कामवाली आंटी की बड़ी चूचियां चूस कर पीछे से चोदा - जोरदार चुदाई
जवान लड़के ने अपनी कामवाली आंटी की भारी-भारी चूचियों को जोर-जोर से चूसा और फिर पीछे से उनकी मोटी गांड पकड़कर उन्हें इतनी जोरदार चुदाई दी कि आंटी की चीखें पूरे घर में गूंजने लगीं। गर्म साँसें, भीगी चूत और पागलपन भरी चुदाई की वो कहानी जो आपको रोमांचित कर देगी।
रोहन 22 साल का एक सुंदर और हट्टा-कट्टा जवान लड़का था। वह कॉलेज के अंतिम वर्ष में पढ़ता था। उसके घर में सिर्फ वह और उसकी माँ रहते थे। माँ दिन भर ऑफिस की नौकरी में व्यस्त रहती थीं, इसलिए घर अक्सर खाली पड़ा रहता था। कई सालों से उनके घर में काम करने वाली आंटी का नाम सुनीता था।
सुनीता आंटी उम्र में करीब 38-39 साल की थीं, लेकिन देखने में बिल्कुल 30 से भी कम उम्र की लगती थीं। उनका गोरा रंग, भरा-भरा जिस्म, बड़ी-बड़ी और भारी चूचियाँ जो साड़ी के पल्लू में भी छिप नहीं पाती थीं, मोटी और गोल गाँड, पतली कमर और मोटी-मोटी जाँघें।
वे हमेशा टाइट ब्लाउज और साड़ी पहनती थीं, जिससे उनकी कमर की गोलाई, चूचियों की उभरी हुई लकीरें और नितंबों की मोटाई साफ-साफ दिखाई देती थी।
रोहन बचपन से ही सुनीता आंटी को देखता आया था, लेकिन अब जब वह जवान हो गया तो उसके मन में कुछ और ही भावनाएँ जागने लगी थीं। हर सुबह जब आंटी घर आतीं, रोहन चुपके से उनके जिस्म को ताड़ता रहता। आंटी भी जानती थीं कि लड़का उन पर लाइन मारता है, लेकिन वे हँसकर टाल जाती थीं।
एक दिन माँ ऑफिस के लिए बाहर चली गईं। घर में सिर्फ रोहन और सुनीता आंटी थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी, बिजली चमक रही थी और गरज की आवाजें आ रही थीं। आंटी किचन में काम कर रही थीं।
रोहन कॉलेज से जल्दी आ गया था। वह किचन के दरवाजे पर खड़ा-खड़ा आंटी को देख रहा था। आंटी की साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, उनकी भारी चूचियाँ ब्लाउज के अंदर उभरी हुई थीं। पसीना उनकी गर्दन से नीचे बह रहा था और ब्लाउज को गीला कर रहा था।
“आंटी, पानी पी लीजिए,” रोहन बोला और गिलास लेकर उनके पास गया।
सुनीता आंटी ने मुड़कर देखा। उनकी आँखों में शर्म थी, लेकिन एक हल्की मुस्कान भी थी। “बेटा, तू तो कॉलेज गया था ना? जल्दी आ गया?”
“हाँ आंटी, आज छुट्टी मिल गई।” रोहन ने गिलास देते हुए जान-बूझकर उनकी उँगलियों को छुआ। आंटी का शरीर हल्का सा काँप गया।
उस दिन से बातें बढ़ने लगीं। रोहन आंटी को तारीफें देने लगा – “आंटी आप बहुत सुंदर हो”, “आपकी मुस्कान तो कमाल की है”, “आपका फिगर देखकर दिल धड़कता है”। आंटी शरमातीं, लेकिन मना नहीं करती थीं।
एक हफ्ते बाद फिर माँ बाहर चली गईं। बारिश का मौसम था। आंटी घर के कमरे साफ कर रही थीं। रोहन ने हिम्मत करके कहा, “आंटी, आप थक गई होंगी। बैठिए, मैं पानी लाता हूँ।”
जब वह पानी लेकर आया तो आंटी बेड पर बैठी थीं। उन्होंने पल्लू साइड कर दिया था। रोहन पास बैठ गया और उनके हाथ पर अपना हाथ रख दिया। “आंटी... मुझे आपसे बहुत प्यार है।”
सुनीता आंटी की साँसें तेज हो गईं। “रोहन बेटा... यह गलत है। मैं तेरी कामवाली हूँ, उम्र भी...” लेकिन उनकी आवाज में विरोध कम था, इच्छा ज्यादा। रोहन ने धीरे से उनके गाल को छुआ। आंटी की आँखें बंद हो गईं। वह रुक नहीं पाया।
उसने आंटी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहली किस थी – धीमी, गीली, गहरी। आंटी ने शुरू में विरोध किया, लेकिन फिर उनके हाथ रोहन की पीठ पर चढ़ गए।
किस लंबी होती गई। रोहन ने आंटी को बेड पर लिटा दिया। उनकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह खिसक गया। ब्लाउज के अंदर से दो बड़ी-बड़ी, गोल, दूध जैसे उभरे हुए स्तन सामने थे। रोहन ने ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे हुक खुले। आंटी की ब्रा में बंधे हुए दो भारी स्तन बाहर आ गए। रोहन ने ब्रा का हुक भी खोल दिया।
