जवान सेक्सी बहन की टाइट चूत और गांड की छेद पहली बार चोदा

जवान सेक्सी बहन अकेले घर में थी जब भाई ने उसकी टाइट चूत को पहली बार जोर से चोदा। फिर उसकी गांड का छेद भी खोलकर घंटों तक हार्ड सेक्स किया। दोनों रातें पसीने, कराहों और वीर्य से भीग गईं। ये कहानी सिर्फ पढ़ने लायक नहीं, महसूस करने लायक है।

लेखक: Ketan Suri7 मिनट पढ़ने में
जवान सेक्सी बहन की टाइट चूत और गांड की छेद पहली बार चोदा

माँ-बाप सुबह छह बजे ही निकल गए थे। उन्हें किसी रिश्तेदार के यहाँ दो दिन के लिए जाना था। घर में सिर्फ रोहन और उसकी छोटी बहन अनन्या रह गए थे। रोहन चौबीस साल का था और अनन्या इक्कीस साल की। दोनों कॉलेज से गर्मी की छुट्टियों में घर आए थे।

शाम के सात बज रहे थे। अनन्या रसोई से बाहर आई। उसने हल्के गुलाबी रंग की छोटी सी टॉप और छोटी जींस पहन रखी थी। उसका नंगा पेट और कमर की रेखा साफ दिख रही थी। रोहन सोफे पर बैठा टेलीविजन देख रहा था, लेकिन उसकी नजर बार-बार अनन्या के शरीर पर जा रही थी।

अनन्या ने देखा कि भाई उसे घूर रहा है। वह थोड़ी शर्माई, लेकिन मुस्कुरा दी।

“भाई… आज रात अकेले हैं न?” उसने धीरे से पूछा।

रोहन ने रिमोट एक तरफ रख दिया। “हाँ। दो दिन तक कोई नहीं आएगा।”

अनन्या पास आकर उसके बगल में बैठ गई। उसने अपना हाथ धीरे से रोहन की जांघ पर रख दिया। “मुझे… आज से कुछ अलग चाहिए।”

रोहन ने उसका हाथ पकड़ लिया। “क्या चाहिए, अनन्या?”

वह उसके कान के पास झुक गई। “तुझे। पूरी तरह से। जोरदार… और लंबा।”

रोहन का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने अनन्या का चेहरा दोनों हाथों में ले लिया और गहरा चुंबन दिया। अनन्या ने मुँह खोल दिया, उनकी जीभें मिल गईं। चुंबन इतना गरम था कि दोनों की साँसें तेज हो गईं। रोहन ने उसकी टॉप ऊपर उठाई और ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाया। अनन्या ने मस्ती भरी आवाज निकाली।

“शयनकक्ष चलते हैं,” रोहन ने भरी हुई आवाज में कहा।

दोनों कमरे में गए। रोहन ने रोशनी मंद कर दी। अनन्या ने अपनी टॉप और ब्रा उतार दी। उसके गोल, कसे हुए स्तन और गुलाबी निप्पल दिखने लगे। रोहन ने उसकी जींस और पैंट एक साथ खींच ली। अनन्या पूरी तरह नंगी हो गई। उसकी चिकनी जांघें, साफ मुंडा हुआ योनिद्वार और कसी हुई नितंब – सब रोहन के सामने था।

रोहन ने अपने कपड़े भी उतार दिए। उसका लिंग पूरी तरह खड़ा था, मोटा और लंबा। अनन्या ने उसे देखते ही आँखें बड़ी कर लीं।

“इतना बड़ा… आज पूरी रात इसे अंदर लेना है,” उसने कहा और घुटनों के बल झुककर उसके लिंग को हाथ में ले लिया। उसने पहले धीरे-धीरे, फिर तेज गति से चूमना और चाटना शुरू किया। लार से पूरा गीला कर दिया। रोहन के हाथ उसके बालों में थे।

