शालिनी भाभी की दोनों छेद की हार्डकोर चुदाई
सुबह खाली घर में पड़ोस के बैचलर लड़के ने शालिनी भाभी को पहले ज़बरदस्ती दबाया, फिर उनकी चूत और गाँड दोनों छेदों को बेरहमी से चोदा। मिरर के सामने, बेड पर, हर पोजिशन में पूरी तरह फाड़ दिया।

सुबह के सात बज रहे थे। कॉलोनी बिलकुल शांत थी। पड़ोस वाली शालिनी भाभी का पति ऑफिस चला गया था अर्ली शिफ्ट पर, और उनकी बेटी स्कूल बस पकड़कर निकल गई थी। घर में अब सिर्फ वह अकेली थी।
मैं राहुल, उनके बिल्कुल पड़ोस में रहता था। बैचलर। रोज़ सुबह-शाम उन्हें देखते-देखते मेरा दिमाग खराब हो चुका था। उनका पतला कमर, भरी हुई छाती, सॉफ्ट स्माइल और वह नाइटी जो उनके कर्व्स पर चिपक जाती थी…
आज मौका था।
मैं उनके घर के दरवाज़े पर गया और घंटी बजाई। भाभी ने दरवाज़ा खोला। पीला कॉटन का नाइटी पहना हुआ था, बाल खुले थे, चेहरा थोड़ा सा फ्रेश।
“राहुल? इतनी सुबह… क्या बात है?”
मैं अंदर घुस गया। दरवाज़ा पीछे से बंद कर दिया और लॉक लगा दिया।
भाभी थोड़ी हैरान-सी देखने लगी। “क्या हुआ? ऐसे कैसे अंदर आ गए…”
मैंने उनकी आँखों में देखते हुए सीधा कहा,
“भाभी… मैं आपको बहुत दिनों से देख रहा हूँ। रोज़। आपकी यह बॉडी, यह चलना, यह स्माइल… मैं पागल हो चुका हूँ। मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ। आज। अभी।”
भाभी का चेहरा लाल हो गया। वह पीछे हटते हुए बोली, “क्या बकवास कर रहे हो राहुल… मैं तुम्हारी पड़ोसन हूँ… यह सब गलत है… निकल जाओ यहाँ से…”
मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और बेडरूम की तरफ खींचने लगा। भाभी विरोध कर रही थी।
“छोड़ दो… मैं चिल्लाने लगूँ तो…”
मैंने उन्हें बेड पर धकेल दिया। वह गिरते-गिरते बेड पर लेट गई। मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनके दोनों हाथ पिलो के ऊपर दबा दिए।
“चिल्लाओ मत। आज कोई नहीं है घर पर। और मैं अब नहीं रुकने वाला।”
मैंने एक हाथ से उनका नाइटी ऊपर उठाया। उनके बड़े, सॉफ्ट, गोरे बूब्स नंगे हो गए। निप्पल्स पहले से टाइट थे। मैंने पहले लेफ्ट निप्पल को मुँह में लेकर ज़ोर से चूसा, फिर दाँत से हल्का काटा।
“आह्ह्ह… राहुल… दर्द… छोड़ दो… प्लीज़…”
मैं नहीं माना। दूसरे निप्पल को भी उसी तरह काटा और चूसा। भाभी के बॉडी में कंपन आ गई। मैंने उनके दोनों हाथ एक हाथ से पकड़े रखे और दूसरे हाथ से उनकी चूत पर हाथ फेंका। नाइटी के नीचे कुछ नहीं था। मेरी उँगलियों को उनकी चूत बिलकुल गीली मिली।
“बोलती हो मत करो… लेकिन यह चूत तो पहले से भीग रही है भाभी।”
मैंने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। भाभी की कमर उठ गई।
“नहीं… निकाल दो… आह्ह्ह… गलत है यह…”
मैं उँगलियाँ तेज़-तेज़ अंदर-बाहर करने लगा। कभी क्लिटोरिस पर घुमाता, कभी अंदर डीप। भाभी अब विरोध कम कर रही थी, साँस फूल रही थी।
मैंने अपना पैंट नीचे किया। मेरा लंड पूरा टाइट, नसों से भरा हुआ था। मैंने उनकी टाँगें फैलाईं और लंड उनकी चूत के मुहाने पर लगाया।
“अब बोल… चाहिए या नहीं?”
