देवर-भाभी की फॉरबिडन एनल नाइट – घर में ही चुदाई

भाभी की टाइट और कुंवारी गांड में देवर ने पहली बार अपना मोटा लंड घुसेड़ दिया। भैया घर में ही सो रहे थे और दोनों ने पूरी रात गंदी एनल चुदाई की। दर्द के बाद भाभी दीवानी हो गई और खुद मांगने लगी – और जोर से चोदो। एकदम हॉट, डर्टी और मना करने वाली कहानी।

लेखक: Aarav Jain6 मिनट पढ़ने में
देवर-भाभी की फॉरबिडन एनल नाइट – घर में ही चुदाई

गर्मी का मौसम था। शाम का समय, घर में सब शांत। भैया ऑफिस से देर से आते थे और भाभी रिया अकेली थी। वह लिविंग रूम में सोफे पर बैठी थी। पतली कॉटन की साड़ी पहने हुए। साड़ी का पल्लू उसके बड़े-बड़े, गोल-गोल, टाइट ब्लाउज के ऊपर से थोड़ा सा सरक गया था।

उसके भरे-भरे, नरम, भारी स्तन ब्लाउज के अंदर से निकलने को बेचैन थे। निप्पल्स सख्त हो चुके थे, साफ दिख रहे थे। नीचे उसकी गोल, टाइट गांड साड़ी के अंदर से आकार बना रही थी। पतली कमर, फिर वे बड़ी, नरम, रसीली जांघें… देवर रोहन के दिमाग में बस यही चल रहा था।

रोहन बाईस साल का था, भैया से पांच साल छोटा। वह अभी-अभी कॉलेज से आया था। भाभी को देखते ही उसका लंड पैंट में टाइट हो गया। वह रसोई से पानी लेने के बहाने आया, लेकिन नजर भाभी के शरीर पर ही अटकी रही।

“भाभी…” उसने धीरे से कहा, आवाज में भूख साफ थी।

रिया ने नजर उठाई। उसकी बड़ी, सेक्सी आंखों में भी एक अलग सी चमक थी। वह जानती थी देवर उसे कैसे देखता है। “क्या हुआ रोहन? इतनी गर्मी में घर पर क्या कर रहा है?”

रोहन पास आया, सोफे के आर्म पर बैठ गया। उसका हाथ “गलती से” भाभी की नरम, मोटी जांघ पर लग गया। रिया ने हटाया नहीं। उसने बस धीरे से सांस ली।

“भाभी… आपकी साड़ी आज बहुत टाइट लग रही है,” रोहन ने सीधा कहा। “यह ब्लाउज… आपके ये बड़े-बड़े स्तन निकलने वाले हैं।”

रिया की सांस तेज हो गई। “शhh… पागल! कोई सुन लेगा।” लेकिन उसकी आवाज में मना नहीं था। उसके निप्पल्स और सख्त हो गए।

रोहन का हाथ अब उसकी जांघ पर से ऊपर बढ़ रहा था। साड़ी के ऊपर से उसने उसकी नरम, गोल गांड को दबाया। “इतनी नरम है भाभी… इतनी मोटी और गोल। मैं रोज सोचता हूं इसे कितना चोदना है।”

रिया की आंखें बंद हो गईं। “रोहन… मत कर… मैं तेरी भाभी हूं…”

लेकिन उसका हाथ खुद रोहन के लंड पर चला गया। पैंट के ऊपर से उसने उसके लंड को दबाया। “इतना सख्त… कितना बड़ा हो गया है तेरा।”

रोहन ने उसे खींच लिया। साड़ी का पल्लू हटा दिया। ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोले। उसके बड़े, भारी, नरम स्तन निकल आए। गोल, सफेद, गुलाबी निप्पल्स पहले से ही टाइट। रोहन ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। दूसरे को उंगलियों से मसलने लगा।

“आह्ह्ह… रोहन… इतना जोर से मत चूस… भैया आ जाएंगे…” रिया की आवाज में कराह मिल गई।

रोहन ने निप्पल्स को चाट-चाट कर गीला किया, फिर नीचे गया। साड़ी उठाई। उसके नीचे सिर्फ एक पतली, पारदर्शी पैंटी थी। पैंटी पहले से ही गीली थी। रोहन ने पैंटी को साइड करके उसकी चुत पर जीभ फेर दी। “इतनी गीली हो चुकी हो भाभी… सिर्फ मेरे हाथ से।”

