ससुर ने बहु को रंडी बना के चोदा - हार्डकोर सेक्स

बेटा तीन महीने के लिए विदेश चला गया… और ससुर ने जवान बहू को बीमार होने का बहाना बनाकर रात भर अपनी रंडी बना लिया। दोनों छेद खोल दिए, बिना रुके हार्डकोर चोदा।

लेखक: Aalok Pandey6 मिनट पढ़ने में
ससुर ने बहु को रंडी बना के चोदा - हार्डकोर सेक्स

नाम था राजेश शर्मा। उम्र पैंतालीस साल। शरीर अभी भी मज़बूत और हट्टा-कट्टा था। बेटा अमन शादी करके विदेश चला गया था तीन महीने के लिए। घर में सिर्फ राजेश और बहू प्रिया रह गए थे।

प्रिया सिर्फ़ चौबीस साल की थी। गोरी, पतली कमर, भारी भरकम चुचियाँ, और गोल-मटोल गाँड। साड़ी पहनती तो लगती थी जैसे कोई मॉडल हो। राजेश कई दिनों से उसे चुपके से देख रहा था। जब वो घर के काम करती, जब नहाकर निकलती, जब रात को टीवी देखती… हर बार उसका लंड सख्त हो जाता।

एक रात राजेश ने प्लान बनाया। उसने खुद को बीमार होने का नाटक किया। बुखार का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेट गया और प्रिया को आवाज़ दी।

“प्रिया… बेटा… इधर आना। बुखार चढ़ रहा है… बहुत कमज़ोरी लग रही है।”

प्रिया तुरंत कमरे में आई। साड़ी पहने हुए, बाल खुले, चेहरे पर चिंता। “क्या हुआ पापा? दवा लाऊँ?”

राजेश ने कमज़ोर आवाज़ में कहा, “नहीं… बस पास बैठ जा। हाथ पकड़… ठंडक लग रही है।”

प्रिया बिस्तर के किनारे बैठ गई। राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया। फिर धीरे-धीरे अपना हाथ उसके हाथ से खींचकर उसकी जाँघ पर रख दिया। प्रिया सहम गई।

“पापा… ये… क्या कर रहे हो?”

राजेश ने आँखें आधी बंद करके कहा, “बेटा… अमन बहुत दिनों से नहीं है… तन्हाई बहुत सता रही है। तू इतनी खूबसूरत है… मैं खुद को रोक नहीं पा रहा।”

प्रिया उठने की कोशिश करने लगी, लेकिन राजेश ने उसका हाथ पकड़कर खींच लिया। एक झटके में उसे अपने ऊपर लिटा दिया। साड़ी की पल्लू खिसक गई। राजेश ने दोनों हाथों से उसकी भारी चुचियों को थाथ में भर लिया और जोर से दबाने लगा।

“नहीं… पापा… छोड़ो… ये गलत है… मैं तुम्हारी बहू हूँ!”

लेकिन राजेश नहीं माना। उसने प्रिया के होंठों पर अपना मुँह रख दिया और जीभ अंदर धकेल दी। एक हाथ से साड़ी ऊपर कर दी और पेटीकोट के अंदर हाथ डाल दिया। चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा। प्रिया गीली हो रही थी, चाहे वो मना कर रही थी।

राजेश ने चड्डी एक साइड में सरकाई और दो मोटी उँगलियाँ उसकी चूत में घुसा दीं। अंदर-बाहर करने लगा। रस की आवाज़ आने लगी।

“देख… कितनी गीली हो गई है तू। शरीर तो चाहता है।”

प्रिया की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन शरीर काँप रहा था। राजेश ने उसे पलटा और साड़ी पूरी तरह हटा दी। सिर्फ ब्रा और चड्डी में छोड़ दिया। ब्रा के हुक खोले और बड़ी-बड़ी गोरी चुचियाँ मुँह में ले लीं। जोर-जोर से चूसने लगा, दाँतों से काटने लगा। प्रिया के मुँह से कराह निकलने लगी।

“आह्ह… मत करो… पापा…”

राजेश ने अपनी पैंट खोली। मोटा, लंबा, नसों से भरा लंड बाहर निकला। प्रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने प्रिया के बाल पकड़े और लंड उसके मुँह के पास ले गया।

“मुँह खोल… और अच्छे से चूस।”

प्रिया ने मना किया, लेकिन राजेश ने जबरदस्ती मुँह खोलकर लंड अंदर ठूंस दिया। गले तक। प्रिया की आँखों से पानी बहने लगा, लेकिन राजेश उसके सिर को पकड़कर आगे-पीछे करने लगा। लार बह रही थी।

