कुँवारी बहन की चूत चोद के रस निकाला - भर रात चोदा
वो मेरी मासूम कुंवारी चचेरी बहन थी, लेकिन उस उत्तप्त गर्म रात में मैंने उसकी तंग चुत्त को पहली बार फाड़ दिया। भर रात जोर-जोर से चोदा और उसका मीठा रस बार-बार निकाला।
मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ। हमारा परिवार काफी बड़ा है और त्योहारों पर सब एक साथ इकट्ठा होते हैं। मेरी चचेरी बहन प्रिया, उम्र में मुझसे सिर्फ एक साल छोटी — 22 साल। बचपन से हम साथ खेलते-बढ़ते आए थे। वो हमेशा मुझसे चिपकी रहती थी — "राहुल भैया, ये कर दो... वो कर दो..."। लेकिन पिछले दो सालों से कुछ बदल सा गया था।
इस बार गर्मियों की छुट्टियों में पूरा परिवार हमारे घर पर जमा हुआ था। पापा-मम्मी ने ऊपर वाले कमरे में प्रिया को ठहराया था, जबकि मैं नीचे अपना कमरा इस्तेमाल करता था। दिन भर तो सबके सामने वो सामान्य सी लड़की थी — हँसती-खेलती, लेकिन रात होते ही...
रात के दस बज चुके थे। घर में सब सो चुके थे। मैं गर्मी की वजह से नींद नहीं आ रही थी, तो छत पर घूमने चला गया। अचानक मुझे ऊपर वाले कमरे की खिड़की से हल्की रोशनी दिखी। प्रिया का कमरा। मैंने सोचा शायद वो भी गर्मी से परेशान होगी।
मैं चुपके से ऊपर गया। दरवाजा थोड़ा-सा खुला था। अंदर झाँकते ही मेरा दिल धड़कने लगा। प्रिया सिर्फ एक हल्की सी नीली नाइट सूट में थी — जो उसके गोरे, नाजुक शरीर पर चिपकी हुई थी। उसके लंबे काले बाल खुले हुए थे, जो उसकी कमर तक लहरा रहे थे। वो आईने के सामने खड़ी थी और अपने बाल संवार रही थी। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, और उसकी पूरी शक्ल में एक अनजानी चमक थी।
मैं वहीं खड़ा रह गया। उसकी जाँघें मोटी और चिकनी थीं, कमर पतली, और स्तन... भगवान, वो इतने पूरे और उभरे हुए थे कि नाइट सूट का कपड़ा उन्हें रोक नहीं पा रहा था। मेरे लंड में तुरंत सख्ती आ गई। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी चचेरी बहन मुझे इतना आकर्षित करेगी।
"राहुल भैया...?" अचानक उसकी आवाज आई। मैं चौंक गया। वो मुड़कर देख रही थी। उसकी आँखों में हैरानी थी, लेकिन डर नहीं। "तुम... यहाँ क्या कर रहे हो?" उसने धीरे से पूछा, लेकिन आवाज में शरम थी।
"गर्मी लग रही थी... छत पर आया था। तुम्हारे कमरे में रोशनी देखी तो..." मैं लड़खड़ाते हुए बोला। प्रिया मुस्कुराई। वो बिस्तर पर बैठ गई और पैर मोड़कर बैठी। उसकी जाँघें थोड़ी खुलीं, और मैंने उसकी नाइट सूट के अंदर सफेद पैंटी का हल्का झलक देख लिया। मेरा मुंह सूख गया।
"आओ ना अंदर... बाहर मच्छर हैं।" उसने कहा। मैं अंदर चला गया। कमरे में हल्की सी सुगंध थी — उसकी बॉडी लोशन और पसीने की। हम दोनों बिस्तर पर बैठ गए। बातें शुरू हुईं — पुरानी यादें, कॉलेज की, दोस्तों की। लेकिन हवा में कुछ और ही था। उसकी नजर बार-बार मेरी छाती और नीचे की तरफ जा रही थी।
"भैया... तुम्हें लगता है मैं सुंदर हूँ?" अचानक उसने पूछा। उसकी आवाज काँप रही थी। "बहुत... बहुत सुंदर।" मैंने सच्चाई से कहा। उसने शरमाते हुए सिर झुका लिया। फिर धीरे से मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया। उसकी उँगलियाँ गर्म थीं। मैंने हिम्मत करके उसके हाथ को थाम लिया और हल्का दबाया।
"प्रिया... तुम्हें पता है ना, हम चचेरे भाई-बहन हैं।" "पता है..." उसने आँखें उठाकर देखा। "लेकिन... पिछले कुछ महीनों से मैं तुम्हें बहुत याद करती हूँ। रात को... अकेले में... तुम्हारे बारे में सोचती हूँ।"
मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मैंने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया और धीरे से उसके माथे को चूमा। उसकी साँसें तेज हो गईं। फिर मैंने उसकी नाक, गाल और आखिरकार उसके होंठों पर हल्का-सा किस किया।
प्रिया ने आँखें बंद कर लीं और मेरे होंठों को अपने होंठों से चिपका लिया। वो पहला किस था, लेकिन जुनून भरा हुआ। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से खेलने लगी। वो धीरे-धीरे कराह रही थी — "म्म्म... भैया..."
मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर था, दूसरे हाथ से मैंने उसके स्तन को बाहर से दबाया। वो इतना नरम और गर्म था कि मेरा लंड पतलून में तन गया। प्रिया ने खुद को मेरे सीने से और चिपका लिया। "राहुल भैया... मुझे अच्छा लग रहा है... बहुत अच्छा..." उसने साँसें लेते हुए कहा।
मैंने उसकी नाइट सूट की ऊपरी बटन खोलनी शुरू की। एक-एक करके तीन बटन खुल गए। उसके सफेद ब्रा में कैद भरे-भरे स्तन बाहर झाँक रहे थे। मैंने ब्रा को नीचे खींचा और एक स्तन को मुंह में ले लिया। प्रिया ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से कराह उठी — "आह्ह्ह... भैया... चूसो ना... जोर से..."
