बेड पे सोई माँ की पीछे से गांड चोदी - फुल चुदाई
सोती हुई माँ करवट लेकर लेटी थीं, उनकी मोटी गोरी गांड मेरी तरफ थी। मैंने धीरे से उनके पीछे आकर लंड की नोक उनकी तंग गांड पर रखी और धीरे-धीरे पूरा मोटा लंड अंदर ठेल दिया। फिर जोर-जोर से उनकी गांड मारने लगा, माँ नींद में ही कराहने लगीं।

मेरा नाम आर्यन है, उम्र 22 साल। मेरी माँ का नाम प्रिया है, उम्र 41 साल। माँ बेहद गोरी, सेक्सी और आकर्षक हैं। उनका फिगर 36-28-38 है – भारी छातियाँ, पतली कमर और मोटी गोल गांड। पापा सरकारी नौकरी में हैं, इसलिए अक्सर व्यस्त रहते हैं।
सामर वेकेशन में हम तीनों (पापा, माँ और मैं) मनाली घूमने गए। हमने एक अच्छे रिसॉर्ट में दो अलग-अलग वुडन कॉटेज बुक किए। एक पापा के लिए और एक हमारे लिए, क्योंकि पापा को रात में कॉन्फ्रेंस कॉल करनी थी।
पहले दिन हम सबने घूमने का मजा लिया। शाम को वापस लौटे तो पापा थक गए थे और जल्दी सो गए। माँ और मैं हमारे कॉटेज में बैठे थे। बाहर ठंड बहुत थी, इसलिए हमने फायरप्लेस जलाया हुआ था।
रात के ग्यारह बज चुके थे। मनाली की ठंडी हवा कॉटेज की खिड़कियों से अंदर आ रही थी। फायरप्लेस में लकड़ी जल रही थी और उसकी नरम रोशनी पूरे कमरे में फैली हुई थी। पापा अपने कॉटेज में सो चुके थे। माँ और मैं हमारे कॉटेज में थे।
माँ ने हल्का सफेद नाइट सूट पहना हुआ था। सूट का कपड़ा इतना पतला था कि उनकी गोरी देह की गरमाहट साफ महसूस हो रही थी। उनकी भारी छातियाँ सूट के अंदर हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं बेड के एक तरफ लेटा था, माँ दूसरी तरफ।
माँ करवट लेकर सो गई थीं। उनकी मोटी, गोल गांड मेरी तरफ थी। कमरे में सिर्फ फायरप्लेस की आग की हल्की आवाज आ रही थी। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मैं काफी देर तक माँ को देखता रहा, फिर धीरे से उनके पास सरक गया।
पहले मैंने हल्के से उनकी कमर पर हाथ रखा। माँ की कमर नरम और गरम थी। फिर मैंने धीरे-धीरे हाथ ऊपर ले जाकर उनकी छातियों को ऊपर से दबाया। सूट के कपड़े के ऊपर से भी उनकी छातियों की नरमी और भारीपन महसूस हो रहा था। मैंने उन्हें हल्का-हल्का मसलना शुरू किया।
माँ की सांसें थोड़ी तेज हो गईं, लेकिन वे सो रही थीं। मैं और हिम्मत करके सूट के अंदर हाथ डाल दिया। मेरी उँगलियाँ सीधे उनकी नंगी, गोरी छातियों पर पड़ीं। वे बहुत नरम, गरम और भारी थीं। मैंने उन्हें धीरे-धीरे दबाया, मसलने लगा। उनके निप्पल मेरी हथेली में सख्त हो गए थे।
मेरा लंड पैंट में तना हुआ था। मैंने पैंट उतार दी और लंड बाहर निकाल लिया। फिर माँ की मोटी गांड की दरार में लंड रखकर हल्का-हल्का रगड़ने लगा। उनकी गांड की गर्मी और नरमी मेरे लंड को और सख्त बना रही थी।
मैं काफी देर तक यही सब करता रहा – उनकी छातियाँ दबाता, गांड सहलाता और लंड से उनकी गांड की दरार में रगड़ता रहा। माँ की सांसें अब और तेज हो चुकी थीं।
अचानक माँ ने करवट बदली और मेरी तरफ मुड़ गईं। उनकी आँखें खुली हुई थीं। उन्होंने देखा कि मैं नंगा हूँ और मेरा मोटा खड़ा लंड उनके शरीर से सटा हुआ है।
माँ की आँखें फैल गईं। "आर्यन... ये... ये क्या कर रहा है तू?" उनकी आवाज में शर्म और हैरानी थी।
मैं डर गया, लेकिन मेरा लंड अभी भी खड़ा था। मैंने फुसफुसाकर कहा, "माँ... sorry... मुझे बहुत दिनों से आपकी तरफ मन करता है। आप बहुत सुंदर हो... मैं कंट्रोल नहीं कर पाया..."
