कार में बहन की गांड से चिपककर माल गिराया
सोती हुई बड़ी बहन की टाइट गांड से चिपककर भाई ने पूरा माल गिरा दिया। चादर के नीचे बहन की मोटी गांड और चुचियों का छुपा हुआ गंदा मजा। सच पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
मेरा नाम रोहन है, उम्र बाईस (22) साल। मेरी बड़ी बहन प्रिया चौबीस (24) साल की है। वो सच में एक खतरनाक नखरेवाली और सेक्सी लड़की है। उसका गोरा-चिकना शरीर देखते ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।
पतली कमर, छोटी-छोटी लेकिन भारी और टाइट चुचियां जो हर बार शर्ट में उभरकर निप्पल दिखाती रहती हैं, और सबसे बड़ी कमाल की चीज – उसकी मोटी, गोल-गोल, लटकती हुई लेकिन बेहद टाइट गांड। वो चलती है तो गांड हिलती है जैसे दो बड़े-बड़े आकर्षक गेंदें नाच रही हों।
हम सब मुंबई से उत्तर प्रदेश अपने गांव जा रहे थे। ट्रेन की टिकट नहीं मिली तो पापा ने कार ले ली। दो दिन का लंबा सफर था। पहले दिन सुबह निकले और शाम ढलते-ढलते काफी दूर निकल आए। रात काफी हो चुकी थी। रास्ते में कोई अच्छा होटल नहीं मिला तो पापा ने फैसला किया कि आज रात कार में ही सोएंगे।
पापा और माँ आगे की सीटों को थोड़ा झुकाकर लेट गए और चादर ओढ़ ली। उन्होंने हम दोनों को पीछे की सीट पर आराम से समायोजित होकर सोने को कहा और एक बड़ी मोटी चादर दे दी।
प्रिया दीदी पहले से ही थकी हुई थी। उसने उस दिन बहुत ही टाइट नीली जींस पहनी थी जो उसकी मोटी गांड को पूरी तरह से चिपककर रख रही थी। ऊपर सफेद टाइट शर्ट थी, और उसके अंदर ब्रा बिल्कुल नहीं थी। इसलिए उसकी टाइट, उभरी हुई चुचियां शर्ट के कपड़े को फाड़ने को तैयार थीं।
निप्पल साफ-साफ उभरे हुए दिख रहे थे। जींस इतनी टाइट थी कि गांड की पूरी गोलाई, दरार का शेप और पैंटी की लाइन बिल्कुल स्पष्ट दिख रही थी।
मैं उसके ठीक पीछे लेट गया। चादर हम दोनों को अच्छे से ढक रही थी। पहले कुछ देर हम दोनों मोबाइल पर स्क्रॉल कर रहे थे। फिर प्रिया दीदी ने मोबाइल साइड में रख दिया और करवट लेकर सोने की कोशिश करने लगी। उसकी मोटी गांड मेरी तरफ थी।
मुझे नींद नाम की चीज नहीं आ रही थी। मेरी आँखें बार-बार उसकी टाइट जींस में लिपटी उस भारी-भरकम गांड पर जा रही थीं। वो हल्की-हल्की करवट लेकर लेटी थी, जिससे उसकी गांड और भी उभरकर दिख रही थी। मैं सोच रहा था – काश ये गांड मेरे लंड के नीचे होती तो कितना मजा आता। मेरा लंड पहले ही पैंट में तन चुका था।
बहुत देर तक देखने के बाद मैं सह नहीं पाया। धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसकी मोटी गांड पर हल्का सा हाथ फेरने लगा। वाह… क्या नरमाई थी! जींस के ऊपर से भी उसकी गांड की गर्माहट और टाइटनेस महसूस हो रही थी।
मैंने धीरे-धीरे अपनी पूरी हथेली से उसकी गांड को सहलाना शुरू कर दिया। उंगलियां गांड की दरार पर घुमाने लगा। पैंटी की लाइन साफ महसूस हो रही थी – वो बहुत ही छोटी और टाइट पैंटी पहने थी जो उसकी गांड की दरार में पूरी तरह धंस गई थी।
मेरा लंड अब पत्थर की तरह खड़ा था। मैंने हिम्मत करके अपना शरीर आगे सरकाया और अपना लंड उसकी मोटी गांड के बिल्कुल बीच में चिपका दिया। अब मेरी स्थिति परफेक्ट थी – मेरा सख्त लंड उसकी गांड की दरार में बिल्कुल फिट होकर चिपक गया था। मैंने धीरे-धीरे हल्के-हल्के धक्के देने शुरू कर दिए। जींस के ऊपर से ही चोदने जैसा मजा आ रहा था।
फिर मैं रुक नहीं पाया। मैंने चुपके से अपनी पैंट का चेन खोला और अपना मोटा, गर्म लंड बाहर निकाल लिया। अब नंगी लंड उसकी टाइट जींस वाली गांड पर रगड़ रहा था। मैंने उसे गांड की दरार में अच्छे से दबाया और जोर-जोर से रगड़ने लगा। गांड की गोलाई मेरे लंड को चारों तरफ से दबा रही थी।
मेरा ध्यान अब उसकी चुचियों की तरफ गया। मैंने अपनी बांह आगे बढ़ाई, उसकी पतली कमर पर हाथ रखा और धीरे-धीरे ऊपर ले गया। फिर पूरी हथेली से उसकी एक टाइट चूची को पकड़ लिया। हाय भगवान… कितनी नरम, कितनी टाइट! मैंने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। उंगलियों से निप्पल को घुमाने लगा, खींचने लगा। दीदी की सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं, लेकिन वो सोती हुई ही थी।
मैं पीछे से उसकी गांड में लंड रगड़ रहा था और आगे से उसकी दोनों चुचियों को बारी-बारी से मसल रहा था। पूरा बदन गर्म हो रहा था। मैंने अपना मुंह उसकी गर्दन के पास ले जाकर सूंघा। उसकी खुशबू पागल कर रही थी। फिर मैंने धीरे से उसकी जींस के ऊपर से ही गांड चाटने की कोशिश की।
रात भर मैं यही करता रहा – कभी गांड रगड़ता, कभी चुचियां दबाता, कभी निप्पल चुटकी लेता। आखिरकार मेरी झड़ने वाली घड़ी आ गई। मैंने अपना लंड उसकी मोटी गांड की दरार में और भी जोर से चिपकाया और तेजी से रगड़ने लगा। कुछ ही देर में मेरा पूरा गाढ़ा, गर्म माल उसकी जींस की गांड की दरार पर निकल गया।
मैंने हाथ से अच्छे से फैला दिया ताकि कोई निशान न रहे। फिर अपनी उंगलियों से उसकी गांड की दरार में मसल दिया।उस रात मैंने अपनी बड़ी बहन की टाइट गांड और भारी चुचियों का पूरा-पूरा मजा लिया।
प्रिया दीदी को कुछ भी पता नहीं चला। लेकिन मेरे लिए वो रात यादगार बन गई।
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