कज़िन बहन की बड़ी चूची और पूरी रात की बेकाबू चुदाई

कज़िन बहन सान्या की बड़ी-बड़ी चुचियाँ, टाइट लेगिंग्स में फँसी गोल गाँड और दिल्ली की गर्मी में रात 9 से सुबह 4 तक की वो बेकाबू चुदाई… जो पढ़ते ही आपका खड़ा हो जाएगा। घर खाली पड़ा, मम्मी-पापा फंक्शन में गए और फिर जो हुआ वो सिर्फ हम जानते हैं। पूरी डिटेल में, एकदम हॉट और गंदी स्टोरी।

लेखक: Aarav Jain6 मिनट पढ़ने में
कज़िन बहन की बड़ी चूची और पूरी रात की बेकाबू चुदाई

घर में हफ्तों से बात चल रही थी। सान्या आने वाली है। मम्मी की बहन की बेटी। MBA का पहला साल खत्म करके गर्मी की छुट्टियों में दिल्ली घूमने और सबसे मिलने आ रही थी। उसके मम्मी-पापा भी साथ में आ रहे थे। सबको पता था।

मैं 24 का था। सान्या 22 की। जब वह अपने मम्मी-पापा के साथ घर पहुँची तो मेरा दिमाग खराब हो गया। टाइट काली लेगिंग्स, छोटी सफेद टी-शर्ट जो उसकी एकदम बड़ी और टाइट चुचियों पर चिपकी हुई थी। निप्पल की छाप साफ़ दिख रही थी।

पहले कुछ दिन बस बातें और हल्की मस्ती चली। घर में उसके मम्मी-पापा भी थे, इसलिए खुलकर कुछ नहीं हो पा रहा था। लेकिन मैं जान-बूझकर उसके पीछे खड़ा होकर लंड सटा देता, चुचियाँ हल्के से छू लेता। वह भी दूर नहीं हटती थी। दोनों समझ गए थे कि मन में क्या चल रहा है।

फिर वो दिन आया। रिश्तेदारों के यहाँ बड़ा फंक्शन था। पूरा घर जा रहा था—मेरे मम्मी-पापा और सान्या के मम्मी-पापा भी। सान्या ने थकान का बहाना किया, मैंने सरदर्द का। सब मना करने के बाद भी हम दोनों घर पर ही रह गए।

शाम को जाते वक्त मम्मी ने कहा, “तुम दोनों अलग-अलग कमरों में सो जाना।” मैंने सिर हिलाया, “हाँ मम्मी।”

गाड़ियाँ निकलते ही घर में सन्नाटा छा गया।

दोपहर से नजदीकी बढ़ने लगी। शाम होते-होते मैंने साफ़ कह दिया। “सान्या… आज रात मैं तुझे छोड़ने वाला नहीं। 9 से सुबह 4 तक। तैयार है?” वह थोड़ी देर चुप रही, फिर बोली, “कंडोम है ना?” “है।” “तो फिर अलग कमरे वाली बात भूल जा।”

रात के 9 बज रहे थे।

सान्या बैठक में खड़ी थी। उसी टाइट लेगिंग्स और टी-शर्ट में। मैं पीछे से चुपके से गया और अचानक उसे बाँहों में कस लिया। पूरा बदन उसके पीछे चिपक गया।

“भाइया…!” वह हल्के से बोली, लेकिन हटी नहीं।

मैंने टी-शर्ट के ऊपर से ही उसकी एकदम बड़ी और टाइट चुचियों को दोनों हाथों से दबाया। गोल-गोल, भारी, और इतनी सख्त कि हाथ में पूरा फैल नहीं पा रहा था। मैंने जोर से मसला।

“इतनी बड़ी चुचियाँ… रोज टाइट टी-शर्ट में छुपाती है,” मैंने उसके कान में कहा। “भाइया… धीरे… अह्ह…” वह कराह उठी।

