भाभी की गांड चुदाई

भाभी को नंगी नहाते और चूत में उँगलियाँ डालते देखता था। भैया दिल्ली गए तो भाभी ने खुद अपनी मोटी गांड फैलाकर बोली – “जोर-जोर से चोदो!” टाइट गांड में लंड घुसाया, चीखें निकालीं और गर्म वीर्य अंदर भर दिया। पूरी गंदी और हॉट कहानी।

लेखक: Rajesh9 मिनट पढ़ने में
भाभी की गांड चुदाई

मेरा नाम अजीत है। उम्र 26 साल। हम राजस्थान के एक छोटे से गाँव में रहते हैं, जहाँ पुराने पक्के मकान हैं, गलियाँ संकरी हैं और शाम होते ही बिजली की रोशनी भी कम हो जाती है। भैया शहर में नौकरी करते थे, इसलिए हफ्ते में सिर्फ दो-चार दिन गाँव आ पाते थे। घर में मैं, माँ-बाप और भाभी रानी रहते थे।

रानी भाभी 32 साल की थीं। गोरी-चिट्टी रंग, लंबे घने काले बाल, 36 इंच की भारी-भारी गोल-गोल चुचियाँ, पतली कमर और सबसे आकर्षक – उनकी मोटी, नाजुक, गोल-मटोल गांड जो साड़ी पहनने पर भी अलग-अलग हिलती थी। गाँव की सारी औरतें उनसे जलती थीं। मैं बचपन से ही भाभी पर फिदा था। शादी के बाद तो मेरी आदत बन गई थी छुप-छुपकर उन्हें देखने की।

गाँव के पीछे पुराना कुआँ था। भाभी अक्सर दोपहर में नहाने जाती थीं। मैं आम के पेड़ पर चढ़कर छुप जाता। एक दिन उन्होंने ब्लाउज और पेटीकोट उतारा। उनकी भारी-भारी गोरी चुचियाँ हवा में लहराईं। गुलाबी निप्पल्स हवा में खड़े हो गए। पानी डालते वक्त उनकी चुचियाँ ऊपर-नीचे हिल रही थीं। उनकी मोटी जांघें और गांड का फटना पानी से भीगकर चमक रहा था। मैं पेड़ पर खड़े-खड़े ही लंड निकालकर जोर-जोर से मुठ मारने लगा। “भाभी… आह्ह्ह…” कहते हुए मैंने पूरा माल पेड़ के नीचे गिरा दिया।

फिर रातों की बात। एक रात भाभी के कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला था। मैं चुपके से झाँका। भाभी साड़ी ऊपर करके बिस्तर पर लेटी हुई थीं। उनकी जांघें फैली हुई थीं। एक हाथ से वे अपनी चूत में उँगलियाँ डाल रही थीं, दूसरे हाथ से चुची दबा रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं, होंठ काँप रहे थे। “आह्ह्ह… हां… और तेज…” हल्की-हल्की कराह निकल रही थी। उनकी चूत गीली होकर चमक रही थी। मैं बाहर खड़े-खड़े उनकी इस्तेमाल की चादी उठा ली जो कुर्सी पर पड़ी थी। उसमें उनकी चूत और गांड की महक थी। मैंने उसे सूंघा और वहीं खड़े-खड़े मुठ मार दी।

ऐसे ही कई महीने बीते। रोज कुआँ पर नहाते हुए उनकी नंगी देह देखना, रात को चादी सूंघना, उनकी गांड हिलती देखकर मुठ मारना – ये मेरी दिनचर्या बन गई थी। लेकिन मैं कभी बोल नहीं पाया।

भैया 15 दिनों के लिए दिल्ली चले गए। घर में सिर्फ मैं और भाभी। रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। पूरा गाँव सो चुका था। मैं ड्रॉइंग रूम के सोफे पर लेटा था। तभी भाभी किचन से आईं। सिर्फ एक बहुत पतली, पारदर्शी गुलाबी नाइटि पहने हुए। नाइटि इतनी छोटी और पतली थी कि उनकी मोटी जांघों के बीच फंस गई थी। चलते वक्त उनकी गांड के दोनों फंदे नाइटि के नीचे से साफ उभर रहे थे। ऊपर से उनकी भारी चुचियों की गोलाई और निप्पल्स की छाया दिख रही थी।

“अजीत, अभी तक सोए नहीं?” उन्होंने नरम और थोड़ी थकी हुई आवाज में पूछा।

मैंने हिम्मत करके कहा, “भाभी… नींद नहीं आ रही। दो हफ्ते से भैया नहीं हैं… आप भी अकेली लग रही हो।” वे मेरे पास आकर बैठ गईं। उनकी जांघ मेरी जांघ से सट गई। उनकी देह की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी।

“अजीत… सच बताओ, तुम मुझे छुपकर देखते हो ना?” उन्होंने अचानक पूछा।

मैं चौंक गया। फिर सब कुछ निकल गया। “हां भाभी… बहुत दिनों से। कुएँ पर जब आप नहाती हो, आपकी चुचियाँ देखकर… रात को जब आप अकेले में उँगलियाँ डालती हो… और आपकी चादी सूंघकर मैं रोज मुठ मारता हूँ। मैं आपको बहुत चाहता हूँ।”

भाभी पहले शर्म से लाल हो गईं, फिर उनकी साँसें तेज हो गईं। “मैं जानती थी… लेकिन डरती थी। भैया मुझे कभी संतोष नहीं देते। वो जल्दी झड़ जाते हैं और गांड तो कभी छूते भी नहीं। मैं रात-रात भर जलती रहती हूँ।”

