जवान सेक्सी चाची को अकेले में जमकर चोदा - हिंदी सेक्स स्टोरी
जवान सेक्सी चाची को 2 दिन तक घर में अकेले पाकर मैंने उसकी टाइट चूत और गाँड को जमकर चोदा। रात-दिन हार्ड चुदाई की। एक बार पढ़ोगे तो रुक नहीं पाओगे!
मेरा नाम विक्रम है, उम्र 24 साल। मेरे छोटे चाचा (पापा के सबसे छोटे भाई) की पत्नी सोनिया चाची हैं। उनकी उम्र 29 साल है। वो बहुत ही जवान और सेक्सी हैं — गोरा रंग, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी टाइट चूचियाँ, पतली कमर और भारी-भरकम गोल गाँड।
इस बार छोटे चाचा काम के सिलसिले में 10 दिन के लिए दुबई गए हुए थे। उसी बीच मेरे मम्मी-पापा किसी रिश्तेदार की शादी में 2 दिन के लिए बाहर चले गए। घर में सिर्फ सोनिया चाची और मैं ही रह गए थे। पूरे 2 दिन हम दोनों अकेले थे।
पहले दिन सुबह चाची रसोई में काम कर रही थीं। वो हल्के गुलाबी सूट में थीं। सूट की पैंट उनकी गाँड पर टाइट पड़ रही थी। मैं पानी पीने गया तो उन्होंने मुझे बुलाया, “विक्रम, ये जार ऊपर रख दो ना।”
जब मैं जार रखने के लिए उनके पास गया तो मैंने पीछे से अपना लंड उनकी टाइट गाँड पर हल्का सा दबा दिया। चाची थोड़ा सा सिहर गईं लेकिन कुछ नहीं बोलीं।
दूसरे दिन दोपहर में चाची अलमारी की ऊपरी शेल्फ साफ कर रही थीं। वो एक स्टूल पर खड़ी थीं। उनकी साड़ी थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी और उनकी गोल गाँड साफ दिख रही थी। अचानक उनका पैर फिसला और वो गिरने वाली थीं।
मैंने तुरंत उन्हें सपोर्ट करने के लिए पीछे से पकड़ लिया। मेरा पूरा हाथ उनकी गाँड पर आ गया। मैंने उनकी पूरी गाँड को जोर से दबा लिया। चाची की साड़ी पतली थी, इसलिए उनकी गर्म और नरम गाँड मेरे हाथ में पूरी तरह महसूस हो रही थी।
चाची शर्मा गईं। उनके चेहरे पर लालिमा छा गई। उन्होंने धीरे से कहा, “विक्रम… छोड़ दो… मैं ठीक हूँ।”
लेकिन मैंने उनकी गाँड को और जोर से दबाया। चाची की साँसें तेज हो गईं। उन्होंने कुछ नहीं कहा और चुपचाप काम करती रहीं।
उसी शाम मैं बेडरूम के पास से गुजर रहा था। दरवाजा थोड़ा खुला था। मैंने अंदर झाँका तो जो नजारा देखा, मेरा लंड पत्थर हो गया।
चाची बेड पर लेटी हुई थीं। उनकी साड़ी कमर तक ऊपर थी। उनकी पैंटी नीचे सरकी हुई थी और वो अपनी चूत में उंगली डालकर खुद को finger कर रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं और वो धीरे-धीरे कराह रही थीं, “आह्ह्ह… हाँ… और जोर से… आह्ह्ह…”
ये देखकर मैं पागल हो गया। मैंने दरवाजा खोला और अंदर घुस गया। चाची चौंककर उठीं और घबरा गईं। उन्होंने अपनी साड़ी नीचे करने की कोशिश की।
मैंने उन्हें रोका और बोला, “चाची… अब छुपाने की जरूरत नहीं। मैं सब देख चुका हूँ।”
चाची शर्म से लाल हो गईं। मैंने उन्हें बेड पर धकेल दिया और उनके ऊपर चढ़ गया। उन्होंने विरोध किया, “विक्रम… मत करो… मैं तुम्हारी चाची हूँ… ये गलत है…”
लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह ऊपर की और उनकी चूत पर हाथ फेरा। फिर मैंने अपनी उंगलियाँ उनकी चूत में डाल दीं। चाची तड़प उठीं, “आह्ह्ह… विक्रम… प्लीज… आह्ह्ह…”
मैंने उनकी चूचियों को भी जोर से दबाया। फिर मैंने अपना मोटा लंड निकाला और उनकी चूत पर रख दिया।
“चाची… अब मैं आपको पूरी तरह अपनी बना लूंगा।”
मैंने एक जोरदार धक्के से अपना लंड उनकी चूत में ठेल दिया। चाची जोर से चीख पड़ीं, “आआह्ह्ह… फट गई… बहुत मोटा है… धीरे… आह्ह्ह!”