थोड़ी देर बाद उसने लंड निकाला और प्रिया को पेट के बल लिटा दिया। गाँड ऊपर उठाई। चूत के मुँह पर लंड रखा और एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया।

“आह्ह्ह… इतना मोटा… दर्द हो रहा है…”

राजेश ने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के में लंड पूरा बाहर निकलता और फिर गहराई तक अंदर चला जाता। प्रिया की चुचियाँ बिस्तर से रगड़ खा रही थीं। कमरे में सिर्फ मांस की थप-थप आवाज़ और प्रिया की कराहें गूँज रही थीं।

राजेश ने प्रिया के बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेज़ गति से चोदने लगा।

“बेटा घर पर नहीं है… आज तू पूरी मेरी है। रात भर चोदूँगा तुझे।”

प्रिया अब विरोध कम कर रही थी। शरीर खुद ही हिलने लगा था। राजेश ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूत के ऊपर वाली गांठ को मसलने लगा। प्रिया जोर से काँप उठी और झड़ गई। चूत सिकुड़-सिकुड़ कर राजेश के लंड को निचोड़ने लगी।

राजेश ने गति और तेज़ कर दी। कुछ देर बाद उसने लंड बाहर निकाला, प्रिया को पलटा, और उसके मुँह के ऊपर आकर खड़ा हो गया।

“मुँह खोल… सारा पी जा।”

प्रिया ने मुँह खोला। राजेश ने जोर से झड़ते हुए गर्म गाढ़ा माल उसके मुँह और चेहरे पर उड़ेल दिया। कुछ प्रिया के मुँह में गया, कुछ गालों और चुचियों पर बह गया।

राजेश हांफते हुए बिस्तर पर बैठ गया। प्रिया लेटी हुई थी—साँसें तेज़, शरीर काँपता हुआ, चेहरे और चुचियों पर सफेद मैल चिपका हुआ।

राजेश ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “कल रात फिर आना… आज तो बस शुरुआत है।”

प्रिया कुछ नहीं बोली। बस आँखें बंद करके लेटी रही।

अगली रात। घर में फिर से सन्नाटा था। अमन अभी भी विदेश में था। प्रिया पूरे दिन से घबराई हुई थी। सुबह उसने राजेश से आँखें मिलाई भी नहीं थीं। लेकिन रात के ग्यारह बजते-बजते राजेश ने फिर आवाज़ लगाई।

“प्रिया… इधर आ। आज दवा की ज़रूरत नहीं… सिर्फ तुझी की ज़रूरत है।”

प्रिया ने देर तक दरवाज़ा नहीं खोला। लेकिन राजेश खुद उठकर उसके कमरे में चला गया। उसने दरवाज़ा खोला तो प्रिया बिस्तर पर बैठी हुई थी—सिर्फ नाइटी में। नाइटी पतली थी, नीचे ब्रा और चड्डी साफ दिख रही थी। भारी चुचियाँ नाइटी के अंदर से उभर रही थीं।

राजेश ने दरवाज़ा बंद किया और ताला लगा दिया। प्रिया की आँखों में डर था।

“पापा… कल बहुत हो गया… अब मत करो… अगर अमन को पता चल गया तो…”

राजेश हँस पड़ा। “अमन तीन महीने बाद आएगा। तब तक तू मेरी है।”

वह पास गया और एक झटके में प्रिया की नाइटी ऊपर से खींचकर उतार दी। सिर्फ ब्रा और चड्डी रह गई। राजेश ने ब्रा के हुक खोले और बड़ी-बड़ी गोरी चुचियाँ बाहर निकाल लीं। दोनों हाथों से उन्हें जोर-जोर से मसलने लगा, निप्पल को उँगलियों से घुमाते हुए।

“कल रात ये चुचियाँ मेरे मुँह में कितनी अच्छी लगी थीं… आज फिर चूसूँगा।”

प्रिया पीछे हटने की कोशिश करने लगी, लेकिन राजेश ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। वह उसके ऊपर चढ़ गया। मुँह से एक चुची पकड़कर जोर से चूसने लगा, दाँतों से काटने लगा। दूसरी चुची को हाथ से मसलता रहा। प्रिया के मुँह से कराह निकलने लगी।

राजेश ने चड्डी को फाड़ते हुए नीचे खींच लिया। प्रिया की चूत पहले से थोड़ी गीली थी। उसने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और जोर-जोर से फिंगरिंग करने लगा। रस की आवाज़ आने लगी।

