जवान सेक्सी बेटी को पापा ने चोदा - दोनों छेद चोद दिए
बारिश वाली रात में पापा ने उन्नीस साल की बेटी अनन्या को पहली बार छुआ… फिर सुबह कॉलेज जाने से पहले किचन में खड़े-खड़े दोनों छेद भर दिए। टाइट जीन्स में गाँड देखकर काबू नहीं रह पाया।

बारिश पूरे जोरों पर थी। रात के लगभग साढ़े ग्यारह बज रहे थे। अचानक बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया।
विक्रम मल्होत्रा अपने बेडरूम में लेटे हुए थे। बयालीस साल के हो चुके थे। पत्नी तीन साल पहले गुजर चुकी थी। इकलौती बेटी अनन्या उन्नीस साल की थी। कॉलेज जाती थी, घर का भी कुछ ख्याल रखती थी।
अंधेरे में मोबाइल की टॉर्च जलाई। तभी कमरे के दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई।
“पापा… आप सो गए क्या?” अनन्या की आवाज़ आई।
“नहीं… आ जा,” विक्रम ने कहा।
अनन्या अंदर आई। पतली कॉटन की नाइटी पहने हुए थी। गर्मी की वजह से अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। टॉर्च की रोशनी में उसकी चुचियों के निप्पल साफ उभर रहे थे। वो बिस्तर के किनारे खड़ी हो गई।
“पापा, बहुत अंधेरा है… अकेले डर लग रहा है। क्या मैं यहाँ सो सकती हूँ?”
विक्रम थोड़ी देर चुप रहे। फिर बोले, “आ जा। इधर लेट जा।”
अनन्या बिस्तर पर लेट गई। दोनों के बीच थोड़ी दूरी थी। बाहर बारिश की आवाज़ साफ आ रही थी। कुछ देर तक कोई नहीं बोला।
फिर विक्रम ने धीरे से कहा, “तू कितनी बड़ी हो गई है अनन्या। कभी गोद में सोती थी… अब देख, पूरी जवान लगने लगी है।”
अनन्या चुप रही। थोड़ी देर बाद बोली, “पापा, आप भी अकेले ही रहते हो ना… मम्मी के बाद। कभी-कभी मुझे भी अजीब सा लगता है।”
विक्रम ने करवट बदली। उनका हाथ अनजाने में अनन्या की जाँघ पर रख गया। अनन्या ने हटाया नहीं। विक्रम की उँगलियाँ धीरे-धीरे उसकी जाँघ पर फिसलने लगीं।
“अनन्या… मैं तुझे गलत तो नहीं सोच रहा?” उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा।
अनन्या ने कुछ नहीं कहा। बस साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं। विक्रम का हाथ और ऊपर चला गया। नाइटी के अंदर। सीधे उसकी चुची पर। निप्पल कठोर था। उन्होंने हल्के से दबाया।
अनन्या की बॉडी तन गई, लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया।
विक्रम और करीब आ गए। उन्होंने अनन्या का चेहरा अपनी तरफ घुमाया और धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले बस हल्की सी चुम्बन। अनन्या सहम गई, लेकिन पीछे नहीं हटी। विक्रम ने जीभ अंदर दी। अनन्या ने भी धीरे-धीरे जवाब देना शुरू कर दिया।
विक्रम ने नाइटी ऊपर की। एक चुची मुँह में ले ली। धीरे-धीरे चूसने लगे। अनन्या की उँगलियाँ पिता के बालों में फंस गईं। उसकी कमर हल्की सी हिलने लगी।
“पापा…” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“अगर रोकना है तो अभी कह दे,” विक्रम ने मुँह हटाकर कहा।
अनन्या ने सिर हिलाया। “मत रोको…”
विक्रम ने नाइटी पूरी उतार दी। पैंटी भी। अनन्या शर्म से आँखें बंद किए लेटी रही। विक्रम ने उसकी जाँघें फैलाईं। चूत हल्की गीली हो रखी थी। उन्होंने झुककर चाटा। पहले हल्का, फिर गहरा। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं।
