पापा ने बेटी की जवानी का पूरा मजा लिया

सोफे पर छेड़छाड़ से लेकर बेडरूम में रात भर चुदाई, बाथरूम में गीले बदन पर धक्के और मम्मी के सामने सोफे पर छुपकर मज़ा — पापा-बेटी का बेहद गर्म और गुप्त रिश्ता।

लेखक: viren Jagtap9 मिनट पढ़ने में
पापा ने बेटी की जवानी का पूरा मजा लिया

मेरा नाम अदिति है। मैं 19 साल की हूँ, दिखने में बिल्कुल अपनी मम्मी पर गई हूँ। मेरी हाइट 5'4" है, रंग गेहुँआ, बाल लंबे काले और घने। मेरे बदन का जादू मेरे बूब्स में है – 34C साइज़, उभरे हुए, कसे हुए, बिल्कुल संतरे जैसे गोल और सुडौल। मेरी कमर पतली है 28 इंच की और नीचे मेरी गांड 36 इंच की गोल और उभरी हुई है। मेरी जाँघें मोटी और नरम हैं, ऐसी कि हर मर्द की नज़र टिक जाए।

मेरे पापा का नाम अरविंद है। वो 46 साल के हैं पर दिखने में 35 के लगते हैं। जिम जाते हैं, बदन कड़क है, चौड़ी छाती, बाहें मज़बूत। उनकी हाइट 5'11" है, रंग गोरा, आँखें भूरी और बालों में थोड़ी सफेदी जो उन्हें और आकर्षक बनाती है। वो एक बड़ी कंपनी में मैनेजर हैं और अक्सर घर पर सूट-बूट में ही रहते हैं।

मेरी मम्मी सरिता, 42 साल की, घरिणी हैं। वो अक्सर अपने मायके जाती रहती हैं क्योंकि मेरे नाना-नानी बुज़ुर्ग हैं और उनकी देखभाल करनी पड़ती है।

हम दिल्ली के एक अपार्टमेंट में रहते हैं – तीन बेडरूम का फ्लैट। मम्मी-पापा का मास्टर बेडरूम, मेरा कमरा और एक गेस्ट रूम।

ये बात उस गर्मी की है जब मैं कॉलेज की छुट्टियों में घर पर थी। मम्मी फिर से नानी के घर गई हुई थीं – 15 दिन के लिए। घर में सिर्फ मैं और पापा थे।

मई का महीना था। गर्मी अपने चरम पर। मैं अक्सर घर पर हल्के कपड़ों में रहती थी। उस दिन मैंने पहनी थी एक सफ़ेद रंग की छोटी स्कर्ट – जो मेरे घुटनों से ऊपर थी – और ऊपर गुलाबी रंग की टैंक टॉप जिसमें से मेरे कंधे और पेट का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था। अंदर मैंने लाल रंग की लेस वाली ब्रा और पैंटी पहनी थी – विक्टोरिया सीक्रेट की, जो मैंने ऑनलाइन मँगवाई थी।

मैं सोफे पर बैठकर नेटफ्लिक्स देख रही थी। पापा ऑफिस से आए। उन्होंने सूट का कोट उतारा, टाई खोली और शर्ट के ऊपर के दो बटन खोलकर सोफे पर मेरे बगल में बैठ गए।

"क्या देख रही हो बेटा?" पापा ने पूछा, उनकी आवाज़ थकी हुई थी।

"पापा, एक रोमांटिक मूवी है... आप भी देखो ना," मैंने कहा और उनकी तरफ थोड़ा सरक गई।

मूवी में एक सीन आया – हीरो-हीरोइन किस कर रहे थे, पैशनेट किस, हीरो का हाथ हीरोइन की जाँघ पर था। मुझे शर्म आई, मैंने नज़रें झुका लीं।