ये सुनकर मेरा लंड पत्थर जैसा खड़ा हो गया। मैंने उनका हाथ पकड़कर अपनी गोद में खींच लिया। भाभी ने हल्का विरोध किया लेकिन फिर मान गईं। मैंने उनकी गरदन पर गर्म किस किए। वे काँप रही थीं। फिर मैंने उनके मोटे, रसीले होंठों को चूस लिया। भाभी ने भी मेरी जीभ को अपने मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया। किसिंग के दौरान उनकी लार मेरे मुँह में आ रही थी।

मैंने नाइटि की स्ट्रैप्स खींचकर नीचे किया। उनकी दोनों भारी, गोरी, निप्पल्स वाली चुचियाँ बाहर आ गईं। मैंने एक चुची मुँह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा। निप्पल को दाँतों से हल्का काटा। भाभी ने मेरे बाल खींचे – “आह्ह्ह… अजीत… और जोर से चूसो… अपनी भाभी की चुचियाँ खा जाओ…”

दूसरी चुची को मैं हाथ से मसल रहा था। फिर मैंने पूरी नाइटि उतार दी। भाभी अब पूरी तरह नंगी थीं। उनकी चूत पर हल्के बाल थे और पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उन्हें सोफे पर लिटाया, जांघें फैलाईं और चूत चाटने लगा। जीभ से क्लिटोरिस चाटा, अंदर जीभ डाली। भाभी तड़प रही थीं – “हां बेटा… चाटो… पूरी चूत चूसो… आह्ह्ह… बहुत दिनों बाद मजा आ रहा है…”

मैंने दो उँगलियाँ उनकी चूत में डालकर तेजी से अंदर-बाहर किया। “चर्र-चर्र” की आवाज आने लगी। भाभी की चूत से पानी निकल रहा था। फिर भाभी ने मुझे ऊपर खींचा। मेरी पैंट खोली और मेरा 7 इंच लंबा, मोटा, नसों वाला लंड बाहर निकाला। उनकी आँखें चमक उठीं। “कितना मोटा और खड़ा है…” कहते हुए उन्होंने मुंह खोलकर पूरा लंड मुँह में ले लिया। वे गहरी गले तक ले जा रही थीं। लार टपक रही थी। “ग्लग-ग्लग-ग्लग” की आवाज हो रही थी। मैंने उनके बाल पकड़कर उनका मुँह फक किया।

कुछ देर बाद भाभी ने लंड निकाला और शर्म से आँखें नीची करके बोलीं, “अजीत… आज मुझे गांड में चोद दो। मैंने कभी किसी से गांड नहीं चुदवाई। लेकिन तुम्हें देखकर मन कर रहा है। मेरी गांड तुम्हारी है आज।”

मैंने भाभी को सोफे पर घुटनों के बल मोड़ दिया। उनकी मोटी, गोरी, चिकनी गांड मेरे सामने थी। मैंने दोनों हाथों से गांड के फंदे फैलाए। अंदर का गुलाबी छेद सिकुड़ा हुआ था। मैंने खूब सारा थूक लगाया और पहले अपनी मोटी उँगली धीरे से अंदर डाली। “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… धीरे बेटा… दर्द हो रहा है…” भाभी कराह रही थीं।

मैंने धीरे-धीरे उँगली अंदर-बाहर की। फिर दूसरी उँगली भी डाल दी और गांड को अच्छे से फैलाया। भाभी अब दर्द के साथ मजे ले रही थीं – “हां… ऐसे ही… फैलाओ मेरी गांड को… तैयार करो…” जब गांड काफी ढीली हो गई, तो मैंने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया, छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। लंड का सिरा अंदर घुसा।

“उफ्फ्फ… बड़ा है… आह्ह्ह… धीरे अजीत…” भाभी दाँत भींच रही थीं। मैं रुका, फिर धीरे-धीरे पूरा 7 इंच लंड उनकी टाइट, गर्म गांड में उतार दिया। भाभी जोर से चीखीं – “आआआह्ह्ह… फट जाएगी मेरी गांड… पूरा भर गया है…”

कुछ सेकंड रुकने के बाद मैंने धीमी गति से ठोके लगाने शुरू किए। “पटाक… पटाक…” उनकी मोटी गांड हर ठोक पर लहरा रही थी। धीरे-धीरे तेजी बढ़ाई। भाभी अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थीं।

“हां अजीत… और तेज… पूरी गांड फाड़ दो… चोदो अपनी भाभी को… हां हां… गहरी मारो… आह्ह्ह…” मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोके मारे। उनकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। मैं आगे झुककर उनकी लटकती चुचियों को दबाते हुए गांड मार रहा था। फिर एक हाथ से उनकी चूत में उँगलियाँ डाल दीं और दोनों जगह एक साथ चोदने लगा।

भाभी पागल हो गईं – “मैं आ गई… आ गई… गांड में चुदते हुए झड़ रही हूँ… आआआह्ह्ह…” उनकी गांड मेरे लंड को जोर से दबाने लगी। मैं भी झड़ने वाला था। “भाभी, अंदर छोड़ दूँ?” “हां बेटा… अपनी भाभी की गांड के अंदर ही पूरा गर्म वीर्य भर दो… डाल दो…”

मैंने आखिरी 10-12 जोरदार ठोके मारे और लंबी-लंबी फुहारें उनकी गांड के गहरे अंदर छोड़ दीं। गर्म वीर्य उनकी गांड भर गया। जब मैंने लंड निकाला तो भाभी की गांड से सफेद वीर्य बाहर निकलकर उनकी जांघों पर बह रहा था।

हम दोनों थककर सोफे पर लेट गए। भाभी ने मुझे चूम लिया और कान में फुसफुसाई, “अब रोज रात को मेरे कमरे में आना। गांड, चूत, मुंह – जो चाहो करो। मैं अब तुम्हारी हूँ।”

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