भाभी ने आँखें बंद करके सिर्फ सिसकारी दी। मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और आधा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… निकाल… बहुत बड़ा है… दर्द हो रहा है…”
मैं रुका नहीं। दूसरा धक्का मारा और पूरा लंड उनकी चूत में पीछे तक घुसा दिया। भाभी की आँखें खुल गईं, मुँह खुला का खुला रह गया।
मैं अब ज़बरदस्ती धक्के मारने लगा। तेज़, गहरे, ज़ोर के। हर धक्के पर उनके बूब्स हिल रहे थे। मैंने उनके बाल पकड़कर पीछे खींचे और गले में दाँत गाड़ दिए।
“इतने दिनों से देख रहा था… आज मिल गई यह चूत।”
भाभी अब सिर्फ “आह… आह… धीरे…” बोल पा रही थी। मैं धीरे नहीं कर रहा था। मैं उनकी चूत को फाड़ते हुए पेल रहा था। उनकी टाँगें धीरे-धीरे मेरी कमर पर लिपटने लगीं। विरोध कमज़ोर पड़ने लगा।
मैंने उनके एक पैर को ऊपर उठाया और और गहरा पेलने लगा। लंड की हर इंच उनकी चूत के अंदर जा रही थी। भाभी की सिसकियाँ अब दबी हुई मोंस में बदल चुकी थीं।
“राहुल… ज़ोर से… हाँ… ऐसे ही मत रुक…”
मैं मुस्कुराया। ज़बरदस्ती अब हार्डकोर में बदल चुकी थी।
मैं उनके ऊपर से उठा, उन्हें उल्टा करके डॉगी बना दिया। नाइटी बिलकुल कमर तक उठाया, उनकी गोल भरी गाँड को दोनों हाथों से फैलाया और पीछे से एक ही झटके में लंड अंदर डाल दिया।
“उफ्फ्फ… इतना डीप… आह्ह्ह…”
मैं अब दोनों हाथ उनके कमर पर रखकर इतनी ज़ोर से धक्के मार रहा था कि बेड की फ्रेम खड़क रही थी। उनकी गाँड पर थप्पड़ पड़ रहे थे। हर थप्पड़ पर उनकी चूत और टाइट हो जाती।
“ले भाभी… इतने दिनों से देखने का रिजल्ट…”
भाभी अब खुद पीछे धक्का दे रही थी। मैंने उनके बाल पकड़कर मुँह ऊपर उठाया और कान में बोला,
“अब से यह चूत सिर्फ मेरी है। समझी?”
“हाँ… तेरी है… बस मत रुक… अंदर ही डाल…”
मैं और तेज़ हो गया। बॉल्स उनकी चूत से टकरा रही थीं। पूरा रूम सिर्फ मांस पीटने की आवाज़ और भाभी की लाउड मोंस से भर गया था।
थोड़ी देर बाद भाभी की बॉडी काँपने लगी। उसने पिलो में मुँह डालकर ज़ोर से चीखा और उसकी चूत ने मेरे लंड को इतना ज़ोर से पकड़ा कि मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया।
मैं उनके अंदर ही झड़ गया। गरम कम की धार उनकी चूत में पड़ती रही। भाभी की टाँगें काँप रही थीं, बॉडी ढीली पड़ गई थी।
मैं लंड अंदर ही रखे हुए उनके ऊपर लेट गया। कान में धीरे से बोला,
“अभी तो बस पहला राउंड है भाभी… आज पूरा दिन तेरा घर खाली है। मैं और लूँगा।”
भाभी ने थकी हुई आवाज़ में, साँस फूलते हुए कहा,
“फिर से कर… लेकिन इस बार और ज़ोर से… और गहरा…”
मैं लंड अभी भी उनकी चूत में रखे हुए था। थोड़ा ढीला हुआ था, लेकिन अंदर ही अंदर फिर से टाइट होने लगा। भाभी के नीचे लेटी हुई बॉडी अभी भी काँप रही थी। उनकी चूत से मेरा कम धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था और उनकी जाँघों पर चिपक रहा था।
मैंने उनके कान में साँस छोड़ते हुए कहा, “अब उठ। इस बार मैं तुझे बिलकुल तोड़ने वाला हूँ।”
