गाँव की कुँवारी लड़की को खेत मे लिटाकर चोदा - गहरी चुदाई

गाँव की मासूम कुँवारी लड़की को खेत के बीच में लिटाकर मैंने उसकी टाइट चूत को जोर-जोर से चोदा। गहरी चुदाई में वो कराह रही थी, उसकी कुंवारी देह पहली बार पूरी तरह भर गई!

लेखक: Shreyash Kumar7 मिनट पढ़ने में
गाँव की कुँवारी लड़की को खेत मे लिटाकर चोदा - गहरी चुदाई

राज पिछले तीन साल से शहर में नौकरी कर रहा था। इंजीनियरिंग की जॉब थी, अच्छी सैलरी, लेकिन गांव की याद हमेशा सताती रहती आखिरकार छुट्टियां मिली तो वो सीधा अपने गांव लौट आया।

बस स्टैंड से उतरते ही पुरानी मिट्टी की खुशबू, हरे-भरे खेत और दूर दिखती पहाड़ियां देखकर मन शांत हो गया। घर पहुंचा तो मां-बाप खुश हो गए। पड़ोस के लोग मिलने आए। लेकिन राज की नजर सबसे पहले पड़ोस वाले घर पर गई।

वहां रहती थी प्रिया। उम्र सिर्फ 22 साल। गांव वाले उसे प्रिया भाभी कहकर पुकारते थे क्योंकि वो थोड़ी गंभीर और mature दिखती थी, लेकिन असल में वो अभी unmarried थी।

प्रिया का रंग दूध जैसा गोरा, चेहरा गोल-मटोल, बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें और गुलाबी होंठ। उसका बदन एकदम फिगर वाला – कमर पतली, लेकिन पीछे से भारी और उभरी हुई गांड जो चलते वक्त लहराती थी। आगे से दो बड़े-बड़े, भरे हुए स्तन जो सलवार सूट की कुर्ती को टाइट कर देते थे।

ज्यादातर वो सूती सलवार सूट पहनती थी – हल्के रंग का, जिसमें उसकी गोरी त्वचा और ज्यादा निखर जाती। कभी-कभी दुपट्टा सरक जाता तो छाती का गहरा कटाव दिख जाता, जिसे देखकर राज का दिल धड़क जाता।

राज को बचपन से ही प्रिया पर crush था, लेकिन तब वो छोटी थी। अब वो जवान हो चुकी थी और राज शहर से लौटा तो उसकी आंखें खुद-ब-खुद प्रिया पर अटक जातीं। पहला दिन शाम को राज छत पर बैठा चाय पी रहा था। ठीक उसी वक्त प्रिया अपने आंगन में कपड़े सुखा रही थी। सलवार सूट की कुर्ती थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी, जिससे उसकी पतली कमर और नाभि का हिस्सा दिख रहा था।

जब वो झुकी तो उसकी भारी गांड पीछे की तरफ उभर आई। राज का लंड पैंट में हल्का सा खड़ा हो गया। प्रिया ने ऊपर देखा, नजरें मिलीं। वो शरमा गई, लेकिन मुस्कुराई और हल्के से हाथ हिलाया। “राज भैया, कब आए?” उसने पूछा।

“आज दोपहर को,” राज ने जवाब दिया और नीचे उतर आया। दोनों पुरानी यादें शेयर करने लगे। प्रिया ने बताया कि गांव की जिंदगी कितनी उबाऊ हो गई है। “सब दिन एक जैसे, बस खाना बनाना, घर संभालना और खेतों का काम। तुम शहर में कितना मजा करते होगे,” उसने कहा।

राज ने हंसते हुए कहा, “मजा तो यहां भी है प्रिया, बस सही कंपनी चाहिए।” बातें करते-करते शाम हो गई। राज ने देखा कि प्रिया की आंखों में भी कुछ अलग सी चमक थी। वो उसकी मजबूत बॉडी, शहर वाली स्टाइल और बात करने का तरीका देख रही थी।