उसने उसकी चुत को चाटना शुरू किया। क्लिट को जीभ से दबाया, अंदर तक जीभ डाली। रिया की जांघें कांप रही थीं। “हां… ऐसे ही… और जोर से चाट… आह्ह्ह रोहन…”

रोहन ने उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उंगलियों से उसकी गांड के नरम, टाइट छेद को दबाया। “यह गांड… मैं इसे आज छोड़ूंगा भाभी। गुदा। पहली बार।”

रिया की आंखें खुलीं। डर और मजा दोनों साथ। “नहीं… वहां नहीं… दर्द होगा…”

“दर्द के बाद मजा आएगा,” रोहन ने कहा और उसकी गांड के छेद पर थूक लगाया। एक उंगली धीरे से अंदर डाली। रिया का शरीर टाइट हो गया, फिर धीरे-धीरे नरम।

रोहन ने उसे सोफे पर घुटनों के बल कर दिया। साड़ी बिल्कुल ऊपर। गांड ऊपर उठाई हुई। उसने अपना लंड निकाला – लंबा, मोटा, नसें फूली हुई। सिर पर पहले से ही प्रीक्यूम निकल रहा था।

उसने पहले उसकी चुत में थोड़ा सा डाला, गीला किया, फिर निकाल कर सीधा उसकी टाइट गांड के छेद पर लगाया। “अब रिलैक्स कर भाभी… मैं धीरे डाल रहा हूं।”

रिया ने दांत से होंठ काटे। “आह्ह्ह… बड़ा है… धीरे… आह्ह्ह्ह फक…”

रोहन ने इंच बाई इंच डाला। पहले सिर्फ सिर, फिर आधा, फिर पूरा। रिया की गांड उसके लंड को कस रही थी। इतनी टाइट, गरम, नरम।

“कितनी टाइट है तेरी गांड भाभी… मैं पागल हो जाऊंगा,” रोहन ने कहा और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे से क्लिट को रगड़ रहा था।

रिया अब कराह रही थी। “हां… चोद… मेरी गांड चोद… आह्ह्ह रोहन… इतना गहरा… मेरा देवर मेरी गांड मार रहा है…”

रोहन का टेम्पो बढ़ गया। गांड की नरम मांस हर धक्के पर हिल रही थी। थप-थप की आवाज घर में गूंज रही थी। रोहन ने उसकी कमर पकड़ कर और जोर से पीछे से मारना शुरू किया।

“बोल भाभी… किसकी गांड चोद रहा हूं?”

“तेरी… तेरी भाभी की… आह्ह्ह्ह… मेरी गांड तेरी है आज से…”

रोहन ने उसे खींच कर अपने ऊपर लिटाया। लंड अभी भी उसकी गांड में था। अब वह ऊपर से उसके स्तन चूस रहा था, नीचे से धक्के मार रहा था। रिया की चुत से पानी निकल रहा था। रोहन ने उंगलियां उसकी चुत में डाल दीं।

“दोनों जगह… एक साथ…” रिया चीख पड़ी।

अंदर-अंदर दोनों पागल हो रहे थे। रोहन के धक्के तेज हो गए। उसने आखिर में जोर से दबाया और अपना गरम वीर्य उसकी टाइट गांड के अंदर ही छोड़ दिया। रिया भी उसी समय हिल गई, उसका शरीर कांप उठा।

रोहन ने धीरे से लंड निकाला। वीर्य उसकी गांड से निकल कर जांघों पर बह रहा था। रिया सांस ले रही थी, आंखें बंद, चेहरा लाल।

रोहन ने उसके पास लेटे हुए कहा, “यह सिर्फ शुरुआत है भाभी। रात को जब भैया सो जाएंगे… मैं फिर आऊंगा। इस बार और गहरा… और लंबा…”

रिया ने उसके लंड को हाथ में लिया, जो अभी भी आधा सख्त था। “आ जा… मैं इंतजार करूंगी।”

रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे। भैया ने खाना खाकर बेडरूम में टीवी चालू किया और दस मिनट में ही जोर-जोर से खर्राटे लेने लगा। रिया रसोई से आई, उसके चेहरे पर अभी भी शाम वाला रंग बाकी था। वह बाथरूम में गई, नहाई, फिर सिर्फ एक पतली काली नाइटी पहनकर बिस्तर पर लेट गई। नाइटी इतनी पतली और पारदर्शी थी कि उसके बड़े, भारी स्तन, गुलाबी निप्पल्स और नीचे उसकी गोल, नरम गांड साफ दिख रही थी। उसने पैंटी नहीं पहनी थी।

रोहन का कमरा बिल्कुल उसके बेडरूम के बगल में था। उसने दरवाजा धीरे से खोला। रिया ने नजर उठाई। उनकी आंखें मिलते ही दोनों की सांसें तेज हो गईं।

“भैया सो गया?” रोहन ने धीरे से पूछा।

“हां… बिल्कुल गहरा सो गया,” रिया ने जवाब दिया। उसके होठों पर हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन आंखों में पूरा वासना भरा था।

रोहन ने दरवाजा बंद किया और पास आया। उसने नाइटी को ऊपर उठा दिया। रिया के स्तन नंगे थे, नरम, भारी, निप्पल्स पहले से ही सख्त। रोहन ने दोनों स्तनों को दोनों हाथों से पकड़ लिया, दबाया, मसला। “इतने बड़े… इतने नरम… मैं इन्हें रात भर चूसना चाहता हूं।”

उसने एक निप्पल मुंह में ले लिया, जोर से चूसा, दांतों से हल्का काटा। दूसरे को उंगलियों से पिंच किया। रिया की कमर हिल गई। “आह्ह्ह… रोहन… धीरे… आह्ह्ह… इतना चूस मत… मेरी चुचियां सूज जाएंगी…”

रोहन ने नाइटी बिल्कुल उतार दी। रिया अब बिल्कुल नंगी थी। उसका शरीर चमक रहा था। पतली कमर, भरी हुई कमर, नरम सफेद जांघें और बीच में उसकी साफ, गीली चुत। रोहन ने उसे बिस्तर पर लिटाया, जांघें फैलाईं और सीधा उसकी चुत पर मुंह लगा दिया।

उसने क्लिट को जीभ से दबाया, अंदर तक जीभ डाली, चूसा। रिया के हाथ उसके बालों में चले गए। “हां… ऐसे ही चाट… मेरी चुत को चाट दे… आह्ह्ह फक… तेरी जीभ कितनी गहराई तक जा रही है…”

रोहन ने उसकी गांड को भी उठा लिया। दो उंगलियां उसकी चुत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा और जीभ उसकी गांड के छेद पर फेरने लगा। “यह गांड… शाम को मैंने जो वीर्य डाला था… अभी भी थोड़ी नरम है। आज मैं इसे और गहरा चोदूंगा।”

रिया की आंखें बंद थीं। “कर… जो मरजी कर… मैं तेरी हूं आज रात…”

रोहन ने अपना लंड निकाला। अब वह पूरी तरह सख्त था – लंबा, मोटा, सिर चमकीला प्रीक्यूम से। उसने पहले रिया के मुंह में डाल दिया। “चूस भाभी… अपने देवर का लंड चूस।”

रिया ने मुंह खोला। उसने लंड को गहरा ले लिया, जीभ से नीचे तक चाटने लगी, अंडकोष को हाथ से दबाने लगी। लार उसके होठों से निकल रही थी। “म्म्म्फ… इतना मोटा… गले तक जा रहा है…”

रोहन ने उसके बालों को पकड़कर धीरे-धीरे मुंह में धक्के मारे। फिर निकालकर उसे उल्टा कर दिया। घुटनों के बल। गांड ऊपर। उसने थूक लगाया उसकी गांड पर, उंगली से छेद को फैलाया, फिर अपना लंड सीधा उसकी टाइट गांड में डाल दिया।

“आह्ह्ह्ह… रोहन… धीरे… आह्ह्ह्ह… पूरा अंदर…!” रिया चीखकर दबी आवाज में बोली।

रोहन ने पहले आधा डाला, फिर एक जोर का धक्का मारा और पूरा लंड उसकी गांड के अंदर घुस गया। इतनी टाइट, गरम, नरम दीवारें उसके लंड को कस रही थीं। वह रुक गया, दोनों सांस ले रहे थे।

“बोल… कैसी लग रही है तेरी गांड में मेरा लंड?”