अनन्या ने तकिया दबा लिया। “पापा… अजीब लग रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है।”
विक्रम ने अपनी पैंट खोली। लंड बाहर निकला। अनन्या ने आँखें खोलीं और देख लिया। थोड़ी देर चुप रही, फिर खुद ही उठकर बैठ गई। लंड हाथ में लिया और मुँह के पास ले गई। पहले सिर्फ ऊपर-ऊपर चूसा। फिर धीरे-धीरे अंदर लिया।
विक्रम ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “धीरे… जल्दी मत कर।”
कुछ देर बाद विक्रम ने उसे फिर लिटाया। लंड चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया। अनन्या की पेशानी पर बल पड़ गए।
“दर्द हो रहा है पापा…”
“थोड़ा सह ले… अभी ठीक हो जाएगा,” विक्रम ने कहा और रुक-रुक कर अंदर जाता रहा। जब पूरा अंदर चला गया तो दोनों थोड़ी देर रुक गए।
फिर विक्रम ने धीरे-धीरे हरकत शुरू की। एक हाथ से अनन्या की चुची सहलाते रहे। अनन्या की कराहें धीरे-धीरे बढ़ने लगीं। वो खुद भी कमर हिलाने लगी।
“पापा… थोड़ा तेज़ कर दो…” उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा।
विक्रम ने गति बढ़ा दी। बिस्तर हल्के से चरचराने लगा। अनन्या ने पिता की पीठ पकड़ ली। थोड़ी देर बाद उसका शरीर काँपने लगा और वो झड़ गई। विक्रम ने कुछ और देर चोदा, फिर बाहर निकालकर उसके पेट पर ही छोड़ दिया।
दोनों हांफ रहे थे। विक्रम अनन्या के पास लेट गए। उन्होंने उसे अपनी तरफ खींच लिया।
“माफ करना… अगर जबरदस्ती लगी हो,” उन्होंने कहा।
अनन्या ने पिता की छाती पर सिर रखकर धीरे से जवाब दिया, “नहीं पापा… अच्छा लगा। मैं भी… चाहती थी।”
विक्रम ने उसके माथे पर हाथ फेरा। “सो जा अब। सुबह बात करते हैं।”
अनन्या ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी उँगलियाँ अभी भी पिता की छाती पर ही थीं। बाहर बारिश जारी थी। कमरे में सिर्फ दोनों की साँसें चल रही थीं।
सुबह के साढ़े सात बज रहे थे। बारिश रात भर चली थी, लेकिन अब रुक चुकी थी। अनन्या कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी।
उसने टाइट डार्क ब्लू जीन्स पहनी थी। जीन्स इतनी टाइट थी कि उसकी गोल गाँड साफ उभर रही थी। ऊपर हल्की पिंक की फिटेड शर्ट। शर्ट के बटन थोड़े टाइट थे, चुचियाँ जोर से दब रही थीं। बाल खुले थे, चेहरे पर हल्की क्रीम लगी हुई थी।
वो किचन में गई नाश्ता बनाने। टोस्ट निकाल रही थी कि पीछे से विक्रम आ गए। उन्होंने बिना कुछ कहे पीछे से अनन्या की गाँड से अपना लंड सटा दिया। पैंट के ऊपर से ही रगड़ने लगे।
अनन्या की कमर तन गई। “पापा… सुबह सुबह…”
विक्रम ने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी शर्ट के ऊपर से चुचियाँ पकड़ लीं। जोर से दबाने लगे। “रात भर सो नहीं पाया… तेरी बॉडी याद आती रही।”
अनन्या ने कुछ नहीं कहा। बस साँसें तेज़ हो गईं। विक्रम ने शर्ट के बटन खोल दिए। ब्रा के ऊपर से चुचियाँ मसलने लगे। फिर ब्रा ऊपर सरका दी और नंगी चुचियाँ थाम लीं। निप्पल को उँगलियों से घुमाते हुए दबाया।
“पापा… कॉलेज का समय हो रहा है…” अनन्या की आवाज़ काँप रही थी।