“अंदर ले… गहराई तक,” रोहन ने कहा।

अनन्या ने मुँह खोल दिया और लिंग को गले तक ले गई। घुटन की आवाजें आईं, आँखों से पानी आया, लेकिन वह रुकी नहीं। दस-बारह मिनट लगातार गहराई तक मुँह में लिया। रोहन ने उसके मुँह से निकाला।

“बिस्तर पर लेट जा। आज पहले तेरे पूरे शरीर को छूूँगा, चाटूंगा।”

अनन्या लेट गई, पैर फैलाए। रोहन उसके ऊपर आ गया। उसने पहले दोनों निप्पलों को जीभ से चाटा, काटा, खींचा। अनन्या के हाथ चादर पकड़ रहे थे। फिर वह नीचे जाकर उसकी योनि को चाटने लगा। चूचुक को गोलाई में, फिर अंदर जीभ डालकर। अनन्या की कमर हिलने लगी।

“भाई… कृपया… अब अंदर डाल,” वह रोने जैसी आवाज में बोली।

रोहन ने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए। लिंग को उसकी गीली योनि के मुँह पर रखकर धीरे से धक्का मारा। सिर्फ अग्रभाग अंदर गया। अनन्या ने जोर से साँस ली।

“और… पूरा डाल।”

रोहन ने एक जोरदार धक्का दिया। पूरा लिंग अंदर चला गया। अनन्या की आँखें बंद हो गईं, मुँह से लंबी कराह निकल गई।

“कितना कसा हुआ है अभी भी,” रोहन ने कहा।

फिर उसने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। पहले धीमे गहरे धक्के, हर बार पूरी तरह बाहर निकालकर फिर अंत तक डालना। अनन्या के स्तन हिल रहे थे। रोहन ने उन्हें पकड़कर दबाया।

पंद्रह मिनट बाद उसने गति दोगुनी कर दी। बिस्तर की खट-खट आवाज पूरे घर में गूंज रही थी। अनन्या के नाखून रोहन की पीठ में गड़ गए।

“और जोर से… भाई कृपया और जोर से!”

रोहन ने उसके पैरों को मोड़कर उसकी छाती तक दबा दिया। हर धक्का इतना गहरा था कि अनन्या के पेट में दबाव महसूस हो रहा था। उसके पूरे शरीर में कंपन आ गई।

पहला चरम सुख आया। अनन्या की योनि ने लिंग को जोर से कस लिया, उसकी जांघें काँप रही थीं, मुँह से सिर्फ “आह… आह… भाई…” निकल रहा था। रोहन ने उसके चरम सुख के दौरान भी लगातार धक्के दिए, दो-तीन मिनट और।

फिर उसने स्थिति बदली। अनन्या को कुत्ते की तरह पीछे की ओर कर दिया। उसके नितंब ऊपर उठाए, कमर पकड़ी, और पीछे से पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। त्वचा की थप-थप आवाज, अनन्या के स्तन जोर से हिल रहे थे, उसका मुँह तकिए में दबा हुआ था।

“और तेज… मत रुकना आज,” अनन्या चिल्लाई।

रोहन ने चालीस मिनट लगातार पीछे से किया। बीच-बीच में उसने उसके नितंब पर थप्पड़ मारे, उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे। अनन्या का दूसरा चरम सुख आया, इस बार उसकी जांघों से थोड़ा पानी निकल आया।

रोहन ने उसे वापस सीधा किया, आमने-सामने की स्थिति में। अब दोनों की आँखें मिल रही थीं। चुंबन करते हुए जोरदार धक्के। अनन्या के हाथ उसके चेहरे पर थे।

“मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ भाई… आज रात पूरी तेरी हूँ।”

रोहन ने उसके होंठों को काटकर कहा, “मैं भी। आज रात और कल रात… दोनों दिन तुझे इतना भोगूंगा कि तू चल नहीं पाएगी।”

उसने गति और बढ़ा दी। अब हर धक्का पूरी ताकत का था। अनन्या के शरीर में लगातार चरम सुख आ रहे थे – तीसरा, चौथा। उसकी आवाजें नियंत्रण से बाहर हो गई थीं।

आखिर में रोहन ने कहा, “अंदर निकालूँ?”