“हाय... रोहन...” आंटी की आवाज में सिहरन थी।
रोहन ने एक चूची मुंह में ले ली। चूसने लगा, जोर-जोर से चूसता, जीभ से चाटता, हल्का-हल्का काटता। आंटी की चूचियाँ बहुत संवेदनशील थीं। वे कराहने लगीं, “आह्ह्ह... धीरे बेटा... बहुत मजा आ रहा है।” दूसरी चूची पर हाथ से मसलता रहा। निप्पल सख्त और खड़े हो गए थे। वह उन्हें चूसता, दबाता, चाटता जा रहा था। आंटी की गर्दन पीछे झुक गई, आँखें बंद, मुंह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।
आंटी ने रोहन की टी-शर्ट उतार दी। उसका जवान, टाइट शरीर देखा। हाथों से छाती पर हाथ फेरने लगीं। फिर नीचे जाकर उसकी बेल्ट खोली और पैंट उतार दी। रोहन का लंड तना हुआ, मोटा और लंबा बाहर आ गया था। आंटी ने उसे हाथ में पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाने लगीं। “कितना बड़ा और मोटा है तेरा... बहुत दिनों बाद छुआ है ऐसा।”
रोहन ने आंटी की साड़ी पूरी उतार दी। पेटीकोट भी खोल दिया। आंटी अब सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी मोटी गाँड और भरी हुई जाँघें चमक रही थीं। रोहन ने पैंटी भी नीचे खींची। आंटी की चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और थोड़ी गीली होने लगी थी।
वह नीचे झुका और आंटी की चूत को चूमने लगा। जीभ से चूत के होठों को चाटने लगा, क्लिटोरिस को चूसने लगा। आंटी पागल हो गईं। “आह्ह्ह रोहन... बहुत अच्छा लग रहा है... मत रुकना... हायyy!”
आंटी की चूत से रस निकलने लगा। वे झड़ने वाली थीं। रोहन ने तेज चाटना शुरू किया। आंटी ने टाँगें फैला दीं और जोर से चिल्लाईं, “मैं आ रही हूँ बेटा... आह्ह्ह्ह्ह!” उन्होंने पहली बार जोर से झड़ दिया।
अब रोहन ऊपर आया। आंटी ने उसका लंड हाथ में पकड़ा और अपनी चूत पर रगड़ने लगीं। “डाल दे अंदर... धीरे से।”
रोहन ने अपना लंड आंटी की चूत के मुंह पर रखा और धीरे से धक्का मारा। “उफ्फ... कितनी टाइट है आंटी!”
इंच-दर-इंच पूरा लंड अंदर चला गया। आंटी की आँखें बंद, मुंह खुला। रोहन ने धक्के मारने शुरू किए – पहले धीरे-धीरे, फिर तेज। हर धक्के के साथ आंटी की चूचियाँ उछल रही थीं। वह उन्हें दबोचता, चूसता जाता।
“चोद मुझे रोहन... जोर से चोद... तेरी आंटी को आज अपनी बना ले!”
रोहन का रिदम तेज होता गया। वह आंटी की गाँड पकड़कर जोर-जोर से ठोकने लगा। कमरे में चप-चप की आवाज गूंज रही थी। आंटी के मुंह से सिर्फ सिसकारियाँ निकल रही थीं – “आह्ह... आह्ह... हाय... और जोर... फाड़ दे मेरी चूत!”
कई मिनट तक यह चलता रहा। फिर रोहन ने आंटी को घोड़ी बनाया। पीछे से उनकी मोटी गाँड पकड़कर लंड अंदर डाला। गाँड के उभार को देखते हुए जोर-जोर से धक्के मारे। आंटी की गाँड लाल हो रही थी थप्पड़ों से।
आंटी फिर से झड़ गईं। इस बार और जोर से। उसके बाद रोहन ने पोजीशन बदली। मिशनरी में आंटी के ऊपर लेटकर चोदने लगा। उनके होंठ मिले हुए थे, चूचियाँ सीने से दब रही थीं।
“आंटी, मैं आ रहा हूँ...”
“बाहर मत निकालना बेटा... अंदर ही डाल दे... मुझे तेरे गर्म माल को महसूस करना है।”
रोहन ने जोर का धक्का मारा और अपना पूरा गर्म वीर्य आंटी की चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। पसीना, चूत का रस और वीर्य सब मिल गया था।
उसके बाद वे दोनों रोज मौका ढूंढते। कभी किचन में खड़े-खड़े, कभी बाथरूम में नहाते हुए, कभी छत पर रात को। आंटी अब पूरी तरह रोहन की हो चुकी थीं। वे उसे अपना जवान प्रेमी मानने लगी थीं जब माँ घर पर नहीं होतीं।
एक दिन आंटी ने कहा, “बेटा, अब मैं तुझे कभी नहीं छोडूंगी। तू मेरा जवान प्रेमी है।”
रोहन ने मुस्कुराते हुए आंटी की चूचियों को दबोचते हुए कहा, “और मैं आपकी चूत का दीवाना हूँ आंटी।” और यूं उनकी यह चोरी-छिपे वाली प्रेम कहानी चलती रही...
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