मैं उसका स्तन चूस रहा था, काट रहा था, चाट रहा था। दूसरा स्तन हाथ से मसल रहा था। प्रिया की जाँघें आपस में रगड़ रही थीं। उसकी पैंटी पहले ही गीली हो चुकी थी। मैंने नीचे हाथ डाला और उसकी जाँघों के बीच उँगलियाँ फेरनी शुरू की। वो काँप रही थी।
"भैया... पहली बार है मेरे लिए... धीरे करना..." उसने शरमाते हुए कहा। मैंने उसे चुप कराने के लिए फिर से किस किया और धीरे-धीरे उसकी पैंटी के अंदर उँगली डाली। वो बहुत गर्म और चिपचिपी थी। जैसे ही मैंने उसकी छोटी-सी चूत की फाँक को छुआ, प्रिया ने मेरी कमर को अपने पैरों से जकड़ लिया।
"उफ्फ... राहुल... अंदर डालो ना उँगली..." मैंने एक उँगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी। मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। प्रिया की साँसें फूल रही थीं। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसका चेहरा लाल हो गया था।
"भैया... मुझे कुछ हो रहा है... रुक मत... तेज... तेज करो..." मैंने तेजी से उँगली चलानी शुरू की। दूसरे हाथ से उसका क्लिटोरिस रगड़ रहा था। कुछ ही मिनटों में प्रिया का पूरा शरीर तन गया। वो जोर से काँपी और मेरी उँगलियों पर अपना रस छोड़ दिया।
"आआह्ह्ह... भैया... मैं... आई... गई..." वो मेरे सीने में मुँह छुपाकर लेट गई। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। मैंने उसे प्यार से सहलाया।
"प्रिया... तुम कितनी प्यारी हो..." वो शरमाकर मुस्कुराई और मेरी आँखों में देखते हुए बोली, "भैया... अब तुम्हारी बारी है... मुझे सब कुछ सिखाओ... मैं तुम्हारी हूँ... पूरी तरह।"
प्रिया अभी भी मेरी छाती से लिपटी हुई थी। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था और साँसें अभी भी अनियमित चल रही थीं। मेरी उँगलियाँ अभी भी उसकी गीली चूत के अंदर थीं। मैंने धीरे से उन्हें निकाला और उसे चूम लिया।
"भैया... वो क्या हुआ था? मुझे ऐसा लगा जैसे आसमान फट गया..." उसने शरमाते हुए पूछा, आँखें नीचे की हुईं। "तुम्हारा पहला ऑर्गेज्म था, जान।" मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा। "और अब तुम मुझे भी वही एहसास दिलाओगी।"
प्रिया ने मेरी आँखों में देखा। उसकी नजर में शर्म, प्यार और भूख का मिश्रण था। वो धीरे से नीचे सरक गई और मेरी पतलून पर हाथ फेरने लगी। मेरे लंड पर उसका हाथ पड़ा तो वो चौंक गई। "इतना... बड़ा और सख्त है भैया..." उसने फुसफुसाकर कहा।
मैंने पतलून और अंडरवियर उतार दी। मेरा 7 इंच लंबा, मोटा लंड लहराता हुआ बाहर आ गया। प्रिया की आँखें फैल गईं। वो कुछ सेकंड तक उसे देखती रही, फिर हिम्मत करके अपना छोटा-सा हाथ उस पर रख दिया। "गर्म है... और नसें उभरी हुई हैं..." वो बुदबुदाई।
मैंने उसके सिर को धीरे से नीचे किया। प्रिया ने पहली बार किसी लंड को मुंह में लेने से पहले मेरी आँखों में देखा, जैसे पूछ रही हो — "मैं ठीक कर रही हूँ ना?" "हाँ जान... चूसो..." मैंने कहा।
प्रिया ने अपनी गुलाबी जुबान बाहर निकाली और लंड की टिप को चाटा। फिर धीरे-धीरे मुंह में ले लिया। वो बहुत अनाड़ी थी, लेकिन उसकी कोशिशें मुझे पागल कर रही थीं। वो आधा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी, ऊपर-नीचे कर रही थी। कभी-कभी उसके दाँत लग जाते तो मैं सिहर जाता।
"स्स्स... हाँ प्रिया... और गहरा... अच्छा लग रहा है..." मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्का-हल्का धक्का देने लगा। प्रिया की आँखों में पानी आ गया था, लेकिन वो रुकी नहीं। उसके मुँह से "ग्लक ग्लक" की आवाजें आ रही थीं।
कुछ मिनट बाद मैंने उसे ऊपर खींच लिया। अब मेरी बारी थी। मैंने उसकी पूरी नाइट सूट उतार दी। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने ब्रा का हुक खोला। उसके दोनों बड़े, गोल, गोरे स्तन छूटकर बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी जाँघें फैला दीं। पैंटी पहले ही पूरी भीग चुकी थी। मैंने उसे उतारा। प्रिया की चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और छोटी थी। उसकी चूत के होंठ सूजे हुए थे और रस टपक रहा था।
"कितनी सुंदर है तुम्हारी चूत..." मैंने कहा और झुककर उस पर जीभ फेर दी। "आआह्ह्ह... भैया...!" प्रिया ने तकिए को जोर से पकड़ लिया। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जीभ से क्लिटोरिस को घुमाया, अंदर उँगली डाली, फिर दो उँगलियाँ। प्रिया पागल हो रही थी। वो अपनी कमर ऊपर-नीचे कर रही थी, मेरे सिर को अपनी जाँघों में दबा रही थी।
"भैया... चाटो... और चूसो... हाँ... वहाँ... उफ्फफ... मैं फिर से... आ रही हूँ..." दूसरी बार वो जोर से झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में आ गया। मैंने पूरा चाट लिया।
अब वो पूरी तरह तैयार थी। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रगड़ रहा था। प्रिया ने डरी-डरी नजरों से मुझे देखा। "भैया... धीरे करना... दर्द होगा ना..."
