सोई सेक्सी माँ को चोदा

सोती हुई माँ को पीछे से चोदा। टाइट चूत में जोरदार ठोकाई और अंदर वीर्य भरा। पूरी गंदी माँ बेटे की चुदाई कहानी।

लेखक: Aanya Sharma8 मिनट पढ़ने में
सोई सेक्सी माँ को चोदा

मैं राजस्थान के एक छोटे से शहर में रहता हूँ। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे गर्म और गंदी कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

मेरी माँ का नाम छाया है। उनकी उम्र 42 साल है, लेकिन देखने में वो अभी भी 30-32 साल की जवान औरत लगती हैं। उनका रंग दूधिया गोरा है, लंबे घने काले बाल कमर तक, 36 इंच की भारी-भारी गोल-गोल चुचियाँ, पतली कमर और सबसे खतरनाक — उनकी मोटी, नाजुक और गोरी गांड जो चलते समय लहराती रहती है।

बात 2 साल पहले की है, जब मैं 21 साल का था। मेरी जवानी पूरे उफान पर थी। मैं अपनी गर्लफ्रेंड को कई बार चोद चुका था, लेकिन असली प्यास मुझे अपनी माँ की देह की थी।

मुझे शक हुआ कि माँ पापा से खुश नहीं हैं। पापा की उम्र 55 के ऊपर हो चुकी थी और उनमें अब ताकत नहीं रही थी। मैंने माँ का फोन चेक किया तो सब राज खुल गया। माँ किसी अमित नाम के आदमी से पिछले 8-10 महीने से चक्कर चला रही थीं। वो उनसे होटल में मिलती थीं और वो माँ को खूब चोदता था। माँ ने उसे अपनी नंगी तस्वीरें भी भेजी थीं — अपनी भारी चुचियाँ, साफ चूत और मोटी गांड की।

ये सब देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया, लेकिन मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया। मैंने मन बना लिया कि अब मैं ही अपनी माँ को चोदूंगा।

मैंने माँ से कहा, “माँ, आज रात मुझे आपके पास सोना है। अकेले नींद नहीं आती।” माँ और पापा अलग-अलग सोते थे, इसलिए माँ मान गईं।

पहले 3-4 रातें मैं बस उनके पास लेटा रहता। जब वो गहरी नींद में सो जातीं, तो मैं धीरे से उनके पास चिपक जाता। अपना खड़ा लंड उनकी मोटी गांड की दरार में घिसता, एक हाथ से उनकी जांघ सहलाता और दूसरे हाथ से उनकी भारी चुची को धीरे-धीरे दबाता। माँ हल्का-हल्का कराहतीं, लेकिन नींद में रहतीं।

एक शुक्रवार की रात माँ ने अपने यार के साथ ज्यादा शराब पी ली थी। वो पूरी तरह नशे में बेहोश होकर सो गईं। मैं रात 1:15 बजे उनके कमरे में गया। उन्होंने सिर्फ एक हल्की नीली मैक्सी पहनी हुई थी, उसके अंदर ब्रा या पैंटी नहीं थी। मैक्सी उनकी जांघों तक चढ़ी हुई थी और उनकी मोटी गोरी जांघें साफ दिख रही थीं।

मैं चुपके से उनके बगल में लेट गया। पहले मैंने उन्हें चिपका लिया। मेरा खड़ा लंड उनकी गांड पर दब रहा था। फिर मैंने धीरे से उनकी मैक्सी कमर तक ऊपर कर दी। उनकी मोटी, चिकनी और गोरी गांड मेरे सामने थी।

मैंने अपना 6.5 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड निकाला और उनकी गांड की दरार में घिसने लगा। साथ ही एक हाथ से उनकी भारी चुची दबाने लगा और निप्पल को उँगलियों से मसलने लगा। माँ नशे में कराह रही थीं — “आह्ह्ह… उफ्फ्फ…” मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उनकी मैक्सी और ऊपर की और पैंटी को जांघों तक नीचे सरका दिया। उनकी साफ गुलाबी चूत मेरे सामने थी। मैंने लंड की नोक उनकी चूत पर रखी और धीरे से दबाया।

“आह्ह्ह्ह…” माँ के मुंह से जोर की सिसकारी निकली। मैंने एक और जोरदार धक्का दिया। आधा लंड उनकी गीली चूत में चला गया। फिर मैं रुका नहीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा।

माँ की नींद पूरी तरह टूट गई। जब उन्होंने आँखें खोलीं और देखा कि उनका बेटा उनके ऊपर चढ़ा हुआ है, तो वो घबरा गईं।

माँ: “संजय! क्या कर रहा है बेटा? छोड़ दे… ये गलत है… आह्ह्ह… उफ्फ्!” लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। मैंने उनकी कलाई पकड़ ली और और तेज ठोके मारने लगा।

मैं: “गलत? जिस हरामी अमित से तू चुदवा रही थी, वो गलत नहीं था? अब बेटे का लंड चूत में है तो गलत हो गया?” माँ कुछ देर चुप रहीं। उनकी साँसें तेज हो गईं। फिर उन्होंने आँखें बंद कर लीं और बोलीं —

माँ: “आह्ह्ह… तेरे बाप में लंड में दम ही नहीं रहा… इसलिए बाहर मुंह मारना पड़ा… लेकिन तेरा लंड बहुत मोटा और सख्त है बेटा… जोर से चोद… अपनी माँ को फाड़ डाल…”

अब माँ पूरी तरह रंडी मोड में आ गईं। मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पर जोर का थप्पड़ मारा और लंड एक ही झटके में पूरी चूत में उतार दिया।

“पचाक-पचाक-पचाक” की आवाज कमरे में गूंजने लगी। माँ चिल्ला रही थीं — “हां बेटा… और तेज… जोर से… अपनी रंडी माँ की चूत फाड़ दो… आह्ह्ह… मदरचोद… चोद मुझे!”

मैंने उनके बाल पकड़े और कुत्ते की तरह चोदा। फिर मैंने लंड निकाला और उनके मुंह में ठूंस दिया। माँ बिना हिचकिचाए रंडी की तरह चूसने लगीं। उनके मुंह से लार टपक रही थी।

मैंने उनकी चूत चाटी और उँगलियाँ डालीं। माँ तीन बार झड़ चुकी थीं। आखिर में मैंने कहा, “माँ, अब मुझे तुम्हारी गांड चोदनी है।” माँ ने शर्माते हुए हामी भर दी। मैंने उनके गांड के छेद पर थूक लगाया और धीरे-धीरे अपना मोटा लंड अंदर डाला।

माँ: “आआआह्ह्ह… फट जाएगी मेरी गांड… धीरे बेटा… आह्ह्ह…”

जब पूरा लंड अंदर चला गया तो मैंने जोर-जोर से गांड मारनी शुरू कर दी। माँ अब पूरी तरह पागल हो रही थीं — “हां… चोद अपनी माँ की गांड… फाड़ डाल… आह्ह्ह… मैं तेरी रंडी हूँ बेटा…”

20 मिनट तक जोरदार गांड चुदाई के बाद मैंने अपना पूरा गर्म वीर्य उनकी गांड के अंदर छोड़ दिया।

उसके बाद हम थोड़ी देर लेटे रहे। फिर सुबह 6 बजे फिर चुदाई हुई — इस बार मैंने उनकी चूत और गांड दोनों मारी।

उस दिन के बाद से माँ मेरी पूरी रंडी बन गईं। घर में जब भी मौका मिलता, मैं अपनी माँ की चूत और गांड का भरपूर मजा लेता

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