"क्या हुआ? शर्मा गई?" पापा ने मेरी ठोड़ी उठाई।

"नहीं पापा... बस..." मैंने कुछ कहा नहीं।

पापा ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। उनका हाथ गरम था, मोटा, मज़बूत। उनकी उँगलियाँ मेरे कंधे को सहला रही थीं।

"बड़ी हो गई हो तुम अदिति... पता है?" पापा की आवाज़ में एक अजीब सी गहराई थी।

"क्या मतलब पापा?" मैंने पूछा, मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था।

"मतलब... तुम अब बच्ची नहीं रही। औरत हो गई हो। मेरे लिए... खतरनाक औरत," पापा ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा।

मुझे समझ नहीं आया क्या कहूँ। मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन हो रही थी।

रात के खाने के बाद पापा ने थोड़ी शराब पी। मैंने उनके लिए कॉफ़ी बनाई। जब मैं किचन से बाहर निकली तो पापा डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।

"आओ बेटा, थोड़ी देर बैठो मेरे साथ," पापा ने कहा।

मैं उनके पास गई। वो एक स्टूल पर बैठे थे। उन्होंने मुझे अपने बीच में खड़ा कर लिया – उनके खुले पैरों के बीच।

"तुम्हारे बाल अच्छे नहीं लग रहे खुले... मैं संवार दूँ?" पापा ने कहा।

मैंने हाँ में सिर हिलाया। पापा ने अपने दोनों हाथ मेरे बालों में फेरे। उनकी उँगलियाँ मेरी गर्दन को छू रही थीं। मेरी आँखें बंद हो गईं।

फिर पापा ने अपने हाथ मेरे कंधों से सरकाते हुए मेरी बाँहों पर लाए। "कितनी नरम त्वचा है तुम्हारी... जैसे मक्खन," पापा ने फुसफुसाते हुए कहा।

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मैं कांप रही थी।

"पापा... मुझे..." मैं कुछ कहना चाहती थी पर शब्द नहीं निकले।

"क्या बेटा? क्या हो रहा है तुम्हें?" पापा ने पूछा, उनके हाथ अब मेरी कमर पर थे।

"कुछ नहीं... अजीब सा लग रहा है," मैंने कहा।

"कहाँ अजीब लग रहा है? यहाँ?" पापा ने मेरी कमर सहलाई।

"नहीं... और नीचे..." मैंने शर्माते हुए कहा।

"कहाँ? यहाँ?" पापा का हाथ मेरी स्कर्ट पर आया।

मैंने हाँ में सिर हिलाया। मेरी साँसें तेज़ हो गईं।

पापा ने धीरे से मेरी स्कर्ट ऊपर उठानी शुरू की। मेरी गोरी, मोटी जाँघें उनकी आँखों के सामने आ गईं। मैंने लाल लेस वाली पैंटी पहनी थी जो अब पूरी तरह से मेरी चूत के ऊपर चिपकी हुई थी – गीली हो चुकी थी।

"ओह माय गॉड... तुम तो पूरी गीली हो चुकी हो बेटा," पापा ने कहा।

मैंने शर्म से नज़रें झुका लीं।

"देखो मुझे... मैंने कहा देखो!" पापा की आवाज़ आदेश भरी थी।

मैंने ऊपर देखा। पापा की आँखों में एक जंगली आग थी – वो आग जो एक पिता की नहीं, एक मर्द की थी जो किसी औरत को देखता है।

पापा ने मुझे अपनी गोद में उठाया। मैंने अपने हाथ उनकी गर्दन में डाल दिए। वो मुझे मम्मी-पापा के बेडरूम में ले गए। वो बड़ा कमरा था, एसी चल रहा था, हल्की सी नीली रोशनी में पूरा कमरा रोमांटिक लग रहा था।

पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया। मैंने देखा – पापा ने अपनी शर्ट उतार दी थी। उनकी छाती पर हल्के-हल्के बाल थे, पेट सपाट, बाहें मज़बूत। उनके बदन की खुशबू आ रही थी – पसीने और डियोड्रेंट की मिली-जुली खुशबू जो मुझे पागल कर रही थी।