“हाँ… अंदर ही… पूरे से भर दे।”

रोहन ने अंतिम बीस-पच्चीस गहरे जोरदार धक्के मारे और फिर जोर से झड़ गया। गर्म वीर्य अनन्या की योनि के अंदर भर गया, इतना कि थोड़ा बाहर भी निकल आया। दोनों कुछ क्षण के लिए काँपते रहे।

रोहन उसके ऊपर गिर पड़ा, लेकिन लिंग अभी भी अंदर था। अनन्या ने उसके बाल सहलाए।

“यह तो सिर्फ शुरुआत है… अभी रात लंबी है,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।

रोहन ने उसके गले में चुंबन किया। “हाँ। अब दस मिनट आराम, फिर मैं तुझे दूसरी स्थिति में लूंगा। आज रात कम से कम चार घंटे लगातार संभोग होगा। कल भी वैसा ही।”

अनन्या ने उसके लिंग को अंदर ही थोड़ा हिलाया। “मैं तैयार हूँ। जितना जोर से चाहिए, उतना दे।”

दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया। बाहर अंधेरा हो चुका था। घर बिल्कुल खाली था। अगले चार घंटे उनके लिए सिर्फ एक-दूसरे के शरीर, कराहें, पसीना और लगातार जोरदार संभोग के लिए थे।

रोहन का लिंग अभी भी अनन्या की योनि के अंदर था, थोड़ा नरम पड़ा हुआ लेकिन पूरी तरह बाहर नहीं निकला था। दोनों एक-दूसरे के ऊपर पसीने से भीगे पड़े थे। कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसें और हवा के यंत्र की हल्की आवाज थी।

अनन्या ने धीरे से अपनी कमर हिलाई। “भाई… अभी भी अंदर है। थोड़ा और हिला…”

रोहन ने उसके गले में चुंबन किया, फिर उसके होंठों पर। “दस मिनट भी नहीं हुए आराम के… तू फिर से तैयार है?”

“हाँ। आज रात चार घंटे पूरे करने हैं। मैं नहीं थकूंगी।”

रोहन ने लिंग बाहर निकाला। वीर्य अनन्या की जांघों पर बह रहा था। उसने उसे उठाया और स्नानघर ले गया। फुहारे के नीचे दोनों खड़े हो गए। गर्म पानी उनके ऊपर गिर रहा था। रोहन ने अनन्या को दीवार से सटा दिया, उसके दोनों स्तनों को हाथों में लेकर जोर से दबाया और निप्पलों को उंगलियों से पिंच किया। अनन्या का मुँह खुल गया।

फिर रोहन ने उसके पैर फैलाए और अपना लिंग फिर से उसकी गीली योनि में डाल दिया। खड़े-खड़े संभोग। फुहारे के नीचे हर धक्का गहरा और तेज था। अनन्या के हाथ रोहन की पीठ पर थे, नाखून गड़ रहे थे। पानी उनके शरीरों पर से बह रहा था, उनकी त्वचा एक-दूसरे से चिपक रही थी।

“और जोर से… दीवार से सटाकर,” अनन्या ने कहा।

रोहन ने उसके एक पैर को अपने कंधे पर उठाया और पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। अनन्या की आवाज स्नानघर में गूंज रही थी। बीस मिनट लगातार खड़े-खड़े संभोग के बाद उसका पाँचवाँ चरम सुख आया। उसके पैर काँप रहे थे, लेकिन रोहन ने उसे संभाल लिया।

वे दोनों तौलिये से पोंछकर बिस्तर पर वापस आए। अब रोहन ने अनन्या को अपने ऊपर बैठाया। अनन्या ने लिंग को हाथ से पकड़कर अपनी योनि में बैठाया। पहले धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, फिर गति बढ़ा दी। उसके स्तन जोर से हिल रहे थे। रोहन ने उन्हें पकड़ लिया और मुँह में लेकर चूसने लगा।

अनन्या ने अपनी कमर को गोलाई में घुमाया, फिर पूरे भार से नीचे बैठकर रगड़ने लगी। रोहन के हाथ उसके नितंबों पर थे, उसे और कसकर दबा रहे थे।