मैंने उन्हें जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। उनकी भारी चूचियाँ हर धक्के पर उछल रही थीं। चाची दर्द और मजे के मिश्रण में चीख रही थीं।
“जोर से चोदो विक्की… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…”
चाची की टाइट चूत मेरे मोटे लंड को बहुत जोर से कस रही थी। मैंने उन्हें जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के पर उनकी भारी चूचियाँ उछल रही थीं। चाची दर्द और मजे के मिश्रण में चीख रही थीं, “आह्ह्ह… विक्की… बहुत मोटा है… फट रही है मेरी चूत… धीरे… आह्ह्ह!”
लेकिन कुछ देर बाद उनकी चीखें कराहों में बदल गईं। उन्होंने खुद अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी।
“जोर से चोदो विक्की… और जोर से… हाँ… ऐसे ही… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह!”
मैंने उनकी चूचियों को जोर से दबाते हुए तेजी से धक्के मारे। फिर मैंने उन्हें घुटनों के बल किया और डॉगी स्टाइल में चोदा। उनकी गोल गाँड मेरे सामने लहरा रही थी। मैंने उनकी गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे और लंड को पूरी ताकत से अंदर-बाहर किया।
चाची अब पूरी तरह पागल हो चुकी थीं। वो चीख रही थीं, “हाँ… और जोर से… मेरी गाँड पर थप्पड़ मारो… आह्ह्ह… मुझे रंडी बना दो विक्की… मैं तेरी हूँ आज!”
मैंने उनकी गाँड में भी उंगली डाल दी। चाची और पागल हो गईं। हम दोनों ने उस दिन दोपहर में तीन बार चुदाई की। हर बार मैंने उनकी चूत के अंदर ही अपना गरम माल भर दिया।
शाम को हम दोनों थककर लेटे हुए थे। चाची मेरी छाती पर सिर रखे हुए थीं। उन्होंने धीरे से कहा, “विक्रम… मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतना मज़ा आएगा। अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
मैंने उनके बाल सहलाते हुए कहा, “चाची, अभी तो पूरा एक दिन बाकी है।”
रात को हमने फिर से चुदाई शुरू की। इस बार चाची खुद मुझ पर चढ़ीं। उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत में डाला और जोर-जोर से कूदने लगीं। उनकी चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने उन्हें दबाते हुए नीचे से धक्के मारे।
“आह्ह्ह… विक्की… बहुत गहरा जा रहा है… मुझे और चोदो…”
रात के 12 बजे तक हमने तीन बार और सेक्स किया। मैंने उनकी चूत, मुंह और गाँड — तीनों जगह अपना माल भर दिया।
अगले दिन सुबह हम उठे तो चाची मेरे सीने पर लेटी हुई थीं। उन्होंने मुझे चूम लिया और बोलीं,
“विक्की… आज आखिरी दिन है। मुझे आज पूरी तरह तोड़ दो।”
मैंने उन्हें शावर में ले जाकर वहाँ जोरदार चोदा। फिर बेडरूम में, सोफे पर और आखिर में फर्श पर। चाची अब पूरी तरह मेरी हो चुकी थीं। वो खुद कह रही थीं,
“जोर से चोदो… मेरी गाँड में भी डालो… मुझे अपनी रंडी बना लो…”
आखिरी रात को मैंने उन्हें 4 घंटे तक लगातार चोदा। मैंने उनकी चूत, गाँड और मुंह — हर जगह अपना माल भर दिया। चाची बेहोश होकर मेरी बाहों में पड़ी थीं। उनका पूरा शरीर मेरे वीर्य से सना हुआ था।
सुबह होते ही चाची ने मुझे चूम लिया और बोलीं, “विक्की… ये 2 दिन मैं कभी नहीं भूलूंगी। जब भी चाचा बाहर जाएंगे, तू मुझे चोदना।”
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