“देख… शरीर तो तैयार है तेरा। मुँह से मना कर, लेकिन चूत गीली हो रही है।”

थोड़ी देर बाद राजेश ने अपनी पैंट उतारी। मोटा लंड बाहर निकला—कल रात से भी ज़्यादा सख्त। उसने प्रिया के बाल पकड़े और लंड उसके मुँह में ठूंस दिया।

“आज अच्छे से चूस… गले तक ले।”

प्रिया की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन राजेश उसके सिर को पकड़कर आगे-पीछे करने लगा। लंड गले तक जा रहा था। लार बहकर प्रिया की चुचियों पर गिर रही थी। राजेश ने काफी देर तक मुँह चोदा, फिर लंड निकाला।

उसने प्रिया को पेट के बल लिटाया। गाँड ऊपर उठाई। पहले चूत के मुँह पर थूक लगाई, फिर मोटा लंड एक जोरदार धक्के में अंदर घुसा दिया। पूरा अंदर तक।

“आह्ह्ह… दर्द… बहुत मोटा है…”

राजेश ने कमर पकड़ी और जानवरों की तरह धक्के मारने लगा। हर धक्का इतना जोरदार था कि प्रिया का शरीर आगे खिसक जाता। चुचियाँ बिस्तर से रगड़ खा रही थीं। कमरे में सिर्फ थप-थप की तेज़ आवाज़ गूँज रही थी।

लगभग बीस मिनट तक लगातार चोदने के बाद राजेश ने लंड निकाला। प्रिया की चूत लाल और खुली हुई थी। उसने गाँड के दोनों गाल फैलाए और अंगूठे से छेद को दबाया।

“आज दोनों जगह लूँगा। तैयार हो जा।”

प्रिया ने सिर हिलाया, “नहीं… वहाँ मत डालो… दर्द होगा बहुत…”

लेकिन राजेश ने लार थूककर छेद पर लगाई और धीरे-धीरे अपना मोटा लंड गाँड में धकेलने लगा। प्रिया चीख पड़ी। राजेश रुक-रुक कर अंदर करता गया, जब तक पूरा लंड गाँड में समा नहीं गया। फिर उसने जोर-जोर से गाँड चोदनी शुरू कर दी।

एक हाथ से आगे जाकर प्रिया की चूत में उँगलियाँ डाल दीं। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। प्रिया का शरीर काँप रहा था, मुँह से सिर्फ अधूरी आवाज़ें निकल रही थीं।

राजेश ने करीब आधे घंटे तक गाँड चोदी, फिर वापस चूत में डाल दिया। इस बार और rough। उसने प्रिया को घुटनों के बल बैठाया, बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और पीछे से बेरहमी से धक्के मारने लगा। हर धक्के में प्रिया की भारी चुचियाँ हवा में झूल रही थीं।

रात के दो बज चुके थे। राजेश थकने वाला नहीं था। उसने प्रिया को अलग-अलग पोजीशन में लिया—कभी पीठ के बल लिटाकर जाँघें कंधों तक मोड़कर, कभी साइड से, कभी प्रिया को ऊपर बैठाकर खुद नीचे से धक्के मारते हुए। हर बार लंड गहराई तक जाता। प्रिया की चूत और गाँड दोनों अब पूरी तरह फूल चुके थे, लाल और संवेदनशील।

आखिर में राजेश ने प्रिया को फिर से पेट के बल लिटाया। गाँड ऊपर उठाई और दोनों छेद बारी-बारी से चोदने लगा—कभी चूत, कभी गाँड। गति इतनी तेज़ थी कि प्रिया की आवाज़ भी काँप रही थी। अचानक उसने लंड चूत के अंदर गहराई तक दबाया और जोर से झड़ गया। गर्म गाढ़ा माल सीधे अंदर उड़ेल दिया। प्रिया की चूत सिकुड़-सिकुड़ कर सारा वीर्य अंदर ले रही थी।

राजेश लंड अंदर ही रखे हुए प्रिया के ऊपर गिर गया। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं। प्रिया का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था। चूत और गाँड दोनों खुले, लाल और सूजे हुए थे। बिस्तर गीला था।

राजेश ने उसके कान में फुसफुसाया, “अमन आने तक हर रात ऐसी ही चोदूँगा तुझे। तू अब सिर्फ मेरी रंडी है।”

प्रिया कुछ नहीं बोली। बस आँखें बंद किए लेटी रही। चेहरे पर शर्म, थकान और एक अजीब सी लाचारी थी।

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