"पहली बार थोड़ा दर्द होगा, लेकिन फिर मजा आएगा। मैं प्यार से करूँगा।" मैंने उसे आश्वासन दिया और उसके होंठों को चूम लिया। मैंने लंड की टिप उसके चूत के छेद पर रखी और धीरे से दबाया। "आह्ह्ह...!" प्रिया ने मेरी पीठ में नाखून गड़ाए।
आधा लंड अंदर चला गया। वो बहुत टाइट थी। मैं रुक गया, उसे सहलाया, चूमा। फिर एक और जोरदार धक्का। "उम्म्म्मा... राहुल भैया... फट रही हूँ... आह्ह्ह!" पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया। खून की हल्की सी धार निकली — उसकी कुंवारी चूत फट गई थी। मैं कुछ देर रुका रहा। फिर धीरे-धीरे हिलने लगा।
प्रिया की आँखें बंद थीं। दर्द के साथ-साथ अब कराहने की आवाज में मिठास आने लगी थी। "धीरे... हाँ... ऐसे ही... गहरा... भैया... आपका लंड... बहुत मोटा है... मुझे भर रहा है..." मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब पूरी ताकत से चोद रहा था। कमरे में "पच-पच-पच" की आवाजें गूँज रही थीं। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं एक स्तन को चूस रहा था और जोर-जोर से धक्के दे रहा था।
प्रिया ने अपने पैर मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लिए और मुझे और गहरा खींचने लगी। "भैया... तेज... और तेज... फाड़ दो मेरी चूत... हाँ... मैं तुम्हारी हूँ... चोदो मुझे..." मैं पागल हो गया। अब पूरा बिस्तर हिल रहा था। मैं उसे मिशनरी में चोद रहा था, फिर उसे घुमाकर डॉगी स्टाइल में लिया। उसके गोल-गोल नितंबों को थपथपाते हुए लंड अंदर-बाहर कर रहा था।
"आह्ह... आह्ह... भैया... बहुत गहरा जा रहा है... मुझे फिर से हो रहा है..." हम दोनों एक साथ झड़ने वाले थे। मैंने उसकी कमर पकड़ी और अंतिम जोरदार धक्के मारे। "प्रिया... मैं आ रहा हूँ...!"
"भैया... अंदर डाल दो... सब अंदर... हाँ... आआआह्ह्ह्ह!" मैंने अपनी सारी मलमल उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। प्रिया भी दूसरी बार झड़ गई। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर गिर पड़े। उसका चेहरा मेरी छाती पर था। मैं उसके बालों को सहला रहा था।
"भैया... मुझे इतना अच्छा कभी नहीं लगा। मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती..." उसने प्यार से कहा। मैंने उसे चूम लिया और बोला, "ये सिर्फ शुरुआत है जान। अभी तो पूरी रात बाकी है..."
हम दोनों पसीने से तर-बतर होकर एक-दूसरे से चिपके पड़े थे। प्रिया की चूत से मेरा वीर्य और उसका रस मिलकर बाहर निकल रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में कस लिया। उसके होंठ मेरी छाती पर थे, वो बार-बार हल्के-हल्के किस कर रही थी।
"भैया... अभी भी अंदर कुछ हिल रहा है। तुम्हारा लंड इतना गर्म था..." उसने शरमाते हुए कहा। मैं मुस्कुराया और उसके नितंबों को सहलाते हुए बोला, "अभी तो पूरी रात है प्रिया। मैं तुम्हें आज रात भर चोदना चाहता हूँ।"
प्रिया ने मेरी आँखों में देखा। उसकी आँखों में शर्म अब पूरी तरह भूख में बदल चुकी थी। वो खुद-ब-खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसके भरे-भरे स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ा, जो फिर से आधा खड़ा हो चुका था, और अपनी चूत पर रगड़ने लगी। "मैं ऊपर से करना चाहती हूँ भैया... मुझे कंट्रोल करने दो।"
मैंने उसके कमर को पकड़ लिया। प्रिया ने धीरे से बैठकर मेरा लंड अपनी चूत में उतारा। "आह्ह्ह... फिर से भर गया..." वो कराह उठी। अब वो मेरे ऊपर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल-उछलकर नाच रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया और जोर-जोर से मसलने लगा। प्रिया की साँसें फूल गईं। वो तेजी से कूद रही थी।
"हाँ भैया... तुम्हारा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है... बहुत मजा आ रहा है... आह्ह... आह्ह..." मैं नीचे से जोरदार धक्के दे रहा था। कमरे में फिर से चुदाई की आवाजें गूँजने लगीं — पचाक-पचाक-पचाक। प्रिया का रस मेरे लंड और अंडकोष पर बह रहा था।
कुछ देर बाद मैंने उसे उठाया और खड़ा कर दिया। पीछे से उसे झुकाकर दीवार के सहारे खड़ा किया। उसके दोनों हाथ दीवार पर थे और गोल नितंब मेरी तरफ थे। मैंने पीछे से लंड अंदर डाला और जोर से चोदना शुरू किया। "उफ्फ... भैया... इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है... मेरी चूत फट जाएगी... हाँ... तेज... चोदो अपनी चचेरी बहन को..."
मैंने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह चोदने लगा। हर धक्के पर उसके नितंब लहरा रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे हाथ से उसकी चूत पर उँगलियाँ फेरते हुए क्लिटोरिस रगड़ा। प्रिया पागल हो रही थी। "भैया... मैं फिर से आने वाली हूँ... रुकना मत... भर दो मुझे..."