“थोड़ी देर लेट हो जा,” विक्रम ने कान में कहा और जीन्स का बटन खोला। जिप नीचे की। जीन्स को जाँघों तक खींच लिया। चड्डी भी एक साइड में सरका दी।
अनन्या किचन की स्लैब पर झुक गई। विक्रम ने अपना लंड निकाला। पहले उसकी गाँड की दरार में रगड़ा, फिर चूत के मुँह पर लाकर एक धक्के में अंदर घुसा दिया।
“आह्ह…” अनन्या की हल्की चीख निकल गई।
विक्रम ने कमर पकड़ी और खड़े-खड़े जोर-जोर से धक्के मारने लगे। हर धक्के में अनन्या की चुचियाँ स्लैब से टकरा रही थीं। किचन में थप-थप की आवाज़ गूँजने लगी।
“पापा… धीरे… कोई आ सकता है…”
“कोई नहीं आएगा,” विक्रम ने कहा और और तेज़ चोदने लगे। एक हाथ से उसकी चुची मसलते रहे। अनन्या खुद भी पीछे की तरफ धक्के देने लगी।
कुछ देर बाद विक्रम ने लंड निकाला। अनन्या को पलटा। उसे किचन की कुर्सी पर बैठाया। जीन्स पूरी तरह उतार दी। जाँघें फैलाकर फिर से अंदर घुस गए। इस बार आमने-सामने। अनन्या ने पिता का गला पकड़ लिया। दोनों की साँसें मिल रही थीं।
विक्रम ने उसे उठा लिया। अनन्या ने पैर उनकी कमर में लपेट लिए। खड़े-खड़े उठा-उठाकर चोदने लगे। अनन्या की पीठ दीवार से लग गई। हर धक्का गहरा जा रहा था।
फिर विक्रम उसे बेडरूम में ले गए। बिस्तर पर लिटाया। एक टाँग कंधे पर रखी और साइड से चोदने लगे। अनन्या की कराहें बढ़ने लगीं। उसने तकिया दबा लिया।
“पापा… और… अंदर…”
विक्रम ने पोजीशन बदली। अनन्या को घुटनों के बल किया। पीछे से गाँड ऊपर उठाई और फिर से चूत में डाल दिया। इस बार बहुत जोर से। बिस्तर चरचराने लगा। अनन्या के बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा।
थोड़ी देर बाद विक्रम ने लंड निकाला। अनन्या की गाँड के छेद पर लाया। थूक लगाकर धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगे। अनन्या की आँखें बंद हो गईं।
“पापा… दर्द… लेकिन… मत रोको…”
विक्रम ने पूरा अंदर कर दिया और गाँड चोदने लगे। एक हाथ से आगे जाकर उसकी चूत में उँगलियाँ डाल दीं। दोनों जगह एक साथ। अनन्या का शरीर काँप रहा था।
काफी देर तक दोनों जगह चोदने के बाद विक्रम ने फिर से चूत में लंड डाला। इस बार आखिरी राउंड। बहुत तेज़ धक्के। अनन्या जोर से काँप उठी और झड़ गई। विक्रम ने लंड गहराई तक दबाया और चूत के अंदर ही सारा माल छोड़ दिया। गर्म वीर्य अंदर भर गया।
फिर उन्होंने लंड निकाला और अनन्या की गाँड में भी थोड़ा बचा हुआ माल डाल दिया। दोनों छेद भर गए।
अनन्या थककर बिस्तर पर गिर गई। साँसें उखड़ी हुई थीं। जीन्स और शर्ट एक तरफ पड़ी थीं। चुचियों पर और जाँघों पर पसीना चमक रहा था।
विक्रम उसके पास लेट गए। हाथ से उसके बाल हटाते हुए बोले, “अब जा… नहा ले। कॉलेज के लिए लेट हो जाएगी।”
अनन्या ने आँखें खोलीं। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थी। उसने धीरे से कहा, “पापा… आज रात… फिर से?”
विक्रम ने उसके माथे पर चुम्बन दी। “हाँ… रात को इंतज़ार रहूँगा।”
अनन्या उठकर बाथरूम चली गई। चलते समय उसकी दोनों जगहों से हल्का वीर्य रिस रहा था। विक्रम बिस्तर पर लेटे हुए उसे जाते हुए देखते रहे।
बाहर धूप निकल आई थी। नया दिन शुरू हो चुका था।