भाभी ने आँखें खोलीं। आँखों में अब शर्म नहीं, सिर्फ भूख थी। “कर… जो करना है कर ले… आज कोई नहीं आएगा।”
मैंने लंड बाहर निकाला। कम की एक लंबी लाइन उनकी चूत से निकलकर बेडशीट पर गिरी। मैंने उन्हें उठाया और सीधा खड़ा कर दिया। नाइटी बिलकुल उतारकर फेंक दी। अब वह पूरी नंगी थी — बड़े भरे बूब्स, पतली कमर, गोल टाइट गाँड और कम से भीगी हुई चूत।
मैंने उन्हें बाथरूम के सामने वाले बड़े मिरर के सामने खड़ा कर दिया। पीछे से उनके बूब्स पकड़े और ज़ोर से मसलने लगा। निप्पल्स को उँगलियों से पिंच करके खींचता रहा।
“देख अपने आप को मिरर में… कितनी रंडी दिख रही है आज।”
भाभी ने मिरर में खुद को देखा। उनका चेहरा लाल था, बाल बिखरे हुए, बूब्स पर मेरे उँगलियों के निशान। मैंने एक हाथ से उनकी चूत पर हाथ फेंका और दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। कम और उनकी गीलाहट से उँगलियाँ चप-चप कर रही थीं।
“उफ्फ… राहुल… और अंदर…”
मैंने उँगलियाँ निकालकर उनके मुँह में डाल दीं। “चाट… अपनी चूत का स्वाद ले।”
भाभी ने मेरी उँगलियाँ चूसनी शुरू कर दीं। मैं उनके पीछे से अपना लंड उनकी गाँड के बीच में रगड़ने लगा। फिर एक झटके में उनकी चूत में दोबारा घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मादरचोद… इतना गहरा…”
मैं मिरर के सामने ही उन्हें चोदने लगा। दोनों हाथ उनके बूब्स पर, उँगलियाँ निप्पल्स पर, और नीचे से इतनी ज़ोर से धक्के मार रहा था कि उनके बूब्स मिरर में हिल-हिलकर दिख रहे थे। हर धक्के पर उनकी गाँड मेरे पेट से टकराती।
मैंने उनके बाल एक हाथ में लिए और पीछे खींच लिए। उनका मुँह खुल गया। मैंने दो उँगलियाँ उनके मुँह में डाल दीं।
“चुपचाप ले… आज मैं तेरा मुँह भी चोदूँगा।”
भाभी की आँखें बंद थीं। वह मेरी उँगलियाँ चूस रही थी और पीछे से धक्के खा रही थी। मैं और तेज़ हो गया। बेड की तरह अब फ्लोर पर भी उनके पैरों के निशान पड़ने लगे।
थोड़ी देर बाद मैं निकल गया। भाभी के पैर काँप रहे थे। मैंने उन्हें बेड पर उलट दिया, टाँगें कंधे पर रख लीं और फुल लेंथ में लंड अंदर डाल दिया। अब पोजिशन ऐसी थी कि लंड बिलकुल उनके गर्भाशय तक जा रहा था।
“देख… कितना अंदर जा रहा है तेरे पड़ोसी का लंड।”
“हाँ… जा रहा है… फाड़ दे… आह्ह्ह… ज़ोर से…”
मैं अब बिलकुल जानवर बन गया। धक्के इतने तेज़ और गहरे थे कि भाभी की चीखें निकलने लगीं। मैंने उनके गले पर हाथ रख दिया और हल्का दबाया। उनकी चूत और टाइट हो गई।
“ले… साली… इतने दिनों से तुझे देख-देखकर लंड मसलता था… आज पूरी तरह ले रही है।”
भाभी की आँखों से पानी निकलने लगा, लेकिन वह रुकने को नहीं बोल रही थी। उल्टा दोनों हाथों से मेरी गाँड पकड़कर मुझे और अंदर खींच रही थी।
मैंने पोजिशन बदल दी। उन्हें उठाया और खुद बेड पर लेट गया। “ऊपर आ। खुद पेल।”
भाभी ने तुरंत मेरे लंड पर बैठ गई। उनकी चूत ने मेरे लंड को धीरे-धीरे निगल लिया। फिर वह अपने बूब्स पकड़कर ऊपर-नीचे उछलने लगी। पहले धीरे, फिर तेज़। उनके बूब्स उनके चेहरे पर थप्पड़ खा रहे थे। मैं नीचे से धक्के मार रहा था।