तभी अचानक नीचे से आवाज आई। किसी ने पानी का ग्लास रखा। शायद मम्मी या कोई जाग गया था। हम दोनों सिहर गए। लेकिन रुकने की बजाय मेरा जुनून और बढ़ गया। "चुप... शांत रहो..." मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा और तेज-तेज धक्के देने लगा। प्रिया की आँखें डर और मजे से फैली हुई थीं। वो मेरे हाथ में कराह रही थी — "म्म्म... म्म्म..."
खतरे का रोमांच हमें और उत्तेजित कर रहा था। मैंने उसे तेजी से चोदा। कुछ ही देर में प्रिया ने दीवार को पकड़ते हुए जोर से झड़ दिया। उसकी टाँगें काँप रही थीं। मैं भी अपनी सीमा पर था। मैंने लंड बाहर निकाला और उसे घुमाकर घुटनों पर बैठा दिया। प्रिया समझ गई। उसने तुरंत मेरा लंड मुंह में ले लिया और तेजी से चूसने लगी।
"प्रिया... ले लो... सब मुंह में..." मैंने उसके बाल पकड़े और मुंह के अंदर ही अपना पूरा वीर्य छोड़ दिया। प्रिया ने आँखें बंद करके सब निगल लिया। कुछ बूँदें उसके होंठों के कोने से निकल गईं।
हम दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। प्रिया मेरी बाहों में आ गई। "भैया... आज रात मुझे लगा जैसे मैं स्वर्ग में हूँ। तुम्हारे बिना अब मेरी चूत शांत नहीं रहेगी।" उसने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा।
मैंने उसे चूमते हुए उसके स्तनों को सहलाया। "कल रात और भी खतरनाक होने वाली है। मैं तुम्हें पूरे घर में चोदना चाहता हूँ — छत पर, बाथरूम में, हर जगह।" प्रिया शरमाकर मेरे सीने में मुँह छुपा गई, लेकिन उसके हाथ मेरे लंड पर फिर से खेलने लगे थे।
रात के दो बज चुके थे। प्रिया अभी भी मेरी बाहों में नंगी लेटी थी। उसके शरीर पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। मेरे लंड पर उसका हाथ खेल रहा था और वो धीरे-धीरे उसे सहला रही थी।
"भैया... नींद नहीं आ रही। मेरी चूत अभी भी गर्म है और तुम्हें माँग रही है..." उसने शरमाते हुए कहा। मैंने उसे उठाया और बोला, "चलो, आज रात हम पूरा घर अपना बनाते हैं।"
हम दोनों चुपके से कमरे से बाहर निकले। पूरा घर सो रहा था। हम छत पर गए। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। छत पर पुराना मैट बिछा था। मैंने प्रिया को वहीं लिटा दिया। चाँदनी में उसका नग्न शरीर और भी खूबसूरत लग रहा था।
मैं उसके ऊपर लेट गया। इस बार बहुत धीरे-धीरे प्यार से चोदना शुरू किया। लंबे-लंबे स्ट्रोक। हर धक्के पर वो कराह रही थी — "भैया... तुम्हारा लंड मेरी आत्मा तक पहुँच रहा है... मुझे अपना बना लो... हमेशा के लिए..." हम दोनों की साँसें मिल गई थीं। मैं उसके होंठ चूस रहा था, गर्दन चूस रहा था, स्तनों को दांतों से काट रहा था। प्रिया के नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे।
फिर मैंने उसे उठाकर खड़ा किया और छत की दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। एक टाँग को उठाकर। वो मेरी गर्दन में बाहें डाले हुए थी। "आह्ह... तेज... भैया... डर भी लग रहा है कोई देख ना ले... लेकिन रुकना मत..." मैंने तेजी से धक्के मारे। छत पर "पच-पच" की आवाजें हवा में घुल रही थीं।
कुछ देर बाद हम नीचे आए। बाथरूम में घुस गए। शावर ऑन किया। गर्म पानी हमारे शरीर पर बह रहा था। प्रिया को झुकाकर पीछे से फिर चोदा। पानी की धार के साथ मेरे धक्के और तेज हो गए थे। "हाँ... हाँ... फाड़ दो... मेरी चूत तुम्हारी है... रोज चोदना मुझे..." प्रिया चिल्ला रही थी। मैंने उसे शावर के नीचे घुटनों पर बिठाया और मुंह में चोदा। फिर उसे उठाकर दीवार से सटाकर लिफ्ट स्टाइल में चोदा। उसके पूरे वजन के साथ मेरा लंड बार-बार उसकी चूत में घुस रहा था।
"भैया... मैं आ गई... आह्ह्ह्ह!" प्रिया का शरीर काँप उठा। मैं भी अपनी सीमा पर था। मैंने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटाया और मिशनरी पोजीशन में आखिरी जोरदार चुदाई शुरू की।
"प्रिया... मैं तुमसे प्यार करता हूँ... तुम मेरी हो... हमेशा मेरी रहोगी..." "हाँ भैया... मैं तुम्हारी चचेरी रंडी हूँ... भर दो मुझे... अंदर डालो..." मैंने आखिरी 10-15 जोरदार धक्के मारे। पूरा बाथरूम हमारी चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था। आखिरकार मैंने गहरी साँस लेते हुए अपनी सारी मलमल उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से में छोड़ दी। प्रिया भी मेरे साथ झड़ गई। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे रहे। पानी अभी भी बह रहा था।
सुबह होने वाली थी। हम वापस उसके कमरे में आए। प्रिया मेरी गोद में बैठ गई और बोली, "भैया... ये चार रातें मैं कभी नहीं भूलूँगी। अब जब भी तुम्हें देखूँगी, मेरी चूत गीली हो जाएगी।" मैंने उसके माथे को चूमा और कहा, "ये सिर्फ शुरुआत है। अब हम छुप-छुपकर मिलेंगे। चाहे कॉलेज हो, चाहे घर। तुम मेरी हो।"
प्रिया मुस्कुराई, मेरे लंड को आखिरी बार चूमकर बोली, "जब भी बुलाओ... मैं तैयार हूँ... अपनी चचेरी बहन की चूत हमेशा तुम्हारे लिए खुली रहेगी।"
मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ। हमारा परिवार काफी बड़ा है और त्योहारों पर सब एक साथ इकट्ठा होते हैं। मेरी चचेरी बहन प्रिया, उम्र में मुझसे सिर्फ एक साल छोटी — 22 साल। बचपन से हम साथ खेलते-बढ़ते आए थे। वो हमेशा मुझसे चिपकी रहती थी — "राहुल भैया, ये कर दो... वो कर दो..."। लेकिन पिछले दो सालों से कुछ बदल सा गया था।
इस बार गर्मियों की छुट्टियों में पूरा परिवार हमारे घर पर जमा हुआ था। पापा-मम्मी ने ऊपर वाले कमरे में प्रिया को ठहराया था, जबकि मैं नीचे अपना कमरा इस्तेमाल करता था। दिन भर तो सबके सामने वो सामान्य सी लड़की थी — हँसती-खेलती, लेकिन रात होते ही...
