हिंदी सेक्स स्टोरी: ट्रेन में माँ को पीछे से चोदा
अपनी सोई हुई सेक्सी माँ को ऊपरी बर्थ पर पीछे से चोदा। पहले उनकी टाइट चूत में लंड घुसाया, फिर मोटी गांड फाड़ दी। जागने के बाद माँ भी चुप नहीं रही और खूब चुदवाया। बेहद गंदी और हॉट माँ-बेटे की सेक्स स्टोरी!
नमस्कार दोस्तों, आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे हॉट, रोमांचक और अविस्मरणीय रात की पूरी हिंदी सेक्स स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ। यह माँ-बेटे की देसी सेक्स कहानी है।
हम पूरा परिवार ट्रेन से कहीं जा रहे थे। ट्रेन में भीड़ बहुत ज्यादा थी। हमारे पास सीटें कम पड़ गईं। पापा और बाकी सब अलग बर्थ पर थे। सिर्फ एक ऊपरी बर्थ बची थी। मैंने माँ से कहा, “माँ, आपकी सीट पर आ जाऊँ?” माँ ने पहले हिचकिचाते हुए मना कर दिया। लेकिन रात ज्यादा हो चुकी थी और नीचे जगह नहीं थी, तो आखिरकार उन्होंने हामी भर दी।
ट्रेन थर्ड AC थी। हम दोनों ऊपरी बर्थ पर चढ़ गए। हमने एक ही चादर ओढ़ रखी थी। माँ सबसे अंदर की तरफ लेट गईं और मैं उनके ठीक पीछे सो गया। बर्थ काफी छोटी थी, इसलिए एडजस्ट होने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन किसी तरह हम एडजस्ट हो गए।
थोड़ी देर मैं आराम करने लगा। ट्रेन के चलने की वजह से मेरा लंड माँ की जांघ पर रगड़ खाने लगा। माँ ने शायद अंदर पैंटी नहीं पहनी थी और वे पतली सिल्क वाली साड़ी पहने हुए थीं। जैसे-जैसे ट्रेन की स्पीड बढ़ी, मेरे लंड की रगड़ भी तेज होती गई। मुझे साफ-साफ महसूस हो रहा था कि मेरा लंड उनकी जांघ से होते हुए उनकी मोटी गांड की दरार में घिस रहा है। हमने एक ही चादर ओढ़ रखी थी, इसलिए किसी को कुछ भी दिख नहीं रहा था।
थोड़ी देर बाद बार-बार घिसने से मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और टाइट हो गया। मैं खुद को संभाल नहीं पाया और मैंने भी जोर-जोर से घिसना शुरू कर दिया। माँ उल्टी लेटी हुई थीं और उन्हें अभी तक कुछ पता नहीं था।
फिर मैं और मजा लेने के लिए और इस मौके को कभी न भूलने लायक एवरग्रीन बनाने के लिए चादर के अंदर ही अपनी पैंट थोड़ी नीचे सरका दी और अपनी चड्डी से लंड बाहर निकाल लिया। फिर चुपके से मैंने अपना लंड माँ की गांड के और पास चिपका दिया और उनकी गांड की दरार में, जो पतली साड़ी के ऊपर से साफ महसूस हो रही थी, घिसने लगा। ट्रेन की स्पीड बढ़ने पर मैं और जोर से घिसने लगा। मानो मजा ही आ गया था।
तभी अचानक माँ की नींद खुल गई। वे पीछे की तरफ मुड़ीं और धीरे से बोलीं, “बेटा, तुम्हें तकलीफ तो नहीं हो रही ना?” मैं डर गया और बोला, “नहीं माँ, लेकिन आप थोड़ा और अंदर की तरफ खिसक जाओ, ताकि आपको कोई तकलीफ न हो।”
ये सुनते ही माँ थोड़ा और अंदर खिसक गईं। लेकिन इस बार उनकी पूरी मोटी गांड मेरे खड़े लंड से टाइटली चिपक गई। मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा पूरा लंड उनकी गांड में एकदम सेट होकर चिपक गया है। बस पतली साड़ी ही रोक रही थी, वरना तुरंत उनकी गांड के छेद में घुस जाता।