“भाई… मैं तुझे इतना प्यार करती हूँ… तेरा लिंग मेरी योनि में बिल्कुल सही लगता है,” वह बोली, आँखें बंद करके।

रोहन ने उसे नीचे खींचा और उसके होंठों को काट लिया। “और बैठ… पूरा ले।”

अनन्या ने पच्चीस-तीस मिनट लगातार सवारी की। बीच में उसका छठा चरम सुख आया, उसकी जांघें काँप उठीं, योनि ने लिंग को इतना कस लिया कि रोहन भी लगभग झड़ने वाला था। उसने संयम रखा।

फिर रोहन ने उसे उलट दिया। अब अनन्या पेट के बल लेटी हुई थी, रोहन उसके ऊपर। उसने उसके नितंब थोड़े ऊपर उठाए और पीछे से फिर से अंदर डाल दिया। हर धक्का गहरा और शक्तिशाली था। अनन्या के मुँह से सिर्फ दबी हुई कराहें निकल रही थीं क्योंकि उसका चेहरा तकिए में दबा हुआ था।

रोहन ने उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और गति दोगुनी कर दी। बिस्तर की आवाज पूरे घर में गूंज रही थी। पैंतीस मिनट इस स्थिति में। अनन्या का सातवाँ चरम सुख आया, इस बार उसकी योनि से स्वच्छ तरल निकल आया, चादर गीली हो गई।

रोहन ने लिंग बाहर निकाला। अब वह थोड़ा थक गया था लेकिन अनन्या ने उसे देखते हुए कहा, “अब मेरी गुदा में डाल… पहली बार।”

रोहन ने स्नेहक लिया जो दराज में पड़ा था, उसकी कसी हुई गुदा पर लगाया, उंगली से धीरे-धीरे तैयार किया। अनन्या ने जोर से साँस ली लेकिन कहा, “धीरे से… फिर जोर से।”

रोहन ने लिंग का अग्रभाग उसकी गुदा के मुँह पर रखा और धीरे दबाव दिया। थोड़े प्रतिरोध के बाद अग्रभाग अंदर चला गया। अनन्या ने तकिया पकड़ लिया।

“और… पूरा…”

रोहन ने धीरे-धीरे पूरा लिंग उसकी गुदा में डाल दिया। अनन्या की आँखें भर आईं। फिर उसने धीमे धक्के शुरू किए। दस मिनट बाद गति बढ़ाई। अब दोनों के पसीने फिर से बह रहे थे।

“जोर से भाई… मैं संभाल लूंगी।”

रोहन ने उसकी कमर पकड़ी और पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। अनन्या की कराहें दर्द और आनंद की मिली-जुली थीं। बीस मिनट लगातार गुदा संभोग के बाद रोहन ने कहा, “अब निकालता हूँ…”

उसने लिंग निकाला, अनन्या को वापस घुमाया, उसके मुँह में डाल दिया। अनन्या ने तुरंत चूसना शुरू किया। रोहन ने उसके बाल पकड़कर गहराई तक मुँह में लिया और फिर उसके मुँह में झड़ गया। गर्म वीर्य अनन्या के गले में उतर गया, थोड़ा उसके होंठों और ठुड्डी पर भी लग गया। उसने सब चाट लिया।

पहली रात के लगभग चार घंटे पूरे हो चुके थे। दोनों बिल्कुल थककर एक-दूसरे से चिपककर सो गए। अनन्या की योनि और गुदा दोनों से वीर्य बह रहा था, लेकिन उसने साफ नहीं किया। वह वैसे ही सोई।

दूसरी सुबह:

दोनों देर से उठे। अनन्या ने पहले ही रोहन के लिंग को हाथ में ले लिया जो सुबह-सुबह कठोर था। वह कंबल के अंदर जाकर उसे मुँह में ले गई। धीमी सुबह की चुसाई। रोहन ने आँखें खोलीं तो अनन्या उसके लिंग को गहराई तक ले रही थी।