अगले दिन सुबह राज खेतों में घूमने गया। प्रिया भी पानी भरने आ गई थी। दोनों अकेले थे। राज ने हिम्मत करके कहा, “प्रिया, तुम बहुत खूबसूरत हो गई हो। पहले से कहीं ज्यादा।” प्रिया लाल हो गई, दुपट्टा ठीक किया और बोली, “तुम भी तो अच्छे लगते हो अब। शहर ने तुम्हें और हैंडसम बना दिया।” दोनों हंसे। राज ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। प्रिया ने हाथ नहीं छुड़ाया। बस कुछ सेकंड के लिए आंखों में आंखें डालीं। राज को लगा जैसे बिजली दौड़ गई।

उसके बाद रोज छोटी-छोटी मुलाकातें होने लगीं। कभी छत पर, कभी गली में, कभी खेत की मेड़ पर। राज प्रिया को शहर की कहानियां सुनाता – सिनेमा, मॉल, नाइट लाइफ। प्रिया सुनती और सपने देखती। “काश मैं भी शहर जा पाती,” वो कहती। राज उसे छेड़ता, “जब तुम मेरी हो जाओगी तो ले चलूंगा।” प्रिया शरमाकर भाग जाती, लेकिन मन में कुछ गुदगुदी होने लगी थी।

तीसरे दिन रात को बिजली चली गई। पूरा गांव अंधेरे में था। राज ने मौका देखा और प्रिया के घर की तरफ गया। प्रिया बाहर बैठी हवा खा रही थी। “डर तो नहीं लग रहा?” राज ने पूछा। “अकेली हूं आज, मां-बाप मामा के यहां गए हैं,” प्रिया ने कहा।

दोनों पुरानी यादों में खो गए। राज पास बैठ गया। हल्की हवा चल रही थी। राज ने धीरे से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। प्रिया कांपी, लेकिन हटाई नहीं। “राज... ये ठीक नहीं है,” उसने फुसफुसाया। लेकिन उसकी सांसें भारी हो रही थीं।

राज ने उसकी गर्दन पर हल्का सा किस किया। प्रिया की आंखें बंद हो गईं। “मुझे तुम बहुत पसंद हो प्रिया। तुम्हें देखकर मेरा मन नहीं मानता,” राज ने कहा। प्रिया ने कुछ नहीं बोला, बस सर उसके कंधे पर टिका दिया। उस रात सिर्फ बातें और हल्के स्पर्श हुए, लेकिन दोनों के मन में आग लग चुकी थी।

राज अब पूरी तरह प्रिया पर फिदा था। उसकी गोरी स्किन, भारी गांड, बड़े स्तन और शर्मीली मुस्कान – सब कुछ उसे पागल कर रहा था। प्रिया भी राज की company में खुद को सुरक्षित और excited महसूस कर रही थी। धीरे-धीरे बातें गहरी होने लगीं। राज जानता था कि जल्दी ही वो प्रिया को मनाने वाला है।

अगले कुछ दिन राज और प्रिया की मुलाकातें बढ़ती गईं। राज अब जानबूझकर ऐसे समय निकलता जब प्रिया अकेली होती। एक दिन दोपहर को खेतों में दोनों मिले। प्रिया पानी भरने आई थी, सलवार सूट में उसकी गोरी गर्दन पसीने से चमक रही थी। राज ने पानी का घड़ा उठाने में मदद की।

हाथ छूते ही दोनों में करंट सा दौड़ गया। “प्रिया, तुम्हारे बिना दिन कितना सूना लगता है,” राज ने कहा। प्रिया ने शरमाते हुए नीचे देखा, “तुम भी तो बस दो-चार दिन की मेहमान हो। फिर चले जाओगे।”

राज ने उसे एक पेड़ के नीचे बिठाया। वहां कोई नहीं था। उसने प्रिया का हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे उंगलियां सहलाने लगा। “मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाना चाहता। तुम्हें देखकर मेरा मन करता है कि तुम्हें हमेशा अपने पास रखूं।” प्रिया की सांसें तेज हो गईं।

राज ने हिम्मत करके उसके गाल पर हाथ फेरा। प्रिया ने आंखें बंद कर लीं। राज ने धीरे से उसके होंठों पर किस किया – सिर्फ हल्का सा, लेकिन गहरा। प्रिया ने पहली बार जवाब दिया, उसके होंठ हल्के से खुले।

