीं। चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।

दस दिन बाद पहली बार उसकी सच्ची सुहागरात पूरी हुई थी।

कहानी
28 देखा गया
0.0 रेटिंग
0 पसंद
0 पसंदीदा
0 कमेंट
लेखक
Aalok Pandey
इस कहानी को रेट करें:

कमेंट0

अपनी राय साझा करें

SexStories HQ

भाभी की गांड चुदाई, माँ-बेटे की चुदाई, ससुर-बहू का राज, कुंवारी लड़की की पहली चुदाई, ऑफिस, कॉलेज और हर तरह की हॉट सेक्स स्टोरीज़।

श्रेणियां

    कोई नया चैप्टर मिस न करें!

    जब भी नए सीक्रेट चैप्टर या कहानियां अपलोड होंगी, आपको तुरंत ईमेल अपडेट मिल जाएगा।

    © 2026 SexStoriesHQ. All rights reserved.

    Join TelegramFor latest updates 🚀
    Telegram Icon
    Kunwari Biwi Ki First Anal Chudai – Dard Ke Baad Deewani Ho Gayi | SexStoriesHQ | SexStoriesHQ