एक हाथ से मैंने उसकी गाँड दबाई। गोल, कसी हुई। पेंट के ऊपर से ही उसके अंडरवियर का स्ट्रैप खींचा। स्ट्रैप लेगिंग्स के ऊपर से तन गया। वह और जोर से कराहने लगी।

“आह्ह भाइया… क्या कर रहे हो…”

मैंने उसी हाथ से लेगिंग्स के ऊपर से उसकी चुत को रगड़ना शुरू किया। उँगलियों से जोर-जोर से मसल रहा था। थोड़ी देर में उसकी लेगिंग्स हल्की गीली हो गई। पानी निकल आया था।

“देख… लेगिंग्स भीग गई तेरी। इतनी गीली हो गई सिर्फ छूने से?” “हम्म… भाइया… और रगड़ो…” उसकी आवाज़ काँप रही थी।

मैंने पहले उसकी टी-शर्ट ऊपर खींचकर उतार दी। बड़ी-बड़ी नंगी चुचियाँ बाहर आ गईं। बिना ब्रा के। मैंने दोनों को जोर-जोर से दबाना शुरू किया। निप्पल को उँगली से घुमाया, फिर मुँह में लेकर चूसा।

“आाह्ह… जोर से दबाओ भाइया… आह्ह…”

फिर मैंने उसकी लेगिंग्स नीचे खींची। अंडरवियर अभी भी पहनी हुई थी। मैंने अंडरवियर को साइड में सरकाया और सीधी उसकी चुत में उँगली डाल दी। जोर से अंदर-बाहर करने लगा। दो उँगलियाँ कर दीं।

“आाह्ह्ह… भाइया… धीरे… इतनी जोर से… अह्हह्ह…” वह कमर हिला-हिलाकर मेरे हाथ पर दबाव डाल रही थी।

मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया। अंडरवियर में ही। फिर उसे अपने लंड के ऊपर बिठाया। कंडोम अभी नहीं पहना था। मैंने अपना सख्त लंड उसकी गाँड के छेद पर रखा और रगड़ने लगा। आगे-पीछे घिसाने लगा।

“देख… गाँड के छेद पर रगड़ रहा हूँ। कैसा लग रहा है?” “अह्ह… गरम-गरम लग रहा है भाइया… और घिसाओ…”

थोड़ी देर बाद मैंने उसे नीचे उतारा और खड़ा कर दिया। वह खुद मेरे लंड के पास झुकी और मुँह में ले लिया। गरम मुँह, जीभ घुमा-घुमाकर चूसने लगी। मैंने उसके बाल पकड़ रखे थे।

“ अच्छी चूस रही है… गहराई तक ले…” वह और गहराई तक ले जा रही थी। लार टपकने लगी थी।

फिर मैंने उसे खड़ा किया। अंडरवियर साइड में सरकाई, कंडोम पहना और एक जोरदार धक्के में पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया।

“आाह्ह्ह्ह भाइया… इतना मोटा… पूरा अंदर…!” “अब सह ले… आज पूरा रात हार्ड ही चोदूँगा,” मैंने कहा और जोर-जोर के धक्के लगाने लगा।

खड़े-खड़े ही कुद रहा था। उसके दोनों हाथ पकड़कर पीछे किए और और तेज़ किया। चुचियाँ मेरे हाथ में दब रही थीं।

फिर मैंने उसे घुमाया और डॉगी स्टाइल में झुका दिया। गाँड पीछे की तरफ। जोर-जोर के धक्के। थप्पड़ उसकी गाँड पर।

“आह्ह… और तेज़… तोड़ दो भाइया…” वह चिल्ला रही थी।

मैंने उसे उठाया और बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया। उसकी टाँगें फैलाईं और नीचे झुककर उसकी चुत चूसने लगा। जीभ अंदर तक घुसा दी। वह तकिये में मुँह दबाकर कराह रही थी।

“भाइया… चूसो… और जोर से… अह्हह्ह…”

थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने उसे उल्टा किया। मिशनरी पोजीशन में टाँगें कंधों पर चढ़ाईं और फिर से लंड अंदर डाल दिया। जोरदार धक्के। उसकी चुचियाँ मेरे मुँह में थीं।

“देख मुझमें… आँखें खोल,” मैंने कहा। वह आँखें खोले मुझे देख रही थी। मुँह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं।

फिर मैंने उसे फिर से उल्टा किया। गाँड के छेद पर जीभ फेरने लगा। चटने शुरू किए।

“भाइया… मत करो… गंदी बात है… अह्ह… मत चटो…” वह मना कर रही थी, लेकिन कमर ऊपर उठा रही थी।

मैंने नहीं माना। जीभ और अंदर तक ले गया। फिर एक उँगली गाँड में डाल दी। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

“आाह्ह्ह… निकाल… दर्द हो रहा है… लेकिन… मत निकाल…”

उँगली के बाद मैंने कंडोम पर थूक लगाया और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी गाँड में ठूसना शुरू किया। पहले सिर्फ टॉप, फिर आधा, फिर पूरा।

“आाह्ह्ह्ह भाइया… बहुत बड़ा… धीरे… पूरा मत डालो… अह्हह्ह…” मैंने पूरा अंदर कर दिया और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। वह दर्द और मज़े से चीख रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकाला। उसे चित लिटाया। उसके ऊपर लेट गया। दोनों टाँगें फैला दीं और बारी-बारी से उसकी चुत और गाँड चूसने लगा। लगातार। जीभ एक से दूसरी जगह। वह पागल हो रही थी।

“भाइया… बंद करो… झड़ने वाली हूँ… अह्हह्ह…”

आखिर में मैंने उसे ऊपर बिठाया। काउगर्ल पोजीशन। उसने खुद लंड अपनी चुत में डाल लिया। मैंने उसकी कमर पकड़ी और नीचे से जोर-जोर के धक्के लगाने लगा। वह ऊपर-नीचे कुद रही थी। चुचियाँ मेरे मुँह में थीं।

“और गहरा… पूरा अंदर ले… ” मैंने कहा।

वह और जोर से कमर हिलाने लगी। मैंने उसकी गाँड पकड़कर और गहराई तक धकेला। दोनों एक साथ पहुँचे। मैंने एकदम गहराई में ही सारा माल छोड़ दिया। कंडोम गर्म हो गया।

सान्या मेरे ऊपर गिर पड़ी। दोनों हाँफ रहे थे। पसीने से पूरे बदन चिपके हुए थे।

वह मेरे कान में बोली, “भाइया… अभी तो सिर्फ शुरुआत है ना…?”

मैंने उसकी गाँड दोनों हाथों से दबाई और हल्के से थपथपाई। “शुरुआत ही है। अभी तो मैंने तेरी चुत और गाँड दोनों को सिर्फ चखा है। सुबह 4 तक छोड़ने वाला नहीं हूँ।”

मैंने लंड बाहर निकाला। कंडोम उतारकर फेंक दिया। सान्या बिस्तर पर लेटी हुई थी—बाल बिखरे, चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं, चुत और गाँड दोनों चमक रहे थे। मैं उठा, पानी की बोतल लाया। दोनों ने पानी पिया। फिर मैंने नया कंडोम निकाला।

“अब क्या करने वाला है?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा। “अब तेरी गाँड को और अच्छे से तैयार करूँगा। फिर चुत में इतना जोर से कुदूँगा कि तू चिल्लाना बंद ही न कर पाए।”

मैंने उसे पेट के बल लिटाया। टाँगें फैलाईं। पहले उसकी चुत को फिर से चूसा—जीभ अंदर तक घुसाकर। वह तकिये में मुँह दबाकर कराहने लगी। फिर जीभ उसकी गाँड के छेद पर ले गया। जोर-जोर से चटने लगा।