उसने उसे ऊपर खींचा और सीधे अपनी योनि में बैठा दिया। सुबह का संभोग – धीमा, गहरा, प्रेमपूर्ण। दोनों चुंबन करते हुए, आँखों में देखते हुए। अनन्या ने धीरे-धीरे सवारी की, रोहन ने उसके स्तन चूसे। चालीस मिनट बाद दोनों साथ में झड़े – रोहन ने अंदर वीर्य डाला, अनन्या का चरम सुख उसके ऊपर आया।

दिन भर वे घर में नंगे ही घूमते रहे। रसोई में अनन्या मेज पर बैठी थी, रोहन ने उसके पैर फैलाए और खड़े-खड़े उसकी योनि चाटी, फिर लिंग डालकर पच्चीस मिनट जोर से भोगा। बैठक के सोफे पर अनन्या को उल्टी सवारी की स्थिति में बैठाया, उसके नितंब देखते हुए उसे सवारी करवाई। टेलीविजन चालू था लेकिन किसी ने नहीं देखा।

शाम होने से पहले ही दोनों शयनकक्ष में वापस आ गए।

दूसरी रात – अंतिम लंबा:

रोहन ने अनन्या को बिस्तर पर लिटाया, उसके दोनों पैर फैलाए और पहले पूरे पंद्रह मिनट उसकी योनि और गुदा को जीभ से साफ किया, चाटा, उंगलियाँ डालीं। अनन्या पहले से ही गीली थी।

फिर उसने लिंग डाला। आज स्थितियाँ बदलते रहे:

- पहले आमने-सामने – तीस मिनट लगातार जोरदार धक्के, अनन्या के पैर उसके कंधों पर। - फिर पीछे की ओर – पैंतीस मिनट, नितंबों पर थप्पड़, बाल खींचना, गहरे धक्के। - फिर अनन्या को बगल में लिटाया – बीस मिनट धीमे लेकिन गहरे, उसके चूचुक को उंगली से सहलाते हुए। - फिर उसे उठाया, दीवार से सटाकर खड़े-खड़े – पच्चीस मिनट। - अंत में अनन्या को पूरी तरह मोड़कर (पैर छाती तक) – चालीस मिनट बिना रुके। हर धक्का इतना गहरा था कि अनन्या के पेट में लिंग महसूस हो रहा था। उसके कई चरम सुख आए – लगातार। उसके नाखून चादर फाड़ रहे थे, आवाजें नियंत्रण से बाहर।

रोहन ने बीच में दो बार लगभग झड़ने से रोका, गति कम की, फिर फिर से पूरी ताकत लगाई। आखिर में जब अनन्या का शरीर बिल्कुल नरम हो चुका था, कराहें सिर्फ धीमी रह गई थीं, तब रोहन ने अंतिम जोरदार धक्के मारे और उसकी योनि के अंदर इतना वीर्य डाला कि बाहर निकलने लगा।

दोनों एक-दूसरे से चिपककर पड़े रहे। रोहन का लिंग अभी भी अंदर था। अनन्या ने उसके सीने पर सिर रख दिया।

“दो दिन… इतना कुछ। मैं कभी नहीं भूलूंगी,” उसने धीरे से कहा।

रोहन ने उसके बाल सहलाए। “मैं भी नहीं। जब भी मौका मिलेगा… मैं तुझे ऐसे ही लूंगा। जोर से, लंबा, और सिर्फ तेरा।”

अनन्या ने मुस्कुराते हुए उसके लिंग को अंदर ही थोड़ा भींचा। “कल सुबह माँ-बाप आएंगे… लेकिन आज रात अभी भी बाकी है। थोड़ा आराम, फिर एक अंतिम दौर?”

रोहन ने उसके होंठों पर चुंबन किया। “हाँ। अंतिम दौर में मैं तुझे और भी धीरे और गहरा लूंगा… ताकि तू सुबह तक मेरी याद से भरी रहे।”

बाहर रात गहरे अंधेरे में थी। घर खाली। दोनों के शरीर अभी भी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे – पसीना, वीर्य और प्रेम से।

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Ketan Suri
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