उसके बाद रोज छोटी-मोटी बातें, छेड़छाड़ और स्पर्श होने लगे। राज प्रिया को शहर की लाइफ की कहानियां सुनाता, वो हंसती, कभी-कभी उसकी बांह पकड़ लेती।

एक शाम को पुरानी मंदिर के पास दोनों बैठे थे। अंधेरा हो चुका था। राज ने प्रिया को अपनी गोद में खींच लिया। उसकी गोरी छाती उसके सीने से लग रही थी। “राज... कोई देख लेगा,” प्रिया ने कहा लेकिन हटी नहीं। राज ने उसके दुपट्टे को थोड़ा सरकाया और गर्दन पर किस करने लगा। प्रिया की सांसें भारी हो गईं। राज का हाथ उसकी कमर पर था, धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा था।

“प्रिया, मुझे तुम्हारे साथ अकेले समय चाहिए। वो पुराना खंडहर घर है ना, गांव से थोड़ा दूर... वहां कोई नहीं जाता,” राज ने फुसफुसाया। प्रिया डर गई, “पागल हो गए हो? अगर किसी ने देख लिया तो?”

लेकिन राज ने उसे समझाया, “रात को चुपके से। मैं तुम्हें सच में चाहता हूं। सिर्फ बातें भी कर लेंगे।” प्रिया ने काफी देर सोचा। आखिर बोली, “ठीक है... लेकिन सिर्फ बातें। और हां, मैं precaution ले आऊंगी। pregnancy नहीं होनी चाहिए।”

दूसरे दिन प्रिया ने राज को बताया कि उसके मां-बाप दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं। रात का प्लान बन गया। राज का मन मचल रहा था। वो प्रिया की उस गोरी body को छूने के लिए बेताब था – उसके बड़े स्तन, भारी गांड और पतली कमर।

रात के नौ बजे के आसपास दोनों चुपके से निकले। गांव सो चुका था। पुराना खंडहर घर जंगल के किनारे था, चारों तरफ खामोशी। अंदर पुरानी खटिया पड़ी थी, दीवारें टूटी हुईं, लेकिन चांदनी अंदर आ रही थी। प्रिया सलवार सूट में थी, हल्का सा कांप रही थी। “राज, मेरा दिल बहुत तेज धड़क रहा है,” उसने कहा। राज ने उसे गले लगाया, “डरो मत। मैं तुम्हारे साथ हूं।”

पहले तो दोनों सिर्फ गले लगे और किस करते रहे। राज ने प्रिया के होंठों को चूसना शुरू किया, जीभ अंदर डाली। प्रिया भी सीख रही थी, उसकी जीभ राज से टकरा रही थी। राज का हाथ प्रिया की पीठ पर था, फिर धीरे से नीचे सरका और उसकी भारी गांड को पकड़ लिया। गांड को हल्का दबाया तो प्रिया सिहर गई। “आह्ह... राज...”

राज ने उसका दुपट्टा उतार दिया। कुर्ती के बटन खोले। प्रिया की गोरी छाती ब्रा में उभरी हुई थी। राज ने ब्रा का हुक खोला और दोनों बड़े स्तन बाहर आ गए। वे भरे हुए, निचले हिस्से थोड़े भारी, गुलाबी निप्पल खड़े हो चुके थे। राज ने एक स्तन मुंह में ले लिया, जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ से मसल रहा था। प्रिया की उंगलियां राज के बालों में फंस गईं, “उफ्फ्... बहुत अच्छा लग रहा है... धीरे चूसो।”

प्रिया का बदन गर्म हो चुका था। राज ने उसकी सलवार का नाड़ा खोला। सलवार नीचे सरक गई। प्रिया अब सिर्फ पैंटी में खड़ी थी। उसकी गोरी जांघें, पतली कमर और पैंटी पर हल्का गीला धब्बा। राज घुटनों पर बैठ गया, पैंटी को धीरे से उतारा। प्रिया की चूत गोरी, साफ और थोड़ी फूली हुई थी, पसीने और उत्तेजना से चमक रही थी। राज ने अपनी जीभ निकाली और चूत की लकीर पर चाटा। प्रिया जोर से कांपी, “आआह्ह्ह राज... ये क्या... ओह मां... मजा आ रहा है।”