रात के दस बज चुके थे। घर में सब सो चुके थे। मैं गर्मी की वजह से नींद नहीं आ रही थी, तो छत पर घूमने चला गया। अचानक मुझे ऊपर वाले कमरे की खिड़की से हल्की रोशनी दिखी। प्रिया का कमरा। मैंने सोचा शायद वो भी गर्मी से परेशान होगी।
मैं चुपके से ऊपर गया। दरवाजा थोड़ा-सा खुला था। अंदर झाँकते ही मेरा दिल धड़कने लगा। प्रिया सिर्फ एक हल्की सी नीली नाइट सूट में थी — जो उसके गोरे, नाजुक शरीर पर चिपकी हुई थी। उसके लंबे काले बाल खुले हुए थे, जो उसकी कमर तक लहरा रहे थे। वो आईने के सामने खड़ी थी और अपने बाल संवार रही थी। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, और उसकी पूरी शक्ल में एक अनजानी चमक थी।
मैं वहीं खड़ा रह गया। उसकी जाँघें मोटी और चिकनी थीं, कमर पतली, और स्तन... भगवान, वो इतने पूरे और उभरे हुए थे कि नाइट सूट का कपड़ा उन्हें रोक नहीं पा रहा था। मेरे लंड में तुरंत सख्ती आ गई। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी चचेरी बहन मुझे इतना आकर्षित करेगी।
"राहुल भैया...?" अचानक उसकी आवाज आई। मैं चौंक गया। वो मुड़कर देख रही थी। उसकी आँखों में हैरानी थी, लेकिन डर नहीं। "तुम... यहाँ क्या कर रहे हो?" उसने धीरे से पूछा, लेकिन आवाज में शरम थी।
"गर्मी लग रही थी... छत पर आया था। तुम्हारे कमरे में रोशनी देखी तो..." मैं लड़खड़ाते हुए बोला। प्रिया मुस्कुराई। वो बिस्तर पर बैठ गई और पैर मोड़कर बैठी। उसकी जाँघें थोड़ी खुलीं, और मैंने उसकी नाइट सूट के अंदर सफेद पैंटी का हल्का झलक देख लिया। मेरा मुंह सूख गया।
"आओ ना अंदर... बाहर मच्छर हैं।" उसने कहा। मैं अंदर चला गया। कमरे में हल्की सी सुगंध थी — उसकी बॉडी लोशन और पसीने की। हम दोनों बिस्तर पर बैठ गए। बातें शुरू हुईं — पुरानी यादें, कॉलेज की, दोस्तों की। लेकिन हवा में कुछ और ही था। उसकी नजर बार-बार मेरी छाती और नीचे की तरफ जा रही थी।
"भैया... तुम्हें लगता है मैं सुंदर हूँ?" अचानक उसने पूछा। उसकी आवाज काँप रही थी। "बहुत... बहुत सुंदर।" मैंने सच्चाई से कहा। उसने शरमाते हुए सिर झुका लिया। फिर धीरे से मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया। उसकी उँगलियाँ गर्म थीं। मैंने हिम्मत करके उसके हाथ को थाम लिया और हल्का दबाया।
"प्रिया... तुम्हें पता है ना, हम चचेरे भाई-बहन हैं।" "पता है..." उसने आँखें उठाकर देखा। "लेकिन... पिछले कुछ महीनों से मैं तुम्हें बहुत याद करती हूँ। रात को... अकेले में... तुम्हारे बारे में सोचती हूँ।"
मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मैंने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया और धीरे से उसके माथे को चूमा। उसकी साँसें तेज हो गईं। फिर मैंने उसकी नाक, गाल और आखिरकार उसके होंठों पर हल्का-सा किस किया।
प्रिया ने आँखें बंद कर लीं और मेरे होंठों को अपने होंठों से चिपका लिया। वो पहला किस था, लेकिन जुनून भरा हुआ। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से खेलने लगी। वो धीरे-धीरे कराह रही थी — "म्म्म... भैया..."
मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर था, दूसरे हाथ से मैंने उसके स्तन को बाहर से दबाया। वो इतना नरम और गर्म था कि मेरा लंड पतलून में तन गया। प्रिया ने खुद को मेरे सीने से और चिपका लिया। "राहुल भैया... मुझे अच्छा लग रहा है... बहुत अच्छा..." उसने साँसें लेते हुए कहा।
मैंने उसकी नाइट सूट की ऊपरी बटन खोलनी शुरू की। एक-एक करके तीन बटन खुल गए। उसके सफेद ब्रा में कैद भरे-भरे स्तन बाहर झाँक रहे थे। मैंने ब्रा को नीचे खींचा और एक स्तन को मुंह में ले लिया। प्रिया ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से कराह उठी — "आह्ह्ह... भैया... चूसो ना... जोर से..."