माँ चुप रहीं। उनकी नजरें मेरे खड़े लंड पर अटक गई थीं। मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। माँ ने पहले हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन फिर धीरे से लंड को छू लिया।
"इतना... इतना बड़ा और गर्म..." उन्होंने शर्माते हुए कहा।
मैंने उन्हें मनाना शुरू किया, "माँ... पापा आपको खुश नहीं रख पाते। मैं आपको पूरा प्यार और सुख दे सकता हूँ। बस एक बार मौका दो ना..." माँ ने कुछ देर सोचा, फिर धीरे से बोलीं, "ठीक है... लेकिन बहुत धीरे से... और चुपचाप..."
मैंने तुरंत उनका नाइट सूट ऊपर किया। उनकी भारी, गोरी छातियाँ बाहर आ गईं। मैंने दोनों छातियों को जोर से पकड़ लिया और मुंह लगाकर चूसने लगा। माँ की सांसें तेज हो गईं।
"आह्ह्ह... आर्यन... धीरे... लेकिन अच्छे से चूसो बेटा..." मैंने उनकी छातियाँ चूसते हुए नीचे हाथ ले जाकर उनकी चूत को सहलाया। माँ की चूत पहले से बहुत गीली हो चुकी थी। मैंने एक उंगली अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। माँ कराहने लगीं – "उफ्फ... बेटा... माँ की चूत में उंगली डाल रहे हो... आह्ह्ह..."
माँ अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं। उन्होंने खुद अपना सूट उतार दिया। अब माँ पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थीं। उनकी गोरी देह फायरप्लेस की रोशनी में चमक रही थी।
मैंने उनकी जांघें फैलाईं और चूत पर मुंह रख दिया। जब मेरी जीभ उनकी क्लिट पर पड़ी, माँ ने तकिया मुँह में दबा लिया और जोर से कराहने लगीं – "आआह्ह्ह... आर्यन... वहाँ... माँ की चूत चूसो बेटा... हाँ... और जोर से..."
मैंने उनकी चूत को अच्छे से चाटा। माँ की जांघें काँप रही थीं। वे दो बार झड़ चुकी थीं। उनका गर्म, मीठा रस मेरे मुंह में भर गया था।
फिर माँ ने मुझे ऊपर खींच लिया। उनकी आँखों में शर्म के साथ भूख थी। उन्होंने धीरे से कहा, "अब... अब अपना लंड डाल दो बेटा... माँ की चूत में डाल दो..."
मैंने लंड की नोक उनकी गीली चूत पर रखी और धीरे से अंदर धकेला। पूरा मोटा लंड उनकी गरम, तंग चूत में चला गया। "आआआह्ह्ह... बेटा... बहुत मोटा है... माँ की चूत फट रही है... आह्ह्ह..."
मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। माँ की छातियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं। मैंने उन्हें जोर से पकड़ लिया और तेजी से ठोकने लगा। माँ अब पूरी तरह पागल हो चुकी थीं – "हाँ बेटा... और जोर से... माँ को चोदो... अपनी माँ की चूत फाड़ दो... आह्ह्ह... बहुत मजा आ रहा है..."
उस रात मैंने माँ को तीन बार चोदा। हर बार माँ जोर-जोर से कराह रही थीं और झड़ रही थीं। आखिरी में मैंने उनकी चूत के अंदर ही अपना गर्म माल छोड़ दिया।
माँ थककर मेरे सीने पर लेट गईं और बोलीं, "आर्यन... तूने माँ को आज जिंदगी का असली सुख दे दिया..."
अगली सुबह पापा बाहर घूमने चले गए। माँ और मैं कॉटेज में अकेले थे। माँ अब बिल्कुल शर्माती नहीं थीं। उन्होंने मुझे बुलाया और गले लगाकर जोर से किस किया। "आज पूरा दिन माँ को जितना मन करे चोद सकते हो बेटा..."
हम दोनों नंगे हो गए। मैंने माँ को शावर में ले जाकर चोदा। पानी के नीचे उनकी छातियाँ चूसते हुए मैंने उनकी चूत में लंड डाला। माँ दीवार का सहारा लेकर चीख रही थीं – "हाँ बेटा... और जोर से... माँ को शावर में चोदो..."
फिर हम बेड पर आए। मैंने माँ को doggy style में किया और उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदा। माँ की गांड लाल हो गई थी। "हाँ... माँ की गांड भी मारो... पूरी तरह अपनी बना लो माँ को..."
दिन भर हमने कई बार सेक्स किया। शाम होते-होते माँ थक गई थीं, लेकिन उनके चेहरे पर संतोष था।
रात को पापा सो गए तो माँ मेरे पास आईं और बोलीं, "आर्यन... अब से हर फैमिली ट्रिप पर माँ को ऐसे ही चोदना... माँ अब तेरी हो गई है बेटा।"
मैंने उनकी गांड दबाते हुए कहा, "हाँ माँ... अब हर ट्रिप में तुम मेरी रंडी हो।"