राज ने काफी देर तक चूत चाटी, उंगली अंदर डाली, अंदर-बाहर किया। प्रिया की टांगें कांप रही थीं। वो पहली बार इतना enjoy कर रही थी। फिर प्रिया ने राज को खड़ा किया। उसकी शर्ट उतारी, पैंट खोली। राज का लंड पूरा तना हुआ, मोटा और लंबा। प्रिया ने शरमाते हुए हाथ में लिया, हल्का सहलाया। “इतना बड़ा... धीरे करना प्लीज।”

प्रिया ने अपनी बैग से कंडोम निकाला जो वो गांव की दुकान से चुपके से लाई थी। राज ने कंडोम चढ़ाया। प्रिया को खटिया पर लिटाया, उसके पैर फैलाए। लंड चूत पर रखा और धीरे दबाया। प्रिया के मुंह से दर्द की सिसकारी निकली, “आह्ह... धीरे... फट रहा है।” राज रुका, किस किया, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर कर दिया।

कुछ देर बाद प्रिया को मजा आने लगा। राज ने रफ्तार बढ़ाई – धीमे ठोके, फिर तेज। चूत की चप-चप आवाज आने लगी। प्रिया की आंखें बंद, मुंह खुला, “राज... और जोर से... हां... यही... आह्ह्ह!” राज ने पोजीशन बदली। प्रिया को घुटनों पर मोड़ा, पीछे से गांड पकड़कर चोदा। उसकी भारी गांड हर ठोके पर लहरा रही थी। राज गांड पर थप्पड़ मार रहा था। प्रिया पूरी तरह पागल हो गई थी।

आखिर में प्रिया कांप उठी, उसकी चूत सिकुड़ी और वो झड़ गई। राज भी कुछ ही देर बाद कंडोम में झड़ गया। दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। प्रिया ने राज को चूमते हुए कहा, “ये सबसे अच्छा पल था मेरी जिंदगी का।”

राज गांव में कुल 15 दिन रहा। इन 15 दिनों में प्रिया और राज की मुलाकातें एक रूटीन बन गईं। दोनों ने पुराने खंडहर घर को अपना गुप्त आशियाना बना लिया था। हर रोज अलग-अलग समय, अलग-अलग मूड में दोनों मिलते और पूरी तरह एक-दूसरे में खो जाते। प्रिया अब पहले से ज्यादा खुल गई थी। वो खुद राज को मैसेज करती या इशारा करती कि कब मिलना है।

पहला हफ्ता - धीमी और रोमांटिक चुदाई : पहले कुछ दिन दोनों काफी सावधानी से मिलते। एक सुबह प्रिया खेतों में चली गई थी। राज भी पीछे-पीछे पहुंच गया। वहां झाड़ियों के बीच दोनों छुप गए। प्रिया ने सलवार सूट पहना हुआ था। राज ने उसे पेड़ से सटाकर खड़ा किया। पहले तो लंबी किसिंग, फिर राज ने कुर्ती ऊपर की और दोनों बड़े स्तनों को चूसा।

प्रिया की गांड को पकड़कर मसलता रहा। फिर उसने सलवार का नाड़ा खोला और पैंटी उतार दी। खड़े-खड़े ही राज ने कंडोम लगाया और प्रिया की एक टांग को उठाकर चूत में लंड डाला। धीरे-धीरे ठोके मार रहा था। प्रिया उसके कंधे पर सिर रखे हुए कराह रही थी, “राज... धीरे... कोई आ जाएगा... आह्ह... लेकिन रुकना मत।”

दोपहर में घर के पीछे वाली पुरानी कोठरी में मिलते। वहां प्रिया राज की गोद में बैठकर लंड चूसती। अब वो अच्छे से सीख चुकी थी – लंड को मुंह में लेकर चूसना, जीभ घुमाना। राज उसके बाल पकड़कर हल्का facefuck करता। फिर प्रिया खुद ऊपर चढ़ जाती, काउगर्ल स्टाइल में लंड अंदर लेती और अपनी भारी गांड हिलाती। उसके बड़े स्तन उछल रहे होते, राज उन्हें मुंह से पकड़कर चूसता।