मैं उसका स्तन चूस रहा था, काट रहा था, चाट रहा था। दूसरा स्तन हाथ से मसल रहा था। प्रिया की जाँघें आपस में रगड़ रही थीं। उसकी पैंटी पहले ही गीली हो चुकी थी। मैंने नीचे हाथ डाला और उसकी जाँघों के बीच उँगलियाँ फेरनी शुरू की। वो काँप रही थी।
"भैया... पहली बार है मेरे लिए... धीरे करना..." उसने शरमाते हुए कहा। मैंने उसे चुप कराने के लिए फिर से किस किया और धीरे-धीरे उसकी पैंटी के अंदर उँगली डाली। वो बहुत गर्म और चिपचिपी थी। जैसे ही मैंने उसकी छोटी-सी चूत की फाँक को छुआ, प्रिया ने मेरी कमर को अपने पैरों से जकड़ लिया।
"उफ्फ... राहुल... अंदर डालो ना उँगली..." मैंने एक उँगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी। मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। प्रिया की साँसें फूल रही थीं। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसका चेहरा लाल हो गया था।
"भैया... मुझे कुछ हो रहा है... रुक मत... तेज... तेज करो..." मैंने तेजी से उँगली चलानी शुरू की। दूसरे हाथ से उसका क्लिटोरिस रगड़ रहा था। कुछ ही मिनटों में प्रिया का पूरा शरीर तन गया। वो जोर से काँपी और मेरी उँगलियों पर अपना रस छोड़ दिया।
"आआह्ह्ह... भैया... मैं... आई... गई..." वो मेरे सीने में मुँह छुपाकर लेट गई। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। मैंने उसे प्यार से सहलाया।
"प्रिया... तुम कितनी प्यारी हो..." वो शरमाकर मुस्कुराई और मेरी आँखों में देखते हुए बोली, "भैया... अब तुम्हारी बारी है... मुझे सब कुछ सिखाओ... मैं तुम्हारी हूँ... पूरी तरह।"
प्रिया अभी भी मेरी छाती से लिपटी हुई थी। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था और साँसें अभी भी अनियमित चल रही थीं। मेरी उँगलियाँ अभी भी उसकी गीली चूत के अंदर थीं। मैंने धीरे से उन्हें निकाला और उसे चूम लिया।
"भैया... वो क्या हुआ था? मुझे ऐसा लगा जैसे आसमान फट गया..." उसने शरमाते हुए पूछा, आँखें नीचे की हुईं। "तुम्हारा पहला ऑर्गेज्म था, जान।" मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा। "और अब तुम मुझे भी वही एहसास दिलाओगी।"
प्रिया ने मेरी आँखों में देखा। उसकी नजर में शर्म, प्यार और भूख का मिश्रण था। वो धीरे से नीचे सरक गई और मेरी पतलून पर हाथ फेरने लगी। मेरे लंड पर उसका हाथ पड़ा तो वो चौंक गई। "इतना... बड़ा और सख्त है भैया..." उसने फुसफुसाकर कहा।
मैंने पतलून और अंडरवियर उतार दी। मेरा 7 इंच लंबा, मोटा लंड लहराता हुआ बाहर आ गया। प्रिया की आँखें फैल गईं। वो कुछ सेकंड तक उसे देखती रही, फिर हिम्मत करके अपना छोटा-सा हाथ उस पर रख दिया। "गर्म है... और नसें उभरी हुई हैं..." वो बुदबुदाई।
मैंने उसके सिर को धीरे से नीचे किया। प्रिया ने पहली बार किसी लंड को मुंह में लेने से पहले मेरी आँखों में देखा, जैसे पूछ रही हो — "मैं ठीक कर रही हूँ ना?" "हाँ जान... चूसो..." मैंने कहा।
प्रिया ने अपनी गुलाबी जुबान बाहर निकाली और लंड की टिप को चाटा। फिर धीरे-धीरे मुंह में ले लिया। वो बहुत अनाड़ी थी, लेकिन उसकी कोशिशें मुझे पागल कर रही थीं। वो आधा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी, ऊपर-नीचे कर रही थी। कभी-कभी उसके दाँत लग जाते तो मैं सिहर जाता।
"स्स्स... हाँ प्रिया... और गहरा... अच्छा लग रहा है..." मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्का-हल्का धक्का देने लगा। प्रिया की आँखों में पानी आ गया था, लेकिन वो रुकी नहीं। उसके मुँह से "ग्लक ग्लक" की आवाजें आ रही थीं।
कुछ मिनट बाद मैंने उसे ऊपर खींच लिया। अब मेरी बारी थी। मैंने उसकी पूरी नाइट सूट उतार दी। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने ब्रा का हुक खोला। उसके दोनों बड़े, गोल, गोरे स्तन छूटकर बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी जाँघें फैला दीं। पैंटी पहले ही पूरी भीग चुकी थी। मैंने उसे उतारा। प्रिया की चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और छोटी थी। उसकी चूत के होंठ सूजे हुए थे और रस टपक रहा था।
"कितनी सुंदर है तुम्हारी चूत..." मैंने कहा और झुककर उस पर जीभ फेर दी। "आआह्ह्ह... भैया...!" प्रिया ने तकिए को जोर से पकड़ लिया। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जीभ से क्लिटोरिस को घुमाया, अंदर उँगली डाली, फिर दो उँगलियाँ। प्रिया पागल हो रही थी। वो अपनी कमर ऊपर-नीचे कर रही थी, मेरे सिर को अपनी जाँघों में दबा रही थी।
"भैया... चाटो... और चूसो... हाँ... वहाँ... उफ्फफ... मैं फिर से... आ रही हूँ..." दूसरी बार वो जोर से झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में आ गया। मैंने पूरा चाट लिया।
अब वो पूरी तरह तैयार थी। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रगड़ रहा था। प्रिया ने डरी-डरी नजरों से मुझे देखा। "भैया... धीरे करना... दर्द होगा ना..."