“भाइया… मत करो यार… गंदी लग रही है… अह्ह… लेकिन मत रुकना…” “चुप रह। आज तेरी गाँड को भी मेरी जीभ और लंड दोनों की आदत पड़ जाएगी।”

मैंने एक उँगली गाँड में डाली, फिर दो। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। वह कमर ऊपर उठा-उठाकर दबाव डाल रही थी। जब उसकी गाँड काफी ढीली और गीली हो गई तो मैंने कंडोम पहना, थूक लगाया और लंड उसके छेद पर रखा।

“अब सह ले… पूरा अंदर जाने वाला है।” “हम्म… धीरे करना भाइया… अह्हह्ह…”

मैंने धीरे-धीरे धकेला। पहले टॉप, फिर आधा, फिर एक जोरदार धक्के में पूरा लंड उसकी गाँड में धँस गया। सान्या जोर से चिल्लाई।

“आाह्ह्ह्ह… बहुत बड़ा… निकाल मत… अंदर ही रख…!”

मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिए। गाँड की दीवारें मुझे कस रही थीं। हर धक्के के साथ वह कराह रही थी। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चुची दबाई, दूसरे हाथ से उसकी चुत को रगड़ने लगा।

“कैसा लग रहा है? गाँड में लंड और चुत में उँगली… दोनों साथ?” “पागल कर दिया तुमने… और तेज़… तोड़ दो मेरी गाँड…”

मैंने और तेज़ कर दिया। बिस्तर चरमरा रहा था। उसकी गाँड पर थप्पड़ पड़ रहे थे। लगभग बीस मिनट तक मैंने सिर्फ गाँड ही कुदी। फिर लंड निकाला और सीधा उसकी चुत में डाल दिया। इतनी गीली थी कि एक धक्के में पूरा चला गया।

“आह्ह… अब चुत में… मज़ा आ गया…!”

मैंने उसे उल्टा किया। मिशनरी में टाँगें उसके कंधों तक मोड़ दीं। पूरा वजन डालकर कुदने लगा। उसकी चुचियाँ मेरे मुँह में थीं—एक को चूसता, दूसरी को मसलता।

“देख मुझे… आँखें खोल। देख कैसे तेरी चुत को फाड़ रहा हूँ।” सान्या आँखें खोले मुझे देख रही थी। मुँह से सिर्फ आवाज़ें निकल रही थीं—“आह्ह… भाइया… और… और गहरा…”

रात के लगभग 1:30 बज गए थे। मैंने फिर पोजीशन बदली। उसे घोड़ी बनाकर डॉगी में कुदा। बाल पकड़कर खींचे, गाँड पर थप्पड़ मारे। फिर उसे दीवार के सहारे खड़ा किया। एक टाँग उठाई और खड़े-खड़े जोर-जोर से कुदा। उसकी चुचियाँ दीवार से रगड़ खा रही थीं।

“दीवार पकड़… गिर मत जाना,” मैंने कहा। “गिरने वाली हूँ… संभालो… अह्हह्ह…”

फिर मैंने उसे बिस्तर पर वापस लाया। इस बार मैं लेट गया और उसे ऊपर बिठाया—काउगर्ल। लेकिन उल्टी। यानी उसका मुँह मेरे पैरों की तरफ, गाँड मेरे चेहरे के पास।

“अब बैठ। मैं तेरी चुत और गाँड दोनों चसूँगा, तू मेरा लंड चूस।”

सान्या झुक गई। मेरे लंड को मुँह में ले लिया। मैंने नीचे से उसकी चुत और गाँड दोनों को बारी-बारी से चूसना शुरू किया। जीभ एक में, उँगली दूसरी में। वह पागलों की तरह मेरे लंड को चूस रही थी। लार टपक रही थी।

थोड़ी देर बाद वह सीधी हुई और लंड अपनी चुत में डाल लिया। ऊपर-नीचे कुदने लगी। मैंने उसकी कमर पकड़कर नीचे से और जोर के धक्के दिए।