"तुम्हें पता है अदिति, मैं कब से तुम्हें देख रहा हूँ? जब से तुम 18 की हुई हो... तब से मेरी नज़र तुम पर है। मम्मी के सोने के बाद मैं तुम्हारे कमरे के दरवाज़े के पास आता था... तुम्हारे मुँह से निकलती हल्की-हल्की साँसें सुनता था। कभी-कभी तुम सोते हुए अपनी नाइटी ऊपर कर लेती थी... और मैं तुम्हारी गोरी जाँघें देखकर लंड सहलाता था," पापा ने अपना दिल खोला।

मेरी आँखों में आँसू आ गए – पर ये दुख के नहीं थे, एक अजीब सी खुशी के आँसू थे।

"मुझे माफ़ कर दो बेटा... मैं एक गंदा बाप हूँ," पापा ने कहा।

"नहीं पापा... मैं भी... मैं भी कभी-कभी आपको सोचकर..." मैंने कहा और रुक गई।

"क्या सोचकर? बोलो!"

"सोचकर... अपनी चूट सहलाती थी," मैंने शर्माते हुए कहा।

पापा की आँखें चौड़ी हो गईं। फिर उनके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आई।

"आज हम दोनों एक-दूसरे की fantasy पूरी करेंगे," पापा ने कहा।

उन्होंने मेरी टैंक टॉप ऊपर से उतार दी। मेरी लाल ब्रा में कसे हुए बूब्स उनके सामने थे। पापा ने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाने शुरू किए।

"कितने कड़क हैं... जैसे पहाड़ी," पापा ने कहा।

फिर उन्होंने मेरी ब्रा के हुक खोले। मेरे बूब्स आज़ाद हो गए। मेरे निप्पल गुलाबी, छोटे-छोटे, कड़क हो चुके थे। पापा ने एक निप्पल अपने मुँह में लिया और चूसने लगे।

"आह्ह्ह... पापा... स्स्स..." मैंने कराही।

दूसरे हाथ से वो मेरी दूसरी चूची दबा रहे थे। मैं उनके बालों में हाथ फेर रही थी।

फिर पापा नीचे गए। उन्होंने मेरी स्कर्ट उतार दी। मैं सिर्फ लाल पैंटी में थी। मेरी पैंटी पूरी तरह गीली थी – चूत के रस से तर।

"मेरी बेटी की चूत... कितनी खूबसूरत है," पापा ने मेरी पैंटी के ऊपर से चूमते हुए कहा।

फिर उन्होंने मेरी पैंटी उतारी। मेरी चूत साफ़ की हुई थी, गोरी, गुलाबी होंठ, बीच में एक पतली दरार। पापा ने अपनी जीभ निकाली और मेरी चूत पर चाटी।

"उम्म्म्म... क्या स्वाद है... शहद जैसा," पापा ने कहा।

मैं पागल हो रही थी। पापा ने मेरी चूत के होंठों को चौड़ा किया और अंदर जीभ डाली। वो मेरी चूत चाट रहे थे, कभी ऊपर क्लिट पर, कभी नीचे छेद पर।

"पापा... मर जाऊँगी... बस... आह्ह्ह..." मैं बिस्तर पर तड़प रही थी।

पापा ने अपनी दो उँगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं। अंदर बहुत गरम और गीला था। वो उँगली अंदर-बाहर करने लगे और जीभ से क्लिट चाट रहे थे।

मुझे ऐसा लगा जैसे कोई करंट दौड़ गया। मेरा पूरा बदन कांपने लगा। मैंने अपनी जाँघें पापा के सिर पर कस लीं और एक ज़ोरदार झड़की के साथ मैं झड़ गई। मेरी चूत से पानी निकलने लगा जो पापा ने पी लिया।

अब पापा खड़े हुए। उन्होंने अपनी पैंट उतारी। उनका लंड बॉक्सर के ऊपर से ही ऐसा उभरा हुआ था जैसे कोई लोहे की रॉड हो।