“ज़ोर से उछल… रंडी की तरह…”
भाभी अब पूरी तरह बेचैन थी। वह मेरी छाती पर हाथ रखकर इतनी ज़ोर से पेल रही थी कि उसकी गाँड मेरी जाँघों पर बज रही थी। मैंने उनके निप्पल्स पकड़कर खींच लिए।
“आह्ह्ह… काट… काट दे…”
मैंने उन्हें नीचे खींचकर अपने मुँह तक लाया और दोनों निप्पल्स को एक-एक करके काटा। भाभी की चूत ने मेरे लंड को इतना प्रेस किया कि मैं लगभग झड़ने वाला था।
मैंने उन्हें उतारा, पीछे से डॉगी बनाया, लेकिन इस बार उनकी गाँड के छेद पर लंड रगड़ने लगा।
भाभी डर गई। “नहीं… वहाँ मत डाल… पहली बार है…”
मैंने थूक अपने लंड पर लगाया और धीरे से उनकी गाँड के छेद में सिर्फ टॉप डाला।
“आह्ह्ह… दर्द… निकाल…”
मैंने रुककर कहा, “ले ले… आज दोनों छेद मारूँगा।”
थोड़ा और दबाया। भाभी ने पिलो काट लिया। मैं धीरे-धीरे आधा लंड उनकी गाँड में घुसा दिया। उनकी बॉडी कस गई।
“मादरचोद… निकाल मत… आह्ह… धीरे…”
मैंने अब उनकी चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और गाँड में लंड। दोनों छेद एक साथ। भाभी पागल-सी चीखने लगी। मैं पीछे से धक्के मारने लगा — पहले स्लो, फिर मीडियम, फिर फुल स्पीड।
“ले भाभी… अब तेरी गाँड भी मेरी हो गई।”
भाभी अब सिर्फ “हाह… हाह… और… और डाल” बोल रही थी। मैंने पूरा लंड उनकी गाँड में पेल दिया। उनकी चूत से मेरा पहले वाला कम निकल रहा था और उँगलियाँ चप-चप कर रही थीं।
थोड़ी देर बाद मैं निकलकर उनकी चूत में वापस डाल दिया। अब दोनों पोजिशन्स बदलता जा रहा था — कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी उन्हें उठाकर खड़े-खड़े, कभी उनकी टाँगें फैलाकर फुल डेप्थ।
आखिरी राउंड में मैंने उन्हें बेड के किनारे बिठाया, टाँगें फैलाईं, और खड़े होकर इतनी ज़ोर से पेलने लगा कि बेड हिलने लगा। भाभी की चीखें पूरे घर में गूँज रही थीं।
“राहुल… मैं आ रही हूँ… साथ में झाड़… अंदर…”
मैंने उनके बाल पकड़े, गले में दाँत गाड़े और लास्ट के दस-बारह धक्के इतने गहरे मारे कि भाभी की बॉडी पूरी तरह काँपने लगी। उसने मेरी कमर पर पैर लपेट लिए और ज़ोर से चीखते हुए झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को इतना स्क्वीज़ किया कि मैं भी उनके अंदर ही दूसरी बार झड़ गया। इतना कम निकला कि उनकी चूत से बाहर निकलकर बेडशीट भीग गई।
दोनों हाँफ रहे थे। मैं उनके ऊपर गिरा पड़ा था। लंड अभी भी अंदर था, धीरे-धीरे कम बाहर निकल रहा था।
भाभी ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए, थकी हुई आवाज़ में कहा,
“राहुल… आज के बाद तू रोज़ आना… जब घर खाली हो… मैं तुझे रोकूँगी नहीं।”
मैंने उनके गले में दाँत से निशान बनाते हुए जवाब दिया,
“रोज़ नहीं… जब चाहेगा तब आऊँगा। और हर बार तुझे ऐसे ही फाड़ूँगा।”
भाभी ने बस मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर लीं। उसकी जाँघें अभी भी काँप रही थीं, और उसकी चूत से मेरे कम की लास्ट ड्रॉप्स निकल रही थीं।

