हिंदी सेक्स स्टोरी: माँ की टाइट गांड चुपके से दबाई
अपनी हॉट माँ की टाइट और मोटी गांड को चुपके से छूता, दबाता और चाटता है। रात में सोती हुई माँ की नंगी गांड और चूत पर मुठ मारकर वीर्य गिराता है।
गाँव के छोटे से घर में रमेश अपनी हॉट और सेक्सी माँ राधा, छोटी बहन प्रिया, और पिता के साथ रहता था। पिता ट्रक ड्राइवर थे, जो अक्सर देर रात शराब पीकर घर आते थे। घर इतना छोटा था कि हर कमरे की आवाज़ दूसरे कमरे तक जाती थी।
राधा की उम्र 38 साल थी, लेकिन उनका शरीर किसी 25 साल की लड़की जैसा था – गोरा रंग, भारी-भारी और चुस्त चुचियाँ, पतली कमर और मोटी, गोल, टाइट गांड जो साड़ी में भी फटने को तैयार रहती थी।
रमेश 19 साल का हो चुका था। वह अपनी माँ को चुपके-चुपके नंगा देखने का मौका कभी नहीं छोड़ता। सुबह जब माँ नहाती, तो वह दरवाज़े के पर्दे से झाँककर उनकी भीगी चोचियों और चिकनी चूत को देखता। कभी माँ पेशाब करने जाती तो वह छेद से देखता। कपड़े बदलते समय उनकी कसी हुई ब्रा और पैंटी देखकर उसका लंड खड़ा हो जाता।
रात को जब पिता घर आते, तो रमेश चुपके से देखता। पिता माँ को ज़ोर-ज़ोर से नीचे ले जाते, उनकी साड़ी फाड़कर नंगी करते और घोड़ी बनाकर जोर-जोर से चोदते। माँ की चीखें “आह... धीरे... ओह मर गई...” सुनकर रमेश अपना लंड सहलाता और सोचता, “काश एक दिन मैं ही माँ की इस टाइट गांड को चोदूँ।”
रोज़ रमेश अपनी माँ को काम करते हुए ललचती नज़रों से देखता। उनकी झुकी हुई गांड, हिलती चूचियाँ देखकर उसका मन करता कि बस छू लूँ। एक दिन मौका मिल गया। बहन स्कूल गई थी। माँ फर्श पोछ रही थीं। रमेश ने कहा, “माँ, मैं मदद कर दूँ?”
राधा बोलीं, “नहीं बेटा, तू पढ़ाई कर। मैं बस चारपाई के नीचे पोछा मार रही हूँ।”
लेकिन रमेश की नज़र माँ की झुकी हुई टाइट गांड पर थी। उसने हठ किया, “माँ, तुम चारपाई के अंदर जाकर पोछा मारो, मैं मोबाइल की लाइट से दिखाता हूँ।”
राधा मान गईं। उन्होंने चारपाई के नीचे घुसकर पोछा लगाना शुरू किया। उनकी साड़ी ऊपर चढ़ गई। गांड पूरी तरह बाहर, डोगी स्टाइल में तनी हुई, साड़ी में कसी हुई मोटी गांड रमेश के सामने थी।
रमेश ने लाइट जलाकर एक हाथ से लाइट दिखाई, दूसरे हाथ से धीरे से माँ की गांड पर हाथ फेर दिया। गरम, मुलायम और भारी गांड। उसकी पूरी देह में बिजली दौड़ गई।
“आह... इतनी मुलायम गांड...” वह फुसफुसाया।
उसने हिम्मत करके पूरी गांड को जोर से दबा दिया। अपनी उँगलियाँ गांड की दरार में घुसेड़ दीं। राधा हल्का सा काँपीं लेकिन कुछ नहीं बोलीं। रमेश गांड दबाता रहा, सहलाता रहा। कुछ देर बाद राधा बोलीं, “हो गया बेटा... अब जा।”
रमेश ने पहली बार माँ की गांड दबाई थी। वह इस एहसास को कभी नहीं भूला।
इसके बाद छोटे-मोटे कामों में वह माँ की गांड दबाने, चूचियों को छूने का मौका ढूंढता। कभी उनकी पैंटी सूँघकर मुठ मारता।
फिर एक दिन पिता एक दिन के लिए बाहर चले गए। रात को राधा उदास थीं। रोज़ पति की मोटी लंड की भूख उन्हें सताती थी। रमेश और बहन बिस्तर पर सोए थे। राधा नीचे फर्श पर सोई थीं, पतली नाइटी पहने।
रमेश जागा हुआ था। नाइटी में माँ की कसी हुई गांड और चूत की शेप साफ दिख रही थी। वह दबे पाँव नीचे उतरा और माँ के ठीक पीछे लेट गया। उसने हाथ बढ़ाया और माँ की गोल गांड को सहलाने लगा। नाइटी इतनी पतली थी कि लग रहा था माँ कुछ पहने ही नहीं। उसने गांड को जोर से दबाया। फिर लंड निकालकर नाइटी के ऊपर से ही गांड की दरार में रगड़ने लगा।
राधा हल्की सी हिलीं तो रमेश डर गया, लेकिन वे फिर सो गईं।
रमेश ने हिम्मत की। लंड को गांड पर जोर-जोर से रगड़ा। फिर नाइटी ऊपर करके चूत सूँघी, जीभ से चाटा। माँ की गर्म चूत और गांड का स्वाद पागल कर रहा था। वह गांड चूसता रहा, हाथों से दबाता रहा।
आखिरकार उसका 7 इंच का लंड फड़क उठा। उसने पूरा माल माँ की नाइटी पर, चूत के ऊपर ही छोड़ दिया। गाढ़ा वीर्य नाइटी पर फैल गया। रमेश ने झुककर अपना वीर्य चाट लिया, साफ कर दिया। फिर चुपचाप अपने बिस्तर पर लेट गया।
उस रात उसने माँ की गांड और चूत को अच्छे से महसूस किया था। अब वह इंतज़ार कर रहा था कि कब असली मौका मिले और वह अपनी सेक्सी माँ को पूरी तरह चोद सके।
राधा की देह अभी भी गर्म थी। शायद उन्हें भी अंदाज़ा था, लेकिन चुप थीं... (कहानी जारी रखनी हो तो बताना।)
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