"आज तुम मेरे लड़े को देखोगी... और महसूस करोगी," पापा ने कहा।

उन्होंने अपना अंडरवियर नीचे किया। मेरे सामने एक 8 इंच का, मोटा, काला-गुलाबी लंड था। उस पर मोटी-मोटी नसें उभरी हुई थीं। नीचे दो बड़े-बड़े अंडे थे।

"पापा... ये तो... बहुत बड़ा है," मैंने कांपते हुए कहा।

"तुम्हारी मम्मी भी यही कहती थी पहली बार में," पापा ने मुस्कुराते हुए कहा।

मुझे डर था पर पापा ने मुझे समझाया, "डरो मत बेटा... धीरे-धीरे सारा अंदर जाएगा।"

पापा ने बिस्तर पर लेटकर मुझे अपने ऊपर बैठने का इशारा किया। मैं उनके ऊपर आ गई। उन्होंने अपने हाथों से मेरी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे मुझे नीचे लाने लगे।

मेरी चूत का मुँह उनके लंड के सुपाड़े पर टिका। वो गरम था, बहुत गरम।

"अब बैठो बेटा... धीरे से," पापा ने कहा।

मैंने धीरे से नीचे बैठना शुरू किया। सुपाड़ा अंदर घुसा। मेरी चूत फटी जा रही थी – इतना मोटा कभी कुछ अंदर नहीं गया था।

"उम्म्म्ह्ह... पापा... बहुत दर्द हो रहा है... रुक जाओ..." मैंने रोते हुए कहा।

"थोड़ा सा और... बस आधा हुआ है," पापा ने कहा।

उन्होंने एक ज़ोर से धक्का दिया। मैं चीखी। उनका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। मेरी चूत की दीवारें फैल गईं। मुझे लगा जैसे कोई गरम लोहा अंदर डाल दिया हो।

"बस... अब मज़ा आएगा," पापा ने कहा और मेरे बूब्स पकड़कर दबाने लगे।

थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ और एक अजीब सा मज़ा आने लगा। मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी।

"ये लड़की... अब तो पूरा ले रही है," पापा ने मुस्कुराते हुए कहा।

"हाँ पापा... अब मज़ा आ रहा है... और ज़ोर से करो!" मैंने कहा।

पापा ने मुझे पलट दिया। अब वो मेरे ऊपर थे। उन्होंने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए।

थप-थप-थप-थप! उनकी कमर की आवाज़ और मेरी चूत की चपड़-चपड़ की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।

"क्या चूत है... इतनी टाइट... मम्मी से भी ज़्यादा टाइट है तू!" पापा चिल्ला रहे थे।

मैं अपने नाखून उनकी पीठ में गाड़ रही थी। मेरे बूब्स उनकी छाती से रगड़ खा रहे थे।

"पापा... और तेज़... फाड़ दो मेरी चूत... आह्ह्ह... मैं झड़ने वाली हूँ!" मैंने चीखी।

"मैं भी... एक साथ... आजा बेटा!" पापा ने कहा।

हम दोनों एक साथ झड़े। पापा का गाढ़ा, गरम वीर्य मेरी चूत में भर गया। वो मेरे ऊपर गिर पड़े, हाँफ रहे थे। मैं भी हाँफ रही थी। हम दोनों के शरीर पसीने से तर थे।

उस रात के बाद पापा और मैं रोज़ चुदाई करने लगे। सुबह जब मम्मी योगा के लिए पार्क जातीं, तो पापा मेरे कमरे में आ जाते। मैं अक्सर सोती हुई मिलती और वो मेरी नाइटी ऊपर करके मेरी चूत चाटते, फिर मुझे जगाकर चोदते।

एक दिन पापा ने मुझे बाथरूम में चोदा। मैं नहा रही थी, शावर चल रहा था। पापा नंगे होकर अंदर आए। मेरे गीले बदन को देखकर उनका लंड तुरंत खड़ा हो गया।