"पहली बार थोड़ा दर्द होगा, लेकिन फिर मजा आएगा। मैं प्यार से करूँगा।" मैंने उसे आश्वासन दिया और उसके होंठों को चूम लिया। मैंने लंड की टिप उसके चूत के छेद पर रखी और धीरे से दबाया। "आह्ह्ह...!" प्रिया ने मेरी पीठ में नाखून गड़ाए।
आधा लंड अंदर चला गया। वो बहुत टाइट थी। मैं रुक गया, उसे सहलाया, चूमा। फिर एक और जोरदार धक्का। "उम्म्म्मा... राहुल भैया... फट रही हूँ... आह्ह्ह!" पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया। खून की हल्की सी धार निकली — उसकी कुंवारी चूत फट गई थी। मैं कुछ देर रुका रहा। फिर धीरे-धीरे हिलने लगा।
प्रिया की आँखें बंद थीं। दर्द के साथ-साथ अब कराहने की आवाज में मिठास आने लगी थी। "धीरे... हाँ... ऐसे ही... गहरा... भैया... आपका लंड... बहुत मोटा है... मुझे भर रहा है..." मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब पूरी ताकत से चोद रहा था। कमरे में "पच-पच-पच" की आवाजें गूँज रही थीं। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं एक स्तन को चूस रहा था और जोर-जोर से धक्के दे रहा था।
प्रिया ने अपने पैर मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लिए और मुझे और गहरा खींचने लगी। "भैया... तेज... और तेज... फाड़ दो मेरी चूत... हाँ... मैं तुम्हारी हूँ... चोदो मुझे..." मैं पागल हो गया। अब पूरा बिस्तर हिल रहा था। मैं उसे मिशनरी में चोद रहा था, फिर उसे घुमाकर डॉगी स्टाइल में लिया। उसके गोल-गोल नितंबों को थपथपाते हुए लंड अंदर-बाहर कर रहा था।
"आह्ह... आह्ह... भैया... बहुत गहरा जा रहा है... मुझे फिर से हो रहा है..." हम दोनों एक साथ झड़ने वाले थे। मैंने उसकी कमर पकड़ी और अंतिम जोरदार धक्के मारे। "प्रिया... मैं आ रहा हूँ...!"
"भैया... अंदर डाल दो... सब अंदर... हाँ... आआआह्ह्ह्ह!" मैंने अपनी सारी मलमल उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। प्रिया भी दूसरी बार झड़ गई। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर गिर पड़े। उसका चेहरा मेरी छाती पर था। मैं उसके बालों को सहला रहा था।
"भैया... मुझे इतना अच्छा कभी नहीं लगा। मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती..." उसने प्यार से कहा। मैंने उसे चूम लिया और बोला, "ये सिर्फ शुरुआत है जान। अभी तो पूरी रात बाकी है..."
हम दोनों पसीने से तर-बतर होकर एक-दूसरे से चिपके पड़े थे। प्रिया की चूत से मेरा वीर्य और उसका रस मिलकर बाहर निकल रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में कस लिया। उसके होंठ मेरी छाती पर थे, वो बार-बार हल्के-हल्के किस कर रही थी।
"भैया... अभी भी अंदर कुछ हिल रहा है। तुम्हारा लंड इतना गर्म था..." उसने शरमाते हुए कहा। मैं मुस्कुराया और उसके नितंबों को सहलाते हुए बोला, "अभी तो पूरी रात है प्रिया। मैं तुम्हें आज रात भर चोदना चाहता हूँ।"
प्रिया ने मेरी आँखों में देखा। उसकी आँखों में शर्म अब पूरी तरह भूख में बदल चुकी थी। वो खुद-ब-खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसके भरे-भरे स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ा, जो फिर से आधा खड़ा हो चुका था, और अपनी चूत पर रगड़ने लगी। "मैं ऊपर से करना चाहती हूँ भैया... मुझे कंट्रोल करने दो।"
मैंने उसके कमर को पकड़ लिया। प्रिया ने धीरे से बैठकर मेरा लंड अपनी चूत में उतारा। "आह्ह्ह... फिर से भर गया..." वो कराह उठी। अब वो मेरे ऊपर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल-उछलकर नाच रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया और जोर-जोर से मसलने लगा। प्रिया की साँसें फूल गईं। वो तेजी से कूद रही थी।
"हाँ भैया... तुम्हारा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है... बहुत मजा आ रहा है... आह्ह... आह्ह..." मैं नीचे से जोरदार धक्के दे रहा था। कमरे में फिर से चुदाई की आवाजें गूँजने लगीं — पचाक-पचाक-पचाक। प्रिया का रस मेरे लंड और अंडकोष पर बह रहा था।
कुछ देर बाद मैंने उसे उठाया और खड़ा कर दिया। पीछे से उसे झुकाकर दीवार के सहारे खड़ा किया। उसके दोनों हाथ दीवार पर थे और गोल नितंब मेरी तरफ थे। मैंने पीछे से लंड अंदर डाला और जोर से चोदना शुरू किया। "उफ्फ... भैया... इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है... मेरी चूत फट जाएगी... हाँ... तेज... चोदो अपनी चचेरी बहन को..."
मैंने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह चोदने लगा। हर धक्के पर उसके नितंब लहरा रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे हाथ से उसकी चूत पर उँगलियाँ फेरते हुए क्लिटोरिस रगड़ा। प्रिया पागल हो रही थी। "भैया... मैं फिर से आने वाली हूँ... रुकना मत... भर दो मुझे..."
तभी अचानक नीचे से आवाज आई। किसी ने पानी का ग्लास रखा। शायद मम्मी या कोई जाग गया था। हम दोनों सिहर गए। लेकिन रुकने की बजाय मेरा जुनून और बढ़ गया। "चुप... शांत रहो..." मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा और तेज-तेज धक्के देने लगा। प्रिया की आँखें डर और मजे से फैली हुई थीं। वो मेरे हाथ में कराह रही थी — "म्म्म... म्म्म..."