“इतनी जोर से मत हिला… झड़ जाऊँगी…” “झड़ जा… मैं भी छोड़ने वाला हूँ…”

लेकिन मैंने रोका। लंड निकाला, नया कंडोम पहना और फिर से गाँड में डाल दिया। इस बार वह खुद कमर हिला-हिलाकर ले रही थी।

रात के 3 बज गए थे। दोनों थक चुके थे, लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मैंने आखिरी राउंड के लिए उसे चित लिटाया। टाँगें फैलाईं। एक टाँग मेरे कंधे पर, दूसरी सीधी। लंड उसकी चुत में डाला और बहुत धीरे-धीरे, लेकिन बहुत गहराई तक धक्के लगाने लगा।

“अब धीरे… लेकिन पूरा अंदर…” “हम्म… महसूस हो रहा है… एकदम तलक…”

मैंने उसकी दोनों चुचियाँ एक साथ दबाईं। निप्पल को दाँतों से हल्के से काटा। वह काँप रही थी।

“सान्या… अब छोड़ने वाला हूँ… अंदर ही…” “हाँ… अंदर छोड़ो… गहराई में…”

मैंने आखिरी दस-बारह जोरदार धक्के दिए और एकदम गहराई में सारा माल छोड़ दिया। कंडोम भर गया। सान्या भी उसी समय जोर से काँपते हुए झड़ गई। उसकी चुत मुझे इतने जोर से कस रही थी कि लंड बाहर निकलने का नाम नहीं ले रहा था।

दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे पर गिर पड़े। कमरे में सिर्फ साँसों की आवाज़ थी। बाहर हल्की रोशनी आने लगी थी। घड़ी में 4:05 बज रहे थे।

सान्या ने मेरा लंड हाथ में लिया जो अभी भी आधा सख्त था। धीरे से सहलाते हुए बोली,

“भाइया… लोग सुबह लौटेंगे। लेकिन कल रात फिर से यही करना… और अगली बार… बिना कंडोम के।”

मैंने उसकी गाँड पर थप्पड़ मारा और मुस्कुराया। “बिना कंडोम के? तो फिर तैयारी रख। क्योंकि अगली बार मैं तेरी चुत और गाँड दोनों में इतना भरूँगा कि तू चल भी नहीं पाएगी।”

सान्या हँसी। मेरे सीने पर सर रखकर लेट गई। दोनों की आँखें बंद हो रही थीं। लेकिन मन में एक ही बात घूम रही थी—

यह छुट्टी अभी खत्म नहीं हुई थी। और दिल्ली की ये गर्मी… अब और भी गरम होने वाली थी।

बिना विज्ञापन बेहतरीन अनुभव

हमें विज्ञापन-मुक्त रहने में मदद करें

हम आपका अनुभव खराब नहीं करना चाहते, इसलिए साइट पर कोई Ads नहीं है। इसे साफ-सुथरा रखने में कृपया थोड़ा सपोर्ट करें। ❤️

कहानी
3 देखा गया
0.0 रेटिंग
0 पसंद
0 पसंदीदा
0 कमेंट
लेखक
Aarav Jain
इस कहानी को रेट करें:

कमेंट0

अपनी राय साझा करें

SexStories HQ

भाभी की गांड चुदाई, माँ-बेटे की चुदाई, ससुर-बहू का राज, कुंवारी लड़की की पहली चुदाई, ऑफिस, कॉलेज और हर तरह की हॉट सेक्स स्टोरीज़।

श्रेणियां

    कोई नया चैप्टर मिस न करें!

    जब भी नए सीक्रेट चैप्टर या कहानियां अपलोड होंगी, आपको तुरंत ईमेल अपडेट मिल जाएगा।

    © 2026 SexStoriesHQ. All rights reserved.

    Join TelegramFor latest updates 🚀
    Telegram Icon