"आज गीली चूत में गीला लंड डालूँगा," पापा ने कहा।

उन्होंने मुझे दीवार से सटाया, मेरी एक टाँग उठाई और पीछे से लंड डाल दिया। पानी की बौछार के नीचे हम दोनों की साँसें मिल रही थीं। पापा मेरे बूब्स पकड़े हुए पीछे से धक्के मार रहे थे।

"कितनी गहरी जा रहा है पापा... पूरा अंदर तक!" मैंने कहा।

"हाँ बेटा... तेरी चूत का हर कोना चाट रहा है मेरा लंड!"

वो मुझे घुमाकर सामने लाए और मुझे उठाया। मैंने अपने पैर उनकी कमर के चारों ओर लपेट लिए। वो दीवार से मुझे सटाकर खड़े-खड़े चोदने लगे। मेरे पैर हवा में थे, पूरी तरह उनके सहारे थी।

सबसे रिस्की दिन वो था जब मम्मी घर पर थीं। रात को हम तीनों टीवी देख रहे थे। मम्मी सोफे के एक सिरे पर, पापा बीच में, मैं दूसरे सिरे पर।

पापा ने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया। मैंने कंबल ओढ़ रखा था। पापा का हाथ कंबल के नीचे से मेरी नाइटी के अंदर जा रहा था।

"क्या देख रहे हो?" मम्मी ने पूछा पापा से।

"कुछ नहीं... एक नई वेब सीरीज़ है," पापा ने कहते हुए मेरी चूत पर उँगली घुमाई।

मैंने मुँह दबाया। मम्मी को कुछ पता नहीं चला।

पापा ने मुझे इशारा किया। मैं समझ गई। मैंने धीरे से अपनी नाइटी ऊपर की और पैंटी नीचे सरकाई। पापा ने अपना लंड बाहर निकाला – कंबल के नीचे से।

मैंने अपनी गांड उठाई और पापा के लंड पर बैठ गई। मम्मी के सामने, सोफे पर, मैं अपने पापा के लंड पर बैठी थी।

पापा ने मेरी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगे। मम्मी सामने टीवी देख रही थीं और पीछे मैं अपने पापा से चुद रही थी।

"क्या हुआ अदिति, तुम कांप क्यों रही हो?" मम्मी ने पूछा।

"कुछ नहीं मम्मी... ठंड लग रही है... पापा से सटकर बैठी हूँ," मैंने कहा।

"हाँ... मैं इसे गर्म कर रहा हूँ," पापा ने मुस्कुराते हुए कहा और मेरी चूत में एक ज़ोरदार धक्का मारा।

मैं झड़ गई। पापा भी मेरी चूत में ही झड़ गए। हम दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए।

आज भी मम्मी के न होने पर पापा मेरी चूत की सेवा करते हैं। मैं उनकी बनाई हुई औरत हूँ। वो मुझे हर तरह से चोदना सिखा चुके हैं – डॉगी स्टाइल, काउगर्ल, सिक्स्टीनाइन, स्टैंडिंग सेक्स, बाथरूम सेक्स, किचन सेक्स।

मैं अब पापा की गुलाम हूँ। जब वो चाहें मुझे बुलाते हैं और मैं उनके लिए अपनी चूत तैयार कर लेती हूँ। वो मुझे रोज़ नए तरीके से चोदते हैं।

कभी-कभी मम्मी के सामने भी, जब वो ध्यान नहीं देतीं, पापा मेरी गांड पर हाथ मारते हैं या मेरी चूचियाँ दबाते हैं। ये हमारा पापा-बेटी का गुप्त प्यार है जो रोज़ रात को मम्मी की नींद में जाग उठता है।

मैं अब पापा की रखैल हूँ... और मुझे इस पर कोई शर्म नहीं, सिर्फ गर्व है!

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viren Jagtap
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