रात को खंडहर घर में सबसे ज्यादा मस्ती होती। एक रात प्रिया ने राज को सरप्राइज दिया। वो नई वाली लाल रंग की सलवार सूट पहनकर आई थी, जिसमें उसकी गोरी body और ज्यादा हॉट लग रही थी। दोनों ने पहले एक-दूसरे को पूरा नंगा किया। राज ने प्रिया को खटिया पर लिटाया और पूरे बदन पर किस करने लगा – गर्दन, स्तन, पेट, नाभि, जांघें और आखिर में चूत। प्रिया कराह रही थी, “राज... मैं तुम्हारी दीवानी हो गई हूं... चोदो मुझे।”

उस रात राज ने उसे spoon position में चोदा – पीछे से लिपटकर, एक हाथ स्तन मसलते हुए और दूसरा क्लिट पर। धीमी लेकिन गहरी चुदाई। प्रिया बार-बार झड़ रही थी। आखिर में राज ने उसे doggy में मोड़ा। उसकी भारी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से ठोके मारे। गांड लाल हो गई थी थप्पड़ों से। प्रिया चीख रही थी, “हां राज... और तेज... मेरी गांड फाड़ दो... आह्ह्ह!” दोनों एक साथ झड़े।

दूसरा हफ्ता - जंगली और अलग-अलग तरीके : अब दोनों ज्यादा बोल्ड हो गए थे। एक दिन दोपहर में खेत के बीच वाले पुराने बरगद के पेड़ के नीचे मिले। प्रिया ने खुद राज का लंड निकाला और घुटनों पर बैठकर चूसा। फिर राज ने उसे पेड़ से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। प्रिया की एक टांग ऊपर थी, लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था।

रात में कभी-कभी राज प्रिया को घर से उठाकर ले जाता। एक रात तो बारिश हो रही थी। दोनों भीगे हुए खंडहर घर पहुंचे। भीगी सलवार सूट प्रिया के बदन से चिपक गया था, जिससे उसकी चुचियां और गांड की शेप साफ दिख रही थी। राज ने उसे दीवार से लगाकर पीछे से चोदा। पानी की बूंदें दोनों के शरीर पर गिर रही थीं। प्रिया चिल्ला रही थी मजा लेकर।

एक और दिन प्रिया ने राज को बताया कि उसे anal try करना है। राज ने पहले उंगली और थूक से तैयार किया। फिर कंडोम लगाकर बहुत धीरे से गांड में घुसाया। प्रिया पहले दर्द से चीखी, लेकिन बाद में मजा आने लगा। “अब मैं पूरी तरह तुम्हारी हो गई,” उसने कहा।

आखिरी दिन - भावुक और सबसे तेज चुदाई : आखिरी दिन प्रिया बहुत उदास थी। “कल तुम जा रहे हो... फिर कब मिलोगे?” राज ने उसे गले लगाया। उस रात दोनों ने खंडहर घर में पूरा समय बिताया। राज ने प्रिया को पूरा नंगा किया और हर हिस्से को चूम-चाट लिया। लंबी foreplay के बाद उसने missionary में चोदा, आंखों में आंखें डालकर। फिर cowgirl, फिर doggy। आखिर में standing position में उठाकर चोदा। प्रिया की टांगें राज की कमर पर लिपटी हुई थीं।

“राज... मुझे याद रखना... जब भी आओ, मैं इंतजार करूंगी,” प्रिया रोते हुए बोली। राज ने आखिरी बार जोर-जोर से चोदा, प्रिया कई बार झड़ गई। दोनों थककर एक-दूसरे से चिपके सो गए।

सुबह राज के जाने से पहले प्रिया ने उसे आखिरी किस दिया और कहा, “कंडोम हमेशा यूज करना... और जल्दी आना।” राज गांव से वापस शहर गया, लेकिन प्रिया की याद और उन 15 दिनों की गर्म रातें हमेशा उसके साथ रहीं।

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Shreyash Kumar
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