मैं अब और जोर-जोर से उनकी चूत पर लंड घिस रहा था। धीरे-धीरे मैंने एक हाथ से उनकी गांड दबाना भी शुरू कर दिया। उनकी गांड पूरी अंदर की तरफ थी और एकदम मेरे लंड से सटी हुई थी। जैसे ही मैंने हल्का-हल्का उनकी गांड दबाई, एकदम मजा आ गया। वो एकदम टाइट और कसी हुई लग रही थी।
तभी मुझे आइडिया आया कि उनकी चूचियां भी काफी बड़ी और टाइट हैं। उन्होंने काफी टाइट ब्लाउज पहना हुआ था। मैंने पीछे से उन्हें और चिपक लिया, उनके गले लग गया और अपना हाथ उनकी चूची के पास ले गया। माँ अचानक थोड़ा हिचकिचाईं, लेकिन चादर की वजह से किसी को कुछ दिख नहीं रहा था। उन्हें लगा शायद जगह कम है, इसलिए मैंने ऐसा किया। वे फिर सो गईं।
अब मेरा हाथ एकदम उनकी चूची के ऊपर था। मैंने धीरे से हाथ से उन्हें पकड़ा। पकड़ते ही एकदम टाइट, गर्म और हॉट चूची मेरे हाथ में महसूस हुई। मैंने और हिम्मत की और उनके निप्पल को छू लिया। निप्पल एकदम टाइट और कड़क था। फिर मैंने आराम से, बिना उन्हें पता लगे, उनकी टाइट ब्लाउज के ऊपर से ही चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। क्योंकि हम चादर में थे, कोई देख नहीं रहा था और रात ज्यादा हो चुकी थी, इसलिए मम्मी भी गहरी नींद में थीं।
अब मेरी मौज हो गई। एक हाथ में उनकी एकदम टाइट चूचियां जो मैं जोर से दबा रहा था और निप्पल को सहला रहा था। दूसरी तरफ मेरा लंड मानो सीधे पतली साड़ी फाड़कर अंदर घुस जाने वाला था। लगभग एक घंटे तक मैं उनकी चूचियां दबाता रहा, निप्पल सहलाता रहा और पीछे से गांड पर लंड घिसता रहा। मम्मी गहरी नींद में सोई रही। आज मैंने जीवन का पूरा मजा ले लिया और बाहर से उनकी पूरी बॉडी का पूरा मजा ले लिया।
फिर मैंने सोचा कि थोड़ा और मजा किया जाए। सबसे पहले मैंने चेक किया कि वे गहरी नींद में हैं या नहीं। वे उस दिन एकदम गहरी नींद में थीं। फिर मैंने सबसे चुपके से चादर के अंदर ही उनकी साड़ी को हल्का-हल्का ऊपर करना शुरू किया। इसमें मुझे लगभग आधा घंटा लग गया ताकि मम्मी को शक न हो। मैंने उनके पैरों के थोड़े ऊपर से साड़ी उठानी शुरू की और धीरे-धीरे पूरा ऊपर तक कर दिया।
जैसे ही मैंने साड़ी ऊपर की, मेरे होश उड़ गए। चादर के नीचे देखा तो उनकी एकदम गोरी, चिकनी, मोटी-मोटी गोल-गोल गांड मेरे एकदम सामने थी। जैसा मैंने सोचा था, वे बिना चड्डी के ही थीं। उनकी गांड के बाल एकदम शेव्ड और चिकनी थे। उनकी चूत थोड़ी-थोड़ी भिगी हुई लग रही थी, मानो चुदने को एकदम तैयार हो, और एकदम गुलाबी व पूरी टाइट थी।
अब मैंने असली खेल शुरू किया। मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगा लिया ताकि आसानी से अंदर चला जाए। मैंने ज्यादा थूक लगाया और हल्के से उनके और पास गया। उनके ऊपर हाथ रखकर हल्के से पीछे से अपना लंड का टिप उनकी चूत पर लगाया और लंड अंदर जाना शुरू हो गया। अचानक जैसे ही उन्हें थोड़ा दर्द हुआ, उन्होंने “आह” बोला और अचानक उठ गईं। मैं डर गया और पीछे हट गया।
लेकिन वो समझ गई थीं। उन्होंने धीरे से कहा, “ये क्या कर रहा है बेटा? आज प्रेग्नेंट ही कर देगा क्या?”