“बहुत… बहुत भरी हुई… आह्ह्ह… मेरी गांड फटने वाली है… लेकिन मत निकाल… चोद… जोर से चोद…”

रोहन ने धक्के शुरू किए। पहले धीमे, फिर तेज। हर धक्के पर रिया की नरम गांड हिल रही थी। थप-थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। रोहन के हाथ उसकी कमर पर थे, कभी उसके स्तनों पर जाकर दबाते, कभी उसकी चुत पर उंगलियां रगड़ते।

“तेरी यह मोटी गांड… मैं इसे रोज चोदूंगा अब। भैया सो रहे हैं न उनके बगल में… उनकी बीवी की गांड उनके छोटे भाई से चुद रही है…”

रिया पागल हो रही थी। “हां… बोल… और गंदी बातें बोल… आह्ह्ह… मेरी गांड तेरी रख… जिस दिन चाहे आ के चोद लेना…”

रोहन ने उसे खींचकर अपने ऊपर लिटाया। लंड अभी भी उसकी गांड में था। अब रिया ऊपर थी, उसकी पीठ रोहन की छाती से चिपकी हुई। रोहन ने नीचे से धक्के मारने शुरू किए, एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे हाथ से उसकी चुत में दो उंगलियां डाल दीं।

“दोनों जगह… देख… तेरी चुत भी गीली हो रही है मेरी उंगलियों से, और गांड में मेरा लंड…”

रिया का शरीर कांप रहा था। “मैं आने वाली हूं… आह्ह्ह रोहन… जोर से… और गहरा…”

रोहन ने रफ्तार दोगुनी कर दी। उसके धक्के अब पूरी तरह जोरदार थे। गांड की नरम मांस हिल रही थी, पहले वाला वीर्य थोड़ा निकलकर मिल रहा था। रिया ने मुंह में तकिया दबा लिया ताकि चीख न निकल जाए। उसके पूरे शरीर में चरमसुख आ गया – चुत से पानी निकलने लगा, गांड कसकर रोहन के लंड को और भी जोर से दबाने लगी।

रोहन भी नियंत्रण नहीं कर पाया। उसने आखिरी चार-पांच धक्के पूरे जोर से मारे और अपना गरम, गाढ़ा वीर्य सीधा उसकी गांड के अंदर गहरा छोड़ दिया। “ले… ले मेरी भाभी… तेरी गांड में भर दिया मैंने…”

दोनों हिलते-हिलते रुक गए। रोहन का लंड अभी भी अंदर था, धीरे-धीरे नरम हो रहा था। वीर्य उसकी गांड से निकलकर जांघों पर बह रहा था।

रिया ने पीछे मुड़कर उसके होठों पर चुंबन किया। “रोहन… तू पागल है… लेकिन मैं भी पागल हो गई हूं तुझ पर। कल सुबह भैया ऑफिस जाएंगे… फिर आना। इस बार मैं तुझे ऊपर से चुदवाऊंगी… और तू मेरी गांड और चुत दोनों एक साथ लेगा।”

रोहन ने उसके स्तन दबाए, निप्पल चूसा। “हां भाभी। अब यह सिलसिला नहीं रुकेगा। तेरा यह सेक्सी शरीर… यह मोटी गांड… ये बड़े स्तन… सब मेरा है अब।”

उसने धीरे से लंड निकाला। वीर्य की गाढ़ी धार उसकी गांड से निकलकर चादर पर गिरने लगी। रिया ने हाथ पीछे ले जाकर अपनी गांड को फैलाया, वीर्य को उंगली से छुआ, फिर उस उंगली को मुंह में लेकर चाट लिया।

“तेरा वीर्य… थोड़ा कड़वा है… लेकिन मुझे पसंद आ गया।”

रोहन मुस्कुराया। उसने उसे गले लगा लिया, दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपके हुए लेट गए। बाहर भैया के खर्राटे आ रहे थे… और अंदर देवर अपनी भाभी की गांड में अपना वीर्य भरकर सो रहा था।

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