खतरे का रोमांच हमें और उत्तेजित कर रहा था। मैंने उसे तेजी से चोदा। कुछ ही देर में प्रिया ने दीवार को पकड़ते हुए जोर से झड़ दिया। उसकी टाँगें काँप रही थीं। मैं भी अपनी सीमा पर था। मैंने लंड बाहर निकाला और उसे घुमाकर घुटनों पर बैठा दिया। प्रिया समझ गई। उसने तुरंत मेरा लंड मुंह में ले लिया और तेजी से चूसने लगी।
"प्रिया... ले लो... सब मुंह में..." मैंने उसके बाल पकड़े और मुंह के अंदर ही अपना पूरा वीर्य छोड़ दिया। प्रिया ने आँखें बंद करके सब निगल लिया। कुछ बूँदें उसके होंठों के कोने से निकल गईं।
हम दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। प्रिया मेरी बाहों में आ गई। "भैया... आज रात मुझे लगा जैसे मैं स्वर्ग में हूँ। तुम्हारे बिना अब मेरी चूत शांत नहीं रहेगी।" उसने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा।
मैंने उसे चूमते हुए उसके स्तनों को सहलाया। "कल रात और भी खतरनाक होने वाली है। मैं तुम्हें पूरे घर में चोदना चाहता हूँ — छत पर, बाथरूम में, हर जगह।" प्रिया शरमाकर मेरे सीने में मुँह छुपा गई, लेकिन उसके हाथ मेरे लंड पर फिर से खेलने लगे थे।
रात के दो बज चुके थे। प्रिया अभी भी मेरी बाहों में नंगी लेटी थी। उसके शरीर पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। मेरे लंड पर उसका हाथ खेल रहा था और वो धीरे-धीरे उसे सहला रही थी।
"भैया... नींद नहीं आ रही। मेरी चूत अभी भी गर्म है और तुम्हें माँग रही है..." उसने शरमाते हुए कहा। मैंने उसे उठाया और बोला, "चलो, आज रात हम पूरा घर अपना बनाते हैं।"
हम दोनों चुपके से कमरे से बाहर निकले। पूरा घर सो रहा था। हम छत पर गए। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। छत पर पुराना मैट बिछा था। मैंने प्रिया को वहीं लिटा दिया। चाँदनी में उसका नग्न शरीर और भी खूबसूरत लग रहा था।
मैं उसके ऊपर लेट गया। इस बार बहुत धीरे-धीरे प्यार से चोदना शुरू किया। लंबे-लंबे स्ट्रोक। हर धक्के पर वो कराह रही थी — "भैया... तुम्हारा लंड मेरी आत्मा तक पहुँच रहा है... मुझे अपना बना लो... हमेशा के लिए..." हम दोनों की साँसें मिल गई थीं। मैं उसके होंठ चूस रहा था, गर्दन चूस रहा था, स्तनों को दांतों से काट रहा था। प्रिया के नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे।
फिर मैंने उसे उठाकर खड़ा किया और छत की दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। एक टाँग को उठाकर। वो मेरी गर्दन में बाहें डाले हुए थी। "आह्ह... तेज... भैया... डर भी लग रहा है कोई देख ना ले... लेकिन रुकना मत..." मैंने तेजी से धक्के मारे। छत पर "पच-पच" की आवाजें हवा में घुल रही थीं।
कुछ देर बाद हम नीचे आए। बाथरूम में घुस गए। शावर ऑन किया। गर्म पानी हमारे शरीर पर बह रहा था। प्रिया को झुकाकर पीछे से फिर चोदा। पानी की धार के साथ मेरे धक्के और तेज हो गए थे। "हाँ... हाँ... फाड़ दो... मेरी चूत तुम्हारी है... रोज चोदना मुझे..." प्रिया चिल्ला रही थी। मैंने उसे शावर के नीचे घुटनों पर बिठाया और मुंह में चोदा। फिर उसे उठाकर दीवार से सटाकर लिफ्ट स्टाइल में चोदा। उसके पूरे वजन के साथ मेरा लंड बार-बार उसकी चूत में घुस रहा था।
"भैया... मैं आ गई... आह्ह्ह्ह!" प्रिया का शरीर काँप उठा। मैं भी अपनी सीमा पर था। मैंने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटाया और मिशनरी पोजीशन में आखिरी जोरदार चुदाई शुरू की।
"प्रिया... मैं तुमसे प्यार करता हूँ... तुम मेरी हो... हमेशा मेरी रहोगी..." "हाँ भैया... मैं तुम्हारी चचेरी रंडी हूँ... भर दो मुझे... अंदर डालो..." मैंने आखिरी 10-15 जोरदार धक्के मारे। पूरा बाथरूम हमारी चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था। आखिरकार मैंने गहरी साँस लेते हुए अपनी सारी मलमल उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से में छोड़ दी। प्रिया भी मेरे साथ झड़ गई। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे रहे। पानी अभी भी बह रहा था।
सुबह होने वाली थी। हम वापस उसके कमरे में आए। प्रिया मेरी गोद में बैठ गई और बोली, "भैया... ये चार रातें मैं कभी नहीं भूलूँगी। अब जब भी तुम्हें देखूँगी, मेरी चूत गीली हो जाएगी।" मैंने उसके माथे को चूमा और कहा, "ये सिर्फ शुरुआत है। अब हम छुप-छुपकर मिलेंगे। चाहे कॉलेज हो, चाहे घर। तुम मेरी हो।"
प्रिया मुस्कुराई, मेरे लंड को आखिरी बार चूमकर बोली, "जब भी बुलाओ... मैं तैयार हूँ... अपनी चचेरी बहन की चूत हमेशा तुम्हारे लिए खुली रहेगी।"
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