मैं चौंक गया। मुझे महसूस हुआ कि जो कुछ भी मैं कर रहा था, उन्हें सब पता है और वो जानबूझकर सब करवा रही हैं। क्योंकि पापा बहुत बिजी आदमी हैं और वो माँ को बहुत कम चोद पाते हैं।
उन्होंने धीरे से कहा, “तुम्हारे पापा ने कभी मुझे संतुष्ट नहीं किया। आज तू ही कर दे।”
ये सुनकर मैं पागल सा हो गया। उन्होंने अब एक टांग हल्का उठाकर एकदम मेरी टांग पर रख दी और बोलीं, “ले चालू हो जा… और अपना पूरा माल अंदर ही डालना, सीट पर मत गिराना।”
मेरी लॉटरी लग गई। मैंने अपना 8 इंच का लंड सहलाया और बिना थूक लगाए ही उनकी चूत में डालना शुरू किया। वो थोड़ा सिसकी और बोलीं, “बेटा थोड़ा धीरे… दर्द हो रहा है एकदम।” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया। मेरी माँ अब एकदम मदहोश हो गई थीं। मैं जोर से अंदर-बाहर करने लगा। उनकी चूत में पहले से चिपचिपी जेल थी जो अंदर तक डालने में मदद कर रही थी।
अब मैं उनकी चूत में अंदर तक डालता रहा और वो मेरी टांग पर टांग रखकर अपनी गांड और फैला रही थीं। तब मैंने दोनों हाथ उनकी चूचियों की तरफ ले गए और चादर के अंदर ही उनकी दोनों चूचियों को ब्लाउज से पूरा निकाला। चूचियां एकदम टाइट थीं और निप्पल गुलाबी व टाइट थे। मैं उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा।
अब माँ कराह रही थीं। मैं पूरा 8 इंच का लंड उनकी चूत में अंदर तक डालता रहा और दूसरे हाथ से जोर-जोर से उनका दोनों बोब दबाता रहा। मजा पूछो मत! उनकी चूत एकदम टाइट कुँवारी लड़की जैसी थी जो मेरे पूरे लंड को जकड़ रही थी और उनकी चूचियां एकदम टाइट और मखमल जैसी थीं। वो सिसकती रहीं और मैं करता रहा। फिर मैंने अचानक स्पीड बढ़ाई और एक जोर का झटका मारा। माँ अचानक दर्द से चीख उठीं लेकिन मैंने उनका मुंह हाथ से दबा दिया और उनके मुंह में उंगलियां डाल दीं। लगभग 2 घंटे तक हम चादर के अंदर नॉन-स्टॉप चुदाई करते रहे।
अब मेरी माँ थक गईं और बोलीं, “बेटा बस कर, कोई उठ जाएगा… छोड़ दे अब और अपना गरम माल बस अब मेरी चूत में निकाल दे।” लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था। मैंने कहा, “नहीं माँ, अब मुझे आपकी गांड की छेद में डालना है। वो बहुत टाइट और रसीला लग रहा है।” माँ ने साफ मना कर दिया लेकिन मैंने बहुत जिद की और उन्हें पलट दिया।
पहले मैंने उनकी गांड की छेद को देखा, जो एकदम गुलाबी लग रही थी और साइज बहुत छोटा था। मैंने दो उंगलियां उनके मुंह में डालीं, थूक लगाया और सीधे उनकी गांड के छेद में डालकर हिलाने लगा। माँ सहम गईं लेकिन मैंने दूसरा हाथ उनके मुंह में डाल दिया। फिर मैंने अपनी उंगलियां निकालीं और उन्हें उनके मुंह में डाल दीं। वो एकदम मदहोश हो गईं।
अब मैंने अपना 8 इंच का लंड उनकी गांड के छेद में डालना शुरू किया। मैंने उनके मुंह से लार लेकर अपने लंड पर लगाई और धीरे से कहा, “थोड़ा और पीछे आओ और चिल्लाना मत।” मैंने दो उंगलियां उनके मुंह में डालीं और धीरे से लंड डालना शुरू किया। लेकिन वो जा ही नहीं रहा था। आखिरकार मैंने जोर लगाया और पूरा लंड अंदर डाल दिया।
माँ का चेहरा एकदम लाल हो गया। मैं जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा। माँ भी अब अपनी गांड हिलाकर बोलने लगीं, “जोर से चोद बेटा।” आखिर में मैंने स्पीड बढ़ाई और अपना पूरा माल उनकी गांड के अंदर भर दिया।
माँ मदहोश होकर बोलीं, “आज तो तूने माँ को रंडी बना दिया बेटा। ऐसे लगा कि सालों बाद मजा आया। अब जहाँ भी मौका मिलेगा, मैं तुझे जरूर दूंगी।” उस रात मेरी जिंदगी की सबसे बेस्ट रात थी।
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